रविवार, मई 31, 2009

कुछ निवेदन और पहेली का जबाब एवं विजेता

जब कालेज में पढ़ा करते थे, अमिताभ बच्चन टॉप पर थे. जो फिल्म आये, हिट होती थी. हॉल में नई फिल्म में सुबह ६ बजे से शो शुरु हो जाते थे और रात १२ बजे तक चलते रहते थे.

जमाने में बहुत कुछ नहीं बदला, उनमें से एक बात यह भी नहीं बदली कि तब भी टिकिट के ब्लैकिये तबीयत से पुलिस की मिलिभगत में कारोबार करते थे और आज भी. अमिताभ की किसी भी नई फिल्म के शुरुवाती हफ्ते उनके लिए धन्धे का व्यस्त समय होते थे.

अब का पता नहीं मगर तब अमिताभ का ऐसा क्रेज होता था कि कालेज के आधे से ज्यादा लड़के, जिसमें हम खुद भी शामिल थे, कान को ढके बाल के साथ उल्टा सेवन वाली कलम रखा करते थे. फिल्म खत्म होने पर यही वीर दोनों हाथ पाकेट में डाले सर झुकाये टहलते हुए निकलते थे मानो खुद ही अमिताभ हों. हर चेहरे पर उसी के समान गुस्सा और एक विद्रोह का भाव.

हमारे साथ पढ़ते थे नीरज शर्मा. एक मात्र योग्यता के आधार पर कि वह ६ फुट से कुछ ज्यादा थे, वो अपने आप को अमिताभ बच्चन समझते थे. वही स्टाईल बिल्कुल कॉपी. शायद शीशा देखने के आदी न रहे होंगे तो मुगालते में पलते रहे.

हम दोस्तों का सच्चा झूठा प्रोत्साहन तो साथ रहता ही था बाफर्ज, सब उसे अमित कह कर ही पुकारते थे और वह दिन भी आ गया, जब वो एक ऑर्केस्ट्रा के साथ अमिताभ बच्चन की नकल करते मंच पर नज़र आने लगे. मंच की चकाचौंध, स्टाईल ,चश्मा, बाल आदि में वो वाकई अमिताभ सा ही लगता था दर्शक दीर्घा से.

देखा, प्रोत्साहन का नतीजा!!


यह सूत्र जीवन हर क्षेत्र में लागू होता है. लेखक या कवि लिख रहा है, माना कि नया है और बहुत अच्छा न भी लिख रहा हो मगर एक मुगालते में तो है ही कि वो लेखक है या कवि है. ६ फुट से ज्यादा होने की तरह एकाध क्वालिटी तो है ही तभी तो कम्प्यूटर पर लिख पा रहा है ब्लॉग खोल कर. उसे भी लाइम लाईट में लाओ भाई.

जरुरत है बस तुम्हारे प्रोत्साहन की और तुम हो कि अपनी लेखनी पर फूले पिचके मूँह फुलाये बैठे हो. कुछ बोलते ही नहीं. कभी अपने शुरुवाती लेखन को भी देखना और फिर आज का. क्या शुरु से ही ऐसा ही लिख रहे हो. फिर?? वो भी नया आया है लेखन में जैसे कभी तुम आये थे. बस, दरकार है उसे तुम्हारे प्रोत्साहन की.

भय मत खाओ कि वो तुम्हें पीछे छोड़ कर आगे निकल जायेगा.
सो तो अपने इस दंभ के तले यूँ भी छूट जाओगे. विश्वास करो प्रोत्साहन देने से तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा मगर उसका बहुत कुछ बन जायेगा.

बस, आज इतना ही. किसी की ईमेल आई है जिसने ब्लॉग जगत में आई टिप्पणियों की मंदी और पुराने लिख्खाड़ों द्वारा नये लोगों के ब्लॉग पर टिप्पणी न देने पर चिन्ता और मायूसी जाहिर की गई है. बात उनकी सही लगी, तो निवेदन दर्ज कर दिया.


