हास्य_व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हास्य_व्यंग्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, अप्रैल 03, 2021

हे गंगा पुत्र, अपने उदगम का तो ध्यान धरो!!

 


सब आदत की ही तो बात होती. कोई भी आदत शुरु में शौक या मजबूरी से एन्ट्री लेती है पर बाद में लत बन जाती है. अच्छी या बुरी दोनों ही बातें अगर लत बन जायें और फिर न उपलब्ध हों तो फिर तकलीफदायी हो चलती हैं. इन्सान छटपटाने लगता है. कुछ भी कर गुजरने को आतुर हो जाता है.

किसी ड्रग के आदी, शराब के लती, सिगरेटबाज और यहाँ तक कि शतरंजी को अपने व्यसन की उपलब्धता के आभाव में तड़पते तो सभी ने देखा ही होगा. शायद शुरु में चार दोस्तों के बीच फैशन में या स्टेटस बघारने को एक पैग स्कॉच ले ली होगी. नशे की किक में मजा आया होगा. फिर कभी कभार और, फिर महीने में एक बार, फिर हफ्ते में, फिर एक दिन छोड़ एक दिन और फिर रोज पीने लग गये होंगे. बस, लग गई लत. अब एक दिन न मिले, तो बिस्तर में उलटते पलटते नजर आयें. नींद न पड़े. बेबात बीबी बच्चों पर बरसने लगें.

तब देखा कि फेसबुक कुछ देर को क्या बैठा, लगे लोग ट्विटर पर ट्विटियाने,व्हाटसएप भर गया - हाय, फेसबुक नहीं चल रहा. क्या आपका भी नहीं चल रहा? जबकि फेसबुक की साईट साफ साफ लिख कर बता रही थी कि मेन्टेनेन्स चल रहा है, अभी आते हैं. मगर लतियों को चैन कहाँ? वो तो लगे यहाँ वहाँ भड़भड़ाहट मचाने. यहाँ तक कि जब कुछ ही देर में फेसबुक चालू हुआ तो फिर हल्ला मचा और कम से कम १०० ट्विट और व्हाटसएप अपडेट मिले कि हुर्रे, चालू हो गया!! अच्छा है यहाँ चीयर बालाओं का चलन नहीं है वरना तो क्या नाच होता कि देखने वाले देखते ही रह जाते.

लम्बे समय तक कोई आदत रहे तो लत बन जाने पर क्या हालत होती है, उसका जो जायजा आज मिला उसे देख कर एकाएक परेशान हो उठा. सोचने लगा कि भारत का क्या होगा?

सुनते हैं कि साहब किसी भी तरह हार मानने को तैयार नहीं. लगे हैं कि न खाऊँगा न खाने दूंगा. भ्रष्ट्राचार बंद हो ही जाना चाहिये. उनकी इस हठ से और आज के अनुभव से मुझे डर लगने लगा है. न सिर्फ भ्रष्ट्राचारियों से बल्कि उनसे भी जो इतने सालों तक भ्रष्ट्राचार झेलने के आदी हो गये हैं.

यूँ भी पूरे भारत में मात्र दो पार्टियाँ ही हैं जिन्हें मिलाकार भारत को भारत कहा जाता है. एक जो भ्रष्ट्राचार करते हैं और एक वो जो भ्रष्ट्राचार झेलते हैं.

एकाएक चुनाव के नतीजे आते ही भ्रष्ट्राचार बंद हो जायेगा तो इन दोनों पार्टियों की क्या हालत होगी, ये भी तो सोचो. पूरे देश में हर तरफ अफरा तफरी मच जायेगी. हाहाकार का माहौल होगा. आदमी स्टेशन पहुँचेगा, बिना रिश्वत दिये रिजर्वेशन मिल जाने पर भी ट्रेन में चढ़ने की हिम्मत न जुटा पायेगा कि जरुर कुछ घपला है. ऐसे भला रिजर्वेशन मिलता है क्या कहीं? ट्रेन का कन्फर्म टिकिट लिए वो बौखलाया सा बस में बैठ जायेगा और भी इसी तरह की कितनी विकट स्थितियाँ निर्मित हो जायेंगी-सोच सोच कर माथे की नसें फटी जा रही हैं.

