गुरुवार, दिसंबर 21, 2006

हम कुछ नहीं कहेंगे

भई, हम तो इन चुनाव प्रचारियों से बहुते परेशान हूँ. चैन ही नहीं लेने दे रहे. सुबह से चार चार बार समाचार आ चुके हैं कि आपका घोषणा पत्र नहीं छ्पा. अब कब तक सहते, हम तो डांट दिये कि यार, जब हमें नहीं छापना है तो काहे पीछे पडे़ हो. हम चाहे हारें या जीतें, हमे नहीं पंगे में पड़ना है और न ही कुछ बोलना है.

हमारा सबसे प्रेम है. हम किसी के बारे में कैसे कुछ कह सकते हैं और न ही यहाँ कोई राजनिती हो रही है कि एक दूसरे पर कींचड़ उछालना नितांत आवश्यक हो और इसके बिना सब बेकार. हम तो बिल्कुल नहीं बोलेंगे और न छापेंगे.

हम तो उस नामांकित चिट्ठाकार का न तो नाम लेंगे और न ही उनका नामांकन खारिज करने को हल्ला मचायेंगे जिसने अपने घोषणापत्र में न सिर्फ मदिरा बल्कि भांग और देशी शराब का भी इस्तेमाल किया है और ठाकुरों से वोट मांग कर (हमको जीताय दो ठाकुर!!) जातिवाद को भड़काने जैसे जघन्य अपराध किये है और अपने जजों के साथ की सांठगांठ को, खुले आम उजागर कर लोकतांत्रिक प्रणाली का मजाक उठाया है. हम तो चुप ही रहेंगे, हमें तो सबसे प्रेम है, आप खुद ही देखें:

जजों की चिंता ना करें.... हम इतने तो लायक हैं कि उ लोग हमरा परचा खारीज नहीं ना करेंगे।

हम तो इनका नाम भी नहीं लेंगे.हमारा तो इनके साथ प्रेम भाव है

हम तो उस दूसरे वाले नामांकित चिट्ठाकार का नाम भी नहीं लेंगे जिसे अपना घोषणापत्र लिखने तक का एक बार में टाईम नहीं है और वादे दूनिया भर के कि यह करा दूँगा, वह करा दूँगा. अरे, घोषणापत्र तो एक सिटिंग में लिखो. ये क्या कि बीच में स्कूल चले गये कि अब आकर लिखूँगा. आपके भरोसे सब रहे तो आप तो स्कूल कट लोगे और बाकी अपनी समस्या लिये टपते रहेंगे.

स्कूल जाने का समय हो गया है। अभी और भी है आकर लिखता हूँ …

हमें तो उनके द्वारा लोगों के वोट के लिये सुन्दरियों के दर्शन का प्रलोभन (घोर असंवेधानिक बात, नामांकन खारिज होने का एक पुख्ता आधार) और वोट न देने वालों को कवियों के साथ कमरे में बंद करने देने की धमकी (जान से मार डालने की धमकी पर तो एक बार विचार भी हो सकता है, मगर उससे भी कई गुना बड़े इस अपराध पर तो अगर नामांकन खारिज नहीं हो, तब तो चुनाव प्रणाली ही शक के दायरे में आ जायेगी). और लुभाने के लिये अंग्रेजी शराब और साथ साथ दो गिलास की फोटो लगाकर सांकेतिक प्रलोभन ऐसा दे रहे हैं कि हम तो खुद ही उन्हें वोट देने निकल पड़े थे, बड़ी मुश्किल से रुके. वैसे अपने नाम के साथ पंडित शब्द का प्रयोग भी जातिवाद उकसाने के लिये किया गया है, यह सब जानते है वर्ना शर्मा जी से भी काम चल सकता था. लेकिन हम तो उनका नाम भी नहीं लेंगे.

