गुरुवार, जुलाई 30, 2009

हे प्रभु, ये तेरी माया...

रंग, रुप और ये काया,

हे प्रभु, ये तेरी माया.

इधर कुछ दिनों से हमारा रक्तचाप अरहर हो गया है. कहाँ तक बढ़ेगा, कुछ कहना ही मुश्किल. अगर अपने डॉक्टर को आम जनता मान लूँ तो उसकी पहुँच के बाहर. वैसे भी इस बिमारी को राजसी बिमारी का नाम दिया गया है तो ऐसी लक्ज़री उठाते लगभग हफ्ता बीतने जा रहा है. कभी लगता है कि अरहर नहीं सेन्सेक्स सा हो गया है. इस क्षण उपर, उस क्षण नीचे. नीचे आने लगता है, एक आशा बनती है कि खटाक से उपर. नमक न खाओ, टेंशन में न आओ, आराम करो, कम्प्यूटर पर न बैठो और इतने निवेश का नतीजा? फिर ढ़ाक के तीन पात..शाम तक बाजार बंद और सारा निवेश मिट्टी और कल सब ठीक हो जायेगा, इस आशा में फिर सोकर एक रात और गुजार ली.

मित्र मिलने आये. किसी तरह दरवाजा खोला. उनको बताया कि यार!! बड़ी कमजोरी लग रही है. वो ठहाका लगाते लगाते रह गये. बोले, देखकर तो नहीं लगता.

मोटे लोगों के साथ यही खराबी है कि कितनी भी कमजोरी लगे, कोई मानने ही तैयार नहीं. कोई दुबला पतला हो तो जरा सा मूँह लटका ले और सबकी सहानुभूति बटोर ले और हम सच्ची के कमजोर, बीबी तक नहीं मान रही. कहती है कि चाय बनाने से बचने का अच्छा बहाना निकाला है, अब बताओ!

ये मोटापा एक बार नहीं, न जाने कितनी बार फजिहत कराता है.

एक तो जिसे देखो, सलाह का बस्ता टांगे सामने आ खड़ा होता है कि भाई साहब, कुछ करिये. बढ़िया जगह रहते हैं, सामने झील है. फर्स्ट क्लास टहलते हुए निकल जाया करिये. दो घंटे टहलिए और फिर देखिये. अब क्या कहें, दो घंटा टहलें तो सोच कर ही लगता है कि फिर देखेंगे क्या? क्या बच रहेगा कुछ भी. दो घंटा तो क्या, दो मिनट में हफाई छूट जाती है, दो घंटे होने के पहले तो निश्चित ही खुद ही छूट लेंगे. फिर तुम देखना, हम तो उपलब्ध न होंगे.

दुकान में पैन्ट देखने जाओ तो कहता है कि इस साईज की तो न मिल पायेगी. कमर नप जाये तो लम्बाई ऐसी कि मानों सर से फुल पैन्ट पहनेंगे और लम्बाई नप जाये तो एक ही पैर में पूरे फुल पैन्ट की कमर समाप्त. वो ही हाल कमीज का है. जो मिलती है, पहन लेते हैं तो भारत में मित्र कहते हैं कि हाफ शर्ट पहने हो कि तीन चौथाई? इतनी लम्बी रहती है क्या कहीं हाफ स्लीव? अब क्या बतायें, कि वाकई वाली हाफ स्लीव में तो पेट खुला देख और भी खराब लगेगा, उससे बेहतर कि स्लीव ही लम्बी दिखे.

ट्रेन में रिजर्वेशन न हो तो किसी से कह कर बैठ भी नहीं सकते कि भाई जी, जरा खिसकना तो..जरा क्या पूरा खिसके तो शायद बाजू वाली सीट वाले को जरा खिसकना पड़े.

एक शायर कह गये:

करेला और उस पर से नीम चढ़ा.

अब हमारे साथ यह नीम ईश्वर की महान देन - हमारा रंग.

बचपन में नजर न लगे (क्यूट तो थे ही :)) तो अम्मा ठिठोना लगा देती थी काजल का.. फिर भी मोहल्ले वाले कहें कि इसे ठिठोना लगा दिया करो, कहीं नजर न खा जाये. अब क्या बतायें, ठिठोना तो लगाये घूम रहे हैं मगर हमारे रंग में ऐसा ब्लैंड हुआ कि दिख तक नहीं रहा.

कार्यालय का हमारा साथी, साथ में एक ही प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. करते करते थक गये. रात में दो दो बजे तक काम करें और फिर सुबह ५ बजे से. उसकी आँख के नीचे काले गढ्ढे देखकर बॉस घबरा गया और उसे छुट्टी देकर घर भेज दिया. पड़े हमें भी रहे होंगे काले गढ्ढे, मगर दिखें तब न बॉस छुट्टी दे तो जुटे रहे प्रोजेक्ट निपटाने में. कौन मानें कि हम भी थक गये हैं. सब सोचते होंगे कि मौका निकाल कर नींद मार लेता होगा. ये भी रुप की ही उपज होगी कि कोई सीधा सादा मानने तैयार ही नहीं.

हर तरफ से चोट खाये आपको कविता सुनाने चले आये हैं कि कम से कम आप लोग तो मुझे समझोगे. यूँ ही ख्याल आया कि मेरा जीवन तो खुली किताब है, फिर क्यूँ लोग मुझे नहीं समझ पा रहे (कविता जरा दूसरे मूड की कभी किसी मोड़ पर लिखी होगी, बस सुनाने का मन हो आया) :



पांडुलिपि




मेरी जिन्दगी

छोटी छोटी

खट्टी मीठी

कहानियों की

एक किताब

...

बस, बिकाऊ नहीं है

एक ही कॉपी है

वो भी

हस्त लिखित.

...
अपनी

किताबों के

मामले में

मैं थोड़ा पजेसिव हूँ.

