बुधवार, जून 24, 2026

वादे से कहानी तक


वादे से कहानी तक

जो तुमने कहा था

जो तुमने किया था

वो भी उस वक्त एक वादा ही था

न तुमने उसे निभाया

न तुमने आवाज दी

और उसी खामोशी में डूबा मैं

अब तलक उसी कहानी को सुनता हूँ

और सोचता हूँ

आखिर उस कहानी का असल किरदार कौन था?

तुम थीं?

मैं था?

या कि वो हम थे

जिनका न मिल पाना ही

वादे से कहानी तक की

एक कहानी बन गया।

-समीर लाल ‘समीर’

 

https://youtube.com/shorts/h_Fme5pUVoE?feature=share


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शुक्रवार, जून 05, 2026

तुम अनंत हो

तुम अनंत हो -----------------

 मैं रेत पर लिखता हूँ अपना नाम और 

फिर देर तक उसमें खोजता हूँ तुमको! 

तुम दिखने ही वाली थी कि 

आकर एक लहर पोंछ जाती है मुझे, 

मेरे अरमान, 

और बहा ले जाती है तुमको अपने साथ – 

खो जाने को उस अनंत में। 

और मैं सोचता हूँ तुमको... 

क्या मेरे नाम में तुम हो, 

या तुम्हारे होने से है मेरा नाम? 

जाने किस इबारत में तुम हो, 

और मैं खोजता हूँ तुमको कहाँ! 

कितना वक्त गुजर गया, 

तब जाकर जाना है मैंने- 

कि तुम तो अनंत हो, 

और अनंत में ही तुम हो! 

-समीर लाल ‘समीर’

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बुधवार, अप्रैल 22, 2026

गुरु तो गुरु ही होता है!!

 



घँसू आज बड़े अचरज में था। वो तिवारी जी के लिए ऐसा समाचार लाया था कि उसे लगा पहली बार ऐसा होगा जब तिवारी जी से ज्यादा वो जान रहा होगा।

उसने तिवारी जी को बतलाया कि आजकल ऐसी कार आ गई है जो खुद से चलती है और चलती भी बिजली से है। आप बस बैठ जाओ और वो भीड़ में सबसे बचते बचाते बिना किसी को छूए आपको आपके गंतव्य तक पहुँचा देती है। आज जबकि शहर का ट्रेफिक इतना बीहड़ है कि कोई गाड़ी बिना खरोंच के मिल जाए यह सिर्फ शोरूम में ही संभव है। ऐसे में खुद को सब गाड़ियों और भीड़ से बचा ले जाना अजूबा ही है मगर यह हो रहा है। साथ ही बिजली से चार्ज करो तो पैट्रोल की भी झंझट नहीं। लड़ा करें अमरीका ईरान आपस में – हमारी बला से। जहाँ तक बिजली का सवाल है तो अपने यहाँ तो कितने लोगों ने आजतक घर की बिजली का बिल तक कभी नहीं भरा- कटिया जिन्दाबाद रही है तो कार की चार्जिंग भी मुफ्त ही समझो। बस लफड़ा इतना सा है कि जरूरत से ज्यादा ही मंहगी है।

तिवारी जी मुस्कराए और कहने लगे कि तुम टेसला की बात कर रहे हो। हम सब कुछ जानते हैं। हम बैठे जरूर पान की दुकान पर हैं मगर अमरीका में क्या हो रहा है और ट्रंप कब क्या सोच रहा है – सब हमारी नजर में है। हमसे कोई पूछे तो हम तो आज अमरीका ईरान की संधी करा दें मगर उनको पाकिस्तान सगा लग रहा है तो हम काहे टांग अड़ायें – वो जाने और उनका काम जाने। हमसे सलाह चाहिए तो आओ हमारे पास- हम किसी के पास जाने से रहे।