हमें क्या करना है. हमारे तो उनसे भी प्रेम भाव है, हम तो कुछ नहीं कहेंगे. बिल्कुल चुप रहेंगे और न ही उस तीसरे नामांकित चिट्ठाकार के बारे में कुछ कहेंगे. वो तो हमारा शिष्य है. मगर हम उसका नाम नहीं लेंगे. अपने शिष्यों को भी कोई बदनाम करता है क्या? भले ही उसने हमसे सिखी विधा रुपी अस्त्र से ही हम पर वार किया हो मगर यह उसका अधिकार क्षेत्र है, उससे हमें क्या. हमसे कहे कि गुरुदेव हम आपका चुनाव प्रचार करेंगे और एक पोस्ट लिख रहे हैं. हम प्रेमी स्वभाव के अनुरुप आशिष दे दिये और जब पोस्ट देखते हैं तो शिष्य बाबू अपने नारे लगवा रहे हैं हाईकु में. अब भले ही उसने हमारे पिछवाडे पड़े घुरे से कचरा बीन कर छाप दिया, मगर हमें बुरा नहीं लगा. यही तो होता है जब किसी से प्रेम भाव हो. हालांकि शिष्य ने कोई असंवेधानिक कार्य नहीं किया कि बाकियों की तरह इनका परचा खारिज हो, मगर कचरा पेटी में मुँह मारना भी तो शोभा नहीं देता. अब जो कचरे में गया, गया. उसमें कौन ढ़ूँढ़ता है और जो ढ़ूढ़ता हो वो चुनाव में. न न!! मन खराब सा हुआ जा रहा है. पत्थर मारने तक का मन होता.

अब मन खराब हो या अच्छा, हम तो अपना प्रेमभाव बनायें रखेंगे और बिल्कुल चुप रहेंगे और न ही कुछ छापेंगे.

बाकी के नामांकित चिट्ठाकारों के तो घोषणापत्र तक नहीं आये हैं बाकि तो भगवान मालिक है कि उनका क्या होगा. कहीं लड्डू तो लुटाये नहीं जा रहे कि मुँह बाये खडे रहो, एक आध तो अपने आप आकर गिर जायेगा और जिसकी गरज हो वो खुद आकर इन्हें वोट दे. अब सब तो हम नहीं हो जायेंगे, चलो हम तो अपना वोट इन्हें दे भी देंगे मगर क्या सभी यही करने लगें. क्या सबको अपना चेला समझ कर रखा है कि साहब आ रहे हैं, बिछकर सलाम करो. क्यूँ? अरे बाबू, यही जनता है, इंदिरा गाँधी तक को धूल चटवा चुकी है, तो आप क्या!! और वो भी राजनारायण जैसों के लिये तो हम तो कुछ बेहतर ही हैं.

खैर, हमें तो चुप ही रहना है, बिल्कुल चुप, कुछ भी न तो कहेंगे और न ही छापेंगे और उस पर से घोषणापत्र- वो तो बिल्कुल नहीं. जबकि इनको जीतना था तो घोषणा पत्र में छापते कि:

१.हम चिट्ठाकारों को हिन्दी की अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध करायेंगे, भले ही वो उपलब्ध हो तब भी फिर से करायेंगे.

२.टिप्पणी के लाँग इन द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगवायेंगे ताकि कोई टिप्पणी रुपी बम लेकर किसी की पोस्ट में न घुसे.

३.परिचर्चा जैसे पवित्र स्थलों पर जूते पहन कर जाने की मनाही करवायेंगे ताकि इनका गलत इस्तेमाल रुक सके.

४.नारद को चव्यनप्राश और ताकत के लिये रोज दो लिटर दूध, ताकि वो थक थक कर धीरे धीरे काम न करे, बल्कि हम जवानों और युवाओं की तरह सजग रहे.

आदि आदि.

हमें तो कुछ घोषणा करनी नहीं है, न ही कुछ कहना है. बिल्कुल चुप रहेंगे और कुछ छापेंगे भी नहीं. हमारा तो सबसे प्रेम भाव है, हम चाहते हैं, सब जीतें और हमारी शुभकामनायें सबके साथ हैं. एक बार टिप्पणियों के सिवाय यहां बस यह कहना चाहता हूँ कि इन सभी उम्मीदवारों को यदि यह लगे कि कैसे युगपुरुष के दर्शन हो गये जो खुद भी रेस में होकर हमारे जीतने की उम्मीद और अभिलाषा कर रहा है और शुभकामनायें देता घूम रहा है और इस तरह मिली तहे दिली शुभकामनाओं को पाकर अगर आपका दिल भर आया हो, आँखें नम सी लगें या गला रुँध जाये, तो चुनाव से नाम वापस ले लेना. मन हल्का लगेगा. हमें बुरा नहीं लगेगा, प्रेम भाव जो है.