...
मेरी लायब्रेरी

के

कायदे

तो

जानती हो न?

...

ले जाओ

जतन से पढ़ना

फिर

वापस करने की

जिम्मेदारी

भी तुम्हारी है.

..

-समीर लाल ’समीर’





नोट:

१. इसी बल्ड प्रेशर के चलते बहुत नेट पर भी आना नहीं हो रहा अतः अधिकतर जगह टिप्पणी न कर पाने के लिए क्षमाप्रार्थी.

२. जन्म दिवस पर आप सबकी बधाई और शुभकामनाओं का हृदय से आभार. Indli - Hindi News, Blogs, Links

97 टिप्‍पणियां:

Vivek Rastogi ने कहा…

जल्दी से इस सेन्सेक्स पर काबू पाईये।

वैसे मोटे लोगों की फ़जीहत का अंदाजा हमें भी है क्योंकि अब तो हम भी मोटापे की श्रेणी में आ गये हैं, और तो और अब तो रास्ते चलते लोग टोकने लगे हैं कि अब मोटापा कम कर लो।

आपने मोटापा और मोटे लोगों की बेहतरीन अभिव्यक्ति की है ऐसा लगा कि आप अपनी नहीं मेरी बात कर रहे हैं, हालांकि अभी भी रेडीमेड पेन्ट का नंबर हमारे नाप का आता है, बस इसीलिये खुश हैं। :)

अनूप शुक्ल ने कहा…

क्यूट तो अब भी लगते हैं। अरविन्द मिश्र की ब्लागर दोस्त ने बताया है। ढिठौना सफ़ेद लगाया करिये अब तो!

श्यामल सुमन ने कहा…

अपने स्लिम बाडी और गौर-वर्ण की चर्चा करके आपने आनन्दित कर दिया। आप जल्द से ज्ल्द रक्त चाप के कठोर चाप से मुक्त होकर यूँ ही क्यूट लगते रहें - मेरी शुभकामना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Arvind Mishra ने कहा…

दुखवा कासे कहूं -हमसे कहिये न और कह ही दिए ! हम तो आपसे गलबहियां डाल कर ढार ढार आंसू टपकाने को कब से बेताब है !

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

ले जाओ
जतन से पढ़ना
फिर
वापस करने की
जिम्मेदारी
भी तुम्हारी है.
बेहतरीन,यही सही है ,टेंशन लेने का नहीं बाबा ,देने का .ब्लड प्रेशर अपने आप ठीक हो जायेगा. (अभी हाल में एक छोला छाप डाक्टर ब्लडप्रेशर घटाने के बारे में अपना सुझाव दे रहा था.)

पंकज सुबीर ने कहा…

अपने आप का क्‍या आपादमस्‍तक वर्णन है । आनंद ही आनंद । बड़े बड़े लोगों को छोटी छोटी बीमारियां तो लगी रहती हैं । और इस सुसरे ब्‍लड प्रेशर का क्‍या है ये तो होता रहता है यूं ही कभी ऊंचा तो कभी नीचा । बताओ एक ही शरीर में रह कर क्‍या ज़रूरत है यूं ऊंचे नीचे होने की । बताओ, आपके शरीर में भी उच्‍च हो रहा है जहां पर बहने के लिये जगह ही जगह है । जितना चाहे पैर पसार कर बहता रहे । भरा पूरा शरीर है । किसी कमनीय काया का ब्‍लड होता तो हम मान भी लेते कि बहने के लिये जगह ही नहीं मिल रही है इसलिये प्रेशर में है । खैर ये तो मजाक की बात । ईश्‍वर आपको स्‍वस्‍थ और सानंद रखे । योग वगैरह कुछ करना प्रारंभ करें । चाहे कम ही करें । किन्‍तु उम्र कहती है कि अब शरीर का ध्‍यान रखो तो उसका कहा मानना ही चाहिये ।

पंकज सुबीर ने कहा…

अरे लो आपकी चिंता में कविता को तो भूल ही गया । बहुत सुदर कविता है । लौटाने की जिम्‍मेदारी तुम्‍हारी है ये पंक्तियां बहुत कुछ कह रही हैं । जस की तस धर दीनी चदरिया वाली बात है इन पंक्तियों में । बधाई ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सेंसेक्स मे इतनी वोलेटिलिटी अच्छी बात नही है. जरा सोच समझ कर धैर्यपुर्वक निवेश करने की सलाह है. हम पिछले २१ साल के अनुभव से कह रहे हैं. वैसे झील किनारे का आनंद लेने से सेंसेक्स बडा शांत रहता है.:)

ढिठौना तो ढिठौना ही होता है हमें तो दिख रहा है. वैसे भी ढिठौना खुद किसी को भी दिखाई नही देता.

ले जाओ
जतन से पढ़ना
फिर
वापस करने की
जिम्मेदारी
भी तुम्हारी है.

बहुत सार्थक.

रामराम.

Prem Farrukhabadi ने कहा…

ले जाओ

जतन से पढ़ना

फिर

वापस करने की

जिम्मेदारी

भी तुम्हारी है.

kavita achhi lagi.

apna khyal rakhen. yu hi hamen bahlate rahen.40 ke oopar body maintenance bahut jaroori hai bhai
maintain both equally body and blog.be a evergreen.

AlbelaKhatri.com ने कहा…

bahut naazuk
bahut makhmali
bahut muqaddas
aur bahut hi gahri kavita.................

shabdon se aage ki yaatra karaati kavita
antar ke ujaale ka darshan karaati kavita
aisi kavita ko likhna aapka ahobhaagya hai
aur ise padhna paathkon ka saubhaagya hai

__is se zyada makkhan main toh kya mere pujya pitaji bhi nahin laga sakte...HA HA HA

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

समीर लाल ’समीर’जी!
अरहर की दाल तो हमे बहुत पसन्द है।
शायद आपने अरहर की दाल ज्यादा खा ली है, इसीलिए आपका रक्तचाप अरहर हो गया होगा।

मेरी जिन्दगी
छोटी छोटी
खट्टी मीठी
कहानियों की
एक किताब
...

