बुधवार, नवंबर 10, 2010

ब्लॉगिंग अगर इंडस्ट्री है तो गलत आ गये यार!!!

screaming-at-computer

ब्लॉगिंग अगर इंडस्ट्री है तो मैने गलत चुन ली. अफसोस होता है कभी कभी. कभी कभी कहना बहुत मर्यादित वक्तव्य है सिर्फ इसलिए क्यूँकि मैं इसका हिस्सा हूँ. न होता तो कहता ‘हमेशा’.

मैं बचपन से यह गलती करता रहा हूँ मगर फितरत ऐसी कि बार बार ऐसी ही गलती कर बैठता हूँ. यही फितरत मुझे एक अच्छा भारतीय इन्सान बनाती है. मानो गलती से कुछ सीखने को तैयार ही नहीं. हर बार वो ही गलती दोहराये जा रहे हैं और कोस रहे हैं दूसरों को.

सबसे पहले सी ए(चार्टड एकाउंटेन्ट- सनधि लेखापाल) बना, एक ऐसी इन्डस्ट्री सलाहकारों की जिसमें आपकी सलाह की पूछ ही तब हो जब बाल सफेद हो जायें. जब प्रेक्टिस करता था तो हर वक्त लगता था कि जल्दी बाल सफेद हों तो प्रेक्टिस चमके और जम कर चमके..मगर सफेद भी ऐसे हों कि सिर्फ साईड साईड से कलम पर (फैशन कॉन्शस तो था ही शुरु से. रुप रंग तो अपने हाथ में होता नहीं मगर सजना संवरना तो खुद को ही पड़ता है वरना तो रुप रंग भी धक्का खाता नजर आये, खाता ही है-आपने भी अनुभव किया होगा.)

फिर राजनीति में हाथ आजमाया. यूथ कांग्रेस ज्वाईन की. शायद कारण था कि जब नेहरु जी मरे तब मैं एक बरस का भी न था. शायद दूध पीने के लिए भूख के मारे रो रहा हूँगा और घर वालों ने समझा कि नेहरु जी के मरने की खबर जानकर रो रहा है तो तब से ही कांग्रेसी होने का ठप्पा लग गया. अब घर वालों को झुठलाना तो हमारी भारतीय संस्कृति नहीं सिखाती तो कांग्रेसी ही बन गये और अब तक निभाये जा रहे हैं.

जब आस पास नजर घुमाता हूँ तब पाता हूँ कि ९० प्रतिशत से ज्यादा किसी भी राजनैतिक पार्टी में इसी तरह की किसी ऊलजलूल वजहों से हैं, कोई पहचान से, तो कोई जुगाड़ से तो कोई विकल्प के आभाव में. बहुत मुश्किल से ऐसे नेता दिखेंगे जो किसी पार्टी में उस पार्टी की मान्यताओं और राजनैतिक विचारों की वजह से हैं. तभी तो मौका देख देख कर पार्टियाँ बदलते रहते हैं.

जब यूथ कांग्रेस ज्वाईन की तो ज्वाईन करने के बाद, फिर वही पाया कि लड़कों की कौन सुने? युवा पाले जाते हैं राजनीति में ताकि शांति भंग न करें मगर सुने नहीं जाते. शांति भंग न करें का तात्पर्य यह कतई न लगायें कि बिल्कुल शांति भंग न करें बल्कि इसे ऐसा समझे कि अपने मन से किसी तरह की कोई शांति भंग न करें यानि की सिर्फ वहीं शांति भंग करें जो सफेद बाल वाले तथाकथित वरिष्ट चाहते हों जटिल मुद्दों से आमजन का ध्यान भटकाने के लिए.

राजनैतिक पार्टी में भी सुनवाई के लिए फिर बालों में सफेदी जरुरी है भले ही दिमाग युवाओं से भी गया गुजरा हो. देश की छोड़ कोई सी भी चिन्ता पालो मगर बाल सफेद रहें. ज्यादा सफलता चाहिये तो घुटना भी रिप्लेसमेन्ट लायक कर लो. खुद चल पाओ या नहीं, मगर देश चलाने लायक मान लिए जाओगे. ये बात फिर सिर्फ एक पार्टी में नहीं, सभी पार्टियों में है. राजनीति तो राजनीति है, पार्टियाँ तो सिर्फ मन का बहलाव है मतदातओं के लिए. वो ही आज इस पार्टी में, तो कल उस में. फिर भी जीते जा रहा है. ऐसे कितने ही नेता हैं जो हर जीती पार्टी के साथ जीते. बात टाईमिंग की है और टाईम मैनेजमेन्ट की. मगर यही टाईम मैनेजमेन्ट तो ब्लॉगिंग में दगाबाज बनकर उभरा.

खैर, यह सब तो जैसे तैसे समय के साथ पार हो ही गया. होना ही था, इस पर इंसानी जोर कहाँ? समय कहाँ रुकता है? एक नियमित गति से चलता जाता है. यह तो आप पर है कि उससे तेज भाग लो, या धीरे चलो या फिर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहो समय के भाग जाने की दुहाई देते. आधे से ज्यादा लोग इसी कोसने में जिन्दगी गुजारे दे रहे हैं और इसी मे संतोष प्राप्त कर रहे हैं. आश्चर्य यह है कि वो इसके बावजूद भी खुश हैं.

फिर न जाने किस मनहूस घड़ी में शौक जागा ब्लॉगिंग का, वो भी हिन्दी में. पुरानी दो उम्मीदों के चलते नाजुक उमर में ही बाल तो सफेद कर बैठे थे. पत्नी की लाख लानत पर भी रंगने को कतई तैयार नहीं हुए हैं आज तक.

जैसे ही सन २००६ में लिखना शुरु किया तो पहले लोग आये कि वाह समीर, क्या लिखते हो. अच्छा लगा. तारीफ किसे बुरी लगती है. जानकारी के अनुसार, मात्र १०० लोग थे उस वक्त इस जगत में जो हिन्दी में लिखते थे अपना ब्लॉग और उनमें से एक हम भी.

