रविवार, अक्तूबर 11, 2009

बिखरे मोती का विमोचन एवं समीर लाल सम्मानित

आखिरकार ’बिखरे मोती’ का दीर्घ प्रतिक्षित विमोचन विगत ४ अक्टूबर, २००९ को गुरुदेव श्री राकेश खण्डेलवाल, वाशिंगटन, यू. एस.ए. के कर कमलों द्वारा गया चौहान बैन्केट हॉल, टोरंटो में समपन्न हुआ. इस अवसर पर श्री अनूप भार्गव एवं रजनी भार्गव जी, न्यू जर्सी, यू एस ए, मानोषी चटर्जी जी, शैलजा सक्सेना जी ने शिरकत की. श्रोताओं से खचाखच भरे हॉल में कार्यक्रम की शुरुवात मानोषी चटर्जी ने की. कार्यक्रम की अध्यक्षता अनूप भार्गव जी एवं संचालन श्री राकेश खण्डेलवाल जी ने किया.

कार्यक्रम के आरंभ मे प्रसिद्ध शायर फिराक गोरखपुरी जी की भांजी, मेरी दादी श्रीमति कनकलता जी ने अपने आशीर्वचन दिये एवं ’बिखरे मोती’ पर अपने विचार व्यक्त किये.

dadi

मेरी दादी फिराक गोरखपुरी जी की भांजी श्रीमति कनक वर्मा

तदोपरान्त मनोषी चटर्जी ने अपनी गज़ल अपनी मधुर आवाज में गाकर श्रोताओं को मुग्ध कर लिया:

आपकी आँखों में मुझ को मिल गई है ज़िंदगी
सहरा-ए-दिल में कोई बाक़ी रही ना तश्नगी

रात के बोसे का शम्मे पर असर कुछ यूँ हुआ
उम्र भर पीती रही रो-रो के उस की तीरगी

उससे मिलके एक तुम ही बस नहीं हैरां कोई
है गली-कूचा परेशां देख ऐसी सादगी

आजकल दिखने लगा है मुझको अपना अक़्स भी
आजकल क्या आइना भी कर रहा है दिल्लगी

झुक गया हूँ जब से उसके सजदे में ऐ ’दोस्त’ मैं
उम्र बन के रह गई है बस उसी की बंदगी

चूँकि कार्यक्रम के साथ ही मेरे पुत्र एवं पुत्रवधु के प्रथम गृह-आगमन का समारोह भी रखा गया था. अतः सभी कवियों एवं कवियत्रियों ने विमोचन हेतु एवं वर वधु को अपने आशीर्वचन भी काव्यात्मक प्रस्तुत किए.


मनोषी के बाद रजनी भार्गव जी ने अपना काव्यपाठ किया. पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो गया.

सुरमई शाम चुपके से सुरमई हो गयी है शाम
रात ने सर रख दिया है काँधे पर
तारों ने बो दिये हैं चन्द्रकिरण से मनके वीराने में
धवल, चमकीली चाँद की निबोली
अटकी हुई है नीम की टहनी पर
नीचे गिरी तो बाजूबंद सी खुल जाएगी
सुरमई शाम
अनुपम और प्रगति के अनुराग
में ढल जाएगी।

उसके बाद शैलजा सक्सेना जी कविता ’सात फेरे’ ने सभी को अभिभूत कर दिया.

दो-दो खुशियाँ एक साथ हैं
घर और कलम प्रफुल्लित
इसी तरह से बढ़े वाटिका
गीत पुष्प हों प्रमुदित॥

अनुपम -प्रगति के लिये....

मधुमय जीवन बने तुम्हारा
स्वप्न सुगंधित सब हो
रहे आस्था संबंध में
चंदन-चाँदनी मन हो॥

-*-
सात फेरे

डॉ. शैलजा सक्सेना

सात फेरे लिए तुमने
सात फेरे लिए मैंने
मन की सेज पर
हर रात, सुहाग रात।

तुम्हारे पुरुषार्थ ने
मेरी कल्पना की कोख में
सपनों का बीज बोया
और हम विश्वास का फल लिए
चढ़ते चले आए जीवन की कठिन सीढ़ियाँ
कुछ फूलों से लदी
कुछ रपटन से भरी
फिसलने को हुए तुम तो
हाथ थामा मैंने
गिरने को हुई मैं तो
हाथ पकड़ा तुमने।

सात फेरे लिए तुमने.......

सुहाग का सोना
तन से ज़्यादा रचा मन पर।
समय झरता रहा
हरसिंगार सा हमारी देहों पर
सोख ली वह गंध स्वयं में
गंध बढ़ रही है तुम्हारी
गंध बढ़ रही है मेरी

झील की लहरों सी
मुस्कान उठती है तुम्हारे होंठों से
और मेरी आँखों का सूरज छूने की होड़ करती है
साँसों में हवन-धूम भरती है
उस दिन जो लिए थे सप्तपदी-वचन
भूलने को हुए तुम तो
याद दिलाए मैंने
भूलने को हुई मैं
तो याद दिलाए तुमने।

सात फेरे लिए तुमने
सात फेरे लिए मैंने
मन की सेज पर
हर रात, सुहाग रात।।

poster

उनके बाद अनूप भार्गव जी ने अपने काव्यपाठ से समा बाँधा.

