मंगलवार, दिसंबर 06, 2011

जिंदा कविता!!

एक गुलाब भेजता हूँ तुमको.

मैं तो हो नहीं सकता तुम्हारे आस पास. न तो ऐसा दस्तूर है जमाने का और न हीं मौका. कौन इसे सही मानेगा- तुम भी नहीं मानोगी कि मैं तुम्हारे आस पास आऊँ भी.

ये गुलाब देखेगा तुमको.

अभी तो खुशबू है इसमें बाकी- फिर सूख जायेगा जल्दी ही मगर मेरी कविता.... जो भेज रहा हूँ साथ...पढ़ लेना वक्त निकाल कर... तब...ये भर देगी हर बार एक ताज़गी भरी खुशबू उस गुलाब में- हर बार- तुम्हारा दिन एक खुशबूदार दिन बनाने के लिए...

इतना हक तो है मुझे कि तुम्हें खुश देख सकूँ और अहसासूँ तुम्हारी खुशिया!..कुछ पल को ही सही- खुश हो जाने के लिए!!!

मै खुद टूटा हुआ हूँ- न जाने कब तक- कितनी देर में- मुरझा जाऊँगा..मगर यह कविता- यह सनद रहेगी और हर वक्त काम आयेगी...तुम्हारे!!

इसलिए तो नाम दिया है इसे: ’जिंदा कविता’

बस शीर्षक ही तो लिखा है कविता के नाम पर- बाकी तो मौन की भाषा- इसे हर मोहब्बत करने वाला पढ़ पायेगा- तुमने भी तो एक दफा की थी बेइंतिहा मोहब्बत मुझसे...तुम पक्का पढ़ लोगी-

बताना कैसी लगी यह कविता!!!

जो न पढ़ पाये- उसे तुम वैसा ही मूँह बना कर चिढ़ाना- जैसा मुझे कहते वक्त बनाती थी-’दीवाने, इतना भी नहीं जानते??’

मोह लेती थी मुझे तुम्हारी वो अदा!!

sam

कविता:

’जिंदा कविता’

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( कि मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
जिनमें शब्द नहीं होते
मगर
जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें...

गुनगुनाते हैं उसे...
हर वो लब....

जो जानते हैं...

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं....

किसी दीवाने के लिए
ये नई है....
तो किसी के लिए...
ये पुरानी है....

-समीर लाल ’समीर’

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76 टिप्‍पणियां:

Kunwar Kusumesh ने कहा…

इसलिए तो नाम दिया है इसे: ’जिंदा कविता’..............Title well justified.
आपका लेखन अच्छा है.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

खाली पन्नों में बहुत कुछ होता है, जब प्यार होता है ...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…






आदरणीय ’समीर’ जी
सस्नेहाभिवादन !

एक गुलाब भेजता हूँ तुमको
( कितने तरीके मा'लूम हैं… )

ये गुलाब देखेगा तुमको.
अभी तो खुशबू है इसमें बाकी- फिर सूख जायेगा जल्दी ही
मगर मेरी कविता.... जो भेज रहा हूँ साथ...
पढ़ लेना वक्त निकाल कर...
तब...ये भर देगी हर बार एक ताज़गी भरी खुशबू उस गुलाब में- हर बार- तुम्हारा दिन एक खुशबूदार दिन बनाने के लिए...


इसे कहते हैं कुशल प्रबंधन और प्रणय-संचालन ! :)
समीर भाईजी !
आपका भी जवाब नहीं …

कोई आपको न पहचानने वाला /वाली आपकी इस सम्पूर्ण पोस्ट की शब्दावली से गुज़रने के बाद रचनाकार के रूप में आपकी कल्पना एक 18 साल के किशोर से 22-25 साल के युवक के सिवा कुछ कर ही न पाए … :)))

…और 'ज़िंदा कविता'

मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
जिनमें शब्द नहीं होते
मगर
जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें...गुनगुनाते हैं उसे...
हर वो लब.... जो जानते हैं... मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं.... किसी दीवाने के लिए
ये नई है....
तो किसी के लिए...
ये पुरानी है....


गज़्ज़ब ! कम्माल ! व्वाऽऽह !

बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut khoobsurat jajbaat dil ki gaharaai se nikli hui kavita.--bahut khoob.

अरूण साथी ने कहा…

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं...

प्रेमपुर्ण रचना

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" ने कहा…

bahut sundar

संजय भास्कर ने कहा…

प्रभावशाली प्रस्तुति
आपकी रचना बहुत कुछ सिखा जाती है...गुरदेव


संजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
पर आपका स्वागत है
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

mridula pradhan ने कहा…

कि मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
bemisaal.....shabd hi nahin tareef ke liye......