बस, बिकाऊ नहीं है
एक ही कॉपी है
वो भी
हस्त लिखित.

बहुत बढ़िया।
बधाई स्वीकार करं।

seema gupta ने कहा…

करेला और उस पर से नीम चढ़ा.

अब हमारे साथ यह नीम ईश्वर की महान देन - हमारा रंग.
" हा हा हा हा हा इश्वर का दिया हुआ कुछ भी हो आशीर्वाद ही होता है , इतना बिंदास और बेबाक आप ही लिख सकते हैं.....आपकी अच्छी सेहत के लिए हमेशा ही इश्वर से प्रार्थना है.."

regards

Nirmla Kapila ने कहा…

ये मोटापा एक बार नहीं, न जाने कितनी बार फजिहत कराता है.
अरे समीर जी आपने तो हमारी भी दुखती रग पे हाथ रख दिया अब क्या करें एक बार 18 कि कम किया उसके बाद 20 कि बढा लिया हा हा हा । बहुत खूब खुद पर व्यंग लिखना सब के बस की बात नहीं लाजवाब कवित भी सुन्दर है आपकी सेहत के लिये शुभकामनायें आभार्

Nirmla Kapila ने कहा…

ये मोटापा एक बार नहीं, न जाने कितनी बार फजिहत कराता है.
अरे समीर जी आपने तो हमारी भी दुखती रग पे हाथ रख दिया अब क्या करें एक बार 18 कि कम किया उसके बाद 20 कि बढा लिया हा हा हा । बहुत खूब खुद पर व्यंग लिखना सब के बस की बात नहीं लाजवाब कवित भी सुन्दर है आपकी सेहत के लिये शुभकामनायें आभार्

"अर्श" ने कहा…

ये कमबख्त खून की सरगर्मी भी देखो समीर लाल जी जैसे सरीखे से लोहा लेने को आतुर हो रही है ... मगर उसे नहीं पता की वो जहां है उसकी चादर बहोत लम्बी है .. कुछ नहीं होगा... जैसा की गुरु देव ने कहा है थोडा अपने ऊपर ध्यान देना शुरू करें आप योग वगैरह ... कविता वाकई आपकी बहोत अछि है हमेशा की तरह... कुछ तो अपने उपसे भी ध्यान देलो आप...


अर्श

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत मस्त लिखते हो समीर भाई ...ईश्वर इस जिन्दादिली को बनाये रखे .....
होमिओपैथी को आजमायें , रक्तचाप भाग जायेगा !

डा. अमर कुमार ने कहा…


उच्च रक्त-चाप एक स्टेटस है, भाई जी ! यह भला हम नीचों को कहाँ नसीव ?
यह अति-सौम्यता व असहमत चुप्पी का साइड इफ़ेक्ट ही सही, पर तक़लीफ़देह तो है ही !

आपकी कँचनकाया पर वारी जाऊँ, कौन कलमुँहा आपको मोटे में गिनता है ? रँज़ो-ग़म से दूर और खाते पीते शरीर से लोग जलते ही हैं । सारी गड़बड़ अम्माओं के लगाये डिठौने से ही हुआ करती है, ग़र न लगातीं तो बुरी नज़र वालों की दुआ से आप गल कर अब तक आधे न हो गये होते ? बुरी नज़र वालों का मुँह काला करने को अपना रँग उधार देते देते आप स्वयँ ही रँगों के कँगाल श्वेतवर्णी होते !

रही बात आपके हस्तलिखित पाँडुलिपि की.. तो बिना विद्वानों की सहमति के टिप्पणी देना उचित नहीं, कहीं यह अकविता निकली तो ?

Dhiraj Shah ने कहा…

आप की स्वस्थ होने की कामना करता हुँ आप जल्दी से ठीक हो और आप हमारे साथ हो ।
और आपको जन्मदिन की बधाई । आभार....

बवाल ने कहा…

हा हा बहुत मज़ेदार लिखा सर आपने । फ़ुरसतिया जी सही कह रहे हैं बॊस ! ढिठौना सफ़ेद लगाया करिये अब तो! मगर ये भी आपकी तरह स्पैलिंग मिस्टेक कर रहे हैं।
भैये ये ठिठोना और ढिठौना क्या होते हैं। हमें तो पता ही नहीं। हाँ हमने हमारी नानी जी जो व्याकरण की ज़बरदस्त जानकार थीं ने हमें डिक्शनरी दिखलाकर सिखलाया था ‘डिठौना’ का अर्थ है काजल का टीका जिसे स्त्रियाँ अपने बच्चों के चेहरे या माथे के किनारों पर, नज़रे-बद से बचाने के लिए लगाती हैं। हा हा। हाँ मगर कमज़ोरी के ज़माने में आँखों के नीचे पड़्ने वाले काले धब्बे आपके चेहरे पर उभारने के लिए तो अरविंद मिश्रा जी की वैज्ञानिक सलाह ही लेनी पड़ेगी। हा हा ।
हमेशा हंसा देते हो। हाँ नहीं तो।

P.N. Subramanian ने कहा…

आपकी संजीदगी के हम कायल हैं. कविता भी बेहतरीन थी.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ईश्वर करे कि आपका बीपी और मोटापा दोनों ही छोटे किसान की आय की तरह कम हो जाये.