हम तो कुछ नहीं कहेंगे, बिल्कुल चुप रहेंगे और न ही कुछ छापेंगे.


टीप:
कृप्या कोई अन्यथा न ले, यह सिर्फ़ मौज मजे के लिये पोस्ट है और साथ ही जीत सुनिश्चित करने को. किसी को ठेस पहुँचाने को नहीं और न ही दिल दुखाने को. सभी से तो प्रेम भाव है और बाकि तो हम चुप हईये हैं!!! :) Indli - Hindi News, Blogs, Links

15 टिप्‍पणियां:

जगदीश भाटिया ने कहा…

वाह वाह, क्या लिखा है, मजा आ गया,,,,,हंसते हंसते पेट मे बल पड़ गये. :D

Laxmi N. Gupta ने कहा…

हमारा वोट आपके लिये है लेकिन हमें तो यह भी नहीं पता कि डालना कहाँ है।

Neeraj Rohilla ने कहा…

समीरजी,
एक ही पोस्ट में सभी दिग्गजों को चित कर दिया,
चिट्ठाकारी का ये नमूना आपकी अत्यन्त दूरदर्शिता दशाता है|

वैसे आप लोगों के घोषणापत्रों से विचलित न हों,
याद रखें, जनता को उसके मताधिकार का प्रयोग करना भलीभांति आता है|

आम जनता का ध्येयवाक्य है,

सुनों सबकी, करो अपने मन की,

Neeraj Rohilla ने कहा…

समीरजी,
एक ही पोस्ट में सभी दिग्गजों को चित कर दिया,
चिट्ठाकारी का ये नमूना आपकी अत्यन्त दूरदर्शिता दशाता है|

वैसे आप लोगों के घोषणापत्रों से विचलित न हों,
याद रखें, जनता को उसके मताधिकार का प्रयोग करना भलीभांति आता है|

आम जनता का ध्येयवाक्य है,

सुनों सबकी, करो अपने मन की,

Pratyaksha ने कहा…

:-)))

संजय बेंगाणी ने कहा…

हँसा-हँसा कर लोटपोट कर दिया...
बहुत खुब.

Pankaj Bengani ने कहा…

मेरा तो गला भर आया, अब का करूं. धत नाम वापस ले ले वो मुआ मरद क्या?

हम तो लडेंगे लालाजी, लेकिन हमरा परचा खारीज हुई जाएगा तो हमरी पार्टी आपको पुरा सशर्त समर्थन देगी। :) अन्यथा ना लें, ईस्माइली ठोक दी है।

mahashakti ने कहा…

आप पर तो धमकियों का भी असर नही हो रहा है। प्रचार पर प्रचार किये जा रहे है। अगर किसी को बताया कि ठाकुर धमकी दे रहा है तो ठाकुर से बुरा कोई नही होगा।
यह बताना तो जरूरी नही है कि अन्‍यथा मत लिजियेगा।
क्‍या :) लगाना भी जरूरी है।

अभिनव ने कहा…

वाह समीर भाई साहब, ब्लाग जगत में चुनाव की गहमा गहमी देख कर अच्छा लग रहा है। लगै नहीं रहा है कि यूपी से दूर कहीं बैठे हैं। तनिक ई तो बतावा कि वोट डालना कहाँ है। हम अभी सोच रहे हैं कि किसे वोट दें बहुत लोग बढ़िया बढ़िया लिख रहे हैं। रचनाकार से सबसे अधिक प्रिंट आउट फायर किए गए हैं, पता नहीं रवि भाई चुनाव लड़ रहे हैं या नहीं। अपने बड़कऊ शुकुल भी ग़जब ढ़ाते रहते हैं कभी अपनी सायकिल के द्वारा तो कभी व्यंग्यों के द्वारा, रमचरितमानस का तो हम कई बार यहाँ आयोजन कर लिए वर्डप्रेस के चक्कर में (कभी फोटो अपलोड करते हैं सभी भक्तजनों की)। बेंगाणी बन्धू भी अच्छा लिख रहे हैं। अरे हां इधर अपने अतुल अरोड़ा जी के बचपन के मित्र प्रशांत से भेंट हुई यहाँ सिएटल में, उनको पढ़े भी बहुत दिन हो गए। और कवियन का क्या कही राकेश जी तो हमरी ओर से आल रेडी सबसे बढ़िया कवि की उपाधि लइ चुके हैं। आपऊ कम नहीं हो, ऐसा छाए हो धरती पर कि सबका दूसरे ग्रहों की सैर करवा के ही दम लेते हो। खैर तो मुद्दा ये है कि हम क्या करें, वोट किसे दें। कोई है आपकी नज़र में।