फिर देखते देखते एक और नई खेप आई, समीर जी वाली..तुम से आप हो लिये. अच्छा लगा. कारवां तो बढ़ना ही था वरना शायर गलत हो जाते जो कहते हैं कि लोग खुद जुड़ते रहे और कारवां बनता गया, वो तो फिर नाकाबिले बर्दाश्त गुजरता:

लोग बढ़े, स्वभाविक है, बढ़ना ही था. जो भी होता है उसे बढ़ना ही है. वरना तो होना ही एक दिन खो जयेगा. नये लोग आये और आदरणीय कहने लगे, श्रेद्धेय, मठाधीष, गुरुवर, प्रणाम, चरण स्पर्श और न जाने क्या क्या-सब सहते रहे, अच्छा लगता रहा. कोई और रास्ता भी न था.

फिर समय के साथ चच्चा, अंकल और मामा का दौर लिए नवयुवा आये. नवयुवाओं के साथ लफड़ा ये है कि उनकी उम्र की कोई रेन्ज नहीं होती. कितने नेता तो मरते दम तक युवा नेता रहे. मानो असमय गुजर गये मात्र ८५ साल की अवस्था में.

सारी राजनीतिक पार्टियाँ ऐसी ही युवा शक्तियों से पटी पड़ी हैं जिनकी युवा अवस्था उनके गुजरने के पूर्व गुजरने का नाम ही नहीं लेती.

चुप रहना कई बार क्या, हमेशा ही, जुर्म बढ़वाते जाता है... मगर फिर भी लोग मजबूरीवश चुप रहते हैं.सबकी अपनी अपनी मजबूरी होती है और अपने अपने आसमान. कहते हैं कि प्रतिकार आवश्यक है अक्सर. मगर वो आदत रही नहीं, आप तो जानते हैं,  तो देखते देखते धीरे से दद्दा, नाना जी कहलाने लगे और वरिष्ट एवं बुजुर्ग बन बैठे.

५० पार की उम्र वाले भी चरण स्पर्श कह करके जाने लगे, कोई दादा जी, कोई नाना जी, कोई बाबू जी, कोई बाउ जी, तो कोई परम श्रद्धेय तो कोई नतमस्तक कह कर बढ़ जाता और हम अपना सा मूँह लिये टपते रहते. क्या करते?

सोचता हूँ कि काश, फिल्म इन्डस्ट्री में होता तो इस उम्र में तो सलमान की जगह मैं बिग बास का संचालन कर रहा होता. युवाओं का आईकान, जाने कितनों का स्वप्नकुमार और रातों की नींद, तन्हाई का साथी और दीवारों पर टंगी तस्वीर. आहें भर रहे होते लोग मेरे नाम पर मेरी इस बाली उम्र में और यहाँ..चार साल की ब्लॉगिंग में जिस स्पीड से उम्र बढ़ी है, इस रफ्तार से कदमताल मिलाने के लिए महामानव होना जरुरी लग रहा है और मैं, चुपचाप बैठा निठल्लों की तरह कह रहा हूँ कि समय बहुत तेज भाग रहा है.

केशव तो खैर बिना ब्लॉगिंग ही ऐसे लफड़े में फंस गये थे, और तब मजबूरी में उन्हें लिखना पड़ा:

केशव केसन अस करी जस अरिहूं न कराहिं,
चंद्रवदन मृगलोचनी बाबा कहि-कहि जांहि।

यही गति रही तो वो दिन दूर नहीं जब जीते जी लोग स्वर्गवासी कहने लग जायेंगे... कहना ही तो है-हैं कि नहीं इससे तो पहले भी कहाँ मतलब रखा किसी ने.

इन्हीं सब के मद्देनजर अब तो कई बार मन करता है कि किसी नजदीकी कब्रिस्तान में ही जाकर बिस्तर लगा कर सो जाऊँ. क्या पता नींद खुले न खुले. तब इन चहेतों की इच्छा भी रह जायेगी और यदि भूले से नींद खुल गई तो अगली रचना रच देंगे उसी अनुभव पर. आज तक तो किसी ने लिखा नहीं है कब्रिस्तान में सोने का अनुभव या कब्रिस्तान का यात्रा वृतांत. नयापन मिलेगा लोगों को. कुछ और लोग आकर चरण स्पर्श कर जायेंगे भावी स्वर्गवासी के.

किसी वाकई वाले बुजुर्ग से पूछा तो उसने कहा कि चुप रहना ही बेहतर है, साहित्यजगत की यही रीत है (हालांकि ब्लॉगिंग को वो वाले साहित्यकार साहित्य मानते नहीं हैं फिर भी दिल बहलाने को गालिब ख्याल अच्छा है कि तर्ज पर मान लेते हैं).  बस, संतुष्ट हूँ इस रीत का पालन कर कि शायद हिन्दी साहित्य जगत का हिस्सा कहलाया जाऊँ.

एक उम्मीद ही तो है...एक उम्मीद के सहारे ही तो पूरा भारत जिये जा रहा है, तब इसे मैं पाल बैठा तो क्या बुराई है??

नोट: जब यह पोस्ट छपेगी, तब तक भारत पहुँच चुका हूँगा. जल्दी ही बात चीत/मुलाकात होती है.

Indli - Hindi News, Blogs, Links

114 टिप्‍पणियां:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

हम भी चुप है कुछ नहीं कह रहे |
भारत में आपका स्वागत |

मो सम कौन ? ने कहा…

ओ सर जी,
हुण तुसी कित्थों घट्ट हो? रैंकिंग तो टॉप, इनाम शिनाम लूटने हो तो टॉप, मुशायरे या कवि-सम्मेलन लूटने हों तो टॉप! होर की चाही दा है जी?
कोई अब्लॉगर, अकवि, अशायर, अरसिक आपकी लूट के किस्से सुने तो आपको धूम-iv का हीरो साईन कर ले। इतनी लूटपाट मचा रखी है आपने।
बाल रंगने वाली बात न करते आप तो हम भी बहुत अच्छे, वाह वाह टाईप का कमेंट कर देते। हमारी दुखती रग को छेड़ोगे तो ये सब झेलना ही पड़ेगा। अपने से बड़ी बड़ी भी(बाकायदा जन्म-तिथि चैक करी है कई बार) जब हमें अंकल जी कह जाती हैं तो आप तो इस इंडस्ट्री की कहते हैं, अपने को लगता है कि हम गलत धरती पर आ गये हैं यार।