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

समीर भाई
आपने मोटापे की नाकारात्मकता का तो बखान किया मगर इसके कई फ़ायदे भी हैं
कोई ऐरा गेरा पंगा नहीं लेता.. यह सोच कर की अगर यह उपर बैठ गया तो मेरा क्या होगा..
दूसरा जितना ज्यादा बडा शरीर होगा.. उतना ज्यादा बल्ड और फ़िर प्रेशर तो अपने आप ही ज्यादा होगा न :)
कुछ प्रेशर हो हम लोगों ने खुद ही बनाये हुये हैं.. पोस्ट लिखने का.. दुसरों की पोस्ट पढने का.. टिप्पयाने और टिप्पणी पाने का फ़िर उसे पढने का..
आधे ब्लोगरों को तो इस लिये बल्ड प्रेशर है कि लिखने के बाबजूद टिप्पणियां नहीं मिलती (अपुन भी उनमें से एक हैं)..
हिमालय पर जा कर एकान्त वास ही इससे छुटकारा दिला सकता है.. अगर लेपटोप साथ न हो तो ;)

बवाल ने कहा…

और कविता तो क्या ही ज़ोरदार लिखी सर, सच में व्यंग्य को संजीदगी तक लाने में कमाल की महारत हासिल कर चुके हो आप। बधाई।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

नजर ही लग गयी है आपको ...लाल केसरी रंग का टीका लगा ले ..:) कविता बहुत पसंद आई ..अपना ख्याल रखे

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

ईश्वर करे आप शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करे...!

जगदीश त्रिपाठी ने कहा…

आपका वर्णन उत्कृष्ट है। लेकिन आपकी बीमारी की बात कष्टदायक। जल्द स्वस्थ हों। शुभकामना। कविता अच्छी है.।

संजय बेंगाणी ने कहा…

राजसी बिमारी तो हम कब से लिए घुम रहे है. डॉक्टर हैरान है कि हमें हो कैसे सकती है. उसे क्या मालूम हम ऐरी गैरी बिमारी थोड़े ही पालेंगे? सेम-पिंच जी. :)

ठिठोना, काजल के स्थान पर चूने का लगाना था...नजर तो नहीं लगती :)

गुस्ताख़ ने कहा…

चचा बुरा मत मानिएगा, प्रेमचंद जी कह गए हैं मोटा होना बेहयाई है। सौ लोगो को दुबला बना कर एक आदमी मोटा होता है। तो इससे जितनी जल्दी छुटकारा पाएं उतना बेहतर। रही अरहर की बात, ऊश्वर से कामना है कि आपके स्वास्थ्य या रक्तचाप को आम आदमी की दशा बना दे। आजादी के बाद से ही एक ही जगह सामान्य पर अटकी पड़ी है।

चंदन कुमार झा ने कहा…

आपके अच्छे स्वास्थ के लिये हम ईश्वर से प्रार्थना करते है.......कविता अच्छी लगी.अगर मन सुन्दर हो तो फिर किसी और सुन्दरता की आवश्कता नहीं रह जाती है.......सारी सुन्दरतायें गौण हो हो जाती है.आभार.

sada ने कहा…

मेरी जिन्दगी

छोटी छोटी

खट्टी मीठी

कहानियों की

एक किताब

बहुत ही चुने हुये दिल को छूते शब्‍दों से सजी यह प्रस्‍तुति बेहतरीन लगी ईश्‍वर आपको जल्‍द ही स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दे ऐसी ही शुभकामनाओं के साथ

पंकज सुबीर ने कहा…

ये रमेश हठीला जी की ओर से संदेश है । वे कह रहें हैं कि आप तुरंत ही योग प्रारंभ करें और किसी भी प्रकार की सहायता योग में चाहिये तो वे सहर्ष तैयार हैं । वे आपके लिये चिंतित हैं और कह रहे हैं कि समीर भाई से कहो कि केवल मेरे लिये, मेरे कहने पर पन्‍द्रह दिन योग और उसमें भी केवल प्राणायाम कर लें । आपको परिवर्तन स्‍वयं दिखाई देगा । श्री हठीला जी कह रहे हैं कि आप केवल पन्‍द्रह मिनिट का समय निकाल लें और केवल कुछ प्राणायाम कर लें । अनुलोम विलोम, कपाल भांति, भस्त्रिका, भ्रामरी, नाद ये कुछ प्राणायाम आप करलें । आपको आराम मिलेगा । ये उनका अनुरोध है जो आप तक पहुचा रहा हूं ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

समझ सकता हूं कष्ट। उच्च रक्तचाप के साथ साथ और भी प्रकार के कष्ट मेरी भी काया देती है और मन में बेबात उदासी भी।
समझ सकता हूं कष्ट।

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत बढ़्या है समीर जी, आपको जनम दिवस की बधाई आपके ब्लॉग पर दे रहा हूं!

डॉ .अनुराग ने कहा…

....अरे बाकी लोग जलते है जो ऐसा कहते है अब क्यूट नेस नहीं रही ..काला चश्मा लगाये लेपटोप लिए बैठे देखिये कितने क्यूट है..वैसे हमने चिटठा चर्चा पे आपके जन्मदिन पे एक दौ सवाल छोडे थे ...उनका जवाब नहीं मिला ....तनिक हमारे मेल पे अपना नंबर तो दीजिये ..

Priya ने कहा…

Kavita too good..... aur khud par hansna bahut badi baat hoti hai....aur ham sab ko bhi khoob hasaya..... aap bas jaldi se theek ho jaiye.... doctor ke according precaution lene mein burai kya hai ....tippani ko maariye goli.....wo kahte hai na ki health is wealth..... Happy life ahead! go healthy and keep smiling always :-)

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

"फिर क्यूँ लोग मुझे नहीं समझ पा रहे"

अजी लगता है कि हम तो आपको कुछ कुछ समझने लगे हैं:)

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर कविता लिखा है आपने! आपके लिखने का अंदाज़ सबसे अलग सबसे जुदा है और मुझे आपका हर एक पोस्ट बहुत अच्छा लगता है! लिखते रहिये!