१.
प्रणय की प्रेरणा तुम हो
विरह की वेदना तुम हो
निगाहों में तुम्ही तुम हो
समय की चेतना तुम हो ।

२.
तृप्ति का अहसास तुम हो
बिन बुझी सी प्यास तुम हो
मौत से अब डर नहीं है
ज़िन्दगी की आस तुम हो ।

३.
सपनों का अध्याय तुम्ही हो
फ़ूलों का पर्याय तुम्ही हो
एक पंक्ति में अगर कहूँ तो
जीवन का अभिप्राय तुम्ही हो ।

४.
सुख दुख की हर आशा तुम हो
चुम्बन की अभिलाशा तुम हो
मौत के आगे जाने क्या हो
जीवन की परिभाषा तुम हो ।

५.
ज़िन्दगी को अर्थ दे दो
इक नया सन्दर्भ दे दो
दूर कब तक यूँ रहोगी
नेह का सम्पर्क दे दो ।

अनूप जी के बाद राकेश खण्डेलवाल जी ने अपना काव्यपाठ कर पुस्तक का विमोचन किया एवं शिवना प्रकाशन की ओर से पुस्तक की एक प्रति मेरी पुत्र वधु को भेंट की.

शुभ हो प्रणय पर्व हम सब मिल कर नूतन हर्ष संजोयें
अभिनन्दन के भाव आज हम भेंट कर रहे हैं स्वीकारो
भावी जीवन के सपनों की मधुपूरित खुशियों से
विविध रूप में र~मगा तुम्हारा वर्त्तमान सजाता हो

साथ ही अनूप और रजनी भार्गव, विकास और शैलजा सक्सेना, मानोशी छटर्जी और राकेश जी की ओर से राकेश जी ने वर वधु के लिए मंगलकामना करते हुए गीत प्रेषित किया:

सदा रहे मंगलमय जीवन
शुभ आशीष तुम्हें देते हैं
तुम्हें मुबारक गुल औ’ कलियाँ
रस भीगे दिन रस की रतियाँ
रसिक सुबह हो, शाम सुगन्धी
गगन बिखेरे रस मकरन्दी
जिसमें सदा खिलें नवकलियाँ
ऐसा चमन तुम्हें देते हैं
जो छू लें अन्त:स्तल तल को
घुटनलिप्त नभ के मंडल को
नयनों के बेसुध काजल को
हियरा के उड़ते आँचल को
फिर उच्चार करें गीता सा
ऐसे अधर तुम्हें देते हैं
जो बिखरे तिनकों को जोड़ें
मांझी को साहिल तक छोड़ें
अन्तर्मन को दिशा दिखायें
पथ में नूतन सरगम गायें
जो उड़ छू लें मंज़िल का सर
ऐसे पंख तुम्हें देते हैं
जो सपनों की अँगनाई में
मन की गुंजित शहनाई में
उषा की मॄदु अँगड़ाई में
घुल जाते हैं परछाईं में
इन्द्रधनुष नित बन कर सँवरें
ऐसे पंख तुम्हें देते हैं.
सदा रहे मंगलमय जीवन
शुभ आशीष तुम्हें देते हैं.

समीर लाल सम्मानित:

इसी अवसर पर वाशिंगटन हिन्दी समिति यू एस ए द्वारा हिन्दी भाषा एवं हिन्दी चिट्ठाकारी की विशिष्ट सेवा के लिए मुझे ‘साहित्य गौरव’ के सम्मान से विभूषित किया गया एवं शिवना प्रकाशन, सिहोर के द्वारा से ’शिवना सारस्वत सम्मान’ से अलंकृत किया गया. श्री अनूप भार्गव जी ने इस मौके पर दोनों सम्मान पत्रों का अंग्रेजी मे अनुवाद कर उन कनेडियन मेहमानों को सुनाया जिन्हें हिन्दी नहीं आती थी.

मास्साब पंकज सुबीर जी, हटीला जी और कासट जी को इस मौके पर विशेष रुप से याद किया गया जिनके अथक प्रयास से यह ’बिखरे मोती’ का संकलन मूर्त रुप ले पाया.

साहित्य गौरव शिवना सारस्वत सम्मान
sammanusblog sammanshivblog

इसके बाद मेरे द्वारा सभी के आभार प्रदर्शन एवं काव्यपाठ के बाद विमोचन का कार्यक्रम समाप्त हुआ और मेरे पुत्र एवं पुत्रवधु के प्रथम गृह-आगमन का समारोह शुरु हुआ.


मेरे द्वारा पढ़ी गई रचना:

sam

चाँद गर रुसवा हो जाये तो फिर क्या होगा
रात थक कर सो जाये तो फिर क्या होगा.

यूँ मैं लबों पर, मुस्कान लिए फिरता हूँ
आँख ही मेरी रो जाये तो फिर क्या होगा.

यों तो मिल कर रहता हूँ सबके साथ में
नफरत अगर कोई बो जाये तो फिर क्या होगा.

