बुधवार, अगस्त 05, 2009

हाय रे, ये विचार-रुकते क्यूँ नहीं!!

बीमारी से उतनी परेशानी नहीं, जितनी खाली लेटे लेटे आते जाते विचारों से होती है.

अब रक्तचाप ऐसी बीमारी भी नहीं कि तकलीफ दे या बुखार आ रहा हो. बस, हल्की सी कमजोरी रहती है और क्या.

खूब नापो!!

एक तो यहाँ के मेडीकल रिवाज मुझे पसंद नहीं आते. डॉक्टर बिना टेस्ट, जैसा भारत की तरह मौसम देख बीमारी जान जायें, सिम्पटमबेस कुछ दवाई ही नहीं देते. फिर टेस्ट कराने का एपॉइंटमेन्ट कब का मिलेगा. स्पेश्लिस्ट से कब का समय मिल पायेगा, कोई भरोसा नहीं.

एक मित्र हैं, उनके स्पेश्लिस्ट का समय उन्हें ६ माह बाद का मिला है, तब तक शायद वो ही बच रहें या उनकी बीमारी. वैसे हमारे मित्र हैं, भारतीय हैं तो भरोसा है कुछ न कुछ नया सा ही होगा. कहो वो स्पेश्लिस्ट ही न निपट जाये. अनुभव अर्जित करने में इतना व्यस्त होते होते काफी उम्र गुजार ही चुका है.

एक बार याद आता है कि मुझे बड़ी तेज एसीडिटी का अटैक हुआ. लगा कि हार्ट अटैक ही होगा. तुरंत पत्नी और एक मित्र के साथ भागे अस्पताल. पहला डॉक्टर तुरंत मिलता है और हालत का अंदाजा लेकर आपको क्यू में डाल देता केसानुसार. हम भी क्यू में लगा दिये गये स्ट्रेचर पर लेटे.

कई बार झूट मूट मूँह लटका कर नर्स से कहा कि छाती में बाईं तरफ दर्द उठ रहा है जिससे वो उसे हार्ट की समस्या समझ डॉक्टर को बता दे और वो तुरंत अटैंड कर ले. मगर आप एक शातिर तो वो दो. सब समझते हैं और हम टंगे रहे वेटिंग में. पहली जो दवा उसने दी थी माईल्ड सी, वो खा कर. ५ घंटे बाद जब हमारा भरती होने का नम्बर आया, तब तक एसिडिटी अपने आप ही बिदा हो ली थी. उसके रुकने की भी एक सीमा रेखा है.

बीबी और महबूबा में यही तो अंतर है. बीबी दिल की धड़कन, अंतिम दम तक साथ बनाये रहती है और महबूबा, आई, मिली और बाय बाय, चली. दोनों की ही अपनी अपनी अच्छाईयाँ हैं मगर यहाँ वो विषय वस्तु नहीं है इस आलेख की, तो प्रकाश नहीं डाला जा रहा है.

जब नम्बर आया तो डॉक्टर ने कहा कि हाँ, अब आप अपनी समस्या बतायें. क्या हुआ है?

हमने कहा कि इतनी देर बाद तो अब आप ये पूछो कि क्या हुआ था. अभी तो सब बेहतरीन है. आप तो क्षमा ही करें और अब हमें जाने दें. मगर वो काहे आये मेहमान को जाने दे. पचास तरह के टेस्ट करा डाले. मेहबूबा एसीडिटी तो निकल ही ली थी, वो तो पकड़ाई नहीं बल्कि टेस्ट वेस्ट के चक्कर में उसकी सहेली जो उसे लेकर आई थी, पथरी पकड़ गई, जिससे कुछ लेना देना न था. अरे, चार छः बीयर पीते, खुद ही बह निकलती मगर तब वो डॉक्टर अपनी लेज़र तलवार कहाँ चलाता. बोफोर्स तोप टाईप शो पीस तो है नहीं, काम करती है, यह उसने साबित कर दिया तब माना. दो दिन अस्पताल में भरती रहे थे.