अब, पिछली पोस्ट पर पूछी गई पहेली:

पहली बात तो उस आलेख का उदगम स्थल था निशान्त मिश्र जी का ब्लॉग हिन्दी जेन पर २९ मई को पूछी गई पहेली पर आई बेनामी जी की टिप्पणी.

पहेली के चित्र:



का सही जबाब:

ऊपर: श्री ज्ञान दत्त पांडे

चश्मा: श्री अजीत वडनेकर

नीचे: डॉ अनुराग आर्या



विजेता रहे:

प्रथम: ताऊ रामपुरिया



द्वितीय: सैयद

तीसरे नम्बर पर: संजय तिवारी ’संजू’

चौथे: श्री ज्ञान दत्त पांडे जी


विजेताओं को बधाई.


सभी प्रतिभागियों का बहुत आभार और बधाई.


चलते चलते:

तीन चार पोस्ट पहले कविता पर एक टिप्पणी आई:

’सहनीय रचना’

हम चकित. सब इतनी तारीफ मचाये हैं और ये भाई जी कह रहे हैं ’सहनीय रचना’. रात भर जागे रहे कि ये क्या हुआ. फिर एकाएक सुबह के सूरज के साथ दिमाग खुला कि टंकण त्रुटि के चलते ’सराहनीय रचना’ की जगह ’सहनीय रचना’ लिख गया होगा. बस, पूरे उत्साह से टिप्पणीकर्ता को ईमेल लिखी गई और निवेदन किया गया कि शायद टंकण त्रुटि रह गई है और प्रोत्साहन की आदत के चलते जोड़ दिया कि अक्सर जल्दबाजी में ऐसा हो जाता है. जबाब आने में जरा भी समय नहीं लगा. लिखा कि ’भाई उड़न जी, आपसे सहमत हूँ कि जल्दबाजी में ऐसा हो जाना संभव है किन्तु यह टिप्पणी तो जल्दबाजी में नहीं लिखी है. दरअसल मैं वही कहना चाह रहा था जो आप पढ़ रहे हैं.
अब??

अब क्या-रिजेक्ट-मॉडरेशन का फायदा उठा लिया. इसीलिए कहता हूँ कि मॉडरेशन लगाओ. यह तो अच्छी सलाह थी जिसने मुझे अपनी रचनाओं पर पुनर्विचार का मौका दिया, बस जरा दंभ आड़े आ गया. इन्सान हूँ और गलत फैसले लेना इन्सानी स्वभाव, मैं कैसे अछूता रह सकता हूँ तो हो गया गलत फैसला रिजेक्ट करने का. मगर अक्सर लोग उट पटांग बातें लिख कर भाग जाते हैं, यहाँ तक की गाली गलोज भी. उसे तो आप कंट्रोल कर ही सकते हो मॉडरेशन से बात बढ़ाने की बजाये. Indli - Hindi News, Blogs, Links

69 टिप्‍पणियां:

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

आप केलिफोर्निया पहुँचे या नहीँ ? उडन तश्तरी भ्रमण के किस्से सचित्र जल्द छापियेगा -
और यात्रा सुखद हो !
स्नेह सहित,
- लावण्या

अबयज़ ख़ान ने कहा…

बहुत शुक्रिया सर, बिल्कुल सही फ़रमाया आपने, ये वही रामपुर है, जहां से जया प्रदा चुनाव लड़ी थीं, और आज़म खान की वजह से मीडिया में रामपुर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

अबयज़ ख़ान ने कहा…

बहुत शुक्रिया सर, बिल्कुल सही फ़रमाया आपने, ये वही रामपुर है, जहां से जया प्रदा चुनाव लड़ी थीं, और आज़म खान की वजह से मीडिया में रामपुर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

चाचा

पटक पटक कर मारते भी हो और कहते हो आहा!! मत करना..मैं हूँ न मलहम लगाने को. बहुत ऊँची चीज हो आप. :) मजा आ गया. मैं भी मॉडरेशन लगा लूँ क्या? बस, एक बार गाली पड़ी है अभी तो.