कहने मैं निकला हूँ हाल ए दिल अपना
अल्फाज़ कहीं खो जाये तो फिर क्या होगा.

किस्मत की लकीरें हैं हाथों में जो अपने
आंसू उन्हें धो जाये तो फिर क्या होगा.

बहुत अरमां से बनाया था आशियां अपना
बंट टुकड़े में दो जाये तो फिर क्या होगा.

ये उड़ के चला तो है घर जाने को ’समीर;
हवा ये पश्चिम को जाये तो फिर क्या होगा.

-समीर लाल ’समीर’

नोट: विडियो अभी उपलब्ध नहीं हो पाये हैं. समय समय पर मौका देखकर लगाये जायेंगे. इन्तजार करिये.

Indli - Hindi News, Blogs, Links

117 टिप्‍पणियां:

Varun Kumar Jaiswal ने कहा…

बधाई हो !

रानी पात्रिक ने कहा…

पूरे कार्यक्रम का ब्यौरा पढ़ कर ऐसा लगा मानों हम भी वहीं पहुँच गये थे। सम्मान पाने के लिए बधाई।

रानी पात्रिक ने कहा…

विडियो की प्रतीक्षा रहेगी।

Khushdeep Sehgal ने कहा…

गुरुदेव, पहले बधाई का ट्रेलर स्वीकार करें...पिक्चर पीछे पीछे आ रही है...

जय हिंद...

Sanjay Gulati Musafir ने कहा…

समीर जी,
बहुत बहुत बधाई।

आपके बिखरे मोती चुनने की इच्छा रहेगी।

सप्रेम
संजय गुलाटी मुसाफिर

Gyan Darpan ने कहा…

साहित्य गौरव’ के सम्मान से विभूषित होने के लिए घणी-घणी बधाईयाँ

शरद कोकास ने कहा…

साहित्य गौरव सम्मान एवं शिवना सारस्वत सम्मान से सम्मनित होने के लिये तथा संग्रह " बिखरे मोती " के विमोचन पर हार्दिक बधाई । सबसे अच्छा यह लगा कि इस अवसर पर दादी कनकलता जी का आशिर्वाद आपको मिला । मनोषी जी, रजनी जी, शैलजा जी और अनूप जी की कवितायें पढ़कर अच्छा लगा । आप अगला संग्रह तैयार कीजिये उसका विमोचन भारत में करवायेंगे । अब जल्दी से तस्वीरें भी दिखाइये . ताकि अपनी कल्पना से हम अपने आपको उस कार्यक्रम मे शामिल देख सकें । पुन: ढेर सारी बधाई ।

Khushdeep Sehgal ने कहा…

गुरुदेव, सुबह सुबह इतने शुभ समाचार...यही सोच रहा हूं, कहां से शुरू करूं...सबसे पहले तो यही कहना चाहूंगा कि विमोचन बेशक...बिखरे मोती...का था, लेकिन कार्यक्रम का नाम... इकट्ठे मोती...होना चाहिेए था...

दूसरी बात... आपको साहित्य गौरव व शिवना सारस्वत सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई...वैसे आपका सम्मान खुद सम्मान का ही सम्मान है...

तीसरी बात...बेटे और बहू रानी के प्रथम गृह आगमन पर बहुत बहुत शुभकामनाएं...

चौथी बात...कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट, तस्वीरों, वीडियो का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा...

सुंदर कविताओं के लिए आभार...बस खत्म करता हूं...बधाई देने वाले इतने हो गए हैं कि आपके दरवाजे पर धक्कम-धक्का होने लगी है...व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक-दो मार्शल का इंतज़ाम कर लीजिए...

जय हिंद...

वाणी गीत ने कहा…

लम्बे समय से इस रिपोर्ट का इन्जार था ...बहुत बधाई ..!!

मैथिली गुप्त ने कहा…

बहुत बहुत बधाई समीर जी

संगीता पुरी ने कहा…

'बिखरे मोती' के विमोचन पर हार्दिक बधाई !इसके साथ ही शिवना सारस्वत सम्मान से तथा साहित्य गौरव सम्मान सम्मनित होने के लिये भी बधाई ! एक पोस्‍ट में दतनी सारी कविताएं ! कई किश्‍तों में पढनी पडेगी !

Himanshu Pandey ने कहा…

बिखरे मोती के विमोचन का सजीव विवरण दे दिया आपने । हमने भी उस क्षण को महसूस कर लिया ।

विमोचन व सम्मान की बधाई ।

Satish Saxena ने कहा…

समीर भाई !
इस मांगलिक अवसर पर मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार करें !