वैलकम होम, समीर साहब। आशा करते हैं आपका स्टे सुखद रहेगा।

ललित शर्मा ने कहा…

आज तो भानुमति का पिटारा खोल कर धर दिया।
वैसे भी आपके पेशे में सफ़ेद बाल वालों को सीनियर मान लिया जाता है चाहे 50 साल में सीए बने हों।
सफ़ेद बालों की कदर मैने वकीली में देखी है। वरिष्टता दर्शाने के लिए बालों पर कलई भी नहीं लगाते। युं ही "कास" से चमकते रहते हैं।

वैसे आज भी आप युवक कांग्रेस के सदस्य ही दिखते हैं।:)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

माशा-अल्लाह, अभी तो कड़क जवान हैं. और पाली-टिक्स में होते तो युवा तुर्क कहलाते...
अगर बिलागिंग इन्डस्ट्री है तो आप हिन्दी बिलागिंग के इन्डस्ट्रियलिस्ट...
चलता है, नहीं दौड़ता है...
भारत आगमन पर आपका स्वागत..
आपके अपने घर में....

honesty project democracy ने कहा…

सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुती.....आपका हार्दिक स्वागत है भारत में......

Majaal ने कहा…

वो ग़ालिब साहिब ने ने कहा था न,
हमें adsense से है वफ़ा की उम्मीद,
जो जानता ही नहीं हिंदी क्या है !
खैर, उम्मीद पे दुनिया कायम है, blogging को भी जिंदगी की slogging समझ कर निभा जाइए ..

लिखते रहिये ....

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बाल सफेद होना आपके जैविक अनुभव की निशानी है, वही आपके सरकाये जाने की भी निशानी है। जोशमुक्त हो आईये राजनैतिक जीवन में, निस्तेज जी जाईये और देश को जीने दीजिये।
नेहरू जी के ऊपर आप भूख से रोये, भूख से किसी न जोड़ा इस देश को, बाल-कांग्रेसी बना दिया। अब सफेद-बाल-कांग्रेसी बनने तक प्रतीक्षा मत कीजियेगा।
आदरणीय, श्रद्धेय इत्यादि आपको धक्का देने की तैयारी है। झाँसे में मत आईये और हमारी तरह उम्र को यथा स्थान रोक कर, खूँटा गाड़कर खड़े हो जाईये।

Bhushan ने कहा…

रुचिकर पोस्ट है. सफेद बालों की खाल निकलते पहली बार देखी है. आपने राजनीति का ख़िज़ाब नहीं लगाया अच्छा किया. सी.ए. रहे और केशों का रक्षण किया- अद्भुत. बलॉगिंग जैसे आवश्यक कार्य के लिए आप उपलब्ध हुए हमारी खुशकिस्मती. साहित्यकार ब्लॉगर्ज़ को साहित्यकार नहीं समझते- उनकी बदकिस्मती. वे अपनी आदत नहीं बदलते तो हम ही एक दूसरे को बधाइयाँ देने और तारीफ़ करने की आदत क्यों छोड़ें?

ajit gupta ने कहा…

समीरजी,
आपकी पोस्‍ट पढकर आपका प्रोफाइल देखा कि कहीं उम्र दिखायी दे जाए लेकिन नहीं। अब जी लगाना तो हमारी सभ्‍यता है इसलिए लगा ही देते हैं, शेष बड़ा भाई आदि उम्र के बाद ही तय करेंगे। आप एकाध साल और रूक जाइए आपको यहाँ लोग सोने की सीढी चढा देंगे, समझ गए ना कि पर दादा बना देंगे। बहुत आनन्‍ददायी पोस्‍ट। भारत में आपका स्‍वागत है।

विष्णु बैरागी ने कहा…

दिल्‍ली-जबलपुर की, सत्रह घण्‍टोंवाली यात्रा की परेशानी कस हल्‍ला मचा रहे थे, उसके इतने अच्‍छे परिणाम की कल्‍पना तो आपने भी नहीं की होगी। यह पोस्‍ट 'गल्‍प' का अच्‍छा उदाहरण है-बिलकुल 'गार्डन फ्रेश' की तरह। पढते-पढते हर ताजगी आ जाती है।

ब्‍लागीरी का दरवाजा चौबीसों घण्‍टे खुला रहता है - 'जो चाहे सो आवे।' इसलिए आप निश्चिन्‍त रहिए, अच्‍छे-अच्‍छे 'धन्‍धेबाज' चाहेगे तो भी ब्‍लागीरी को व्‍यवसाय नहीं बना पाऍंग। हॉं, अपवाद सब जगह होते हैं किन्‍तु अपवाद अन्‍तत: सामान्‍य नियमों की ही पुष्टि करते हैं।

ब्‍लॉग की कोई 'बाउण्‍ड्री वाल' का न होना भी इसे 'साहित्‍य' बनने से रोकेगा। यह अलग बात है कि साहित्‍यकार यहॉं भी अपनी टोलियॉं बना कर बैठे नजर आ जाऍं। किन्‍तु मुझ जैसे नासमझों की विशाल भीड के कारण वे सदैव अल्‍पमत में ही बने रहेगे और ब्‍लॉग का खुरदरापन इसकी सुन्‍दरता बना रहेगा।

उम्‍मीद है, यात्रा अच्‍छी रही होगी और इस पोस्‍ट ने सारी थकान 'कपूर' कर दी होगी। आपकी कुशलता के समाचार आपसे ही मिलेंगे। मैं मोबाइल पर आपकी आवाज की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

Arvind Mishra ने कहा…

मुई ब्लागिंग जो जो न कराये :)
मेरी कब्र पर पर साजे इकतार लेकर
उम्मीद अब भी इक गीत गा रही है
समीर लाल 'समीर'
कहते हैं काशी में मुक्ति मिलती है ..
हम बाट जोह रहे हैं !

Somesh Saxena ने कहा…

समीर जी आपका यह लेख पसंद आया मुझे। प्रसिद्ध और नामवर होने का दर्द क्या होता है ये आज जाना। और आपका अंदाज-ए-बयाँ तो हमेशा ही रोचक होता है।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

Blogging is more like India politics rather than an Industry. Industry has some rules and regulations ... some kind of ethics.
I do not find any in Indian Blogging.

ana ने कहा…

मज़ा आ गया पढ़कर

संजय बेंगाणी ने कहा…

भारत में आपका स्वागत है.