तिवारी जी आगे बोले कि अब इतनी मंहगी है टेसला कि कारों में अगर मारुति दलित कहलाई तो टेसला ब्राह्मण की श्रेणी में आएगी। तुम तो जानते ही हो कि सच्चा ब्राह्मण छुआ छूत कितनी मानता है। वो किसी को भला क्यूँ छूने लगा? इसीलिए बिना किसी को छूए बचते बचाते निकल जाती होगी। वो सामने मंदिर वाले पंडित जी भी तो सुबह सुबह स्नान करके टेसला की तरह ही मंदिर जाते हैं – मजाल है जो कोई उनसे छू भी जाए और वो भी तुम्हारी हमारी तरह खरीद कर दाल रोटी पर कहाँ चलते हैं? फल फूल मेवा दूध मलाई की डाईट है वो भी मंदिर के चढ़ावे से फ्री में – सब टेसला के ही गुण हैं। ये भी टेसला के बेसिक मॉडल ही कहलाये।

हालांकि पंडित जी अपने आप को कितना भी बड़ा ब्राह्मण माने – लाख छुआ छूत करें मगर मंगरु चमार उनको छेड़ने से कहाँ बाज आता है। आए दिन दायें बाएं से आकर टकरा ही जाता है और पंडित जी भी क्या करें? गरियाते हुए फिर नहाने चले जाते हैं।  वैसे ही टेसला भी भले ही अपने आप को कितना ही बड़ा ब्राह्मण मान ले, सबसे बचते बचाते चले मगर अगर कोई और आकर ठोंक जाए तो क्या? मारुति और ये ई – रिक्शा टोटो वाले कहीं से भी घुसते हैं- किसी मंगरु से कम थोड़े ही न हैं ये। कब आकर भिड़ जाएँ कौन जाने। फिर आप झाड़ते रहो अपनी पंडिताई – बचाते रहो अपने आप को। मानते रहो छुआ छूत।

वैसे तुमको एक बात बताएं ज्ञानी घँसू जी – आने वाले समय में टेसला एक और मंहगा मॉडल ला रही है जो अपने पास इन मंगरुओं को फटकने भी न देगा। जैसे ही पास आने लगेंगे वो उनको दूर कर देगा। वो न सिर्फ बिजली से चलेगी बल्कि स्पेयर में कई बेटरी भी रहेगी जो पहली की चार्जिंग खत्म होते ही उससे चलने लगेगी। ये इन पंडितों से भी बड़े छूआ छूत वाली हैं। ये तो अपनी कीमत के चलते बहुत ज्यादा रईसों के बस की होगी खरीदना। ब्राह्मणों से भी बढ़कर है ये -ऐसा समझो कि जैसे जेड सिक्युरिटी वाले नेता। वो न आमजन की पहुँच में हैं – न कोई उनके आस पास फटक सकता है – छूना और टकराना तो बहुत दूर की बात है। और रही पेट्रोल वाली बात तो सरकारी और जनता के पैसों से न सिर्फ पेट भर खाते हैं बल्कि अपनी आने वाली कई पीढ़ियों के खाने का इंतजाम भी कर लेते हैं।   

आज फिर घँसू तिवारी जी के ज्ञान का लोहा मान गए और पुनः सेवा में लग गए।

-समीर लाल ‘समीर’


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रविवार, अप्रैल 12, 2026

मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला

 


हर चीज सबके लिए नहीं होती। यह बात तिवारी जी को तब समझ आई जब जोश जोश में मोहल्ले के पार्क में वो भी सबकी देखा देखी योगा दिवस के दिन योगा करने पहुँच गए। सरकारी आयोजन था अतः अच्छी खासी भीड़ थी। कार्यक्रम की शुरुवात लॉफ्टर योगा से हुई। आजकल सरकारी आयोजनों पर हँसी आ जाना यूँ भी सहज होता है। पहले ही ठहाके में न सिर्फ तिवारी जी अपना कुर्ता लाल कर लिए बल्कि अपने सामने अच्छी खासी ठहाका लगाती श्रीमती पाण्डे की सफेद साड़ी भी लाल कर डाली। पान तंबाकू मुंह में घुलाने की ऐसी आदत कि भूल ही गए ठहाका लगाते ही पूरा माल मसाला बाहर आ जाएगा। थूक तो जानता नहीं कि सामने पीकदान है या श्रीमती पाण्डे की सफेद साड़ी।