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

Hardik badhai ,bikhare moti ke prakashan aur putra tatha putra vadhu ke pratham grah agagman ke mangal avsar par.
aapka samman to jitna ho kam hi hoga ,hum se itnee door ho kar bhi aap kabhi avsar nahi dete shikayat ka ,apni paini nazar rakhte hai hum sabhi ki rachnaon per,likh rahe hai nirantar uttam rachnayen,itna kum nahi aaj.
Ishwar se nivedan hai ki aap ka sneh,shakti aur samman yoon hi kayam rahe aur hum sabhi ko sneh se anupranit karta rahe.
Ek baar phir badhiyan aur dhanyavaad saare samachar ke liye.
aapka hi
dr.bhoopendra

पंकज सुबीर ने कहा…

रपट ही बता रही है कि कार्यक्रम कितना शानदार रहा होगा । आपको बधाई बहूरानी के घर आगमन की । दीपावली का ये पर्व इस वर्ष आपके लिये खास है बहूरानी के साथ जो मनाया जाने वाला है । कार्यक्रम के फोटोग्राफ कहीं अपलोड किये हों तो उसका लिंक भेजें । बहूरानी को मेरा और रेखा का आशीष दें कि सात समंदर पार उसके बड़े भाई और भाभी वहां आ तो नहीं पाये लेकिन हमारी शुभकामनाएं नव दम्‍पति के साथ हैं । बिखरे मोती के साथ कवि समीर लाल ने भी एक सोपान तय किया है । उस हेतु पूरे शिवना परिवार की ओर से शुभकामनाएं । आदरणीय भाभीजी को प्रणाम । आशा है आप अभी भी प्राणायाम तथा प्रात: भ्रमण के नियम ठीक प्रकार से निभा रहे होंगें ।

Unknown ने कहा…

बहुत बहुत बधाई !

सम्मान के लिए एवं विमोचन के लिए दिली मुबारकबाद !

रविकांत पाण्डेय ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई। पूरा कवि-सम्मेलन जैसा आनंद आ गया।

उन्मुक्त ने कहा…

बधाई। काश हम भी वहां होते।

मुनीश ( munish ) ने कहा…

Badhai Sameer bhai ! Apko puruskar ki , aap sabko us andolan ki jo aapne videsh mein rah kar bhee hindi ke liye chalaya hai.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

चाँद गर रुसवा हो जाये तो फिर क्या होगा
रात थक कर सो जाये तो फिर क्या होगा.

यूँ मैं लबों पर, मुस्कान लिए फिरता हूँ
आँख ही मेरी रो जाये तो फिर क्या होगा.


रिपोर्ट का बडी बेसब्री से इंतजार था, पढकर आनंद आगया. कार्यक्रम बहुत ही शालीन और गरिमामय रहा ये जानकर बहुत हर्षित हुये. आपको और परिवार को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.

रामराम.

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

ढेर सारी बधाइयाँ, बेटे बहू का घर में प्रवेश, पुस्तक का विमोचन दोनों के लिए। रिपोर्ट में चित्रों का अभाव अखरा, वह होती तो सजीव हो उठता।

दर्पण साह ने कहा…

BADHAI SIR JI !!

bikhre moti padhne ko to kab se lalaiyat hoon !!

sabhi kaviyon ka kavya paath behteri tha...
...aur manoshi ji ki ghazal to dil ko chu gayi !!

गिरिजेश राव, Girijesh Rao ने कहा…

बधाई।

अजेय ने कहा…

बधाई

seema gupta ने कहा…

साहित्य गौरव’ के सम्मान और बिखरे मोती के भव्य विमोचन पर आपकी हार्दिक बधाई....

regards

दीपक "तिवारी साहब" ने कहा…

आपको साहित्य गौरव का सम्मान मिलना समस्त ब्लागजगत के लिये गौरव की बात है| आपने समस्त ब्लागर्स का सम्मान बढाया है| आपका शत शत अभिनंदन और बधाईयां|

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

ये उड़ के चला तो है घर जाने को ’समीर;
हवा ये पश्चिम को जाये तो फिर क्या होगा.

समीर भाई,"बिखरे मोती" विमोचन की हार्दिक बधाई
कवि सम्मेलन भी बढिया था।

गौतम राजऋषि ने कहा…

बधाई हो सरकार...बड़े दिनों से लंबित था ये आयोजन भी...
पुत्रवधु के शुभागमन की भी बधाई...

निर्मला कपिला ने कहा…

आपको बहुत बहुत बधाई व्यौरा बहुत अच्छे से प्रस्तुत किया है धन्यवाद्

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

q

saadar namaskar,

Saahitya Gaurav ke samman aur vimochan ke liye aapko bahut bahut badhai......

बेनामी ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Alpana Verma ने कहा…

'पुस्तक विमोचन और आयोजन की सफलता पर ढेर सारी बधाईयाँ.
आप के किताब 'बिखरे मोती 'सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करे.
शुभकामनायें.
आप को सम्मान भी प्राप्त हुए ..बधाईयाँ ही बधाईयाँ!
चित्र देखे,आप के दादी जी से मिल कर भी ख़ुशी हुई.
[-Will wait for video]

आभार.

अजित गुप्ता का कोना ने कहा…

पुत्र वधु का आगमन ऐसे होता है जैसे घर में नवीन यौवन आ गया हो। आपको नवयौवन के आगमन पर ढेर सारी बधाई। सम्‍मान मिलने पर भी बधाई। कार्यक्रम में पढ़ी गयी रचनाएं बेहद दिलचस्‍प थी।

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई हो आपको।

सुशीला पुरी ने कहा…

बहुत बहुत बधाई समीर जी ! इतनी ख़ुशी की खबर बाँटने का शुक्रिया .

mehek ने कहा…

sunder karyakram,bahut bahut badhai

संजय बेंगाणी ने कहा…

बधाई स्वीकारें. ताली भी बजा रहा हूँ....