Udan Tashtari ने कहा…

संजू,

अभी थोड़ी और गाली खा लो. तबीयत हरी हो जाये-तब लगा लेना मॉडरेशन. हा हा!!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सही सलाह दी गई है. यात्रा की शुभकामनाएं.

उडनतश्तरी पहेली के सभी विजेताओं को बहुत बधाई.

और हमको विशेष बधाई.:)

रामराम.

SWAPN ने कहा…

lal sahab, aapki donon baaten bilkul durust lagin. sahi salah.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

हर ब्लागर को कुछ समय अन्य ब्लाग पढ़ने को लगाना चाहिए और जिसे पढ़ें टिप्पणी जरूर करनी चाहिए।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर ने कहा…

प्रोत्साहन तो जरूरी है ....आखिर आप उसके सबसे बड़े नमूने है हम सब के सामने !!
वैसे ताऊ और महताऊ का बढिया गठजोड़ ?
बहुत खूब !!!!!!
बधाई ताऊ रामपुरिया जी को भी!!

हिन्दी चिट्ठाकारों का आर्थिक सर्वेक्षण : परिणामो पर एक नजर

amit ने कहा…

अब ब्लॉगस्पॉट में यही तो समस्या है कि या तो टिप्पणी पास करेंगे या फेल, और कोई विकल्प नहीं है! अपन तो ओपन पॉलिसी रखे हुए हैं, गाली गलौच और पत्त्थर मारने वाली टिप्पणियाँ भी प्रकाशित की हैं, एक मौका सभी को दिया जाता है, उस मौके का कोई कैसे इस्तेमाल करता है यह उसके अगले मौके को प्रभावित करता है, यदि कोई अधिक बद्‌तमीज़ हो जाए तो फिर उसको पुनः मौका नहीं दिया जाता! :)

गरिमा ने कहा…

टिप्पणी देने के मामले मे क्या कहूँ, अभी खूद को ही आपके दोस्त अमित की तरह अमिताभ बच्चन मान कर चल रही, कभी ना कभी बन भी जाऊँगी। वैसे मै समझती हूँ की टिप्पणी देना और लेना दोनो ही सुखद है, इसके बावजुद आलसपन के कारण रह जाता है, मसलन कोई पोस्ट पढ़ी और सोचा अभी आकर टिप्पणी टिकाती हूँ और वो अभी आते आते देर हो जाती है, पर कोशिश करूँगी कि इस आदत से छुटकारा पाया जाये। आखिर मेरे जैसे कई अमित इंतजार कर रहे होंगे और जो अमिताभ बच्चन हैं वो भी कर रहे होंगे :)

विजेताओं को हार्दिक और मीठी बधाई।

Pyaasa Sajal ने कहा…

Sir..jis tarah hindi blogging ka vistaar ho raha hai usse ye to nahi lagta ki bade bade diggajo ke protsaahan ke bagair ye sambhav tha...balki mera anubhav alag hi raha hai ispe,hindi blogging to aisa parivaar hai jisme aa jaao to fir itna pata nahi chalta kaun bada kaun chhota...haan apnapan zaroor hota hai

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"किसी की ईमेल आई है जिसने ब्लॉग जगत में आई टिप्पणियों की मंदी और पुराने लिख्खाड़ों द्वारा नये लोगों के ब्लॉग पर टिप्पणी न देने पर चिन्ता और मायूसी जाहिर की गई है. बात उनकी सही लगी, तो निवेदन दर्ज कर दिया."

निवेदन अच्छा लगा।
ताऊ रामपुरिया,
सैयद,
संजय तिवारी ’संजू’
और
ज्ञान दत्त पांडे जी
को बधाई।

Nirmla Kapila ने कहा…

sameer jee aapki in paheliyon ke dar se hame aaj ek post likhni padee kyonki aap har comment ko sval bana kar paheli ke roop me paish kar dete hain aap cailifornia jaa rahe hai bahut khushi hui mai santa clara caunty (california )me reh kar aayee hoon to bachon ki yaad aa gayee yaatraa sukhad ho abhaar

अल्पना वर्मा ने कहा…

'उड़न 'पहेली जीतने ले किये ताऊ जी को बहुत बहुत बधाई..
पोस्ट में दिए गए सुझाव बढ़िया हैं..