ठहाका लगाती श्रीमती पाण्डे रुआंसी हो गई। इसके पहले वो तिवारी जी को हड़काती, तिवारी जी खुद ही दबे पाँव पार्क से निकल लिए। उसके बाद सीधे पान की दुकान पर आकर अपने नियमित आसान पर विराजमान हो लिए। तब से आज वो सबको यही समझा रहे हैं कि भाई, सब चीजें सबके लिए नहीं होती फिर वो भले ही योगा क्यूँ न हो।

अपने इसी चिंतन को आगे बढ़ाते हुए वह बोले कि बताओ तो जरा- बनारस से चुनाव जीते हैं और दिन रात योगा दिवस की रट लगाते हैं। यह बनारस का और बनारसी पान का सरासर अपमान है। इतना कहते हुए उनके भीतर का नेता जागा और वो कहने लगे कि या तो बनारस से इस्तीफा दो या योगा बैन करो। घँसु ने भी सदा की तरह हाँ मे हाँ मिलाई। तिवारी जी ने तब तक सुबह सुबह हुए पान के नुकसान और कुर्ता खराब हो जाने के लिए योगा को गरियाते हुए नया पान मुंह में भर लिया। अब वे कुछ घंटे मुंह में पान घुलाएंगे और मौन चिंतन में डूबे रहेंगे।

इस बीच किसी ने सलाह दी कि आप काहे लॉफ्टर योगा करने लगे। बाकी का योगा कर लेते, लॉफ्टर योगा जाने देते। अब तक तिवारी जी चिंतन के दौरान इस निष्कर्ष तक जा पहुंचे थे कि यदि कोई योगा की तारीफ कर रहा है मतलब वो सरकार की तारीफ कर रहा है। मन ही तो है जो सोच लो। सोचने वाले ही तो सोच पाए कि अगर आप सरकार के साथ नहीं हैं तो आप धर्म विरोधी हैं- सोचने पर क्या लगाम और उस पर से सोचने का तो कोई पैसा भी नहीं लगता।

‘मुफ्त का चंदन घिस मेरे लाला’ का मंत्र थामे सब अपने अपने हिसाब से सोच ले रहे हैं। सच्चाई क्या है इससे किसी को कोई लेना देना नहीं है। आधी आबादी को तो जैसा सोचवा दो वैसा सोच लेती है और बाकी की आधी अपनी सुविधा और श्रद्धा के आधार पर सोच समझ रही है।

अतः जैसे ही उसने बाकी के योगा करने की सलाह दी -तिवारी जी उसे ही गरियाने लगे। तुम जाओ करो अपना योगा और अपनी भक्ति। हमको मत समझाओ – हम अपना अच्छा बुरा समझते हैं। गुसा इतना तेज आया कि न तो गुस्सा पी पाए और न ही पान थूक और इस बार लाल हुआ सफेद कुर्ता समझाने वाले सलाहकार का था।

वो अपना कुर्ता खराब होने पर भड़कता, इससे पहले ही घँसु ने मैदान संभाला- काहे बेवजह सलाह देने चले आते हो? तिवारी जी का गुस्सा जानते नहीं हो। अभी तो कुर्ता लाल हुआ है। अगर ज्यादा रुके रहे तो तिवारी जी गाल लाल करने में भी पीछे नहीं रहेंगे।

पिटना भला किसे पसंद है अतः सलाहकार भी अपना कुर्ता पौंछते हुए वहाँ से निकाल लिया। तिवारी जी का सुबह से तीसरा पान अब मुंह में था।

-समीर लाल ‘समीर’  

  

  

 

 


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