स्वप्नदर्शी ने कहा…

Heartiest Congratulation!

सागर ने कहा…

दिल बाग़ -बाग़ हो गया... बधाई हो अंकल... वैसे आपको कैसा महसूस रहा है ?

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

बड़े हर्ष की बात है ..खूब ढेर सारी बधाई..

Sulabh Jaiswal "सुलभ" ने कहा…

बहुत बहुत बधाई हो आपको. कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट देख खुश हूँ.

और ये शेर

ये उड़ के चला तो है घर जाने को ’समीर;
हवा ये पश्चिम को जाये तो फिर क्या होगा.

बहुत खूब...!

यूँ ही छाते रहो तुम पश्चिम के आसमां पर
ये देख पूरब के बादल भी गर्वित होते हैं !!

Sulabh Jaiswal "सुलभ" ने कहा…

बहुत बहुत बधाई हो आपको. कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट देख खुश हूँ.

और ये शेर

ये उड़ के चला तो है घर जाने को ’समीर;
हवा ये पश्चिम को जाये तो फिर क्या होगा.

बहुत खूब...!

यूँ ही छाते रहो तुम पश्चिम के आसमां पर
ये देख पूरब के बादल भी गर्वित होते हैं !!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

लीजिये साहब उतारिये बधाई से भरे टोकरे जो हम अपने सर पर रख कर आपके लिए लाये हैं..इन टोकरों में हैं बधाईयाँ...पुस्तक विमोचन की, पुत्र वधु के आगमन की और आपको मिले ढेर से सम्मानों की...उम्मीद करता हूँ की भविष्य में भी आप हमें इनसे भी भारी बधाईयों से भरे टोकरों को फिर से उठाने का अवसर प्रदान करते रहेंगे...बधाई गुरुदेव को जिनके अथक प्रयास से ये पुस्तक प्रकाश में आयी...
काश राकेश जी तक आप हमारा प्रणाम पहुंचा पाते...

नीरज

समय चक्र ने कहा…

बिखरे मोती के विमोचन का कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आभार . शुभकामनाओ के साथ .

Murari Pareek ने कहा…

समीरजी बधाई हो !!! ऐसे ही शिखर को चुमते रहिये मंगल कामना!!!

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

समीर जी,आपको बहुत बहुत बधाई।

अर्कजेश ने कहा…

बहुत - बहुत बधाई इस सफ़ल आयोजन की ।

चाँद गर रुसवा हो जाये तो फिर क्या होगा
रात थक कर सो जाये तो फिर क्या होगा.

यूँ मैं लबों पर, मुस्कान लिए फिरता हूँ
आँख ही मेरी रो जाये तो फिर क्या होगा.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

समीरलाल जी!
आपको बहुत-बहुत बधाई!

अनूप शुक्ल ने कहा…

बधाई हो सारी खुशनुमा चीजों के लिये।

Mishra Pankaj ने कहा…

समीर जी आपको हमारी तरफ से भी ढेर सारी बधाई स्वीकार करे

धन्य हुआ यह जमीन आसमान , धन्य हुआ सारा जहां ,!

धन्य हुए हम आज गुरुवार , धन्य हुआ हिन्दोस्तान .!!


आपने हम सबको दीपावली का उपहार दे दिया , हमें भी अपनी खुशी में शामिल करके !!


आप को शत शत प्रणाम !!

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) ने कहा…

अलस्सुबह लिये लोटा चले हम जानिबे मैदां
अगर रस्ते में ही हो जाये तो क्या होगा...

ही...ही..ही

ख़ैर, बहुत बहुत बधाई। हिन्दी चिट्ठाकारिता के इथिहास के कुछ गौरवमयी पलों में शुमार होगा यह.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बिखरे मोती के विमोचन पर हार्दिक बधाई, बहुत अच्छा लगा आज का आप का लेख ओर कविताये.
धन्यवाद

Astrologer Sidharth ने कहा…

कविता का तो पता नहीं लेकिन यह जानकर सुखद आश्‍चर्य हुआ कि आप फिराक गोरखपुरी जी के नवासे के बेटे हैं। वाह

यानि खानदानी कवि या शायर या पद्य रचनाकार हैं।

रंजू भाटिया ने कहा…

समीर जीबहुत बहुत बधाई।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

pustak ke punha VIMOCHAN ki badhai.

रमता जोगी ने कहा…

पहले तो बधाई स्वीकार करें। अगर उड़ने की बात आती है तो समीर हवा के रुख को मुंह तोड़ जवाब दे सकता है, उसमें है क्षमता..

उनको हवा का रोकेगी, जो लेते हैं लोहा तूफानों से

विजय गौड़ ने कहा…

badhaai aur shubhkamnain.