जब औखंली में सर दे दिया है तो मुसल से क्या डरना. ब्लॉगिंग करते रहें. और हिंग्लिश से बचें... :)

अशोक बजाज ने कहा…

आपके मनोभावों को इस पोस्ट में पढ़ा .अच्छा लगा . भारत में स्वागत है .

रश्मि प्रभा... ने कहा…

mazaa aa gaya .... hanste hansaate bahut kuch kah diya aapne ...... apni dharti per aapka swaagat hai

sangeeta ने कहा…

ha ha ...sirf chaar saal me dadda ban gaye aap ....

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

" सोचता हूँ कि काश, फिल्म इन्डस्ट्री में होता तो इस उम्र में तो सलमान की जगह मैं बिग बास का संचालन कर रहा होता. युवाओं का आईकान, जाने कितनों का स्वप्नकुमार और रातों की नींद, तन्हाई का साथी और दीवारों पर टंगी तस्वीर. आहें भर रहे होते लोग मेरे नाम पर मेरी इस बाली उम्र में और यहाँ..चार साल की ब्लॉगिंग में जिस स्पीड से उम्र बढ़ी है, इस रफ्तार से कदमताल मिलाने के लिए महामानव होना जरुरी लग रहा है और मैं, चुपचाप बैठा निठल्लों की तरह कह रहा हूँ कि समय बहुत तेज भाग रहा है. "

निसंदेह समय तेजी से भाग रहा है और हम पीछे रह गए है .... बिग बॉस का यदि आप संचालन कर रहे होते तो हम लोगों को आपके ऑटोग्राफ लेने के लिए भरी मस्सकत करनी पड़ती ..... अच्छा है की आप ब्लागर हैं कम से कम आपकी टीप आसानी से मिल जाती है ... बिग बॉस में आपकी और डौली की जोड़ी खूब कामयाब होती .... हा हा हा हा

anitakumar ने कहा…

बिन ब्लोगिंग में उतरे भी अपना हाल कुछ ऐसा ही है।
चलिए हम तो आप को नाम से ही पुकारेगें क्युं कि जब नेहरू जी मरे थे हम सच में उनकी मौत पे रोये थे दूध के लिए नहीं।
भारत के नवोदित युवा कांग्रेसी नेता श्री समीर लाल को भविष्य में मुख्य मंत्री बनने का आशीर्वाद भी देते चलें

Raviratlami ने कहा…

हा हा हा.... वाकई अब तो हमें भी लगने लगा है कि गलत आ गए यार... वो भी हिंदी ब्लॉगिंग में...

क्या कमाल का व्यंग्य लिखा है तूने यार, तेरा जवाब नहीं.
(जब 100 ब्लॉग थे तब के गोल्डन समय की याद दिला रहा हूं... :))

sanjay ने कहा…

pintu babua....kahe pireshan ho rahe hain.......aap to blogwood ke 'asli-
babua' hain....b k b(blog ke bachhan)

pranam.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

sir aap to hamare big boss har samay rahoge.........god bless!!

वाणी गीत ने कहा…

बेटी CA कर रही है ...अक्सर कहती है किसी दुश्मन को भी सलाह नहीं दूँगी CA करने की ...
मुझे लगता है कुछ वर्षों में ब्लॉगिंग के लिए भी यही कहा जाने लगेगा ...जैसा कि आपकी पोस्ट कह रही है !

रानीविशाल ने कहा…

सचमुच बाली उम्र के साथ बड़ा अन्याय हो गया अभी ब्लोगिंग की उम्र के हिसाब से तो आप अनुष्का के हम उम्र हो गए :)
क्या क्या ख्याल आजाते है आपके मन में अचरझ होता है कभी कभी .....हँसी मजाक में ही कितनी सही बातें कह देते है . स्वदेश के अनुभवों की प्रतीक्षा है .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ब्लोगिंग में वाकई उम्र बहुत तेज़ी से बढ़ी .... :):) कब्रिस्तान की यात्रा ...नहीं जी आप तो भारत की यात्रा लिखियेगा ...

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

समीर लाल जी, इस ब्लॉग जगत ने आप जैसी प्रतिभा से रूबरू कराया है, और हमारे लिए ये गर्व की बात है.

cmpershad ने कहा…

`मैं बचपन से यह गलती करता रहा हूँ'

मैं जिंदगी में हरदम रोता ही रहा हूं
रोता ही रहा हूं, तडपता ही रहा हूं :)
मोहम्मद रफ़ी

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

भावनाओॆ की सफल अभिव्यक्ति।
..भारत आने से पहले लिखी गई यह पोस्ट शानदार है।
..सुफेद बालों का आपके व्यवसाय के लिए इतना महत्व है तो फिर रहने दीजिए..मैं तो तुरत बाल रंगा लेता हूँ।
..ब्लॉगिंग इंडस्ट्री नहीं है। यह तो संवेदनशील लोगों का ऐसा जमावड़ा है जो सहज ही घर बैठे उपलब्ध हो जाता है। जहाँ इक दूजे के दिल की बात सुनी जाती है। विचारों में भिन्नता स्वाभाविक है लेकिन विचारों का आदान प्रदान तो होता है।
...निःस्वार्थ भाव से किया गया काम कभी गलत नहीं हो सकता।
...आपका भारत में स्वागत है।

sada ने कहा…

आपका स्‍वागत है अब तो आप हिन्‍दुस्‍तान की धरती में पहुंच चुके हैं .....और लेखन हमेशा की तरह बहुत ही अनुपम ...आभार इस विधा के लिये ।

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

आज की पोस्ट मिली बगैर किसी टिप्पणी की क्योंकि सब सोच रहे होंगे कि जब आप मिलेंगे तभी इस पोस्ट पर चर्चा करके आपको वाहवाही सुनाने का मौका रूबरू दे देंगे. लेकिन बुजुर्गवार ( शायद इसी लिए पोस्ट में जिक्र हो) ये संयोग मुझे तो मिलने वाला नहीं. पोस्ट पढ़कर मजा आ गया और हंसी भी खूब. केशव वाली बात अब बाकी कहाँ रह गयी है? बाल रंगे नहीं तो फिर क्या उम्मीद करते हैं? फिर भी रुतबा और इज्जत जैसी चीज सबको नहीं मिलती. कुछ होता है इंसान में जब लोग हर साल एक दर्जा बढ़ा कर ऊपर चढाते चले जा रहे हैं. चलिए ये टिप्पणी भी भारत में ही आकर पढियेगा.