सतीश सक्सेना ने कहा…


बड़े प्यारे लग रहे हो प्यारे ....
शुभकामनायें !

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत खूब सर!

सादर

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

कविता सही पते पर भेज दी गयी है, जवाब आते ही खबर करता हूँ :)

सदा ने कहा…

अहसासों की कहानी हैं.... भावमय करते शब्‍दों का संगम बिल्‍कुल जिंदा कविता ..आभार इस बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिए ।

वन्दना ने कहा…

( कि मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
जिनमें शब्द नहीं होते
मगर
जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें...

ग्नगुनाते हैं उसे...
हर वो लब....

जो जानते हैं...

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं....

किसी दीवाने के लिए
ये नई है....
तो किसी के लिए...
ये पुरानी है.

आह! हर शब्द पर हर अहसास पर आह निकल रही है…………
एक कसक को जैसे जी गया कोई
मोहब्बत को घूँट बना जैसे पी गया कोई
ये अन्जाने शहर की अन्जानी बातें
अनकहे लफ़्ज़ों की अनकही बातें
बिन लफ़्ज़ो के पढा गया कोई
मेरी उलझी लट जैसे सुलझा गया कोई
मै तो बिना खत के भी पढ लेती हूँ
वो तहरीर जो ना तुम कहते हो
हवाओं मे फ़ैली खुश्बू की कसम
तुम ना भी कहते तब भी
तुम्हारी ज़िंदा कविता को पढ ही लेती
जानते हो ना…………
मोहब्बत के पास आँख नही होती
और जो पढता है उसे उसकी जरूरत नही होती
देखो ना पैगाम आया भी नहीं अभी
और उसने पढ़ भी लिया..... गुन भी लिया
कहो अब भी जरूरत है क्या किसी संदेशवाहक की............

लीजिए समीर जी आपके अहसासो ने कमाल कर दिया आज फिर एक कविता को जन्म दे दिया………हार्दिक आभार्।

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

समीर जी,बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना है।
दिल की गहराईयों से निकली एक आवाज है।एक बिना आवाज के बजने वाला साज है।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

हम भी ग्नगुनाते हैं।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब समीर भाई ... इस मौन की भाषा मुहब्बत करने वाला तो पढ़ ही सकता है ... जंच रहे हो बहुत इस गुलाबी टाई में ... ये भी ताज़ा रहेगी जिन्दा रहेगी कविता की तरह ...

संतोष कुमार ने कहा…

Sir ji
You are just superb
Ek ek shabd mehsoos kiye hain meine. Taarif kaise karoon pata nahi bas natmastak hoon aapki kavita ke saamne.


Aabhaar. . . !

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

कवितायेँ कभी सूखती नहीं हैं.. सुन्दर कविता..

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

ज़िन्दी कविता एकदम

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

बरबस यह गीत याद आ गया :
हमको दीवाना कर गये।

आपकी ‘जिन्दा कविता’ वाकई दीवाना बना देगी उसे...

Amrita Tanmay ने कहा…

जिन्दा कविता खुशबु बिखेर रही है.. वही गुलाब की .

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बस मौन की भाषा !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

भगवान कभी किसी को इन भावों को शब्दों में उतारने का कार्य न दे। बड़ा कठिन है यह बताना।

Pallavi ने कहा…

waah !! sir kya baat hai aaj to aapne is zinda kavita ke madhyam se pyar ke sabhi ahesaason ko or jazbaton ko zinda kardiya aur... saath hee itna kuch likhne ke baad bhi nishabd kardiya:-) jitni tariff ki jaay aaj aapki is rachna ki wo bahut kam hogi :-) bahut khub sir excellent....best wishes ....

Kailash C Sharma ने कहा…

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं....

बहुत खूब ! लाज़वाब भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

PRAN SHARMA ने कहा…

AAPKEE ` ZINDA KAVITA ` JADOO KEE
TARAH SAR PAR CHADH KAR BOLTEE HEE
NAHIN HAI ,DIL MEIN UTARTEE BHEE HAI. KHOOB ! BAHUT KHOOB !! YE
PANKTIYAN TO KISEE ACHCHHE SHER SE
KAM NAHIN HAIN --

MUHABBAT TO BAS
AHSAASON KEE KAHANI HAI
KISEE DEEWAANE KE LIYE
YE NAYEE HAI
KISEE KE LIYE PURANEE HAI

kshama ने कहा…

किसी दीवाने के लिए
ये नई है....
तो किसी के लिए...
ये पुरानी है....
Kya gazab ka likha hai!

Archana ने कहा…

अपने जिंदा होने का अहसास कराती एक "जिंदा कविता"...
जिसकी खुशबू से महक उठता है एक मुरझाया गुलाब !
देख लिया होगा कहीं छुपकर तुमने मुझे पढ़ते हुए ...
अनलिखी ईबारत ...

राजेश उत्‍साही ने कहा…

कविता नहीं पूरा काव्‍य संग्रह है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!
हो जिसमें आब,
वही बन गया गुलाब।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

फिर शायराना मूड में आ गए भाई !
अच्छी बात है ।
बिना लफ़्ज़ों की कविता में भी दम होता है ।
फोटो बड़ी तगड़ी खिंचाई है ।

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

खूबसूरत कविता |

मन के - मनके ने कहा…

समीर जी,नमस्कार
’ज़िंदा है कविता--,,बहुत कुछ उनकहा कहना चाह रही है---
अक्सर ही शब्द,अशब्द हो जातें हैं,ज़ब बिखरती हं अनुभूतियां.
सुंदर

Devi Nangrani ने कहा…

Kya kahoon Soch rahi hoon! Bahut hi accha likhte hain Sameer Lal. jaane kahan se churayi hai is lekhni ne phoolon ki rangat, Gulshan ki khushboo! bahut sunder hai Zindadili ki tahreer..

rashmi ravija ने कहा…

कविता इतनी जिंदा है कि उसकी हर धड़कन सुनाई दे रही है...
सुन्दर कविता

रंजना ने कहा…

वाह....लाजवाब...

भीनी भीनी खुशबू जैसे हवा में तैरती हुई...ऐसे ही सुवासित लहराते शब्द...

रश्मि ने कहा…

वाह कमाल का लि‍खा है आपने। आपकी लेखनी की कायल तो पहले से ही थी मगर बीच के दि‍नों में सि‍लसिला टूट सा गया था। एक बार फि‍र जुड़कर अच्‍छा लग रहा है। लाजवाब है आपकी 'जिंदा कवि‍ता'।

रश्मि ने कहा…

वाह कमाल का लि‍खा है आपने। आपकी लेखनी की कायल तो पहले से ही थी मगर बीच के दि‍नों में सि‍लसिला टूट सा गया था। एक बार फि‍र जुड़कर अच्‍छा लग रहा है। लाजवाब है आपकी 'जिंदा कवि‍ता'।

रश्मि ने कहा…

लाजवाब...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

जब नहीं लिखते और केवल सोचते हैं तो कितना अनकहा कह जाते हैं .. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

अमित तिवारी ने कहा…

सब लोगों ने इतना कुछ कहा है , अब मैं क्या कहूँ? आपके शब्द हमेशा दिल को छू जाते है. इंतजार है अगली पोस्ट का.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मन में प्रेम हो तो बहुत कुछ शब्दों में ढल जाता है ....'जिंदा कविता' यह दो शब्द ही बहुत सुंदर चुने .....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 08 -12 - 2011 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज... अजब पागल सी लडकी है .

Dr.Bhawna ने कहा…

Bahut sundar prasuti lagi...rachna bhi bahut bavpurn hai hardik badhai..

Devendra Gautam ने कहा…

गुनगुनाते हैं उसे...
हर वो लब....

जो जानते हैं...

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं...

.....बहुत खूब!

प्रेम सरोवर ने कहा…

आपका पोस्ट अच्छा लगा .मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें...

bahut sundar !
badhai !!

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-722:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

कविता रावत ने कहा…

जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें...

गुनगुनाते हैं उसे...
हर वो लब....
..esi ka naam pyar hai...

sushma 'आहुति' ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

निर्झर'नीर ने कहा…

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं....

किसी दीवाने के लिए
ये नई है....
तो किसी के लिए...
ये पुरानी है....

exceelent creation

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत गहरी बात कर गए हो गुरु...प्यार के कोमल अहसासों को शब्दों में ढालना हर किसी के बस बात नहीं होती...इसके लिए तप कर कुंदन बनना पड़ता है...कौनसे शब्दों में बधाई दूं आपको...सारे शब्द तो आपने हथिया रखे हैं...
नीरज

राजेंद्र अवस्थी. ने कहा…

वाह आदरणीय, आप जब भी लिखते हो ह्रदय की गहराई से लिखते हो जो आपकी कविता में झलक जाता है, बहुत बढ़िया.....

Atul Shrivastava ने कहा…

बेहतरीन।
सुंदर रचना।

गीता पंडित ने कहा…

प्रेम पर जो कुछ भी आपने लिखा सीधे मन में उतरता चला गया...
बस यही तो प्रेम है...