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सही सलाह सही बात .ताऊ जी को बधाई बाकी सब विजेताओं को भी बधाई ..

नरेश सिह राठौङ ने कहा…

ज्यादा टिप्पणियां बड़े लेखक होने की पहचान नही है । ज्यादा विजिटर पाने के लिये अच्छा लेखक होना जरूरी है, आपकी तरह ।

Ravi Srivastava ने कहा…

ब्लॉग की दुनिया ने प्रशंसनीय एवं सराहनीय प्रयास हैं आपके...ऐसे ही लगे रहें...

मीत ने कहा…

सॉरी सर देरी से आया मेरा जवाब है....
ऊपर: श्री ज्ञान दत्त पांडे

चश्मा: श्री अजीत वडनेकर

नीचे: डॉ अनुराग आर्या
मीत

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप सच कहते हैं जब नए नए आये थे इस क्षेत्र में तब टिपण्णी की और निगाहें यूँ रहती थीं जैसे चकोर की चाँद की और...आप प्रोहत्साहन देने में तब भी अग्रणी रहे और आज भी हैं....सच है हमें कलियों को फूल बनने के लिए उचित खाद डालनी ही चाहिए...नए पौधे अगर ना उगे तो बाद में सिर्फ ठूंठ ही बच जायेंगे...
नीरज

संजय बेंगाणी ने कहा…

हम भी आपको प्रात्साहित करने के लिए टिप्पणी करते है :)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्रोत्साहन तो बहुत जरूरी है समीर भाई................ और आपको तो सब ब्लोगेर्स को प्रोत्साहित करना चाहिए .... वरिष्ट और बुजुर्ग ब्लोगेर्स जो हो .................. उम्र से नहीं भाई........ बुरा न मानो यार

रंजन ने कहा…

धत चशमा नहीं पहचान पाये.. खुद नहीं लगाया था न...

सही कहा आपने प्रोत्साहन से बहुत कुछ पाया जा सकता है.. दो मीठे बोल प्रोत्साहन के.... बंदा दुगने उत्साह से काम करता है..

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

यात्रा मंगलमय हो और ताऊ जी को हमारी भी बधाई .

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

स(रा)हनीय पहेली! अबकी तो मेरी पत्नीजी ने हल करदी।
आगे कहीं क(रा)हनीय न हो! :D

रंजना ने कहा…

Arrrreee.....bas ek se chook gaye....
Koi baat nahi teen chehre me se do pahchaan liya,aadha number to le hi sakte hain....

Bahut bahut majedaar rahi pratiyogita aur yah post.Aabhar.

●๋• सैयद | Syed ●๋• ने कहा…

अरे .... ये ऊपर हमारा ही नाम है क्या ??

अभिषेक ओझा ने कहा…

नीरज अंकल की एक फोटू भी चेप देते :)
सहनीय सॉरी सराहनीय पोस्ट :P वाह जी वाह !

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

असहनीय टिप्पणी को रिजेक्ट भले ही कर दिया आपने पर यहाँ उसका जिक्र बहुत कुछ स्पष्ट कर देता है मंतव्य को ।
धन्यवाद ।

परमजीत बाली ने कहा…

पहेली बूझनें मे सदा नाकामयाब रहते हैं। अत: चुप रहते हैं।
वैसे टकंण त्रुटी के कारण हम भी कई बार गलत लिख जाते हैं।नजर पड़्ने पर सुधार कर लेते हैं ।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया पहेली लगी आज देखा . चित्र में बाल ज्ञानदत्त जी पांडे जी के और चश्मा अजीत वडनेरकर जी का चश्मा और ओठ डाक्टर अनुराग जी के . बढ़िया सम्मिश्रित फोटो लगी . अरे अब तो आप भी मुहावरा बुझवाने लगे. अच्छा लगा. विजेताओं को बहुत बहुत बधाई.

ajay kumar jha ने कहा…

lijiye jawaab to hamara bhee sahi hee niklaa teeno hee blogger nikle ....aur haan baatein bahut pate kee kahi hain...dekhien is naseehat kaa faaydaa kitnaa hota hai...dekhiye na log insaano kee baat to sunte nahin shaayad alien jee ke kehne par.......