वन्दना ने कहा…

पढकर मज़ा आ गया……………आपका भारत मे स्वागत है।

अजित वडनेरकर ने कहा…

बाबा बनने में कौनो बुराई नाहि...:)

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर आलोचनात्मक आलेख बधाई समीरजी

rashmi ravija ने कहा…

आज तो..शब्द-शब्द, दिल का दर्द ...बयान कर रहा है...

पर compensate हो गया ,ना...अच्छा हुआ विदेश ,चले गए.... वहाँ तो सब आपको "Sam' कह कर बुलाते हैं...:)

Evergreen Sam :)

नरेश सिह राठौड़ ने कहा…

समझ नहीं पा रहा हूँ कि मात्र दिल की भड़ास है या सच्चाई है | लेकिन भाषा शैली तो वही जो पहले थी |

shikha varshney ने कहा…

अरे स्वर्गवासी हों आपके दुश्मन .अभि तो इंडिया में हैं जरा बिग बॉस के सेट पर चक्कर लगा आइये सलमान खान बेचारा बहार नजर आएगा गेट के.:)

अजय कुमार झा ने कहा…

जब आप ये पढ रहे होंगे तो आप भारत की धरती पर पहुंच चुके होंगे हमें पता है इसलिए अब कोई बात नहीं करेंगे ,अब आमने सामने ही देखते हैं कि कौन केतना बुढऊ हुआ है

anshumala ने कहा…

ये कहावत ऐसे ही नहीं बना है कि" ये बाल धुप में सफ़ेद नहीं किये है " सही कहा बालो कि सफेदी को आपके अनुभव से जोड़ लिया जाता है भले बाल डाई के कैमिकल रिएक्शन से हुआ हो | आप के अपने ही घर में हम क्या आप का स्वागत करे बस आशा है की जब तक यहाँ रहे आनंद के साथ रहे |

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हा हा हा ! आज बहुत दिनों बाद एक हास्य व्यंग से परिपूर्ण लेख पढने को मिला ।
पढ़कर मज़ा आ गया समीर जी ।
वैसे चिंता न करें , बाल तो आजकल धूप में यूँ ही सफ़ेद हो जाते हैं । आप अभी भी युवा ही हैं , नेता हों या अभिनेता ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अब तो हम भी यही सोच रहे हैं!
--
इस नशे को छुड़ाने का कोई उपाय बताइए!
--
आज के चर्चा मंच पर भी आपकी पोस्ट की चर्चा है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/11/335.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अब तो हम भी यही सोच रहे हैं!
--
इस नशे को छुड़ाने का कोई उपाय बताइए!
--
आज के चर्चा मंच पर भी आपकी पोस्ट की चर्चा है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/11/335.html

क्षितिजा .... ने कहा…

बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट पढ़ कर ... पढ़ते हुआ हर वक़्त एक मुस्कान रही चेहरे पर ...

आपका फैशन कॉन्शस होना ... कांग्रेसी होने का ठप्पा लगना ... आपका ब्लॉग्गिंग का सफ़र ... और कैसे कैसे आपकी तरक्की हुई ... इस पर एक मशहूर ग़ज़ल की एक पंक्ति याद आई ... ' आप से फिर तुम हुए फिर तू का उन्वान हो गए'... आपके केस मैं उल्टा है ... थोडा आगे बाद गए .. दादा नाना हो गए ..:)

"बस, संतुष्ट हूँ इस रीत का पालन कर कि शायद हिन्दी साहित्य जगत का हिस्सा कहलाया जाऊँ". ... amen

.धन्यवाद समीर जी पोस्ट हमारे संग बांटने के लिए ..

शुभकामनाएं

nilesh mathur ने कहा…

हमारी नज़र में तो आप साहित्य जगत के एक मजबूत स्तम्भ हैं!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप भी कहाँ कहाँ की बातें सोचते रहते हैं...आप गलत नहीं आये जनाब इंडस्ट्री गलत हो गयी है...जहाँ भीड़ बढेगी वहाँ शोर और गन्दगी तो फैलेगी ही...आप तो मस्त रहो...दिल्ली की गुनगुनी सर्दी का मज़ा लो और बेटे कि शादी के बाद जबलपुर में निश्चिन्त हो कर लंबी तानो...
इश्वर ने चाहा तो ज्ञान लेने देने हेतु आपसे मुलाकात की जुगाड की जायेगी :-)

नीरज

Deepak 'Prakhar' ने कहा…

Sam ji bilkul sahi kah rahe hai...........

ppaliwal ने कहा…

सर आप ब्लॉग जगत के अमिताभ बच्चन है .

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

इधर सारे युवक कांग्रेसी इंतज़ार में है
मिसफ़िट पर ताज़ातरीन

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

अरे हां घोड़े की नाल का क्या हुया
मिसफ़िट पर ताज़ातरीन

उस्ताद जी ने कहा…

7.5/10

ये साधारण सी पोस्ट भी मुझे क्यूँ दिलकश लगी ..बता पाना मुश्किल है.
आप संजीदा बातों को भी किस तरह किस्सागो अंदाज में सहजता से कह जाते हैं, यह बहुतों के लिए सीखने वाली बात है.

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

कान्ग्रेस के बाल या कहे शिशु नेता के बारे मे पढ कर आंन्द आया .
भारत आगमन पर स्वागत है आपका .
मै भी सी.ऎ बनने के च्क्कर मे था लेकिन नही बना क्योकि जब मैने इसकी हिन्दी जाननी चाहिये तो एक ने बताया भाडे का लेखाकार :-)

ज्योति सिंह ने कहा…

main to tippani karne aai rahi magar sabke vicharo ko padhte huye soch me padh gayi kya likhoo ,badhiya post jahan comment bhi dilchsp rahe ,swagat hai is desh me aapka .

mehzabin ने कहा…

intresting post...

Anand Rathore ने कहा…

ब्लॉगिंग अगर इंडस्ट्री है तो गलत आ गये यार!!!

shayad aapne suni ho..

apni marzi se kahan apne safar ke hum hain..
rukh hawayon ka jidhar hai..udhar ke hum hain...

Shah Nawaz ने कहा…

युवक कांग्रेस तो हमने भी ज्वाइन की थी, लेकिन राजनीति जमी नहीं इसलिए छोड़ दिया! अब सोचता हूँ, की मेरा वह फैसला अच्छा था.