स्वप्न मञ्जूषा ने कहा…

Bahut zabardast raha sabkuch...
poore karyakram ka vyora shaandaar raha...
ab video bhi dikhiye kab tak ham sabko waitiyaaiyega....
aur bahu ko pyaar dulaar ....is chhoti fufu saas ki taraf se...

Anil Pusadkar ने कहा…

बहुत बहुत बधाई हो समीर जी।

Arvind Mishra ने कहा…

वाह ! बधाईयाँ - विमोचन समारोह ने तो एक काव्य निशा का रूप धर लिया !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

sab bemisaal.......badhaai ho

Yogesh Verma Swapn ने कहा…

sameer ji, dheron badhaai sweekaren.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत बहुत बधाई, समीर भाई.
सम्मेलन कितना सम्मोहक रहा होगा, मैं कल्पना कर सकता हूँ.
विमोचन और सम्मान एक साथ, ये तो सोने पर सुहागा हो गया.
पुत्र एवम पुत्रवधू के लिए हमारी भी शुभकामनाएं स्वीकारें.
सभी कवितायेँ लाज़वाब.
विस्तृत प्रस्तुति के लिए आभार.

अजय कुमार ने कहा…

bahut dino se kar rahe the suhani raat ka intazar,
agar shaadi hi tal jaye to kya hoga

Abhishek Ojha ने कहा…

बधाइयां जी थोक के भाव से :)
'तो फिर क्या होगा' तो बड़ी शानदार है ! गूगल टाक पर स्टेटस लगाने लायक.

Vineeta Yashsavi ने कहा…

bahut bahut badhai apko pustak ke vimochan aur samman prapte karne ki liye...

Unknown ने कहा…

bahut-bahut badhai...

Vipin Behari Goyal ने कहा…

ढेर सारी बधाइयाँ

plpandey ने कहा…

कमना है- खुशियाँ बढ़ती रहें! बहुत-बहुत बधाई।

सुशील छौक्कर ने कहा…

बहुत बहुत बधाईयाँ जी।

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

बधाई हो बधाई

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

बधाई!!!

ss ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई आपको। कवितायें और गजलें पढ्कर आनंद आ गया।

Vaibhav ने कहा…

Sameer ji, bahut badhaiyaan.

kabhi in blogs ke motiyon ko bhi samet kar 'Bikhre Moti II' release kare.

plpandey ने कहा…

शुभकामना है - खुशियाँ यूं हीं बढ़ती रहें।
बहुत-बहुत बधाई!

संजीव गौतम ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई. अब जाना कि आपकी जडें किस पाताल लोक से अमृत रस पाती हैं.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

वाशिंगटन हिन्दी समिति यू एस ए द्वारा हिन्दी भाषा एवं हिन्दी चिट्ठाकारी की विशिष्ट सेवा के लिए मुझे ‘साहित्य गौरव’ के सम्मान से विभूषित किया गया एवं शिवना प्रकाशन, सिहोर के द्वारा से ’शिवना सारस्वत सम्मान’ से अलंकृत किया गया.
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
BRAVO !!!
Heartiest Congratulations !!
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
हिंदी ब्लॉग जग के दुलारे ,
हमारे समीर भाई
आयोजन बहुत प्रभावशाली रहा --
सौ. साधना भाभी जी,
बधाई हो जी ...

चि. पुत्र अनुपम व प्रगति बहुरानी
का स्वागत है
कविवर भाई राकेश जी, अनूप जी सौ रजनी भाभी.
प्रिय मानोशी , शैलजा जी , सभी की कवितायेँ बढिया लगीं
आपकी भी --हार्दिक बधाई इस शुभ अवसर पर
आपके अगले लेखन की प्रतीक्षा रहेगी
बहुत स्नेह, के साथ
- लावण्या

आभा ने कहा…

हमारी भी बधाई....समीर भाई

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह } ने कहा…

हमेशा लगता था आप का सम्बन्ध हो न हो किसी साहित्य परिवार से होगा . अब यकीन हो ही गया . साहित्य गौरव समीर लाल समीर की जय हो .

कामोद ने कहा…

बधाईयों भरी ले लो सौगात
छाये रहो यूँ ही दिन रात.

Doobe ji ने कहा…

sir ji sadar namaskar ....doobeyji ki aur se hardik badhai.....

Mansoor ali Hashmi ने कहा…

दिली मुबारक बाद कबूल फ़रमाए। इस खुशी मे हम सब आपके शरीक है।
फ़िराक गौरखपुरी साहब से आपकी रिश्तेदारी जानकर बेहद मसर्रत हुई।
-मन्सूर अली हाश्मी

शरद कोकास ने कहा…

लगभग 14 घंटे बाद यहाँ मेरा पुनरागमन हुआ है सिर्फ यह जानने के लिये कि आपकी दादी फिराक़ साहब की भांजी है तो फिराक साहब के नाती विश्वरंजन आपके कौन हुए .. ? शायद चाचा ..।

PRAN SHARMA ने कहा…

SAMEER JEE,AAPKO TO LAGBHAG HAR
ROZ HEE KOEE N KOEE BADHAAEE MILTEE
HAI LEKIN PUSTAK KE LOKARPAN AUR
SAHITYA SEWA KE LIYE SAMMAANIT HONE PAR MILEE BADHAAEE KEE BAAT HEE KUCHH AUR HAI.MEREE SHUBH KAMNA
KI ISEE TARAH APNE SHUBH CHINTKON
KEE SOOCHEE BADHATEN JAAEEYE.