डॉ .अनुराग ने कहा…

जे बात
हमारा फोटू इस्तेमाल हुआ ओर हमको खबर नहीं.....खैर बन्दा आपका ही है .जैसे चाहे इस्तेमाल करे......पुराणी पोस्ट भी पढ़ी ....ओर लुत्फ़ भी ले लिया ....इन दिनों आप फॉर्म में नजर आ रहे है कसम से ......एक ठो कला टीका लगवा लीजिये

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

धन्यवाद 'उड़न' जी;)
अपनी पोस्ट में मेरी लिंक देने के कारण नाचीज़ के ब्लौग पर भी कुछ आमद दर्ज हो गई:)

Shastri ने कहा…

वाह समीर जी वाह!! तो आजकल आप काटपीट और जोडजाड में लगे हैं. अब तो डर के चलना पडेगा कि कब किसी के सर पर वानर, कुकर आदि के शीर्ष नजर आने लगेंगे!!

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

ये इच्च आनसर अपुन दिया था बीडू अपुन को भी संजू भैया के जन्मदिन की पूर्व कुच्छ रिटन गिफ्ट मिल जाती अरे का बताऊँ गुरु इधर थोड़ी हवा चली कि विजय तिवारी किसलय जी विवेक रंजन जी के पिपात बाले लेट गुल कर देते हैं. उधर अपन ने उत्तर लिखा ही था कि लाईट गम . लाईट का रास्ता देख रए थे कि सुलभा जी ने डांटते हुए कहा कि "कम्प्यूटर का वायरस कहने लगेंगे बच्चे '' बस अपन ने टेबल छोड़ी और देखो हार गए न .
समीर भाई नाव ठीक ठाक चल रइ है
बाकी उस काम का क्या हुआ बताना जी

अजित वडनेरकर ने कहा…

बहुत खूब...
आपका यह सृजन भाया...
बेनामी तो कतई नहीं सुहाते
नाम तो रोज़ हमसे एक नया
पूछ लो, पर नाम तो रखो ...

"अर्श" ने कहा…

bahot bahot badhaayee sabhi vijetawo ko .... apkaa bhi bahot bahot aabhaar...




arsh

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

सटीक उड़न-चिंतन.... वाह.. साधुवाद संभालें

सतीश पंचम ने कहा…

यहाँ मुंबई में लोकल ट्रेन में एक झगडा देखा था सीट को या धक्का मुक्की को लेकर पता नहीं किस बात पर झगडा चल रहा था लेकिन नकी बातचीत से लग रहा था कि वो लोग एक ही ग्रुप के हैं और शायद रोज का आना जाना है।

उस झगडे की एक लाईन मुझे अच्छी तरह याद है - साला...इलाहाबाद से है तो अपने आप को अमिताभ बच्चन समझता है :) ये लाईनें ऐसी थी कि अब कभी भी लोकल ट्रेन में कोई झगडा आदि दिख जाता है तो बरबस वो इलाहाबाद का नाम लेकर हुआ झगडा याद आ जाता है।

बवाल ने कहा…

हा हा आखिर नहीं माने बड्डे पहना ही दिया टोपा। बहुत ही बेहतरीन । मान गए गुरू। कहाँ कहाँ तक सोच लेते हो हाँ नहीं तो। हा हा।
आपके आदेशानुसार पोस्ट लिख दी है आज लाल और बवाल पर शीघ्र मिलता हूँ । हरिओम।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

सच कहा आपने किसी की
थोड़ी भी स्टाइल मिलती हो,
तो खुद को वैसा ही समझने लगता है,

वैसे कभी कभी इन बातों से आदमी अपने अंदर
एक नया पन भी महसूस करता है,
जो लोग उसी नये पन को,
अंदाज बनाने पर तूल जाते है,
उनके विकास के कई रास्ते भी खुल जाते है.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

वाह पहेली मे क्या चित्र जोड़ा आपने,
बहुत बहुत अच्छा,
आप भी अब पहेलियाँ बुझाने और सुलझाने
की कतार आ जाइए,
और ब्लॉग जगत मे लाल बूझक्कड़ बन कर छा जाइए.