प्रेमरस.कॉम

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत बढिया. स्वागत है अपने घर में आपका.

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

राजनीति पर आपकी नीति
ब्‍लॉगिंग से आपकी प्रीति
सब सुंदर है
मन सुंदर है
दिल्‍ली के नुक्‍कड़ पर समीर लाल जी मिल जाएं

समीर यादव ने कहा…

समीर जी ब्लॉग जगत के लिए आप आदरणीय हो चुके , साहित्य जगत में स्वीकार्यता तो वैसे भी प्रतीक्षा की विषयवस्तु है...दादाजी..??
भारतवर्ष में आपका स्वागत है...! इस बार भी आपसे भेंट नहीं हो सकेगी शायद, क्योंकि मैं अब जबलपुर से और दूर..नीमच में पोस्टेड हूँ. बहुत शुभकामनायें.

Madhu chaurasia, journalist ने कहा…

स्वदेश में आपका स्वागत है

एस.एम.मासूम ने कहा…

समीर जी . अगर कुछ लोगों ने इसी इंडस्ट्री बना लिया है तो आप जैसे लोगों ने ब्लॉगजगत की इज्ज़त को बरक़रार भी रखा है. हिन्दुस्तान की ज़मीन पे आप का स्वागत है. दिल्ली वाले किस्मत वाले हैं आप से मिल भी लेंगे. मुंबई वालों का क्या होगा?

डा० अमर कुमार ने कहा…

शौक जागा ब्लॉगिंग का, वो भी हिन्दी में...<>
:(


क्या मतलब ?
भाई जी, इसे जरा स्पष्ट तो करिये !
देखिये.. मॉडरेशन की कसम तोड़ कर आया हूँ ।
आपको श्रद्धेय, गुरुवर, आदरणीय, परमपूज्य वगैरह भी नहीं कहा,
अब तो यह स्पष्ट कर ही दें कि.." वो भी हिन्दी में " के क्या मायने हैं ?

अभिषेक ओझा ने कहा…

इंडस्ट्री है तो मैं सेक्टर बीटा निकलता हूँ फिर वोलाटिलिटी भी निकलते हैं :) और हाँ समीर बेटा बहुत अच्छा लिखते हो.

(अब हैप्पी हो लीजिये ;)

Archana ने कहा…

उस्ताद जी से ७.५/१० मिले,और किसी ने जी के अलावा कुछ नही कहा है अब तक ...हा हा हा ---सही जा रहे हो -----

दीपक 'मशाल' ने कहा…

chaliya aap.. aate hain ham bhee peechhe-peechhe.

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

कहाँ-कहां जाना बंद कर दे कोई ,हर जगह कुछ-न-कुछ ग़लत आ जाने का बोध होता हो अगर, तो ....?

Avimuktesh ने कहा…

baal to tab bhi safed ho gaye aapke.. ha ha!!
maja aa gaya padh ke.. Bharat me aapka swagat hai :)

पद्म सिंह ने कहा…

मान्यवर दादा जी !(बंगाली वाला.. यूपी वाला नहीं:)

दिल्ली से जबलपुर के बीच ट्रेन के सफर में दीवारों पर कहीं न कहीं लिखा पढ़ ही लेंगे ... "बचपन की गलतियों का शर्तिया इलाज"!
बचपना अपनी नासमझी के कारण बहुत सी गलतियों से रूबरू होता है ...जो इतनी मोहक/सम्मोहक होती हैं कि इंसान उसमे जानबूझ कर फँस जाता है... लेकिन उसका असर पूरी उमर साथ रहता है...इसी तरह आप ब्लोगिंग के असर से भी नहीं बच पायेंगे... संभवतः इसका शर्तिया इलाज भी नहीं है कहीं ...

दूसरी बात.. किसी लकीर को छोटी करनी हो तो उसके बगल में बड़ी लकीर खैंच दो बस्स..
इसी लिए हम जैसे लोग आपको दद्दा, चच्चा,नाना मामा बोल कर अपनी उमर पर पर्दा डाल रहे हैं ... इन झांसों में मत आइये और लगे रहिये ... नमस्ते
इंशाअल्ला कल मुलाक़ात होगी :)

anoop joshi ने कहा…

hai dude that's not good.now allways we call u dude.

sorry sir naraj mat hona. ye dude kya hota hai mujhe nahi pata. ha sirf itna pata hai ki aajkal ki nojawan pidi, is sabd ka khoob pryog karti hai.

निर्मला कपिला ने कहा…

गलतियाँ करते रहने मे भी कोई बुराई नही है जी गलतिओं से ही तो इन्सान सीखता है। हम भी 5 बरस की उम्र से काँग्रेस मे आये थी अभी तक बने हुये हैं और मरते दम तक बने रहेंगे। रोटी अब तक नेहरू जी के बनाये भाखडा बान्ध से ही तो खा रहे हैं कर्ज तो चुकाना ही है। आपका ब्लागिन्ग मे आना सब के लिये पथपर्दर्शक जैसा है अब पीछे क्यों हटना? बहुत अच्छी लगी पोस्ट। बधाई।

anju ने कहा…

हा -हा -हा .................:).लगे रहो समीर 'भाई '

anju ने कहा…

समीर जी
समीर भाई
ताऊ जी
गुरुदेव
कनाडा वाले भैया
श्री उड़न तश्तरी जी
सर जी
श्रद्धेय
समीर साहेब
इतने सारे नाम तो फिल्म इंडस्ट्री ने सलमान खान को भी नहीं दिए जितने ब्लॉग जगत ने आपको दिए हैं.आप बिल्कुल सही इंडस्ट्री में हैं:)

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

आपकी भारत यात्रा मंगलमय हो।

---------
मिलिए तंत्र मंत्र वाले गुरूजी से।
भेदभाव करते हैं वे ही जिनकी पूजा कम है।

Manish ने कहा…

हमारे जैसे लोगों को भी नहीं बख्शा!!.... खुद को तोलते हुए सब पर पहुँच जाते हैं.. इधर चेहरे की मुस्कान कुछ ज्यादा हो रही थी सो इस बार रहा नही गया जानबूझ कर कमेंटिया रहा हूँ..