साहब, मान जाओ, प्लीज़. कुछ तो सीख लो आज के इस फेसबुक भीषण कांड से. क्या अच्छा लगेगा जब सब कहेंगे कि पूरा देश जो तांडव कर रहा है, उसके जिम्मेदार आप हैं? नाहक इतना बड़ा इल्जाम क्यूँ अपने माथे लगवाना चाहते हैं?

मान जाइये न प्लीज़!!! चलने दो जैसा चल रहा है? कुछ घंटों के लिए मेनटेनेन्स टाईप भ्रष्ट्राचार रुकवाना हो तो पूर्व सूचना देकर रुकवा लो, दोनों पार्टियाँ झेल लेंगी किसी तरह,आपकी भी बात रह जायेगी- मगर इसे पूरे से खात्मे की जिद न ही करो तो ठीक.

विकास का वादा भी तो आपका ही है- फिर भ्रष्ट्राचार के विकास में आप क्यूँ बाधक बन रहे हैं?

सदियाँ बीती – विकास ही तो भ्रष्ट्राचार की गंगोत्री रहा है.  

हे गंगा पुत्र, अपने उदगम (गंगोत्री) का तो ध्यान धरो.

समीर लाल ’समीर’

 

भोपाल से प्रकाशित दैनिक सुबह सवेरे के रविवार अप्रेल 4, 2021 के अंक में:

http://epaper.subahsavere.news/c/59540993


ब्लॉग पर पढ़ें:

 

#Jugalbandi

#जुगलबंदी

#व्यंग्य_की_जुगलबंदी

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

#Hindi_Blogging

 


