वादे से कहानी तक
जो तुमने कहा था
जो तुमने किया था
वो भी उस वक्त एक वादा ही था
न तुमने उसे निभाया
न तुमने आवाज दी
और उसी खामोशी में डूबा मैं
अब तलक उसी कहानी को सुनता हूँ
और सोचता हूँ
आखिर उस कहानी का असल किरदार कौन था?
तुम थीं?
मैं था?
या कि वो हम थे
जिनका न मिल पाना ही
वादे से कहानी तक की
एक कहानी बन गया।
-समीर लाल ‘समीर’
https://youtube.com/shorts/h_Fme5pUVoE?feature=share









2 टिप्पणियां:
कहानी का किरदार कहानी में ही हो जरूरी तो नहीं
बहुत कम शब्दों में आपने अधूरे रिश्ते का दर्द गहराई से कह दिया। सबसे अच्छा लगा कि कविता किसी पर दोष नहीं डालती, बल्कि एक सच्चा सवाल छोड़ जाती है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!
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