कुश ने कहा…

अरहर की तो दाल का भाव भी चढ़ता ही जा रहा है.. आप की व्यथा देखकर हमें भी रोना आ गया..
जल्दी से स्वस्थ हो जाइए..
वैसे लिखा आपने बहुत ही उम्दा है.. ज़िन्दगी को किताब का दर्जा दे दिया और वो भी इतनी खूबसूरत किताब..

आपकी पोपुलारिटी का अंदाजा तो इस बात से लगाया जा सकता है. कि कल मेरे एक मित्र ने फोन पर कहा कि कल तो आपके समीर लाल जी का जम्दीन था.. मैंने पुछा कैसे पता ? तो उसने कहा वो अक्सर ब्लोग्वानी पढता है.. वह उसे कल समीरलाल जी ही दिखे.. :)

poemsnpuja ने कहा…

ham der se pahuche badhai dene ke liye...fir bhi kubool kijiye samir ji...happy birthday.

aajkal to gorepan ki cream aa gaye hai...john abraham bhi wahi laga ke gora hua tha...aur yakinan uski body me bhi cream ka hath hoga hi...try kyon nahin karte?

cmpershad ने कहा…

"बचपन में नजर न लगे (क्यूट तो थे ही :)) तो अम्मा ठिठोना लगा देती थी काजल का.. फिर भी मोहल्ले वाले कहें कि इसे ठिठोना लगा दिया करो, कहीं नजर न खा जाये"
ठिठोना और वह भी काजल का! नज़र आये तो नज़र न लगे:)

Abhishek ने कहा…

अच्छा सच में इतने मोटे हैं क्या? मुझे तो मोटे लोग बड़े अच्छे लगते हैं :) इतने अच्छे ब्लॉग लिखते हैं, कविता लिखते हैं, चाय बनाने से बचने के लिए बीमार हो जाते हैं ;)

M VERMA ने कहा…

ब्लडप्रेशर कम से कम ब्लड की उपस्थिति साबित तो कर ही रही है.
ब्लडप्रेशर व मोटापा दोनो को दूर करने का एक ही उपाय है जैसा कि आपके मित्र बताते है -- अरे वही दो घंटा टहलने वाली सलाह --
कुछ किताबे मुझे भी चाहिये लौटा दूंगा

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

बहुत बढ़िया पोस्ट. आपसे मिला तो मुझे तो ज़रा भी नहीं लगा कि ऐसी कोई समस्या भी हो सकती है आपको. ब्लड-प्रेशर का क्या है. आता जाता रहता है. आया तो चला जाएगा. ऐसी-ऐसी पोस्ट लिखते हैं भैया, ब्लड-प्रेशर कहाँ टिकेगा? वो तो खुद का स्टेटस टेस्ट करने आता है.

कविता बहुत बढ़िया लगी.

वाणी गीत ने कहा…

३५ साल की उम्र [पुरानी बात है ]में ३५ केजी. वजन होते हुए भी हाई ब्लड प्रेशर को झेला है ..इसीलिए बता सकती हूँ की ब्लड प्रेशर शारीरिक अवस्था से ज्यादा मानसिक होता है..और उचित आहार विहार तथा सकारात्मक सोच ही इसका सबसे मुफीद इलाज़ है ...मस्त रहें ...स्वस्थ रहें..
किताब तो आज तक हमने किसी की न लौटाई ..!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अब इस का तो एक ही इलाज है वजन कम करना जो दुनिया का सब से दुरूह कार्य है। कोशिश करो कम कर भी लो। पर क्या? सारा जीवन कोशिश करते रहो क्या? जैसे ही बन्द करो वजन है कि तल तलाशता हुआ वापस मुकाम पर चला आता है।

पर सही बात तो यह है कि दिल को 50 किलो मांस मज्जा में रक्त पहुँचाने के लिए जितने हॉर्सपावर चाहिए उस से दुगना हॉर्सपावर 100 किलो मांस मज्जा में पहुँचाने के लिए चाहिए और रक्त की चाप भी ऊंची रहना जरूरी है। इस लिए रक्तचाप से मुक्ति का एक ही साधन है वजन कम करो और कम बनाए रखो।
शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करें। आप नहीं होते तो ब्लाग पर दस के पहुँचने पर भी ऐसा लगता है कि एक भी नहीं आया। आप आ जाते हैं तो लगता है आज का कोटा तो पूरा हो चुका बाकी तो बोनस है।

Vaibhav ने कहा…

आज समझ गया की दिल और दिमाग का कोई रिश्ता नहीं होता| आपका दिल (ब्लड प्रेशर में) भले ही साथ न दे रहा हो परन्तु दिमाग भरपूर चल रहा है| पोस्ट की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है [:)] कविता बहुत अच्छी लिखी है|
ईश्वर से आपके अच्छे स्वास्थ की कामना करता हूँ|
धन्यवाद,

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह समीर भाई........... जिंदगी की किताब .... बस पढने के लिए........... लाजवाब लिखा है.............. मालिक अपनी सेहत का ध्यान रखो.......... दिमाग पर ज्यादा प्रेशर न लो........अपना ख्याल रखो

रंजना ने कहा…

स्वयं पर व्यंग्य करना बहुत बड़े दिलवालों के बस का ही हुआ करता है समीर भाई....और आपने तो इतना रोचक वर्णन किया की पढने वालों का ब्लड प्रेशर दुरुस्त कर दिया......

लेकिन इस तरह उच्च रक्त चाप हंसी में लेने लायक भी नहीं है.....समाधान के साधनों का पता आपको है ही बस जरा सा आलस्य त्याग उन्हें अमल में ले आइये....असल में शरीर अतिरिक्त देख भाल मांग रहा है....जिन्हें आप अपने लेखों से आनंदित किया करते हैं,उनसे उसे चिढ जो है....वह आपके पाठकों के प्रति समर्पण से डाह रखने लगा है और चाहता है की आपका कुछ वक्त उसकी सेवा में भी बीते....सो चलिए दे दीजिये उसे भी कुछ समय....