गिरिराज जोशी ने कहा…

कुछ विचारणीय प्रश्न :-

1. क्या ऐसे व्यक्ति को चुनाव में जितवाना जायज होगा जो मंच पर खड़े होकर भी गुंगा बना रहें?

2. क्या जो व्यक्ति अपने चिट्ठे पर भी छापने से कतराता है वो चुनाव जितने के लायक है?

3. क्या जो मात्र प्रेम-भाव के चलते असभ्य और अमानविय हरकते करने वालों का साथ दें वो कभी अच्छा नेता सिद्ध हो सकेगा?

4. खुले आम विपक्ष वालों के साथ सांठ-गांठ की जा रही है, क्या चिट्ठाकारों को बेवकुफ साबित करने की यह कोशिश माफि के लायक है?

5. जो व्यक्ति अपने व्यक्तिगत्त चिट्ठे पर किसी का नाम नहीं ले सकता वो चिट्ठा जगत में अपराधों को रोक पाएगा?

6. क्या एक कमजोर और असहासी व्यक्ति को चुनाव जितवाना मुर्खता नहीं होगी?


7. मैं मानता हूँ कि गुरूदेव बहुत काबिल है और उनकी पोस्ट सर्वप्रिय होती है, मगर क्या एक काबिलियत के पिछे कमजोर शासक बनाना मानसिक दिवालियापन नहीं होगा?


चुनाव वही जिते जो चिट्ठाजगत के लिए हमेशा तत्पर रहता हो, नवयुवक हो और सर्वगुण सम्पन्न हो (नोट किया जाये).

जो बिना किसी भय के कविताएँ, हास्य, व्यंग्य, हाइकु, ग़ज़ल, व्य़ंज़ल, कुण्डलियाँ, मुंडलियाँ, क्षणिकाएँ, कहानी, आलेख सहित सभी विधाओं में हाथ डाल दें और पूर्ण चेष्ठा और लगन से उन्हें सिखने का भी जज्बा दिखाये उससे बहतर नायक कोई हो ही नहीं सकता.

जो अपनी दबंग अवाज के साथ आपके चिट्ठे पर आकर भी इतनी लम्बी टिप्पणी करने का साहस रखता हो, उससे अधिक काबिल नायक कोई हो ही नहीं सकता.

:) स्माइली नोट करें

mahashakti ने कहा…

गिरिराज जी नोट करले, समीर जी व किसी अन्‍य चिठ्ठे पर सबसे लम्‍बी टिप्‍पणी रिकार्ड मेरे नाम ही है।

अनूप शुक्ला ने कहा…

बढ़िया ! चुनाव जीतने की शुभकामनायें!

श्रीश । ई-पंडित ने कहा…

भाई या बात तो कसूती झूठ सै हामने दारु की बाद कद करी, दारु का तो नाम बी कोनी लिया, यकीन ना हो तो चिट्ठे पा आकै देख ल्यो अर आपणी बात साबित करो।

अर जातिवाद वाली बात न्यू कर क केंदे होगें अक दो-तीन जज भी पंडित सैं, भाई मेरे घोषणा पतर छापणे तक तो जजों का नाम बी कोनी आया था।

रेगी बात सुन्दरियों आली तो भाई मान्ने आपणे गुप्त सूतरां ते पता लग्या सै अक एक उड़नतश्तरी ओड़ै (सुन्दरियों के कक्ष मा) रोज ए फिरया करें सै। :) (स्माईली नोट कर लियो जी)

niraj sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर ! आपका लेख मनोरजंक होने के साथ ही विचारोत्तेजक भी लगा। समीर जी, आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ । आपके सहयोग की अपेक्षा रहेगी ।

niraj sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर ! आपका लेख मनोरजंक होने के साथ ही विचारोत्तेजक भी लगा। समीर जी, आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ । आपके सहयोग की अपेक्षा रहेगी ।