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

बधाई हो समीर जी |

ये उड़ के चला तो है घर जाने को ’समीर;
हवा ये पश्चिम को जाये तो फिर क्या होगा ---> बिलकुल सत्य कहा है ..... पर मन है की बार बार पूरब की और ही निहारता रहता है ......

शेफाली पाण्डे ने कहा…

हमारी भी बधाई ....

P.N. Subramanian ने कहा…

समीरजी को झौव्वा भर बधाईयाँ. पिछले साल भी ऐसा ही कुछ हुआ था.

बवाल ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन आयोजन, बहुत बहुत बधाई लाल साहब, आनंद के मारे आँसू निकल पड़े। काश उस कार्यक्रम में हम भी होते! बड़ी याद आ रही है आपकी।

प्रकाश पाखी ने कहा…

बिखरे मोती संग हुए
बने गले की माल
पुस्तक छपने की
बधाई समीर लाल
बधाई समीर लाल
पर आप नहीं रुके
दो दो मिले सम्मान
और फूलों के बुके
दादीजी जी और
राकेश जी ने
दे दिया आर्शीवाद
पढ़के हमने शायरी
दी आपको दाद
दी आपको दाद
पर मन नहीं भरा
अगली पोस्ट पर
विडियो के लिए
किया आपको खरा
बोलो समीरानंद महाराज की जय!

आदरणीय समीर सा,
हार्दिक बधाई स्वीकारें.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

गुरु जी ,
सब से पहेले देरी के लिए बहुत बहुत माफ़ी चाहता हूँ |
साहित्य गौरव सम्मान एवं शिवना सारस्वत सम्मान से सम्मनित होने के लिये तथा संग्रह "बिखरे मोती" के विमोचन पर हार्दिक बधाई ।
आपको मेरा शत शत नमन !

अपूर्व ने कहा…

वाह सर जी ढेरों बधाई आपको..आपका सम्मान हिंदी ब्लॉग जगत का सम्मान है..सो जिस हिंदी ब्लॉगिंग की सेना के पति हैं आप..उसके एक प्यादे की शुभकामनाएं स्वीकारें..और मिठाइयों से अनुग्रहीत करें ..हालाँकि पिछले जमाने मे तो सेनापति लोग अपने सबोर्डिनेट्स को ऐसे शुभ मौकों पे मोती की मालाओं से अनुग्रहीत करते थे..मगर हम मोतीचूर और मालपुओं से भी काम चला लेंगे ;-)
आशा है आगे भी कई पुरस्कार आप को वरण कर धन्य होते रहेंगे.
और यहाँ तो पूरा कवि सम्मेलन का समाँ है

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" ने कहा…

इस सम्मान प्राप्ति हेतु आपको हार्दिक बधाई ओर भविष्य हेतु भी ढेरों शुभकामनाऎं!!!!!!!!

राजेश स्वार्थी ने कहा…

आपको बहुत बधाई. विवरण अच्छा लगा.

Devi Nangrani ने कहा…

’बिखरे मोती’ के विमोचन की विशेष बधाई हो.

‘साहित्य गौरव’ के सम्मान एवं शिवना प्रकाशन, सिहोर के द्वारा से ’शिवना सारस्वत सम्मान’ से अलंकृत कियइ जाने के लिए मेरी देर सारी शुभकामनयें कबूल हो. आपकी उदान का विस्तार भी क्षितिज के उस पार को छूने के लिए मुन्तजिर है. आपकी कलम आसमानों पर अपने नक्श छोड़ आती है.

कागज़ कलम ने नक्श ये खीचे है खेल बिन

रौशन रहे चराग़ जो जलते है तेल बिन

शुभकामनाओं सहित

देवी नागरानी

राजीव तनेजा ने कहा…

ऐसा लगा कि जैसे लाईव टैलीकास्ट देख रहे हों ...


बहुत-बहुत बधाई

Pawan Kumar ने कहा…

समीर जी बेहतरीन आयोजन काश हम भी वहां हो सकते..खैर कोई बातर नहीं आपकी रिपोर्ट बिलकुल सजीव चित्रण थी.....चिट्ठाकारी के लिए अवार्ड मिलने की बधाई.

बेनामी ने कहा…

Afsano me suna tha samman bhi sammanit hote hai;
wishwas ho gaya ab,
jab dekha samman sammanit hote.

Badhai

MADS

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

विमोचन "बिखरे मोती" का, या मोतियों को जोड़ने का उपक्रम,

इतने सारे बिखरे से मोतियों ने कार्यक्रम में एक साथ शिरकत कर दिल को आह्लादित कर दिया.
"एकत्रित मोतियों' के उदगार, प्रस्तुति ने दिल प्रसन्न कर दिया.