तब ब्लॉगिंग नहीं किया करते थे वरना तो खूब चटखारे लेकर अस्पताल के किस्से सुनाते. डॉक्टर से लेकर ऑपरेशन रुम से नर्स तक के. खैर, नहीं सुना पाये तो अब नहीं ही सुनायेंगे जब तक आप जिद्द न करने लगो.

वैसे, अब जाकर समझ में आया कि यहाँ के डॉक्टर विश्व भर में काहे नाम कमाये हुए हैं. जब तक मरीज को देखने का नम्बर आता है, ७०% तो अपने आप ठीक हो जाते है. २० % इनकी दवा से और १०% मर भी जायें, तो उनकी आवाज ९०% के जयकारे के आगे सुनेगा कौन?

ये डॉक्टर तो इस आधार पर कनाडा की ३.५ करोड़ आबादी को चला लिए जा रहे हैं. हमारे पुरनिया प्रधान मंत्री नरसिंहा राव तो १०० करोड़ से उपर की आबादी को आँख बंद किये, मूड़ हिलाते इसी लॉजिक पर चला ले गये.

किस्से और सोच की कडियाँ तो चलती ही रहेंगी. पिछले हफ्ते सब ब्लड टेस्ट, इसीजी, यूरीन और जाने क्या क्या टेस्ट हुए. इस पर भी ऐसा है कि ’नो न्यूज इज गुड न्यूज’. अगर डॉक्टर को कुछ सलाह देने लायक लगेगा तो ही फोन आयेगा समय बुक करने के लिए अन्यथा मस्त रहिये. आपकी रिपोर्ट आपके डॉक्टर की फाईल में जाकर लग जायेगी.

एक तरह से अच्छा ही है मगर जब ऐसे टेस्ट के बाद डॉक्टर के ऑफिस से फोन आता है कि समय बुक करिये, डॉक्टर आपसे मिलना चाहते हैं आपकी रिपोर्ट पर बात करने को, तो उस समय से लेकर मिलने तक घिघ्घी बंधी ही सी रहती है, कि जाने क्या हो.

लगा कि अब बच क्या रहा है, एक डायबटीज़ ही बाकी है जो आज नहीं तो कल, चला ही आयेगा उम्र के इस पड़ाव में. उससे भेटें बगैर तो निकल न पायेंगे तो जब डॉक्टर का कल फोन आया कि मिलना चाहता है तो बस, न जाने क्या क्या ख्याल दिल में आने लगे. खराब खराब से. एक ई सी जी लिया था. प्री मील और पोस्ट मील ब्लड और यूरीन. तब या तो ई सी जी गड़बड़ाया है या फिर ब्लड शुगर. राम राम भजते रहे.

रात में दो ठो मिठाई भी दबा लिए कि कहीं डायबटीज निकली तब तो इससे दूरी हो ही जाना है. मिठाई से मिलते एकदम वो ही फीलिंग रही जैसे कॉलेज के बाद गर्ल फ्रेण्ड की शादी और कहीं तय हो जाये और हम आखिरी बार मिल रहे हों. इससे आपको समझने में सहूलियत होगी, इसलिये यह उदाहरण दिया और कोई खास वजह नहीं है.

आज गये थे डॉक्टर के यहाँ. ईश्वर का लाख लाख शुक्र-न शुगर की शिकायत निकली और दिल तो ऐसा बेहतरीन आया कि डॉक्टर कहने लगा कि अगर अभी भी फेंक दो तो टूटेगा नहीं यह मेरा दावा है. हमने कहा कि दिल की गारंटी तो तुम ले ले रहे हो, हाथ पैर की कौन लेगा? बताओ? चुप हो गया बेचारा. बस, कहने लगा कि B12 की कमी जोरों पर हैं तो बूस्टर लगेंगे. हमें क्या गुरेज, लगाओ. हम तो है ही तुम्हारी छत्र छाया में.

रक्तचाप भी शनैः शनैः काबू में आ ही रहा है. कितना कौन उधम कर पाया है, सभी को आना ही होता है एक दिन काबू में तो यह तो बेचारा रक्तचाप है. और है भी तो अपना ही.