आपने व्यंग्य आलेखों में आप जितने ही चुलबुले होते हैं,अपने काव्यात्मक अभिव्यक्ति में आप उतने ही गंभीर और मर्मस्पर्शी....बस आनंद आ जाता है पढ़कर....

आपके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की मंगलकामना है....देखिये भाभीजी बहुत चिंतित होंगी,उनके कष्ट निवारण के लिए ही सही,स्वास्थ्यलाभ के उपायों को आपको अपनाना ही पड़ेगा...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

"इधर कुछ दिनों से हमारा रक्तचाप अरहर हो गया है. कहाँ तक बढ़ेगा"
हा-हा-हा-हा
समीर जी, बस इत्नना ही कहूंगा कि "हर-हर(अरहर) महादेव !

Shefali Pande ने कहा…

मोटे की गति
मोटा ही जाने
कोई और कहे तो
सच ना मानें ...
आप जल्दी से स्वस्थ हो जाएं ...

Mahesh Sinha ने कहा…

हर फिक्र को ब्लॉग में उड़ाते चलें ये प्रेशर भी कम कर देगा. लोगों के द्वार न जायें तो भी चलेगा अपना दरवाजा खुला रखें

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

समीर जी,

सिर्फ दालों में एक चना ही मिल रही है अफोर्डेबल कीमत पर अरहर तो छॊडिये किसी मुहावरे में काम आयेगी अब ... यह मुँह और .....की दाल।

रक्तचाप को काबू में रखिये हमारी दुआयें आपके साथ, जन्मदिन पुनः बधाईयाँ।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

अनिल कान्त : ने कहा…

कविता अच्छी थी...आप जल्दी स्वस्थ हो जाएँ इसी कामना के साथ

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

रोचक आलेख और कविता बहुत बढ़िया है और आप स्वस्थ रहें .....

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

आपने तो हद ही कर दी . भगवान का दिया शरीर आपको कष्टकारी लगने लगा . कभी किसी हार्ट सेंटर जाए वहां देखे सब पतले ही दिल के मरीज़ होंगे . मैं तो आपसे कहीं ज्यादा हूँ हर चीज़ नार्मल . चिंता छोडे सुख से जिए , अपना तो कोलस्ट्रोल बाहर लटका रहता है पतले बेचारे अपनी नसों में जमा करते रहते है .

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

रोचक आलेख और कविता बहुत बढ़िया है और आप स्वस्थ रहें .....

Manish Kumar ने कहा…

हमें तो चार साल हो गए इस राजरोग को ढोए.. एक बार लग जाए तो जल्दी खिसकता नहीं। आशा है आपकी समस्या अस्थायी निकले।

Prem ने कहा…

आपके स्वस्थ होने के लिए शुभकामनायें । मोटापे के लिए तो क्या कहें --सहानुभूति । पर अभिवयक्ति प्रशंसनीय थी

सबकी कहानी ने कहा…

aray ek electronic morning walker aata hai...soye-soye weight kam karega. isase blood pressure aur baki bimari bhi cure hoti hai..ajma kar dekhiyega.

VaRtIkA ने कहा…

aapki zindagi ki khatti meethi baaton ki kitaab ke panne jaisaa yeh aalekh bahut interesting tha sir... just get well soon... aur jab tak theek naa ho jaayein tab tak yeh chatkaaredaar kisse baccha ke rakhiye... jab poornatah theek ho jaiye tab ek saath chakhenge hum... :)

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

मेरी शुभ कामना आपके साथ है |

घबराएँ नहीं इंडियन मार्केट मैं profit booking hone वाली है सेंसेक्स तो निचे आना ही है, बाला ये ब्लड प्रेशर क्या चीज है ... इसको तो निचे आना ही पड़ेगा !

Neeraj Rohilla ने कहा…

ह्यूस्टन तो आईये,
आपके लिये डायमंड फ़िटनेस वाकिंग एंड जागिंग पैकेज इन्तजार कर रहा है, ;-)

कुछ १५-२० पाउंड हमें ट्रांसफ़र कर दीजिये जिससे हम समाज में सिर उठाकर वजन के साथ चल सकें, ;-)

दिलीप कवठेकर ने कहा…

नज़र लगे ना साथियों....

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

अच्छा लिखा है आपने । भाव, विचार और सटीक शब्दों के चयन से आपकी अभिव्यक्ति बड़ी प्रखर हो गई है। -

http://www.ashokvichar.blogspot.com

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी,अपनी परेशानी को भी बढिया तरीके से पेश कर दिया आपने।बधाई।...जरा सावधान रहें यह रोग बड़ा परेशान कर देता है कई बार.....हम भी इसे भुगत चुके हैं।
कविता बहुत अच्छी लगी। बधाई।

शरद कोकास ने कहा…

समीर भाई क्या सच्मुच तबीयत खराब है ? अगर चाय बनाने से बचने के लिये है तो ठीक है .. मै भी खाना बनाने से बचने के लिये ऐसा करता हूँ.. खैर आपके रक्त चाप पर गालिब साहब का वह शेर याद आ गया ..जो आँख ही से न टपके वो लहू क्या है.. बहरहाल यह लहू ठीक ठाक रगों मे बहे यह कामना .. कविता लिखते रहिये बी.पी. सामान्य बना रहेगा

Pankaj Upadhyay ने कहा…

sehat ka dhyaan rakhen. Dua kerta hoon jaldi hi aap sawstha hoker bllog par laute.. :)

amit ने कहा…

मोटे लोगों के साथ यही खराबी है कि कितनी भी कमजोरी लगे, कोई मानने ही तैयार नहीं. कोई दुबला पतला हो तो जरा सा मूँह लटका ले और सबकी सहानुभूति बटोर ले और हम सच्ची के कमजोर, बीबी तक नहीं मान रही. कहती है कि चाय बनाने से बचने का अच्छा बहाना निकाला है, अब बताओ!