पुत्रबधू का स्वागत और समीर जी के "सम्मान" ने अभिभूत कर दिया.

लगा ज़माने भर की खुशियाँ एक साथ इकठ्ठी हो गई हैं, ऐसा बहुत नसीब से होता है,.....................

हमारी हार्दिक बधाइयाँ.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

Murari Pareek ने कहा…

आपकी उङनतश्तरी हमारे दर नहीं आती क्या !! क्या पेट्रोल ज्यादा खर्च होता है !!पेट्रोल डलवा देंगे ब्लॉग पर अपने आशीर्वाद देने जरुर आइयेगा ! कुछ अपनी कहो में !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बधाई बधाई बधाई ................ समीर जी बहुत बहुत बधाई .............. विडियो न भी लगे तो भी लग रहा है हम थे वहां आपके सम्मान में .............. एक से बढ़ कर एक रचनाएं .............. एह बार फिर से बधाई

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

भला किसलिये लिखूँ बधाई, हैं सहस्त्र सम्मान आपको
मन में उठते उद्गारों का है तो न अनुमान आपको
नित्य भोर का सूरज जैसी कोटि कोटि किरणों की आभा
का पर्याय नाम के सँग में दे नूतन पहचान आपको.

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

बधाई। आपके सम्मान में हम भी किसी अंश में सम्मानित महसूस कर रहे हैं।
फिराक साहब का नाम आने से उनकी रचनायें फिर पढ़ने का मन कर रहा है।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बधाई आप सभी को.....

Urmi ने कहा…

सम्मान के लिए बहुत बहुत मुबारक और ढेर सारी बधाइयाँ!

Science Bloggers Association ने कहा…

इस हेतु आपको जितनी बधाई दी जाए कम है।
----------
डिस्कस लगाएं, सुरक्षित कमेंट पाएँ

अजित वडनेरकर ने कहा…

बहुत बहुत बधाई साथ ही आयोजन की दिलचस्प रिपोर्ट के लिए धन्यवाद।
सभी आमंत्रित कवियों की रचनाओं के चुने हुए अंश पसंद आए। आयोजन की कल्पना हमने कर ली।

दीपावली की शुभकामनाएं।

माधव( Madhav) ने कहा…

उड़न तश्तरी बहुत ही पसंद करता हूँ , करीब करीब रोज इसपे सवार होता हूँ

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

समीर जी, यूँ तो एनी ब्लोगों के मार्फ़त आपकी यह महान सफलता मालूम पड़ गई थी, और हमने दिल खोल अपनी खुशी का भी इजहार किया मगर समय की तंगी कह लो या फिर अपने ही ख्यालो लो में खोने का गम, आपके ब्लॉग पर आकर बधाई न दे सका, इसके लिए क्षमा !

आपकी इस महान उपलब्धि पर आपको ढेरो बधाईयाँ और आपको तथा सभी पारिवारिक जनों को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाये !

Smart Indian ने कहा…

"बिखरे मोती" के विमोचन और सम्मान पर बहुत-बहुत बधाई और दीपावली की शुभकामनाएं!

Lal Sant Kumar Shahdeo ने कहा…

समीर जी,
बधाई हो !साहित्य गौरव सम्मान एवं शिवना सारस्वत सम्मान से सम्मनित होने के लिये|
आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ।

पूनम श्रीवास्तव ने कहा…

आदरणीय समीर जी,
पुस्तक के विमोचन एवम सम्मान के लिये मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें।
पूनम

super-bazar ने कहा…

नमस्‍कार, आपको हमारे तरफ से भी बधाई हो भैया जी और आपके शुभकामना के लिए तहे दिल से शुक्रिया अभी स्‍वास्‍थ्‍य ठीक है अगले ब्‍लाग के पोस्‍ट पर बस इसी तरह हौसला देते हमारे घर भी चले आइयेगा ........ शेष शुभ

Dr.Bhawna Kunwar ने कहा…

Are!ye kamal ki khabar hai.aapko hajaron duayen lakhon badhai aap sahitya ka name yun hi roshan karte rahen..

amit ने कहा…

वाह जी वाह, बहुत-२ बधाई :)

सुबोध ने कहा…

समीर जी
ढेर सारी टिप्पणियों में मेरी टिप्पणी अगर खो जाए तो क्या होगा..लेकिन आपसे उम्मीद है आप इसे खोने नहीं देंगे..बेहतरीन शब्दों का जबरदस्त कोलाज...

Devi Nangrani ने कहा…

Badhayi, Badhayi, Badhayi!!!

Sameer ji ko padna aur padkar samjhna do alag baatein hain. kabhi kahin unke vyang mein ek peeda dikhti hai kahin gadhya mein ek marm jo man ko choo jata hai..
unke sahitya ka vistaar aseem hai..

मीनाक्षी ने कहा…

बज के ज़रिये 'आखर कलश ' तक पहुंचे जहां एक मर्मस्पर्शी रचना पढ़कर इधर आ पहुंचे ...एक दो साल के अंतराल के कारण टूटे सूत्रों को फिर जुड़ने मे कुछ वक़्त लगेगा ...
आपको बहुत बहुत बधाई हो ...