mahendra verma ने कहा…

समीर भाई साहब, आपकी रचनाएं यह सिद्ध करती हैं कि आप एक अच्छे साहित्यकार हैं।

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

सिर्फ वहीं शांति भंग करें जो सफेद बाल वाले तथाकथित वरिष्ट चाहते हों जटिल मुद्दों से आमजन का ध्यान भटकाने के लिए

manoj trivedi ने कहा…

स्वागत समीरजी ! हार्दिक साधुवाद !!
अचरज होता है, आप 'उड़न तश्तरी' की हर पोस्ट लिखने, और उस पर आने वाली इतनी सारी टिप्पणियों को पढ़ते हुए इतना समय कहाँ से निकाल पाते हैं, कि एक साधारण से ब्लोगर की चंद शब्दों की एक पोस्ट पर प्रेरक टिप्पणी प्रेषित कर देते हैं !!!!!

manoj trivedi ने कहा…

स्वागत समीरजी ! हार्दिक साधुवाद !!
अचरज होता है, आप 'उड़न तश्तरी' की हर पोस्ट लिखने, और उस पर आने वाली इतनी सारी टिप्पणियों को पढ़ते हुए इतना समय कहाँ से निकाल पाते हैं, कि एक साधारण से ब्लोगर की चंद शब्दों की एक पोस्ट पर प्रेरक टिप्पणी प्रेषित कर देते हैं !!!!!

lokendra singh rajput ने कहा…

वाह क्या बात है आप उस ज़माने के हैं जब हिंदी के मात्र १०० ब्लॉगर हुआ करते थे... एक बात तो है आज भी हिंदी ब्लॉग की भीड़ में आपका ब्लॉग अलग ही दीख पड़ता है...

Anjana (Gudia) ने कहा…

Hey Sameer, how are you doing, buddy??? ;-)

Anjana (Gudia) ने कहा…

Bahut achchi post hai, sir!

राम त्यागी ने कहा…

अच्छा करोगे तो वाहवाही तो मिलेगी ...पचाने की आदत तो डालनी पड़ेगी ...बाकी जब तूफान निकलता है तो उड़ने दो धुल को ...रुको मत , लिखते रहो , ये आप हो जो ब्लॉग के रूप में बाहर आता है ...

vishal ने कहा…

आपके हिन्दुस्तान में आपका स्वागत है। बहुत अच्छी आकांक्षा है आपकी। ईश्वर से कामना है अवश्य पूर्ण हो।

बस, संतुष्ट हूँ इस रीत का पालन कर कि शायद हिन्दी साहित्य जगत का हिस्सा कहलाया जाऊँ.

एक उम्मीद ही तो है...एक उम्मीद के सहारे ही तो पूरा भारत जिये जा रहा है, तब इसे मैं पाल बैठा तो क्या बुराई है??

हर्षवर्धन ने कहा…

पता नहीं लेकिन, कोई तो बड़ा आदमी (औरत भी हो सकती है) कह गया है। गलतियां करना जरूरी है। हर गलती सबक और अनुभव देती है। और, बाल पके पर चिंता की बात नहीं आजकल पानी में प्रदूषण ज्यादा हो गया है। इसीलिए बाली उमर में आपके बाल पक गए।
आइए अपने देश में, अपनी जमीन पर स्वागत है। देखिए ब्लॉगिंग की एक गलती से कितने लोग आपको स्वागत की टोकरी थमा रहे हैं वो, देश-दुनिया के जाने किस-किस कोने से। दिल्ली से गुजर रहे हों तो, मुलाकात हो। अच्छा लगेगा।

प्रकाश पाखी ने कहा…

यही गति रही तो वो दिन दूर नहीं जब जीते जी लोग स्वर्गवासी कहने लग जायेंगे... कहना ही तो है-हैं कि नहीं इससे तो पहले भी कहाँ मतलब रखा किसी ने.:):):):)

हा!हा!हा!

एक बरस में सौ बरस लगे पहुँचाने सोय
ब्लोगिंग के बर्ताव से दिया समीरा रोय

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

समीर जी आपका यह लेख बहुत पसंद आया मुझे!
आपका भारत मे स्वागत है भारत आने पर ......ओर आपकी भारत की यात्रा कहसी रही जरुर जरुर लिखना ! समीर जी बधाई और शुभकामनाये .............

जितेन्द़ भगत ने कहा…

अच्‍छा लगा काफी दि‍नों बाद आपको पढकर।

अल्पना वर्मा ने कहा…

bahut achchee lagi yeh post..
-very touching!

Laxmi N. Gupta ने कहा…

समीर जी,

ब्लागिंग इन्डस्ट्री तो है किन्तु हम और आप जैसे लोगों के लिए नहीं। भारत में अपनी कुंडली बिचरा के लाइएगा कि कौन सी इन्डस्ट्री आप के लिए उत्तम है।

शरद कोकास ने कहा…

फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी ।

'उदय' ने कहा…

... jeevan chakra ... bahut sundar ... behatreen abhivyakti !

Akshita (Pakhi) ने कहा…

इक साथ ही इत्ती बातें..लम्बे समय बाद आपको पढना अच्छा लगा अंकल जी.

Rahul Singh ने कहा…

ब्‍लॉग पोस्‍ट का शानदार नमूना.''मानो गलती से कुछ सीखने को तैयार ही नहीं''. शायद यशपाल की झूठा सच पुस्‍तक का समर्पण है- 'उस आम आदमी को जो हर बार झूठ से छला जा कर सच की ओर बढ़ने का साहस नहीं छोड़ता'

दिगम्बर नासवा ने कहा…

समीर भाई उम्र में क्या रक्खा है ... अभी तो ....
बस क्या कहूं अब ..

Kajal Kumar ने कहा…

बड़े आदमी होने की इच्छा राजनीति में ले जाने के लिए क्या क्या नहीं करवाती. पैसा आ जाने के बाद भी सामाजिक पहचान पाने की प्रबल इच्छा कइयों को उधर धकेले रहती है. जहां तक ब्लागिंग की बात है...सही बात है, उधर वाले इधर वालों को साहित्याकार मानें या ना मानें कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता. आज अंग्रेज़ी में इलेक्ट्रानिक किताबों का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, पारंपरिक पुस्तक प्रकाशन अगर सिमट नहीं रहा है तो भी उसका marginal rate of growth घनात्मक नहीं है. इसी बीच बहुत से नए लेखक छप व बिक रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ सुनने में यह भी आता है कि हिन्दी के तथाकथित बड़े-बड़े धुरंधरों की भी बस 500-500 प्रतियां ही छपती हैं, उनमें से भी कई तो पारिश्रमिक के ही नाम पर लेखकों को ही टिका दी जाती हैं कि - "जाओ क्या याद करोगे, छाप दिया न ! अब कमाओ खाओ." ऐसे में ब्लागिंग अपनी बात अपने तरीक़े से कहने का मौक़ा देती है...अगर बहुत बड़ी ब़ड़ी उम्मीदें इससे न रखी जाएं तो...