ये बात तो बिलकुल सही कह रहे हैं आप, सुकड़े व्यक्ति का तो चेहरा नहीं भी लटका होगा तो भी लोग बाग़ पूछ लेंगे कि क्या बात है भई कमज़ोर हो गए हो!!

बाकी आप स्वास्थ्य लाभ कीजिए, ब्लॉग टीप तो लेनी देनी है। बीमारी कोई राजसी नहीं होती कोई फकीरी नहीं होती, सब बीमारियाँ बुरी ही हैं। आशा है जल्द ही स्वास्थ्य लाभ कर फुल मोड में वापस आएँगे। :)

अभिषेक ओझा ने कहा…

बड़ी समस्या है जी. यहाँ भी लोग उपदेश दे रहे हैं. कण्ट्रोल में रखिये जैसे आपने बेलगाम छोड़ रखा है और एक बार डांट दीजियेगा तो चुप चाप बैठ जाएगा :) मुझे तो परसाईजी का चिकित्सा का चक्कर याद आ रहा है. वैसे फिर भी कम सलाह आये हैं... !

Pankaj Mishra ने कहा…

+उसकी आँख के नीचे काले गढ्ढे देखकर बॉस घबरा गया और उसे छुट्टी देकर घर भेज दिया. पड़े हमें भी रहे होंगे काले गढ्ढे, मगर दिखें तब न बॉस छुट्टी दे तो जुटे रहे प्रोजेक्ट निपटाने में. कौन मानें कि हम भी थक गये हैं. सब सोचते होंगे कि मौका निकाल कर नींद मार लेता होगा. ये भी रुप की ही उपज होगी कि कोई सीधा सादा मानने तैयार ही नहीं.+


बहुत ही रोचक .
मै तो पतला हु सोचता था कि किसी तरह मोटा हो जाऊ पर आज से नहीं सोचुगा :)

Ancore ने कहा…

दिमाग(?) पर ज्यादा प्रेशर न ले ........ अपना ख्याल रखो.

GET WELL SOON (आप जल्दी से स्वस्थ हो).

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

मेडिकल रिपोर्ट गलत लगती है .. या फिर आपका वहम है जी .... जो लोग खुद पर इतनी शिद्दत से हंसना जानते हैं उन्हें ये सब रोग नहीं होते !

अब 'क्यूटनेस' के सम्बन्ध में तो मेरा इतना ही मानना है कि बाहर वाली भले न दिखे बस अन्दर की क्यूटनेस दिखती रहे यही काफी है !

किस्सा-ए-अरहर :

उसको खोज रहा हूँ जिसने लिखा था ...
"दाल रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ !"
उसको शायद पता नहीं होगा कि चिकन ज्यादा सस्ता है दाल से !

Ravi Srivastava ने कहा…

सचमुच में बहुत प्रभावशाली लेखन है... बहुत सुन्दरता पूर्ण ढंग से भावनाओं का सजीव चित्रण... आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी… बधाई स्वीकारें।
Ravi Srivastava
From- www.meripatrika.co.cc

नन्हीँ लेखिका ने कहा…

सर,
बहुत ही रोचक और बेहतरीन !
और कविता तो सोने पर सुहागा !
आपके अच्छे स्वस्थ्य की कामना के साथ.
सादर.
रश्मि.

बसंत आर्य ने कहा…

गम में खुशी खोज लेते है. रोने की बात पर भी हंसा देते है. ईश्वर आपको खुश रखे इसी मे तो हम सबकी खुशी है भाई.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

आपकी काया..प्रभु ने बनाया..
इतनी खूबियों से सजाया...

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

इसे राजशाही बीमारी कहते है.
इसमे आदमी को बस आराम करना चाहिए..
यहाँ तक की सोचना भी नही चाहिए..
और आपकी सोच ..
क्या कहूँ..
कितना बढ़िया...कितना बड़ा.
आराम कीजिए...
स्वास्थ लाभ लीजिए....
जल्द ही स्वस्थ हो जाएँगे..

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) ने कहा…

sameer ji saadar prnaam aap jaldi se apne is chaap par cntrol paaye yahi hamari dua hai meri subh kamnaye aap ke saath hau
saadar
praveen pathik
9971969084

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

इमली की तरह हैं आपकी खट्टी मीठी कहानियां । आपका रक्तचाप जल्दी ही सामान्य हो जाये इस शुभ कामना के साथ । वैसे रक्तचाप के साथ भी चाय तो बनाई जा सकती है ।

anitakumar ने कहा…

जानती हो न?

ये कौन है?

सलाहों का झोला लिए नहीं खड़े होगें और अच्छा लिखते हैं ये तो ऊपर बहुत से लोग कह चुके तो सेम टू सेम्…।:)

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

जैसा करम करेगा वैसा फल देगा भगवान।
कुछ समझे समीर भाई?
दिन भर आफिस में काम फिर बैठे उड़नतश्तरी में और लगे सैर पर सैर।
ये तो होना ही था।
काया पहले, आया (ब्लाग पर टिप्पणी के लिए) बाद में।

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

जो लिखा, जैसा लिखा, पसंद आया, शिकायत का अंदाज भी पसंद आया.
बात अरहर से शुरू,
सेंसेक्स के उतर चढाव से बलवती हुई,
प्रेशर कूकर की पकड़ में उछल कर खूब गली
खाने की मेज पर ढूदते रह जाओगे दाल को तो ब्लड प्रेशर तो हाई होगा ही.
खामखा लोग मोटे शारीर को दोष देते हैं, कितने लोग पीछे छिप कर अपनी जन बचाते फिर रहे हैं , शायद कभी सोचा भी न होगा. और तो और ट्रेन में बैठ गए तो आजू-बाजू कोई बैठने की हिमाकत कर ही नहीं सकता, कि नींद में लुढ़क गया तो कौन संभालेगा...... बस पैर पसार कर आराम से बैठो.
आपके लिखने के बाद भी लोग-बाग पता नहीं क्यों झोला लटकाए अपनी-अपनी सलाह टिप्पणियों में भी झोके जा रहे हैं, लग रहा है कि दुनिया के सारे मोटों को पतला कर के ही रहेंगे.......वैसे एक पते कि बात है कि लोग धीरे-धीरे मोटे ही होते जाते हैं, पतला शायद कोई नहीं......
जतन से पढ़ कर ही वापस कर रहा हूँ, आपकी लाइब्रेरी ताकि सलामत रहे, और न तो खाली सी लगे और न दुबली हो, दुआ है सबको पढाये, फूले-फले...................
न कोई सलाह, न कोई मशविरा, आपका आदेश सर-माथे पर. राम- राम .......

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा…

एक बात तो तय है हैल्‍दी ? लोगों के चेहरे लटकते नहीं है। आप मुंह लटकाने की प्रेक्टिस कीजिए। अगर कामयाब हो जाएं तो वह फोटो खींचकर ब्‍लॉग पर चिपका दीजिएगा। ढेर सारी साहनुभूति मिलेगी, फैन्‍स का प्‍यार भी। और हमारे जैसे हैल्‍दी होने की कगार पर खड़े लोगों को सीख भी कि कैसे मुंह लटकाया जाए। :)

स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें भाईजान अभी बहुत टिप्‍पणियां करनी बाकी है। रोज नए ब्‍लॉग आ रहे हैं। उन्‍हें भी तो पता चले कि तश्‍तरी सरनेम वाले कोई सज्‍जन हैं जो नियमित रूप से केवल और केवल उन्‍हीं का ब्‍लॉग पढ़कर तंदुरुस्‍त रहते हैं। :)
(आपकी एक पुरानी पोस्‍ट याद आ गई।)

Pakhi ने कहा…

Ap to pyare-pyare lagte hain Uncle ji !!


पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

मधुकर राजपूत ने कहा…

आपका सेंसेक्स जल्दी स्थिर हो। ब्लॉजगत में आपके कदमों की ताज़ा निशान ढूंढने पर भी नहीं मिले तो आपके अड्डे पर मिजाज़पुर्सी के लिए चले आए। रंग काला ही शानदार होता है। क्रीम, मेकअप, डार्कसर्कल्स सबकी छुट्टी। बढ़िया है।

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…

Apne to is post ke bahane bahuton ka dard udel diya...par samir bhai, apni blogar wali jindadili ke liye bhi bhabhi ji se kala tika lagwa lijiye.

फ्रेण्डशिप-डे की शुभकामनायें. "शब्द-शिखर" पर देखें- ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे !!

Dr.T.S. Daral ने कहा…

कहते हैं, जो चीज़ सबसे ज्यादा दी जाती है,वो सलाह है.
और जो चीज़ सबसे कम ली जाती है, वो भी सलाह है.
फिर भी मैं आपको एक सलाह ज़रूर दूंगा. आपके चाहने वालों ने जो ढेर सारी सलाहें दी हैं, उन्हें ज़रूर माने. वर्ना चाहने वालों का दिल टूट जायेगा. वैसे मेरी सिक्स पैक एब्स वाली कविता को एक बार फिर से सुने, आपको एक क्ल्यू अवश्य मिल जायेगा.
आपके अतिशीघ्र स्वस्थ्य लाभ की कामना करता हूँ.

जितेन्द़ भगत ने कहा…

आशा है बी.पी. कंट्रोल हो गया होगा।

कवि‍ता की मासूमीयत दि‍ल को छू गई।

संजीव गौतम ने कहा…

मोटे लोगों के साथ यही खराबी है कि कितनी भी कमजोरी लगे, कोई मानने ही तैयार नहीं.
मज़ा आ गया बहुत देर तक हंसी ने थमंने का नाम नहीं लिया

Dr. Amar Jyoti ने कहा…

आप शीघ्र स्वस्थ हों यही कामना है।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

मुझे लगता है कि ऐसी ही समस्या से दो-चार होने का समय मेरा भी आ रहा है। वजन घटाने के प्रयास में दौड़ लगाना शुरू किया था लेकिन घुटनों ने महीने भर में ही नोटिस थमा दिया है। डॉक्टर ने आराम की सलाह दे दी है। बीस दिन में चार किलो कम हुए थे जो दस दिन के आराम में वापस आ गये लगते हैं। अब क्या करूँ। खाना कम कर रहा हूँ।

Mahesh Sinha ने कहा…

आज ही पता चला है अश्वगंधा की तीन पत्तियाँ सुबह लेने से वजन कम होता है और वजन कम हो तो कई दबाव कम होते हैं

woyaadein ने कहा…

ओह हो.......मैं कहाँ रह गया था.....यहाँ ब्लॉग-जगत में बहुत कुछ प्रिय-अप्रिय घट गया.....सबसे पहले तो आपको जन्मदिन की ढ़ेर सारी शुभकामनायें......तत्पश्चात आपके शीघ्र स्वास्थ्य-लाभ के लिए प्रभु से प्रार्थना करता हूँ.......आपकी अल्प उपस्तिथि तो सभी को ज़रूर खल रही होगी, मगर "एक आपकी सेहत हज़ार नियामत" वाले जुमले के सहारे सभी अपने आप को मना रहे होंगे.....

साभार
प्रशान्त कुमार (काव्यांश)
हमसफ़र यादों का.......

विवेक सिंह ने कहा…

मोटे लोगो ! पतले बनिये !

Hill Goat ने कहा…

Lovely post. About those patches under the eye... it made me roll on the floor, holding my stomach.

शाश्‍वत शेखर ने कहा…

Arhar ki daal, sensex, cute :)

बेनामी ने कहा…

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