खैर, सुनते हैं भारत में गरमी अभी भी बेतरह सता रही है. हाय!! पानी क्यूँ नहीं बरसता. गरमी के लिए इतना मधुर गीत अभी कुछ दिन पहले ही नवगीत की पाठशाला के लिए लिखा था. शायद बहुतों की तरह गरमी नें भी वहाँ न पढ़ा होगा इसलिए बारिश ठीक से नहीं आई. इसलिए यहाँ फिर से कि शायद गरमी पढ़ ले:

चले आओ!!

द्वारचार कर जाती गरमी


सोचो, जानो और समझ लो,
कैसे है सह जाती धरनी.
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी.

अक्सर शांत समुन्दर ने ही,
तूफां का आगाज किया है.
कठिन डगर चलने वाले को,
मंजिल ने सरताज किया है.

काम लगन से करने वालों,
मीठे फल है लाती करनी.
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी.

उजियारा होने से पहले,
होती है अंधियारी रात.
दुख के पीछे सुख आयेगा,
लगती कितनी प्यारी बात

बुरे वक्त में अच्छा सोचो,
दिल में है आ जाती नरमी.
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी.

जीवन जीना एक कला है,
उससे यूँ घबराना कैसा.
धूप छांव के बीच रहा है,
रिश्ता अजब पुराना जैसा

भावी खुशियों के खातिर ही,
पीड़ा है पड़ जाती सहनी.
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी.

-समीर लाल ’समीर’


-चित्र साभार: गुगल Indli - Hindi News, Blogs, Links

94 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

दिल तो ऐसा बेहतरीन आया कि डॉक्टर कहने लगा कि अगर अभी भी फेंक दो तो टूटेगा नहीं यह मेरा दावा है.
समीर लाल जी
सादर
उपरोक्त बात कुछ हज़म नही हुई. यह बात तो तक लिखते जब आप अपना दिल फेकते न होते. ब्लोगिंग के माध्यम से आप अपना दिल बतर्ज 'इस दिल के टुकडे हज़ार हुए --- आप फेकते ही रहते है.
रचना मन को भा गयी.
आपके स्वास्थ्यलाभ की कामना

रंजन ने कहा…

मजा आया.. वैसे हम जिद कर रहे है पुराने किस्सों कि.. सुना दो..

Arvind Mishra ने कहा…

बीमारी में भी ब्लागिंग करके आप एक नजीर छोड़ रहे हैं आने वाली ब्लॉगर कौमों के लिए -कोई तो आपको रोके -ठीक हो जाईये फिर से जमायिये -हम कहाँ भागे जा रहे हैं -आपके और भी बीमार प्रशंसक ब्लॉगर भी आपकी देखा देखी ब्लागिंग नहीं छोड़ रहे हैं -आशंका है की कहीं बीमार ब्लागरों की जमात आपकी अगुआई में धरना ही न दे दे यहीं -लिव एंड लेट लिव समीर जी !

विवेक सिंह ने कहा…

फोटू में आपका हाथ नहीं है यह दावे के साथ कह सकते हैं .

पक्का सबूत लाइये बीमार होने का, तब सुहानुभूति प्रकट की जायेगी :)

Vivek Rastogi ने कहा…

फ़ोटू में किसका हाथ है और कौन जांच कर रहा है यह भी जाँच का विषय है। :)

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

"बीबी और महबूबा में यही तो अंतर है. बीबी दिल की धड़कन, अंतिम दम तक साथ बनाये रहती है और महबूबा, आई, मिली और बाय बाय, चली."

मैं तो इसी विषय पर विस्तार से आपका लिखा पढ़ना चाहता हूँ ।

गीत जबर्दस्त है, और पहली पंक्ति तो पूछिये मत - "द्वारचार कर जाती गरमी ।"

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

रात में दो ठो मिठाई भी दबा लिए कि कहीं डायबटीज निकली तब तो इससे दूरी हो ही जाना है. मिठाई से मिलते एकदम वो ही फीलिंग रही जैसे कॉलेज के बाद गर्ल फ्रेण्ड की शादी और कहीं तय हो जाये और हम आखिरी बार मिल रहे हों.

