आज महावीर जी के ब्लॉग पर नव वर्ष का कवि सम्मेलन आयोजित किया गया है. बेहतरीन और नामी गिरामी कवियों के बीच मुझ अदना से कवि को भी स्थान दिया गया है, बहुत आभार आयोजक मंडल का.
मेरे इस गीत को स्वरबद्ध कर अनुग्रहित किया है काव्य मंजूषा ब्लॉग की स्वप्न मंजूषा शैल 'अदा' जी ने. सुनने के लिए नीचे प्लेयर पर जायें.
देखा कैसे चल दिया, बिना कहे यह साल
बरसों बीते देखते, इसका ऐसा हाल...
अबकी उसके साथ था, मन्दी का इक दौर
लोग राह तकते रहे, मिल जाये कहीं ठौर
जाने कितनों को किया, उसने है बेहाल...
देखा कैसे चल दिया, बिना कहे यह साल....
सूखे ने दिखला दिया,महंगाई का नाच
पण्डित बैठा झूठ ही, रहा किस्मतें बांच
कहीं बाढ़ आती रही, खाने का आकाल
देखा कैसे चल दिया, बिना कहे यह साल....
मेहनत से हम न डरें, खुद पर हो विश्वास
विपदा से हम लड़ सकें, हिम्मत रखना पास
गुजर गया है जान लो, संकट का ये काल
देखा कैसे चल दिया, बिना कहे यह साल....
इक आशा हैं पालते, नये बरस के साथ
दे जाये हमको नई, खुशियों की सौगात
हाथों में लेकर खड़े, आरत का यह थाल
देखो वो है आ रहा, नया नवेला साल...
देखा कैसे चल दिया, बिना कहे यह साल
बरसों बीते देखते, इसका ऐसा हाल...
-समीर लाल ’समीर’
उपरोक्त गीत को सुनिये ऑटवा, कनाड़ा की ब्लॉगर सुश्री स्वपन मंजुषा शैल ’अदा’ जी की मधुर आवाज में:










