बुधवार, सितंबर 24, 2008

ब्लॉगर्स कैसे कैसे!!

ब्लॉगजगत अब इतनी विविधता से भर गया है और ब्लॉगर याने कि यहाँ की जनता इतना कुछ कर रही है कि क्या कहें. जब विचार आया कि चिट्ठाकारी पर चिट्ठाकार को जनता मानते हुआ कुछ गज़लनुमा आईटम लिखा जाये, तब सोचा कि एक गज़ल में साधारणतः ५ या ७ शेर होते हैं तो इतने में कैसे समायेगी ये मेरी इतनी बड़ी दुनिया. फिर दूसरा विचार आया कि जब मेरी अपनी दुनिया है तो जितना चाहो, पैर पसार लो..कोई बुरा थोड़े न मानेगा..तो शेरों की संख्या बढ़ गई..थोड़ी बहुत नहीं..३० पर जाकर भी रोकना पड़ी, वरना एक गज़ल नुमा चीज़ एक किताब माफिक लिखी जा सकती है. जितना ख्याल और अनुभव ने साथ दिया, उतना लिखा..बाकी आप जोड़ लिजिये...फ्री गज़ल है...क्या फरक पड़ता है जोड़ने घटाने में. (ध्यान दिया जाये कि जनता = ब्लॉगर)


जाने क्या लिख लाती जनता
उस पर यह इठलाती जनता

सुबह सुबह उठते ही पहले
अपनी पोस्ट चढा़ती जनता

टिपटिप टिपटिप जाने कैसे
दूजों पर टिपयाती जनता

जो भी इनकी पीठ खुजाये
उसकी पीठ खुजाती जनता

दिन भर फिर अपने चिट्ठे पर
टिप्पणी गिनने आती जनता

कुछ लोगों को छेड़छाड़ कर
टंकी पर चढ़वाती जनता

नर नारी में भेद बता कर
लोगों को भिड़वाती जनता

हिन्दु मुस्लिम बात चले जब
तेवर बहुत दिखाती जनता.

नये नये आते लोगों को
हिम्मत खूब दिलाती जनता

गाली खाने से बचने को
सम्पादन अपनाती जनता

भारी भरकम शब्दों के संग
साहित्यिक कहलाती जनता

लिखने को जब लाले पड़ते
गाने भी सुनवाती जनता.

गाना जिनको समझ न आये
फोटो ही दिखलाती जनता

सबसे अच्छा तुम लिखते हो
सबको यूँ भरमाती जनता.

मैं आया हूँ तुम भी आना
ऐसे ये बुलवाती जनता.

दुनिया भर के मातम लेकर
आँसू रोज बहाती जनता

मसला कितना भी पेचीदा
हल सबके सुझवाती जनता

भूखा उनको जो दिख जाये
दाल भात खिलवाती जनता

भूत विनाशक संग मे रखकर
भूतों को डरवाती जनता

मन के भाव कलम से लिखकर
लय में उनको गाती जनता

तारीफों के दो शब्दों को
गुटबाजी बतलाती जनता

खबर एक और दर्जन खबरी
कैसी यह मायावी जनता.

खाना कैसे आप बनायें
पाककला सिखलाती जनता

खुल कर जब कुछ कहना चाहे
अपना नाम छुपाती जनता

खुद का मूँह बुरके में ढक कर
सबका राज बताती जनता.

अब तक जिनको सुना नहीं है
उनकी गज़ल सुनाती जनता

जाने किन किन शहरों वाले
रस्तों को समझाती जनता.

आपस में कुछ भिड़ जाते हैं
झगड़ों को सुलझाती जनता.

जाने कैसे लेख बनाने
पन्ने* रोज चुराती जनता. (*डायरी के)

कैसी भी है जैसी भी है
हमको बहुत लुभाती जनता.

--समीर लाल ’समीर’

(अब माड़स्साब पंकज सुबीर छड़ी लेकर आयेंगे और गल्ती बतायेंगे...उनकी सौ मार बरदास्त..आखिर मास्साब हैं हमारे..भले के लिए ही बोलेंगे....माड़स्साब आ जाओ..कुछ तो सिखला जाओ!! ३० शेर तक बहर साधते अच्छे खाँ बोल जायें तो हम तो फुस्सु खाँ भी नहीं.!!)

कुश की खास सलाह पर एक सुन्दर फोटो: :)

बोतल तो खुद से भी बड़ी है, कम तो नहीं पड़ना चाहिये.. :)

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114 टिप्‍पणियां:

मैथिली गुप्त ने कहा…

तीस लाइनें तो वाकई बहुत कम है
ये भजन तो एक सौ आठ लाइन तक चलना था

अनूप शुक्ल ने कहा…

बढ़िया है। टहलाते रहिये।

Tarun ने कहा…

सुबह सुबह जनता की कैसी बीन बजायी जनसेवक ने
सभी लिखे में वाह-वाहे जो ऐसा जनसेवक सिर्फ एक

Satyendra Prasad Srivastava ने कहा…

जबर्दस्त। जनता खुश

पंकज सुबीर ने कहा…

भर्तहरी ने तो शतक लिखा था आप क्‍यों 30 पर रुके कम स कम 100 तो हों ताकि शिवना प्रकाशन एक अलग से छापे जनता शतक । फोटो प्रक‍ाशित कर कापी राइट का उल्‍लंघन किया गया है । उसके सर्वाधिकार मेंरे पास थे ।

Ghost Buster ने कहा…

ये बकार्डी प्रेमी जनता पर कोई शेर नहीं ना कहेंगे?

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

वाह !! वाह !! वाह !! ..सही चित्रण किया है आपने ..ब्लॉग जगत का ..मजा आ गया पढ़ कर ..:)

श्रीकांत पाराशर ने कहा…

Sameerji, poori vastvikta hi likh dali. koi mane ya na mane parantu kafi kuchh yahi to hai yah dunia. vaise bahut achhi lagti hai hamen blog ki dunia. anjane doston se kalam ke jariye mulakat hoti hai.

दीपक ने कहा…

जो भी इनकी पीठ खुजाये
उसकी पीठ खुजाती जनता

दिन भर फिर अपने चिट्ठे पर
टिप्पणी गिनने आती जनता


उपरोक्त लाइने हमारे लिये है या हमारे जैसे कईयो के लिये भले वो मुकर जाये ये दिगर बात है ! बाकी बंधु अपनी-अपनी लाइने चुन ले !!

seema gupta ने कहा…

जाने कैसे लेख बनाने
पन्ने* रोज चुराती जनता. (*डायरी के)

कैसी भी है जैसी भी है
हमको बहुत लुभाती जनता.
" great effort sir, but still it seems to ve very small, it could be much more.............ha ha ha ha bakee two line likhne ka kamm to hum kr hee rhen hain ha haha , nice photograph"

Regards

PD ने कहा…

मैथिली जी सही कह रहे हैं.. :)

संगीता पुरी ने कहा…

वाह! वाह ! बहुत अच्छी कविता पढ़ा दी, सुबह ही सुबह ! धन्यवाद।

Tarun Goel ने कहा…

जो भी इनकी पीठ खुजाये
उसकी पीठ खुजाती जनता
Boss you are amazing!!!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

‘उड़न तश्तरी’ की उड़ान को
उमड़-घुमड़ टिपियाती जनता

भारी भीड़ जुटी टंकी पर
नीचे रही बुलाती जनता

झट उतरे, पट पोस्ट ठेल दी,
इनको बहुत सुहाती जनता

नाच रही है ता-ता थ‍इया
कैसे कहें नचाती जनता

Shastri ने कहा…

वाह समीर जी, आज सुबह सुबह एक काव्यात्मक निरीक्षण पढ कर मजा आ गया. आपने व्यंग के पुट के साथ साथ जो कुछ कहा वह सब सच है!!

-- शास्त्री

-- हिन्दीजगत में एक वैचारिक क्राति की जरूरत है. महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

रंजन ने कहा…

समीर भाई,

बहुत सरल शब्दों में आपने ब्लोगीरी समझा दी..

वाह वाह

ALOK PURANIK ने कहा…

भई वाह वाह क्या केने

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

गुरुदेव मजा आ गया ! आपने आज जनता को एक और गाइड लाइन
देदी और एक नया शब्द ! ब्लॉगर = जनता ! हम तो अब ब्लॉगर की जगह
यही शब्द इस्तेमाल करेंगे !
कैसी भी है जैसी भी है
हमको बहुत लुभाती जनता.
बहुत प्रणाम !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

सुबहान अल्लाह! क्या ग़ज़ल लिखी है जनाब-ऐ-आली! बहुत खूब!

भूतनाथ ने कहा…

भूत विनाशक संग मे रखकर
भूतों को डरवाती जनता

हमको काहे डरावत हैं ? हम शरीफ किसीम के
भूत हैं ! :-) प्रणाम !

अनुनाद सिंह ने कहा…

वाह वाह ! ये तो कविता में 'अब्स्ट्रैक्ट' चिट्ठा चर्चा हो गयी!!

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

बेहतरीन हाले-बयां है...

GIRISH BILLORE MUKUL ने कहा…

koi kaise mana karega
AZADI ke mayane badal jaenge
6.5=30 gazal's ke lie shukriya

rakhshanda ने कहा…

bahut shaandar, bahut sundar...aaj kal man itna pareshaan hai ki net pe aane ka man hi nahi karta...aise mein aapki kavia ne thodi uaadasi to door kar hi di.

Gyandutt Pandey ने कहा…

इन्द्रधनुषी जनता है और इन्द्रधनुषी यह कविता!

Parul ने कहा…

saadu...saadhu

G M Rajesh ने कहा…

itnaa agar likhna na hota
neta kah chup ho jaati jantaa

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) ने कहा…

bottle is nice can you serve this?

bavaal ने कहा…

Ha ha ha ha Bel diya papad vale ko. E sorry kuch galat likh gaya kya ? han maar diya papad vale ko. Bahut hee bhayankar kism kee kavita bana dalee bhaiye. Phoonk dala badde. Kaun type ke ho yaar ? Aap. Itnee gahree batain aur itna jhula jhula ke. Zaheenon ke zehan main jo dwand chala karta tha. Saaf sabko samajh main bhee aa raha tha aur kah koyee nahin pa raha tha, (Baapne) kah diya. Oh sorry aapne kah diya aur vo bhee itne jabardast dhang se. Iske liye ab aapko kya eenaam diya jayega dekhiye aur intezaar keejiye.
---Aapka

Anil Pusadkar ने कहा…

जनता जनार्दन की ज़य,आपकी भी जय-जय

संजय बेंगाणी ने कहा…

सबसे अच्छा आप लिखते हो... :)


बहुत ही लय में पढ़ा. गाने योग्य लगी. कुल मिला कर मजा आया. चिट्ठाकारी संसार बिलकुल ऐसा ही है.

सागर नाहर ने कहा…

गल्त बात है ब्लॉगर चालीसा लिखने चले तो और तीसा में ही हाँफ गये, नीचे तो बॉटल में से स्वास्थयवर्धक पेय पीते दिख रहे हैं? सुना है हमारे लालूजी के चमचों ने तो लालूसाठा तक लिख लिया था।
चलिये अब स्वास्थयवर्धक पेय पी लिया हो तो चिट्ठाचालीसा या ब्लॉगरपचासा, साठा पूरा करो।
मजेदार, सुबह सुब मुस्कराने का मौका देने के लिये धन्यवाद।
एक बात और भी गलत है और वह यह है
लिखने को जब लाले पड़ते
गाने भी सुनवाती जनता.

हम तो बहुत कुछ लिखने को तैयार हैं पर साहित्यकारों का सोच कर रुक जाते हैं कि हम रोज लिखना शुरु कर देंगे तो उनका क्या होगा।
:) :) ( दो स्माईली दिये हैं)

sameer yadav ने कहा…

समीर जी , कुछ ऐसा भी होना चाहिए की बीच-बीच में हम अपने कार्यों का विश्लेषण हास्य-व्यंग्य [गजल] या किसी भी विधा के माध्यम से करते रहें. वैसे आपने बखिया खोलने [ उधाड़ना नहीं कहा] में थोड़ी कोमलता बनायें रखा है....वरना करम तो और भी अच्छे हैं ब्लोगेर्स के. फ़िर यहाँ पंदोली (सहारा) भी तो देना है....सभी लोगों को. गिनती....तो और आगे जा सकती है यह तो सब मानेंगे. मजे की बात है पढ़ते हुए बार बार यही लग रहा था कि मेरे बारे में आप इतना कैसे जान गए. हा हा हा....!!!

डॉ .अनुराग ने कहा…

बकार्डी का विज्ञापन?????.. अब आप आधिकारिक तौर पे स्टार हो गये ...

amit ने कहा…

वाह समीर जी, मज़ा आ गया। मैथिली जी क्या कह रहे हैं ज़रा उस पर भी गौर फरमाएँ (सिर्फ़ गौर ही फरमाएँ, अमल में न लाएँ पढ़ना भारी हो जाएगा, गा कर आडियो अपलोड कीजिएगा)। :)

फोटू भी मस्त है, वाकई ज़्यादा रह जाए लेकिन कम नहीं पड़ना चाहिए। वैसे हरे रंग की कौन सी कॉकटेल का मज़ा ले रहे थे?

कुश एक खूबसूरत ख्याल ने कहा…

दिल कर रहा है की एक एक शेर को चूम लू.. पर क्या करू मेरी कुछ नज़्मे बुरा मान जाएगी..

फिर ये डर भी है की गुटबाजी के केस में अंदर ना करवा दे जनता..

लाजवाब ग़ज़ल.. आनंद आ गया.. फोटो भी बड़ी जानदार च शानदार है..

मतलब की आपने रोज़ की सिर्फ़ एक बोतल पीने की सलाह मान ली है :)

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

guru ji to bad me.n ayenge..ham pahile aa gaye hai.n aap i class ki sabse intellegent kshatra..! ye sab kya hai guru ji par impression..? ham sab samjh rahe hai.n...! abhi fir aau.ngi..! dekhane ki guru ji ne kitni santiya.n maari ..? ha ha ha.>!

poemsnpuja ने कहा…

badhiya hai, maza aaya padhkar. janta ki jagah blogger likhte to jyada accha nahin hota :)
salah ka kya hai koi bhi de sakta hai,nahin :D

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी, आपने सत्य कहा है,
अजब गजब है अपनी जनता।

अपनी अपनी ढपली लेकर,
अपना राग सुनाती जनता।

टिपियाते टिपियाते थक जाते है,
पोस्टों की बाड़, ले आती जनता।

इसी लिए कभी छोड़ छाड़ सब,
पढने लगते हम संता-बंता।

manvinder bhimber ने कहा…

mood fresh karne ke liye ye lines bhi kam hai.....
Sameer bhaya....bahut sunder....
badhaaee swikaaren

नीरज गोस्वामी ने कहा…

ई का करा समीर दद्दा, गुरु पंकज जी क्लास में जो होमवर्क मिला था उसे आप ने सार्वजनिक कर दिया...हम इस बहर और ग़ज़ल पे काम कर ही रहे थे की आप इसको पोस्ट बना के छाप भी दिए और लपेट लिए हम जैसन कई भोले भाले ब्लागर भाई बहिनन को... अब ई शेर हमारे ब्लॉग पे चल रही काव्य संध्या के शायरों के लिए नहीं तो किसके लिए लिखे हैं आप?
अब तक जिनको सुना नहीं है
उनकी गज़ल सुनाती जनता
देखिये शरमईये नहीं...पकड़ लिया ना आप को...भाई आप भी बड़े वो...हैं...क्या? धुरंधर.
नीरज

shivam ने कहा…

bhai bahar khade hokar kyon pi rahe hain? are botal ke andar ghuskar aur doobkar tair-tair kar pine ka aanand to le lete "donald duck" k mafik.
abhi kuchh janta ke mijaj ke bare me batane se chook gaye. fir bi bahut achchha........lage raho.....

vineeta ने कहा…

yani aap subah uthte hi blog jagat main aa jate hain....bahut acchi hai. blog jagat ki nabz par haath rakha hai aapne...

ज़ाकिर हुसैन ने कहा…

समीर जी
आज तो आप आइना लेकर आ पहुंचे.
अब क्या कहूं, आईने के सामने कुछ कहते हुए बड़ा डर लगता है.
वैसे बाई द वे, काफी अच्छा और सच्चा लिखा है

अभिषेक ओझा ने कहा…

अरे मालिक ! केवट का प्रेम है इस जनता में:

"हम आयेंगे घाट तुम्हारे तब तुम पार लगाना राम'' :-)

वर्षा ने कहा…

आप भी!!!!

Suresh Chiplunkar ने कहा…

वैसे लगभग सभी मुख्य लोगों को लपेट लिया है इसमें आपने, अब देखना है कि समझदार को इशारा काफ़ी होता है या चाबुक ही चलाना पड़ेगा, लेकिन क्या आपका कीबोर्ड चाबुक चलाने देगा आपको?

Deepak Bhanre ने कहा…

सर जी तुसी , छा गए .
कम मैं सभी कुछ समेटने का बहुत अच्छा प्रयास है .

Dr. Amar Jyoti ने कहा…

शानदार ग़ज़ल। बस एक कमी है। छोटी बहुत है।:-)

जितेन्द़ भगत ने कहा…

जानदार शेर, सब हो गए ढेर। सबको अच्‍छा समेटा आपने, मजा आ गया।

मीत ने कहा…

जाने क्या लिख लाती जनता
उस पर यह इठलाती जनता
सुबह सुबह उठते ही पहले
अपनी पोस्ट चढा़ती जनता
mazza aa gaya.....

रंजना ने कहा…

पंचश्लोकी रामायण में जैसे तुलसीदास जी ने पूरा रामायण समेट दिया, तीस लाइनि दोहे में आपने भी पूरा ब्लागर गाथा रच दिया.जबरदस्त है,कुछ भी छूटा नही.
बहुत बहुत बढ़िया लिखा है आपने.एकदम अनोखा, लाजवाब.

Nitish Raj ने कहा…

सिर्फ ३० लाइनें बहुत ही बढ़िया लगी पर एक बात और ये क्या ब्लागरों को बकारड़ी दिखाकर लुभाया जा रहा है। एकेले एकेले पी रहे हैं, हम फोटो देख कर ही खुश हो लेते हैं।

विनीता यशस्वी ने कहा…

Likha to fir kya khub likha apne....

मथुरा कलौनी ने कहा…

वाह।
उड़ते रहिये

mamta ने कहा…

सबके सब जबरदस्त है ।

अशोक पाण्डेय ने कहा…

ईश्‍वर से प्रार्थना है कि भाभी जी शीघ्र स्‍वस्‍थ्‍ा हों। हमारी हार्दिक शुभकामनाएं।

swati ने कहा…

निश्चित ही सराहनीय है.

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब.

बधाई.

Arvind Mishra ने कहा…

कामधाम सब छोड़छाड़ कर
बस केवल टिपियाती जनता

भाई वाह समीर जी ,मजा आ गया पर इसे तो १०८ मनके की माला के मानिंद होना था .थोड़ी जल्दी दिखाई आपने !

अस्तित्व ने कहा…

बहुत खूब, आखिर ये जनता ही है जो उठाती भी है और गिराती भी है। जनता की अदालत, फूल मिले या लात।

संतोष अग्रवाल ने कहा…

कहाँ कहाँ से नुक्ते ढुंढती
फ़िर भी बहुत हँसाती जनता

चाहे कितनी पीठ खुजाओ
मुँह फेर चली जाती जनता

जिस ढ़ाबे पर सारे टूटे
वहीँ पे खाना खाती जनता

Dr Prabhat Tandon ने कहा…

किसी को नही बख्शा :)

PREETI BARTHWAL ने कहा…

सच में समीर जी 30 शेरों वाली ये दहाङ बाकई में बहुत बढि़या है और आप इसे 1008 तक ले जाने में भी सक्षम है।

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

गुरुजी अच्‍छा लिखा है आपने भजन अब सुबह पूजा करते समय यही भजन गुनगनाना पडा करेगा

जाने क्या लिख लाती जनता
उस पर यह इठलाती जनता

सुबह सुबह उठते ही पहले
अपनी पोस्ट चढा़ती जनता

वैसे इन लाईनों में आपने कहीं मेरे जैसे लिखने के इच्‍छुक लेकिन जिन्‍हें लिखना नहीं आता को सीधे सीधे पवेलियन जाने के लिए तो नहीं कहा ना

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

बहुत शानदार!

समीर भाई, सॉलिड दृष्टि डाली है आपने, जनता पर. बेहतरीन!

Alag saa ने कहा…

ब्लागिंग इतनी आसान नहीं इतना ये भी मानती है,
क्योंकि यह तो जनता है जो कि सब कुछ जानती है।

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

मज़ा आ गया समीर जी व्यंग ग़ज़ल गज़ब की रची है |
आप लिखो शेर हम पर भी फ़िर भी बुलाते हैं
आप हमारी पीठ खुजाओ क्योंकि हम आपकी खुजाते हैं
एक संस्कृत का वाक्य याद आ गया बुरा ना मानो तो कहें प्रासंगिक है इसलिए
कौए ने गधे से कहा अहो स्वरं
गधे ने जवाव दिया अहो रूपं

mahendramishra ने कहा…

सबकुछ तो आपने अपनी रचना में सुन्दरता के साथ अभिव्यक्त कर दिया .सटीक है.धन्यवाद.

रंजन राजन ने कहा…

वाह समीर जी, मज़ा आ गया।

राजीव उत्तराखंडी ने कहा…

वाह समीर जी, मज़ा आ गया।

राजीव उत्तराखंडी ने कहा…

वाह समीर जी, मज़ा आ गया।

मीत ने कहा…

जाने क्या लिख लाती जनता
उस पर यह इठलाती जनता
सुबह सुबह उठते ही पहले
अपनी पोस्ट चढा़ती जनता
सही में जनता ब्लोगर...
उम्दा लिखा है...

Reetesh Gupta ने कहा…

मन के भाव कलम से लिखकर
लय में उनको गाती जनता

तारीफों के दो शब्दों को
गुटबाजी बतलाती जनता

खबर एक और दर्जन खबरी
कैसी यह मायावी जनता.

वाह -वाह मजा आ गया ...आपका प्रयास बहुत सराहनीय है...ऎसे ही जमाये रहिये...बधाई

Manish Kumar ने कहा…

जबरदस्त लपेटा है सबको :) कुछ पंक्तियाँ मेरी ओर से..

टिप्पणी है क्यूँ आवश्यक
बार बार बतलाती जनता

उलटा पुलटा कहने से
सीधे छत चढ़ जाती जनता

हर पोस्ट पर वरदहस्त दे
सबको ही लुभाती जनता

anitakumar ने कहा…

सुन रहे हैं , गुन रहे हैं, समझ रहे हैं, इसकी अगली कड़ी का इंतजार कर रहे हैं…।शानदार, सबसे अच्छा तो आप्॥….।ही ही

हरि ने कहा…

हम तो दो लाइनों में ही चित हो गए। बाकी तो बोनस है हमारे लिए।
जो भी इनकी पीठ खुजाये
उसकी पीठ खुजाती जनता

प्रशांत मलिक ने कहा…

achcha hai

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

चिट्ठा उड़नतश्तरी पढ़ती
जब होती है खाली जनता
और हाथ में लेकर बैठे
गर्म चाय की प्याली जनता
टिप्पणियाँ कैसे करते हैं
पूछे बने सवाली जनता
एक पोस्ट पर तीन सैकड़े
बार बजाती ताली जनता

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

तारीफों के दो शब्दों को
गुटबाजी बतलाती जनता
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
खैर हम तो ऐसा नहीँ मानते
टीप्पणी करने की भरसक
कोशिश करते हैँ
बहुत अच्छी रही ये कविता :)
- लावण्या

Harshad Jangla ने कहा…

समीरभाई
चिठ्ठा जगत की तो आपने धज्जियाँ उडादी |
बोले तो ... जबर्दस्त
-हर्षद जांगला
एटलांटा , युएसए

राज भाटिय़ा ने कहा…

वकारडी पीकर फ़िर चाहे तो टंकी पर चढ जाये जनता ...
मजा आप गया , लगता हे थोदा ज्यादा ही मजा आ गया ...
कुछ लोगों को छेड़छाड़ कर
टंकी पर चढ़वाती जनता,
धन्यवाद

मिहिरभोज ने कहा…

एक क्विंटल का बोझा पाकर
उङन तश्तरी कहलाती जनता

रश्मि प्रभा ने कहा…

jaagran geet blog ka......kya khoob hai!
bahut hi dilchasp

venus kesari ने कहा…

वाह वाह ये समीर जी का कमाल की गुरु जी आए और छड़ी अपने ही हाँथ में पीट डाली और मुस्कुरा कर बोले शिष्य समीर शतकीय पारी से कम तो कुछ भी हमें ग्रहण ही नही है
ही ही ही :) :)

वीनस केसरी

आशा जोगळेकर ने कहा…

सही वर्णन है ब्लॉगर्स के कार्यकलापों का ।
उडन तश्तरी पर सवार हो
एक बार तो टिपियाती जनता ।

padma rai ने कहा…

क्या खूब लिखतें हैं!

vipinkizindagi ने कहा…

bahut achcha likha hai aapne...
choti panktiyo me badi baat kahi hai aapne...

pallavi trivedi ने कहा…

वाह वाह...क्या ग़ज़ल , क्या सुन्दर चित्र!पोस्ट तो हिट है ही!वैसे आपने ३० शेर लिखे थे पर टिप्पणियों में कुछ और शेरों की बढोत्तरी हो गयी....वैसे ३० शेरों तक बहर साधना वाकई अच्छे खां वाला काम ही है....

Ek ziddi dhun ने कहा…

Sameer ji, Karnal mein ek hain HARBHAJAN SINGH KOMAL. Ek bar lambi gazal ka bhoot sawar ho gaya. hajaron sher kah diye. bamushkil manana pada ki ab bakhsh do, nai gazal shuru karo. aap unse is beech mil liye kya.

UjjawalTrivedi ने कहा…

गुरू देव मान गये आपको- कनाडा में बैठकर सुंदर चित्रण किया है- इसी तरह पुष्प वर्षा करते रहिये।

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

बहुत खूब ! चुटीलेपन से सभी कुछ तो कह डाला आपने !
उड़नतश्तरी सरर सर्र सर !
थमक थमक चल पाती जनता !!
तीस शेर नब्बे टिप्पणियां !
देख देख ललचाती जनता !!

रविकांत पाण्डेय ने कहा…

पूरे उस्ताद निकले आप तो। जो बहर हमें मुश्किल लगी उसपर तीस शेर!

dahleez ने कहा…

बिढ़या िलखा है अापने।

सिद्धार्थ जोशी ने कहा…

जनता के लिए,
जनता के द्वारा,
जनता की ओर से,
जनता के चरणों में,
जनता की तुकबंदियां,
जनता पर मारी
और जनता बोली वाह वाह...

राजीव जैन Rajeev Jain ने कहा…

वाह! वाह !

सचिन मिश्रा ने कहा…

sir ji, bahut khub. aap ne to kamal kar diya.

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah wa.....Sameer g
theek farmaya

मित्रों
हरियाणवी टोटके किस्से और कविताएं
haryanaexpress.blogspot.com
साइट पर भी उपलब्ध है
समय निकाल कर आईयेगा
सुस्वागतम्

अर्शिया अली ने कहा…

सुबह सुबह उठते ही पहले
अपनी पोस्ट चढा़ती जनता

सबसे अच्छा तुम लिखते हो
सबको यूँ भरमाती जनता.