बधाई हो जी. वापस मिठाई खाने की परमिशन जो मिल गई.:)

बहुत लाजवाब शैली है. इस शैली बाबा समीरानंद शैली के नाम से जाना जायेगा.

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अक्सर शांत समुन्दर ने ही,
तूफां का आगाज किया है.
कठिन डगर चलने वाले को,
मंजिल ने सरताज किया है.

बहुत बढ़िया, समीर भाई!
भावनाओं के सागर को दिल से
बाहर निकालते रहो।
रक्त-चाप से छुटकारा मिल जायेगा।
दिल मे ही रोके रहोगे तो रक्त-चाप
से कैसे छुटकारा मिलेगा।

जिन्दगी है तो उलझन-झमेले भी हैं।
वेदनाएँ भी हैं सुख के मेले भी हैं।।
जिन्दगानी बिना कुछ धरा ही नही,
आसमाँ भी नही और धरा भी नही,
जिन्दगी में भरे खेल-खेले भी है।
जिन्दगी है तो उलझन-झमेले भी हैं।

आपके शीध्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ।

Nirmla Kapila ने कहा…

बिमारी मे भी इतनी बडिया और लम्बी पोस्ट तभी तो रक्त्चाप भी डर के भाग गया
जीवन जीना एक कला है,
उससे यूँ घबराना कैसा.
धूप छांव के बीच रहा है,
रिश्ता अजब पुराना जैसा
बहुत सुन्दर कविता बधाई

Dhiraj Shah ने कहा…

आप के बारे मे कहना कुछ भी कम है तो डाक्टर की क्या मजाल आप को छेडे ।

आप के स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हु ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

हम तो सोचते थे यहाँ भारत में ही लाइन लगाना पड़ती है। पर वहाँ तो हाल और भी बुरा है। भारतीय डाक्टरों के लिए अच्छी खबर है कनाडा में ट्राई कर सकते हैं।
आप के लिए अच्छी खबर यह है कि राखी ने कनाडा वासी को वर लिया। शिकायत यह कि राखी का नाम तक नहीं ले रहे हैं। अब बिजली जाने वाली है। यह अंतिम टिप्पणी होगी उस के पहले की।

sarwat m ने कहा…

ब्लड प्रेशर जैसी वाहियात बीमारी और आपको !! मगर डॉक्टर कह रहा है, इंस्ट्रूमेंट बता रहा है तो मानना ही पड़ेगा. वैसे जिस स्पीड से ब्लोगिंग चल रही है, इस बीमारी के आपके शरीर पर ज्यादा दिनों तक ठहरने के चांसेस दीखते नहीं. आपकी गध शैली की प्रशंसा करूं या कविता की तारीफ, टॉप पर कौन है यही बता पाना मुश्किल है. खाते 'पीते'रहिये, राम भला करेंगे.

संजीव गौतम ने कहा…

भारतीय हैं तो भरोसा है कुछ न कुछ नया सा ही होगा. कहो वो स्पेश्लिस्ट ही न निपट जाये.----
हमारे पुरनिया प्रधान मंत्री नरसिंहा राव तो १०० करोड़ से उपर की आबादी को आँख बंद किये, मूड़ हिलाते इसी लॉजिक पर चला ले गये.
--रात में दो ठो मिठाई भी दबा लिए कि कहीं डायबटीज निकली तब तो इससे दूरी हो ही जाना है---दिल तो ऐसा बेहतरीन आया कि डॉक्टर कहने लगा कि अगर अभी भी फेंक दो तो टूटेगा
वाह-वाह मज़ा आ गया दिल की खूब कसरत हो गयी. अब दिन अच्छा गुज़रेगा. जय हिन्दुस्तान जय भारत जय इंडिया. जय उडन तश्तरी.

hairan pareshan ने कहा…

आप बहुत बडे रचनाकार हैं और मैं अभी अभी दाखिल हुआ हूँI मेरी हैसियत नहीं कि आप पर टिप्पड़ी दूंI इतना ही कह सकता हूँ कि भगवान आपको स्वस्थ करेI मेरे दो ब्लॉग हैं
http://hairanpareshan.blogspot.com http://iseeduniyamen.blogspot.com
आप अनुभवी लोग हैं और मैं इस क्षेत्र में नया -क्या करना चाहिए और कैसे आगे बढ़ना है इस मामले में आपकी सहायता चाहिए- क्या आप मार्ग दर्शन करेंगे- आप विदेश में हैं और बहुत बड़े आदमी हैं- मैं एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ और कंप्यूटर भी मेरा अपना नहीं है लेकिन उपलब्ध है- आशा है आप अन्यथा न लेकर उचित निर्देश देंगे.

जितेन्द़ भगत ने कहा…

बीमारी को हँसकर सहने से गम कम हो जाता है- आज का वि‍चार, जो मेरे मन में आया:)
आप स्‍वस्‍थ रहें,मेरी शुभकामनाएँ।

Reetika ने कहा…

Umda !! Thanks for sharing this piece

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

बीमारी में ऐसी मौज ले रहे हैं जैसे मेला घूमने निकले हैं। जय हो!

पत्नी और प्रेमिका का प्रकरण प्रकाशित करें,प्लीज़...। ऐं!अनुप्रास :)

संजय बेंगाणी ने कहा…

दिल को इधर उधर उछालते रहें, इससे उसकी कसरत होगी और वह स्वस्थ रहेगा :)

sada ने कहा…

भावी खुशियों के खातिर ही,
पीड़ा है पड़ जाती सहनी.

बहुत ही सुन्‍दर रचना, खासतौर पर यह पंक्तियां बहुत ही भाईं, आभार्

anil ने कहा…

ये भी हुनर ही है वहां के डाक्टरों का जो 70 % मरीजों को बिना दवाई के ही ठीक कर देते हैं

P.N. Subramanian ने कहा…

इसीलिये भारत आने पर अपना पूरा पूरा इलाज करा लेना चाहिए. हमने देखे हैं दांत उखाद्वाने के लिए लोग सिंगापूर से इंडिया आते हुए. आपका संस्मरण अत्यंत रोचक रहा और पुछल्ला याने कविता भी अच्छी ही थी (कहनी होगी!)

kshama ने कहा…

बीमारी में भी creativity चालू है ..तो काहेकी बीमारी ...! आप स्वस्थ होही जायेंगे ..इतनी दुआएँ आपके साथ हैं !

आपका लेखन कब शुरू करती हूँ , कब ख़त्म कर देती हूँ पताही नही चलता !

AlbelaKhatri.com ने कहा…

pahle akshar bi se lekar aakhri akshar mi tak ki poori yaatra adbhut anoothi aur aanandpoorna rahi.......
maza aa gaya
aap vahaan mithaai k maze le rahe ho hum aapki bheji hui meethee post ka maza le rahe hain .

waah
waah
anand aa gaya.................
aapko jald se jald swasthya laabh prapt ho,
aisee meri haardik shubh kaamnaayen
jai ho !

Mahesh Sinha ने कहा…

बधाई हो बधाई

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

बहुत अच्छा जी, अब खुल कर टिपेरिये। एक एक पोस्ट पर दो दो बार! :)

shama ने कहा…

Anek shubhkamnayen !
Maza aata raha padhne me!
http://shamasansmaran.blogspot.com

http://shama-kahanee.blogspot.com

http://shama-baagwaanee.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

Dr.T.S. Daral ने कहा…

उजियारा होने से पहले,
होती है अंधियारी रात.
दुख के पीछे सुख आयेगा,
लगती कितनी प्यारी बात
समीर जी इसी उम्मीद में दुनिया कायम है. इसलिए बी पी भी जल्दी ही ठीक हो जायेगा. परन्तु एक बात अवश्य कहूँगा की डाक्टरों के चक्कर में ज्यादा न पड़ें और अपनी सेहत का स्वयं ध्यान रखें. आप के साथ आपके पाठकों से भी गुजारिस है की मेरी अगली पोस्ट जरूर पढिये. काम की है.

hem pandey ने कहा…

इस रोचक शैली में प्रस्तुति हेतु साधुवाद.

शारदा अरोरा ने कहा…

अक्सर शांत समुन्दर ने ही,
तूफां का आगाज किया है.
कठिन डगर चलने वाले को,
मंजिल ने सरताज किया है.
ये पंक्तियाँ बहुत पसन्द आईं | | इतना हास्य का टॉनिक पिलाने वाला भला कैसे बीमार रह सकता है ? पिछली पोस्ट भी शानदार है , कि जल्दी से लिख कर छापें और बीवी के आने से पहले सर ढक कर चादर ढापे | स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएँ

Science Bloggers Association ने कहा…

Chinta ki kya baat hai? Blog o hai na?
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

तभी तो कहते है मेरा देश महान। यहाँ तो सरदर्द भी हो तो डाक्‍टर हाजिर। मुफ्‍त की सलाह देने वाले तो खैर हजारों ही मिल जाएंगे। इसलिए अपना देश अच्‍छा। अब यदि डॉक्‍टर छ: महिने का अपाइन्‍टमेंट दें तो भारत चले आना। एक दिन में काम के गारण्‍टी।

अजय कुमार झा ने कहा…

हमें तो पहले भी यकीन था और अब तो पूरा विश्वास हो गया है...बीमार इंसान तो ब्लॉग्गिंग कर नहीं सकता..मगर एक एलियन के लिए क्या असंभव है..मगर एक बात रोचक लगी ..ये बीवी और महबूबा का दखल ..एलियन के जीवन में है..वाह ये तो खूब रही..अजी आपको कुछ नहीं होने वाला..इसी बहाने आराम फरमाइए..हमारी दुआएं बोरी भर भर के आपके साथ है..और हाँ आपकी अध्यक्ष वाली पोस्ट भी आपका इन्तजार कर रही है ...

अंशुमाली रस्तोगी ने कहा…

जरूरत विचारों पर स्टॉप-लौस (शेयर बाजार की भाषा) लगाने की है।

पंकज बेंगाणी ने कहा…

जिद्द कर रहे हैं, पूराने मुर्दे उखाड़कर पेश् किए जाएंगे. अपन को नर्सों वाले किस्सों मे इंटरेस्ट रहेगा जो झुकाव उधर रखें.

:)

श्रुति अग्रवाल ने कहा…

सच कहा आपने, जब लंदन में थी तब कई इंडियन फैमली ऑफ द रिकार्ड राजीव को ( आर्थो सर्जन और मेरे सोलमेट) दिखाने आती थी। राजीव कहते हैं विदेश में आपको दो ही चीज मार जाती हैं एक कानूनी फंदे दूसरे बीमारी। इनसे बसो तो ही विदेश जन्नत है। यहाँ न्यूजीलैंड में भी यही हाल है। औऱ की तो छोड़िए डॉक्टर की बीवी होने के बाद भी मैं हमेशा अपने और अपने बच्चे के लिए दवाई का जखईरा साथ लेकर जाती हूँ।

वैस नर्मदा के पानी का कमाल है आप लिखते बेहद प्यारा हैं।

प्रभु करे आप जल्द ठीक हो जाए और फिर जबलपुर आकर नर्मदा स्नान करें...

अनूप शुक्ल ने कहा…

हाय रे, ये विचार-रुकते क्यूँ नहीं!!:इनको गाकर पोस्ट करना चाहता हूं।

ओम आर्य ने कहा…

बहुत सही है .......एक बार फिर नतमस्तक है ......भाई समीर जी

नीरज गोस्वामी ने कहा…

खाओ पीओ मस्त रहो...डाक्टरों का बस चले तो सिर्फ केप्सूल पर ही जिंदा रख्खें...आप तो भूल ही जाओ की आपको बी.पी है क्यूँ की ये दवा एक बार जो शुरू की तो समझिये बीवी की तरह उम्र भर को गले पड़ जायेगी.
यहाँ डाक्टरों के साथ ये सुविधा है की इतनी जनसँख्या होने के बावजूद वो आपको उपलब्ध हो जाते हैं...कुछ एक नामी गिरामी को छोड़ दें तो... और टेस्ट तो हर गली नुक्कड़ पर करवाने की सुविधा है...
कविता से गर्मी कम नहीं हुई बल्कि बारिश की चाह और बढ़ गयी है...
नीरज

विनीता यशस्वी ने कहा…

बेहतरीन आलेख और कविता...

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी, यह बीमारीयां अक्सर महिला के रूप मे ही क्यों नजर आती है......कोई महबूबा कोई सहेली......और कोई.....।....वैसे कुछ ने फोटो पर यकीं नही किया कि आप का हाथ हो सकता है......।लेकिन हम तो समझते हैम इस फोटो के पीछे हाथ तो आपका ही है::)) पोस्ट रोचकता से भरपूर है.....अंत तक बाँधें रही....बधाई।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

सच है. डाक्टर के चंगुल में फ़ंसना ही बीमार कर जाता है, अच्छे भले को. सुन्दर आलेख, सुन्दर कविता. बारिश तो अब हो ही नहीं रही क्यों न वर्षा के गीत ही लिख डालें.

कुश ने कहा…

एक गीत सुनने के लिए इतनी लम्बी भूमिका बाँध दी जी.. वैसे जो भी हो बात बात में काम की बात कहने का अंदाज़ कमाल है आपका..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

कविता बहुत अच्छी है. बीमारी-डाक्टर-नर्स-अस्पताल के कुछ और रोचक किससों का इन्तजार है.

cmpershad ने कहा…

"कई बार झूट मूट मूँह लटका कर नर्स से कहा कि छाती में बाईं तरफ दर्द उठ रहा "

बेचारी नर्स - शायद नौसिख थी...वो क्या जाने दिल का मर्ज़:)

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र ने कहा…

"बीमारी से उतनी परेशानी नहीं, जितनी खाली लेटे लेटे आते जाते विचारों से होती है"
आपके विचारो से सहमत हूँ कहा जाता है खाली घर शैतान का घर होता है तरह तरह के विचार आते है . हाँ एक बात और दिल में दर्द नहीं था फिर भी झूठ मूठ नर्स से कह दिया . दिल के दर्द दो तरह के होते है एक दर्द वास्तव में दिल के रोगी को होता है दूसरा दर्द जो उपरी(दिलफेक दर्द)होता है और इसके दर्द का असर सिर्फ दिमाग पर पड़ता है लगता है की आपको उपरी दर्द हो रहा था . लगता है की आप भी हॉस्पिटल में चुहल कर रहे थे . शुगर में दो दो मिठाई वाह साब आपके क्या कहने हा हा रचना भी बेहद अच्छी लगी आभार.

‘नज़र’ ने कहा…

आपको पढ़ना बारहा अच्छा लगता है!
---
'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत अच्छा लिखते है आप.....और ये कविता भी कितनी सुन्दर बन पड़ी है. आभार.

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

बीते दिन की यादें हमें भी सुनाये जैसे ताज की काफी

Aadarsh Rathore ने कहा…

सर जी मेरा तो ब्लॉगिंग से मोह भग हो रहा है न जाने क्यों...
इसी पर कुछ लिखा है मैंने :(