मोहब्बत तो बस एक...
अहसासों की कहानी हैं..

आभार इस अहसास के लियें जो हरेक में जीवित है पर.....

बधाई आपको .

Rajeev Panchhi ने कहा…

वाह! क्या बात है! बढ़िया लिखा है आपने!

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर लेख..बधाई....
नई पोस्ट में आपका स्वागत है

V.P. Singh Rajput ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
मेरा शौक
मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है
आज रिश्ता सब का पैसे से

वाणी गीत ने कहा…

जाने कैसी भीनी- भीनी खुशबू है इस जिन्दा कविता में ...
कविता को जिन्दा ही होना चाहिए ...
कविता -सी ही मुस्कराहट भी है , दिल से मुस्कुराये हैं !

वाणी गीत ने कहा…

जाने कैसी भीनी- भीनी खुशबू है इस जिन्दा कविता में ...
कविता को जिन्दा ही होना चाहिए ...
कविता -सी ही मुस्कराहट भी है , दिल से मुस्कुराये हैं !

प्रेम सरोवर ने कहा…

इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

Khushdeep Sehgal ने कहा…

फिर खो ना जाएं हम कहीं दुनिया की भीड़ में,
मिलती है पास आने की मोहलत कभी-कभी,
होती है दिलबरों की इनायत कभी-कभी,
मिलती है ज़िंदगी मे मोहब्बत कभी-कभी...

जय हिंद...

Khushdeep Sehgal ने कहा…

फिर खो ना जाएं हम कहीं दुनिया की भीड़ में,
मिलती है पास आने की मोहलत कभी-कभी,
होती है दिलबरों की इनायत कभी-कभी,
मिलती है ज़िंदगी मे मोहब्बत कभी-कभी...

जय हिंद...

NISHA MAHARANA ने कहा…

मगर मेरी कविता.... जो भेज रहा हूँ साथ...
पढ़ लेना वक्त निकाल कर...
तब...ये भर देगी हर बार एक ताज़गी भरी खुशबू उस गुलाब में- हर बार- तुम्हारा दिन एक खुशबूदार दिन बनाने के लिए...bahut khub.

Rajput ने कहा…

जो मैं लिखता हूँ अनलिखी ईबारत
बस तुम
पढ़ पाती हो उन्हें....

प्रेमपुर्ण रचना.

रचना दीक्षित ने कहा…

मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
जिनमें शब्द नहीं होते

वाह वाह सुंदर भावनाएं. अच्छे लगे विचार.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

nirmal bhawnao ki sunder prastuti.

रूप ने कहा…

मैं जब कुछ नहीं लिखता
और सोचता हूँ तुमको...
तो लिख जाती है
ऐसी न जाने कितनी
कवितायें...
जिनमें शब्द नहीं होते
बस .................... वाह !

Sunil Kumar ने कहा…

दिल से लिखी गयी और दिल पर असर करने वाली रचना , बधाई तो लेनी ही होगी

manojjaiswalpbt ने कहा…

प्रभावशाली प्रस्तुति,आपका हार्दिक धन्यवाद।

विष्णु बैरागी ने कहा…

अहसासों को जबान नहीं होती और जबान कुछ भी अहसास नहीं कर पाती। दोनों की ये मजबूरियॉं ही लिखवाती हैं - जिन्‍दा कविता।

Ram Lal Awasthi ने कहा…

I have been regular reader of your writings for last few months. At the very beginning I quite liked those but I see one thing now. Either you are under pressure of mass production enforced by idiotic comments or your followers are afraid of you writing (sometimes comments have nothing to do with your post, some nice words scripted with no correlation similar to your posts now a days) good words always. Remember, Bhishma took few oaths and fought few battles(in most of those his army was defeated) and we could not forget him passing 5000 years.

Madhuresh ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति. धन्यवाद!!

vidya ने कहा…

लाजवाब...............
मूक अभिव्यक्ति..
बहुत खूब.

Vaanbhatt ने कहा…

गज़ब दिल पाया है आपने...अहसासों को महसूस करना...फिर शब्दों में ढालना...कमाल है...

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

समीर जी ,
न जाने ये कविता कैसे छूट गयी निगाह से... ....ये तो हीरा है हीरा .. शब्द और भाव , कौन ज्यादा बेहतर है .. इसके बारे में तो सिर्फ आप ही जानते है .. लेकिन , कविता ने मन में एक घर बना लिया है ... अक्सर ऐसा ही होता है......अब शायद किसी दिन इसी भाव पर कुछ लिखू.....