ब्‍लॉगर्स के बहाने आपने प्‍यारे प्‍यारे शेर रच दिये। बधाई स्‍वीकारें।

Zakir Ali 'Rajneesh' ने कहा…

वैसे एक बात कहूंगा कि जैसे आपने सर्वाधिक टिप्पणियाँ पाने का रिकार्ड बनाया है, वैसे ही अपने फोटो पोस्ट के साथ ---ने का रिकार्ड भी आपके ही नाम होगा। है न?

DHAROHAR ने कहा…

Blogging ko aaina dikha diya aapne.

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

मेरे शब्दों में आप की गजल का सिलसिला--
हमने क्या रचना लिख डाली,
सोच सोच इतराती जनता ।

कही अनकही बातें लिखती,
मन के भेद बताती जनता ।

एक शेर आपके लिए-
समीर लाल की टिप्पणियों की,
करती बहुत प्रतीक्षा जनता ।

http://www.ashokvichar.blogspot.com

महावीर ने कहा…

आपने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं, अब ग़ज़ल की लंबाई का रिकार्ड भी तोड़ डालिए।
शब्द-विन्यास और नए नए विचारों में तो आप लजवाब हैं।

गौतम राजरिशी ने कहा…

...सरकार तुस्सी ग्रेट हो.मैं कल घूम कर गया आपके इस नायाब प्रस्तुती से और नेट ने धोखा दे दिया.लेकिन धन्यवाद आपका कि इस प्रस्तुती को पढ हम अपना होमवर्क पूरा कर पाये.अगर और भी शेर जोड़ा हो तो पढ़वायें. विगत कुछेक दिनों से मेरे ब्लौग पे जो मैने आपका लिंक डला है वो अपडेट नहीं होता है.आपने रद्‍द तो नहीं कर दिया है हमारे लिंक-अनुग्रह को?

Yatish ने कहा…

इतनी बढिया रचना पड़कर
जब जल्दी रुकजाती जनता
क़तरा-क़तरा और बड़े यह
ऐसी मांग करती जनता

भारतीय दर्पण ने कहा…

सर ये गजल थोड़े है. ये तो कविता है.
फिर भी चलने दीजिये. लिखी तो अच्छी है.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपका भी जवाब नही,
उड़नतश्तरी से घुमा देते हो दुनिया.

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

समीर जी,

सारे नुस्खे अपनाये हमने,
फ़िर ब्लोग पर न टिपयाती जनता,
आती तो है लोटों में पर,
बिन लिखे लौट जाती जनता

shama ने कहा…

" Itnee saaree tippanee dekh,
Baukhlaa jaatee mujh jaisee jantaa, likhnese pehele katraa jaatee jantaa,
Soorajko kya ujiyaara dikhla paatee ye adnaa,
jiskaa apnaa naam kewal ek shama?"

कविता वाचक्नवी ने कहा…

उसने उनकी पीठ खुजाई,उन ने उसकी पीठ
इसी तरह निभती रही आपसदारी

rohitler ने कहा…

ब्लॉगिंग पर टिप्पणी जितनी पढ़ने में मज़ेदार है उतनी ही देखा जाये तो सत्य भी... पोस्ट करने के लिये धन्यवाद

Manish ने कहा…

ही ही ही ……

एक भूले भटके जनता का सलाम !!

कुछ दिन फरार रहो तो आप शुरु हो जाते हैं
इधर जनता को लिखने का मन नही कर रहा है ……

काहे कि आप तो है न!

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

होते जब चुनाव भारत में
'उनको' सबक सिखाती जनता


वाह समीर भाई, मजा आ गया ......

- डॉ. विजय तिवारी ' किसलय '
जबलपुर

omsingh shekhawat ने कहा…

arre kya jagab likha hai saab bada hi vyngya kar dete ho khob khoob hai