Mired Mirage ने कहा…

आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ। जब मैं यहाँ पहले पहल आई थी तो आपके व आप जैसे बहुत से मित्रों के प्रोत्साहन के बल पर ही। लेखन सुधरा य नहीं परन्तु सहनीय तो बना ही हुआ है।
वैसे मैंने आपके obselete होने पर एक चुटकी लेता हुआ लेख लिखा था किन्तु पोस्ट करने का साहस नहीं जुटा पाई। गिने चुने प्रोत्साहित करने वालों को भी नाराज कर अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने के लिए साहस या कहिए दुस्साहस चाहिए न।
घुघूती बासूती

Anil Pusadkar ने कहा…

अजीत का चश्मा धोखा दे गया।

poemsnpuja ने कहा…

hamein to aapki aur taau ki milibhagat lag rahi hai...unki paheli me aap first aaye aur aapki paheli me taau. ham soch rahe hain ek commitee bitha di jaaye :D

taau ko badhai :)

RAJ SINH ने कहा…

भाई समीर लाल !
हम तो आपको अपना समकालीन समझ बैठे थे यार . आप तो काफी जूनियर निकले .

बाकी सब आपके ज़माने जैसा था पर हमारा जमाना हमने राजेन्द्र कुमार के ' मेरे महबूब तुझे मेरी मुहब्बत की कसम ' से शुरू कर राजेश खन्ना के ' मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू " तक जारी रखा .बताना जरूरी नहीं की हममे से भी कईयों ने जो लगा जा सकता था , लगे न लगे , समझने में आप की ही तरह , कोई कोताही नहीं की .लगते रहे .

अब उसके आगे किस्से तो होते ही रहते हैं .होते रहे .
उसके बाद वही हुआ जो अक्सर होता है . सपनों की रानी नौकरी ( उम्मीद है की आज के लोग मजाक में न लेंगे ) और फिर कोई न कोई सपनों की रानी ने परमानेंट होना ही था . हुआ .

( लेकिन आज भी करीना कैटरीना हमारे लिए बरक़रार हैं और हम आज भी , आप ही की तरह , स्वयं घोशीत तरीके से , स्वयं सेवी भाव से ,स्वयं पर थोपे उत्तरदायित्व भाव से , उचित खोज खबर ले ,
बाकी सब का भी ज्ञानवर्धन करने का सामाजिक कर्तव्य अक्सर निभाते ही रहते हैं .) :)

RAJ SINH ने कहा…

अरे हे साम्भा !

यी बड़ी नाइंसाफी है !
बाकी सब नैन नक्शा चाहे जिसके जैसा लग रहा हो .हो भी सकता है . हम कुछ नहीं जानते उन सभन को .
मगर यी चश्मा ...........
चश्मा तो मेरा है !
मेरा !

अब पता नहीं क्या ठीक करने की जरूरत है .

पहेल्ली ?

की उसका जबाब ?

या दून्नव ?

या पहेली बाज़ ??

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

पहेली के सभी विजेताओं को बहुत बधाई.
साथ में हमको भी हमने भी जवाब दिया था और ठीक भी था

संजय सिंह ने कहा…

आपने ठीक लिखा हैं - हम नए ब्लॉगर को आपकी बहुत जरुरत है. आपके प्रोत्साहन से एक नया मनोबल मिलता है.

बहुत अच्छा - धन्यवाद

shama ने कहा…

Wah..Aaj qismat behtar hai...meree tippanee pehele 50 ke bheetar hai !

Warna aksar, 100 ke baad hee mai pohonchtee hun, aur chupkese bheegee billikee tarah bhaag jaatee hun!

Aapki tippanee ke liye( Bole too kaunsi bolee pe), tahe dilse shukr guzaar hun!