Parul ने कहा…

aakhir kis udhed-bun mein likha hai sir ji..kahin..kahin soch se humko bhi uljhna pada hai!

gayatri ने कहा…

welcome back in india ....
sir aap wakai main karna kya caahte hai ????

gayatri ने कहा…

most welcome back in india .... sir aap wakai main kya banana caahte hai?? ....

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

कभी ब्लागिंग संवाद के सशक्त माध्यम के रूप में उबर पर अब तो अपने में ही सिमटता जा रहा है...भारत आगमन की बधाई.


_________________
'शब्द-शिखर' पर पढ़िए भारत की प्रथम महिला बैरिस्टर के बारे में...

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

लेख पढ़ कर लगा जैसे किसी ने नुकीली पेंसिल चुभो दिया !
अच्छा व्यंग्य है !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Rambabu Singh ने कहा…

प्रतिक्रिया देने में जरा देर हो गई है परन्तु आपकी लेखन से ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे मानो मन की सारी बाते पन्नो पर उड़ेल दी है |
वैसे भी आप हमारे ब्लॉग जगत के महापुरुष है | आपसे मिलकर मैं धन्य हो गया | आपको अपने घर में हमारे ओर से स्वागत है |

sheetal ने कहा…

bahut acchi lagi aapki yeh post,aap prashidh hain isiliye to itne vishisht sambhodhan se sambhodit kiye jaate hain ab kya kijiyega aapne raah bloging ki jo chuni.har cheez ke advantages aur disadvantages hote hi hain.
kabhi aap apni is udan-tashtari main baith mere blog destination par bhi land ho,aapka swagat karte mujhe bahut khushi hogi.
http://kisseaurkahaniyonkiduniyaa.blogspot.com
sheetalslittleworld.blogspot.com.
main yahi rehti hun.
ant main ek baar phir aapki is behtarin post ke liye aapko badhai deti hun.

रंजना ने कहा…

आपके मन का भार हमारे मन तक भी पहुँच गया...बोझिल हो गया...

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

आ गये न अब
ताज़ा पोस्ट चैंप दो दादा
1. ब्लाग4वार्ता :83 लिंक्स
2. मिसफ़िट पर बेडरूम
3. प्रेम दिवस पर सबसे ज़रूरी बात प्रेम ही संसार की नींव है
लिंक न खुलें तो सूचना पर अंकित ब्लाग के नाम पर क्लिक कीजिये

राहुल प्रताप सिंह राठौड़ ने कहा…

भारत आगमन पर स्वागत ...

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

अजि ब्लॉगिंग ना होती तो कहां इतने दोस्त होते । तो कब आ रहे है ?

निठल्ला ने कहा…

वाह चच्चा, पामेला एंडरसन के आने की खबर क्या सुनी सलमान की जगह बिग बॉस के संचालन के ख्वान देखने लगे....लगे रहिये ख्वाब देखने में ना टैक्स है ना कोई फीस

JHAROKHA ने कहा…

Is bar ki post to vakayi bahut sare manobhavon ko abhivyakt kar rahi hai---achchhii lagi post.
shubhkamnayen.
Poonam

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

कोई बात नही ब्लॉगिंग जगत के बिग बॉस तो आप ही हो..ऐसा मैं समझता हूँ...आप से भारत में मुलाकात के बाद यह पोस्ट पढ़ने को मिला चूँकि पहली बार मुलाकात हुई तो इस पोस्ट को अब तक के सभी पोस्ट से ज़्यादा करीब पा रहा हूँ...बढ़िया मजेदार चर्चा....बधाई

अनुनाद सिंह ने कहा…

Amar_or_Kundali font to Unicode Converter_03.htm

http://technical-hindi.googlegroups.com/web/Amar_or_Kundali+font+to+Unicode+Converter_03.htm?gda=_Cy-m2IAAABK7OLuOm601guSX11NJCeP2uoz0aBri4ejkEd_rvL-NHVxJ4ChbfiF12mbX4i_6v6AhZGdV98ojuMQYvdyfRC9fumAvWarnISmI5vey3KrblXi7dpriIAjJhAipsb2do-CHqjxxwsG8_oKG53kozMh

प्रेम सरोवर ने कहा…

BHai saheb aap to masti mein hain.laut ke aa ja mere dost lekin kam dhandha pura karne ke bad. Hardik swagagat hai.Plz, visit my blog.

कुमार राधारमण ने कहा…

हद है। लोगबाग इंडस्ट्रियलिस्ट बनने के सपने देखते हैं और आप हैं कि..........

महाशक्ति ने कहा…

2006 ke last tak me ham bhi kafi asmanjas me the ki apne se dugne bade age ke vyakti ko kya kaha jaye? ye aapke sath hi nahi anup ji, jitendra ji, priyankar ji, aflatoon ji jaise kai bloggero k sath tha...... jo meri age k double the, to vahi se sameer ji, anup ji aadi kahna hi uchit samjha ek do bar chacha aadi banae ki sochi bhi to... man me aaya ki kisi ki bhrukti tani to teek nahi hoga. so abhi tak sabhi k sath G se kam chala le rahe hai

anjana ने कहा…

nice...

Shri Guru Nanak Dev ji de guru purab di lakh lakh vadhaian hoven ji

Swarajya karun ने कहा…

अगर इंडस्ट्री है और चाहे गलत भी आ ही गए , तो अब जाएंगे कहाँ ? यहीं लगे रहिए और जमकर जमे रहिए- ब्लागरों के मसीहा बन कर .राजकपूर की फिल्म 'मेरा नाम जोकर का गाना गुनगुनाएं -जीना यहाँ , मरना यहाँ ,इसके सिवा जाना कहाँ ? खुदा आपकी बाली उमर को और भी लम्बी से लम्बी उमर दे . दिलचस्प व्यंग्य लेखन के लिए बधाई .