Indli - Hindi News, Blogs, Links

शनिवार, जून 29, 2019

क्रिकेटरों के लिए रिटायरमेंट के बाद रोजगार का नया अवसर



आज सुबह से ही चौक पर भीड़ लगी है. विश्व कप चल रहा है. बिट्टू ने टीवी दुकान के बाहर निकाल कर रख दिया है. आज भारत पाकिस्तान का मैच होना है. पान की दुकान, चाय की दुकान सब आजू बाजू में ही हैं. कहीं भी बैठ लो और मैच के मजे लो.
चौक पर मैच देखने का आनन्द ही अलग होता है. टीवी के समानन्तर एक कमेन्ट्री चौक पर बैठे एक्सपर्ट भी देते चलते हैं. थर्ड एम्पायर का निर्णय तो बाद में आता है, उसके पहले ही चौक पर तय हो जाता है कि आऊट था कि नहीं और अगर थर्ड एम्पायर का निर्णय उनसे अलग आया इसका मतलब थर्ड एम्पायर ने पैसे खायें हैं. हर भारतीय चौके, छक्के पर, हर पाकिस्तानी कैच ड्राप पर, हर पाकिस्तानी विकेट गिरने पर बकायदा नगाड़े बज कर नाच होता है. वहीं हर भारत के गिरते विकेट पर, पाकिस्तानी चौके छक्के पर, हर भारतीय कैच ड्राप पर नगाड़े के बदले गालियाँ और सलाहों का अम्बार लग जाता है. ऐसा नहीं वैसा करना था. ये शॉट गलत लगाया. अगर भारत की टीम का कोच इस चौक पर आ जाये तो अपनी अज्ञानता पर शर्मिन्दा हो जाये. 
बहुत से लोग भारत की टीम की टी शर्ट पहन कर आये हैं. किसी ने गाल पर भारत के झंडे का टैटू लगवा रखा है. कोई भारत का झंडा थामे है तो कोई विंग कमांडर अभिनन्दन का पोस्टर.. पूरा का पूरा माहौल एकदम उत्सव का. सब पहले से मान कर चल रहे हैं कि पाकिस्तान को तो हराना ही है, भले विश्व कप कोई भी ले जाये.
इस बार के चुनाव के बाद से एक नया डायलॉग भी चल पड़ा है कि चाहे कैसी भी बैटिंग कर लो, चाहे कैसी भी बालिंग कर लो, जितेगा तो भारत ही. मैने पूछा भी कि इतने विश्वास से आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? खेल है कोई भी हार जीत सकता है? जबाब मिला कि आप तो चुनाव के समय भी कहाँ हमारी बात मान रहे थे. मेरे पास चुप रह जाने के सिवाय रास्ता न था मगर मन ही मन सोचना तो मना नहीं है अतः सोचा कि यहाँ तो खुले में मैच हो रहा है और रन भी कोई ईवीएम तो गिन नहीं रही फिर भी ऐसा विकट विश्वास. चुनाव की तरह ये भी नहीं कह सकते कि कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है.
इसके अलावा कुछ अंतर और आये हैं. रनों के साथ जय श्री राम का उदघोष, चौक्के छ्क्के को विंग कमांडर अभिन्नदन के शौर्य से जोड़ कर उसके पोस्टर लहराना हर चौक की कहानी बन गये हैं.
घंसू भी आज क्रिकेट का बल्ला लेकर आये हैं. क्रिकेट का महापर्व चल रहा हो और घंसू पीछे रह जायें, ऐसा कैसे हो सकता है. मैच शुरु होने में अभी समय है. घंसू बीच सड़क में चौक्का छक्का मारने की मुद्रा में बल्ला घुमा रहे हैं. कभी कभी दो चार कदम आगे दौड़ कर भी बल्ला घुमा रहे हैं.
तिवारी जी ने आवाज लगाई कि भाई घंसू, अगर नेट प्रेक्टिस हो गई हो तो आ जाओ, पान खाया जाये. घंसू के आने पर तिवारी जी चुटकी लेते हुए कहने लगे कि बड़ी स्टाईल से शॉट लगा रहे थे घंसू. कोहली और धवन की बेटिंग भी फीकी लगेगी इसके सामने तो. लगता है अगले विश्व कप की तैयारी कर रहे हो. तुम्हारा सेलेक्शन तो पक्का समझो. तुम्हें कोई नहीं रोक सकता सेलेक्ट होने से.
घंसू जोर जोर से ठहाके लगाने लगा. कहने लगा कि यहाँ किसे क्रिकेट खेलना है. मैने तो आज तक मौहल्ले की  क्रिकेट टीम से भी नहीं खेला, विश्व कप में क्या खेलूंगा?
जो खेल खेलना नहीं, उसके लिए नेट प्रेक्टिस क्यूँ कर रहे हो फिर? तिवारी जी ने जानना चाहा.
घंसू बताने लगे कि दरअसल वो अगली विधानसभा के चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं. भाषण देना सीख लिया है. झूठे वादे करना सीख लिया है. घड़ियाली आंसू बहाना सीख लिया है. बस एकाएक पता चला कि एक नई विधा में भी महारत होना चाहिये और वो है क्रिकेट के बल्ले से सरकारी अधिकारियों की कुटाई करने की. तो उसी की नेट प्रेक्टिस कर रहा था. विश्व कप का मौका भी है. सोचा लगे हाथों प्रेक्टिस भी कर लूँ और किसी को पता भी न चलेगा कि मैं विधायकी की तैयारी कर रहा हूँ.
मैने देखा तिवारी जी घंसू की दूरद्दष्टिता से अभिभूत उसे एकटक निहार रहे हैं. उन्होंने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया और विधायक भवः का आशीष दिया. तिवारी जी आँखों में खुशी के आंसू हैं.
घंसू ने खुशी में दो तीन बार फिर बल्ला घुमाया और तभी उधर से जय श्री राम का उदघोष गूंजा.
मैच प्रारंभ हो चुका है. भारत बैटिंग करने उतर रहा है.
अब इन क्रिकेट के खिलाड़ियों के लिए भी क्रिकेट से रिटायर होने के बाद एक नया रोजगार का अवसर हो गया है. वे विधायकी का चुनाव लड़ सकते हैं.
-समीर लाल ’समीर’
   
भोपाल से प्रकाशित दैनिक सुबह सवेरे के रविवार जून ३०, २०१९ में:




Indli - Hindi News, Blogs, Links

शनिवार, मई 25, 2019

अब जनता के आत्म मंथन का समय है


चुनाव के परिणाम आ गये हैं. जनता ने अपना आदेश दे दिया है. टीवी पर तो सभी नेताओं ने इसे जनादेश कहते हुए सर माथे से लगा लिया है. यही एक मात्र दिन होता हैं जब जनता को आदेश देने की अनुमति होती है. अब इसके बाद पाँच साल तक वो इस गुस्ताखी की सजा काटती है कि तेरी इतनी हिम्मत कि हमें आदेश देगा. महीने भर तुम्हारे आगे पीछे क्या घूम लिए, तुम तो खुद को कलेक्टर ही समझने लगे.
तिवारी जी और घंसु ने भी परंपरा का पालन करते हुए जनादेश का स्वागत किया. दोनों हार गये. २ लोगों वाली नई नई बनी गैर मान्यता प्राप्त पार्टी नेस्तनाबूत हो गई. शाम आत्म मंथन के लिए बैठक बुलाई गई पान की दुकान के पीछे पुलिया पर. एक बोतल, नमकीन और चार उबले अड़े के साथ आत्ममंथन शुरु हुआ. दोनों ने ही हार की नैतिक जिम्मेदारी ली. घंसू को दो वोट मिले. एक खुद का और दूसरा तिवारी जी का. तिवारी जी को भी दो वोट मिले. वो अपनी ससुराल से जाकर लड़े थे. जहाँ उनकी पत्नी का, सास का और एक ससुर का वोट था. जनादेश पर मंथन इस बात का था कि तीन में से तिवारी जी को वोट किसने नहीं दिया? ससुर ने वादा किया था कि वो वोट उनको ही देंगे मगर ससुर उनसे हमेशा झूठ बोल कर वादा खिलाफी करते आये हैं. इस बात के साक्ष्य के तौर पर तिवारी जी ने बताया कि विवाह के समय भी उनकी पत्नी को गौर वर्णीय एवं गाय स्वभाव की बता कर ब्याह दिया था. दोनों ही बातें कोरा झूठ साबित हुई. पक्का उन्होंने ही वोट न दी होगी. कभी सच नहीं कहते. उनको तो चुनाव ल़अना चाहिये. एक शक की सुई पत्नी पर भी घूमी कि उसी सुबह कुर्ता ठीक से प्रेस न करने पर तिवारी जी पत्नी पर भड़क गये थे और पत्नी ने उन्हें ऐसी नजर से देखा था जैसे कह रही हो कि देख लूँगी. शायद इस तरह ही उसने देख लिया हो. जनता भी इसी तरह कन्फ्यूज करती है.किसी का पुराना रिकार्ड खराब है तो कोई नजर से बता देता है. सामने तो कौन न कहेगा.
मंथन बोतल के साथ खत्म हुआ. तिवारी जी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से अपना इस्तिफा घंसु को सौंपा और घंसु ने राष्ट्रीय सह अध्यक्ष पद से अपना इस्तिफा तिवारी जी को सौंपा.दोनों ने एक दूसरे का इस्तिफा स्वीकार नहीं किया. फिर दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और प्रण लिया कि पूरे जोश खरोश से अब अगले चुनाव की तैयारी करनी है. ससुर और पत्नी से संबंध सुधारने होंगे तिवारी जी को एवं ससुर जी को अगली बार उनके गुणो को देखते हुए पार्टी से चुनाव लड़वाना होगा. फिर दोनों पुलिया से निकल कर पान की दुकान पर आ गये थे. बोतल अपना असर दिखाने लगी थी.
पान की दुकान पर खड़ी आम जनता अब तिवारी जी और घंसु से गालियों का प्रसाद प्राप्त कर रही थी. किसी ने तिवारी जी से चुटकी लेते हुए १२००० रुपये प्रति माह देने के वादे की याद दिला दी. घंसु उखड़ पड़े. अगर १२००० चाहिये थे तो हमें वोट देते. अब जाओ मांगो उन्हीं से, जिनको वोट देकर आये हो. हमसे तो अब बस १२ लातें मिलेंगी. भगो यहाँ से..
जनता हतप्रभ थी कि ये एक ही दिन में क्या हुआ इनको कि कल तक सभी को भईया जी, बाबू जी, चाचा जी कहने वाले आज सबको गाली बक रहे हैं. जबकि हमने तो इनको आदेश भी नहीं दिया. जिनको आदेश दिया है वो तो दिल्ली चले गये हैं. अब पाँच साल बाद ही मुलाकात होगी.
तब तक अब जनता के आत्म मंथन का समय है कि जिन्हें आदेश दिया है उनका क्या कहर बरपेगा?
मगर यही तो हर बार होता है. कहाँ कुछ बदलता है?
आदत भी तो कोई चीज होती है, इतनी आसानी से कहाँ बदलती है!!
-समीर लाल ’समीर’
दैनिक सुबह सवेरे में रविवार मई २६, २०१९ को:




Indli - Hindi News, Blogs, Links