Aur aapkaa sawal...jiske baareme aapne poochha," wo aap bolna seekhi ya nahee", afsos,ki, mujhe use kaamse hata dena pada...mujhe nahee pata ki, aapne "Duvidha" ke un kadiyon ko padha yaa nahee...jahan, maine is mahilaki chand kartooton ke bareme likha...pata nahee tha, ki, zindageeme aisabhi hoga..!Khair...jeete, jeete jo anek seekhen miltee hain, unmese yebhi ek...waise, uski beteeke higher education ke kharcheka wada mai aajbhi nibha rahi hun...uski betee ki kya khata?

Kshama karen, aapke lekhan pe tippanee nahee ki...sach to ye hai, ki, aap jaise diggaj ke blog pe aake meree bolti band ho jaatee hai!

shama ने कहा…

Mai ek pratiyogita rakhna chah rahee thee...apnee kahanee" Kisee Rahpar", iska ant karneke any kya paryaay ho sakte hain?

Ye maine ek Marathi ezine pe rakhi thi...jo NY se prakashit hota hai..

Kya aapke blog dwara ise publicity mil sakegi? Mera aur koyi hetu nahee...ek rachnatmak chalna ke tehet kar rahee hun!
Us masik ke liye to maine apnee Marathi me prakashit kitaben, puraskar ki taurpe pesh kee theen...lekin Hindi me to kewal ek kitab prakashit hai!

Mai jawab kee ummeed rakh sakti hun? Either way, I don't mind...! Jaanti hun, aap behad wyast rehte hain..phirbhi gustaqee kar rahee hun!
snehadar sahit
shama

महावीर ने कहा…

उड़नतश्तरी पहेली के सभी विजेताओं को और ताऊ को बहुत बहुत बधायी. फोटोज में काटपीट और जोड़-तोड़ में मजा आ गया.
टंकण में कभी कभी गलती हो ही जाती है. आप जानते ही हैं कि जय शंकर प्रसाद जी
की 'कामायनी' में एक पंक्ति थी:
'नारी! तुम केवल श्रद्धा हो'
उसकी जगह गलती से लिखा गया:
'नारी! तुम केवल अद्धा हो'
मॉडरेशन के बारे में आपकी सलाह ठीक ही लगती है.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

आप तो प्रोत्साहन के मास्टर हैं आपसे सीखने को बहुत कुछ है । पर लेखक कवि को थोडा मोटी चमडी वाला भी होना पडता है, सहनीय या सराहनीय दोनो ही प्रशंसनीय हैं ।

woyaadein ने कहा…

बेशकीमती सलाह.......पहेली के चारों विजेताओं को हार्दिक शुभकामनाएं.......
वैसे तो हर काम में, परन्तु विशेषकर लेखन में प्रोत्साहन की अत्यंत आवश्यकता होती है, ऐसा मेरा भी मानना है. स्वयं लिखने के साथ-साथ औरों को पढ़ना भी ज़रूरी है. साफ़ शब्दों में कहा जाए तो दुनिया की रीत है, अगर हम किसी का लिखा नहीं पढ़ सकते तो भला कोई हमारा लिखा क्यूँ पढेगा??

साभार
हमसफ़र यादों का.......

Laxmi N. Gupta ने कहा…

प्रोत्साहन का बहुत बड़ा हाथ है सफलता में। इसमें तो दो रायें हो ही नहीं सकतीं। "सहनीय" शब्द अच्छा लगा भले ही टंकण त्रुटि से आया हो। इसका मतलब है ऐसी रचना जो बहुत उत्तम तो नहीं किन्तु सही जा सकती है। जिसे अंग्रेज़ी में "Tolerable" कहेंगे।

Hapi ने कहा…

hello... hapi blogging... have a nice day! just visiting here....

File ने कहा…

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KK Yadav ने कहा…

आपने इतना सुन्दर लिखा कि बार-बार पढने को जी चाहे...उम्दा प्रस्तुति.यूँ ही आपको ब्लोगिंग का बादशाह नहीं कहा जाता.
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सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा…

टिप्‍पणियों का अकाल। कहां है मैं जब टिप्‍पणी लिख रहा हूं तब तक 58 टिप्‍पणियां अप्रूवल पा चुकी हैं। हो सकता है दो चार पैंडिंग में पड़ी हों। और एक मेरी भी। इतनी टिप्‍पणियां पर्याप्‍त नहीं है ?


सार्थक हो तो दो टिप्‍पणियां ही बहुत है।


मेरे ब्‍लॉग पर आइएगा वाली टिप्‍पणियों से तो अच्‍छा है कि कम आए। मैं खुद बहुत से स्‍थानों पर टिप्‍पणी करता हूं। और आपका प्रयास भी सराहनीय है (सहनीय नहीं कह रहा :)) लेकिन सहज भाव में लेखों का स्‍तर इस ऊंचाई पर पहुंच जाए जहां पाठक अपने आप हाथ चलाने लगे वही अच्‍छा है बजाय प्रोत्‍साहन से टिप्‍प्‍पणियां लिखे जाने के। कुछ लोगों को समय लग सकता है लेकिन जुनूनी लोग किसी चीज के लिए रुकेंगे नहीं, यकीन कीजिए। मैं अब भी अपनी बात पर कायम हूं कि टिप्‍पणी के लिए न तो आग्रह की आवश्‍यकता है न प्रयास की वे स्‍वत: आएंगी। लेख के अनुसार आएंगी।

एक दिन जब हिन्‍दी लेखकों और उपयोगकर्ताओं की संख्‍या इतनी अधिक हो जाएगी कि नया लेखक भी दमदार लेखक के जरिए सौ या दो सौ टिप्‍प्‍पणियां आसानी से पा लेगा। अब वह दिन अधिक दूर नहीं है। :)

दिलीप कवठेकर ने कहा…

ताऊ को बधाई !!

ओम आर्य ने कहा…

bahut badhiya

शोभना चौरे ने कहा…

shneey kha hai to sahn to krna hi pdega bhaiji ..
badhai

Harkirat Haqeer ने कहा…

ये अच्छी रही ....ताऊ के ब्लॉग पे आप गिनीज बुक में नाम लिखाने वाले हो और अब आपके ब्लॉग पे ताऊ ......कहीं कोई चक्कर वक्कर तो नहीं बिटिया रामप्यारी का.......??

sarwat m ने कहा…

भाई साहब, आप को पढ़ता रहा हूँ और किसी किशोर की मानिंद दूर से अपने एकतरफा प्यार का नजारा करके खुश होता रहा हूँ. हिम्मत ही नहीं पड़ती इतनी टिप्पणियों के बीच घुसने की. आपने इस पोस्ट में जितनी बातें रखी हैं उनकी सच्चाई से इंकार करने वाला काफिर ही कहलायेगा. मैं आज हिम्मत कर रहा हूँ वह भी शर्मिन्दगी के साथ, क्योंकि एक आप जो लगातार मुझ नाचीज़ को सराहते रहे और एक मैं जो अब तक शुक्रिये की एक लाइन तक नहीं भेज सका. भीड़ में आज घुस गया तो गया हूँ और झिझक टूट गयी है तो सिलसिला भी शरू है, बस एक ही खौफ है, पता नहीं आपकी निगाह पडेगी या नहीं.
एक माह की अनुपस्थिति के बाद वापस आया हूँ, बहुत समय तो नहीं है लेकिन ब्लॉग को वक्त देता रहूँगा और आपसे गुफ्तगू भी (अगर आपके पास वक्त होगा).
सर्वत जमाल

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

वाह वाह क्या लिखा है। वाकई स‌हनीय रचना :)

Pankaj Upadhyay ने कहा…

wasie udantastri ki photo sahee lagayee hai aapne..aur sahi kaha protsahan bahut jaroori hai..kabhi kabhi to mujhe lagta hai, ki log padhte jyda hai aur comments kam aate hain..lekin jaise mein hamesha hi bahut jaldi kisi bhi cheez se bore ho jata hoon, comments se bhi bore hoon..wasie ye bhi kah sakte hain ki 'angoor khatte hain' :)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

मज़ा आ गया इस सराहनीय रचना पर ;)