:(

alka sarwat ने कहा…

भाई जी, मुझे बताया गया था कि आप गोरखपुर के हैं .आपकी फोटो देखते ही मैंने कहा -अरे ये तो सूर्यकांत हैं तो जवाब मिला; नहीं समीर लाल हैं .मैं तो मानने को तैयार ही नहीं थी ,सूर्यकांत ,हनुमान प्रसाद् पोद्दार के लड़के हैं ,गोरखपुर की गीतावातिका और प्रसिद्द गीता प्रेस का निर्माण हनुमान पोद्दार के द्वारा हुआ था .इतनी बड़ी और आध्यात्मिक हस्ती के पुत्र सूर्यकांत .डील-डौल में आपसे बीस-इक्कीस ,चेहरा-मोहरा आपसे मिलता जुलता ,फर्क केवल लिबास में है आप सूट टाई में हो और सूर्यकांत जी के लिए इस लिबास को पहनना नामुमकिन .बस इसी लिबास ने आपको बचा लिया वरना मैं तो आपको समीर लाल मानने को तैयार ही नहीं होती मेरी साफगोई के लिए मुआफ कीजियेगा .आप कुछ ज़्यादा ही दूर हैं वरना मेरी रिसर्च का कुछ तो लाभ आपको मिलता ही ,खैर.......
अभी सुबह आपकी इस रचना पर मैंने ९ कमेन्ट देखे थे ,लैब से लौट कर आने पर ये ४९ हो गये ,दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति का एवरेज है. ...बधाई...
वैसे आपकी रचना से ज्यादा मजेदार तो कमेन्ट होते हैं
शेष पुनः
जय हिंद

संगीता पुरी ने कहा…

यह कविता तो पहले भी पढ चुकी थी .. पर पूरी पोस्‍ट बहुत अच्‍छी लगी .. ब्‍लागिंग से जुडे रहेंगे तो आज न कल .. बीमारी को रफूचक्‍कर होना ही है .. अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए शुभकामनाएं !!

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

समीर भाई
आप स -परिवार,
हमेशा खुश रहे
यही कामना है
और द्वाराचार कर जाती गरमी वाला नवगीत उम्दा लगा
ये " दो ठो " में -
" ठो = क्या होता है जी ? :)

है बड़ा प्यारा शब्द ...
.समक्झाइये ना !! ;-)
रक्षा बंधन पर
सभी को भरपूर स्नेह मिले
- लावण्या

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आ़रे काहे को बिना कोनो बात के टेंशनइया रहे है ???

आपको कुछो नहीं होएबे करेगा,
रामजी से कोह दिए है सब उही देखबे करेगे |
ईयोऊ झौस्त धोन्त बहूरी |

देखे है हुमाऊ एन्गलीसह बोलत बा नी |

Jokes apart do take good care of yourself.

Regards

Shivam Misra

woyaadein ने कहा…

ये झमाझम बारिश कहाँ से ले आये महाराज........यहाँ भी आजकल वैसे बारिश हो रही है मगर कुछ एक इलाकों में.....हस्पताल के किस्से सुनाने की विनती करते हैं.....स्वीकार लीजियेगा.....

साभार
हमसफ़र यादों का.......

उसका सच ने कहा…

समीर में उड़ती एक तश्तरी..उस पर सवार शब्द...सांये..सांये की आवाज़! ये समीर की ही देन है...समीर तेरे स्वस्थ झोंके उन्मुक्त गगन में उड़ता चला जाये....

सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये
सांये..सांये........................................................................

ज्यादा लिख दिया क्या..?

चलो आपसे कम ही लिखा मिस्टर समीर..

suresh sharma (cartoonist) ने कहा…

समीर भाई, आपके यहाँ, डाक्टरों के इलाज का जो तरीका है, वो भारत में लागू कर दिया तो मरीज ऊपर चला जायेगा और गायेगा- हुजूर, आते-आते बहुत देर कर दी !....सुन्दर लेखनी..आभार !

वाणी गीत ने कहा…

मिल गयी इतनी सारी दुआएं ...!!
मुझे शक है आपके बीमार होने में ..!!

बी एस पाबला ने कहा…

डायबिटीज़ तो आपको नहीं होने वाली!

वैसे ये गड़े मुर्दे कुछ ज़्यादा ही रोचक होंगे, उम्मीद है, प्रतीक्षा है :-)

Prem Farrukhabadi ने कहा…

Sameer bhai,
nai nai jankariyan aap de rahe hai aapki post lajawab lagi. badhai!

डा. अमर कुमार ने कहा…


बकौल अनुसँधानकत्री : वैसे आपकी रचना से ज्यादा मजेदार तो कमेन्ट होते हैं ।
सरदार खुस हुआ : डायबिटीज़ तो आपको नहीं होने वाली!
आकाशवाणी भी हुई गयी : मुझे शक है आपके बीमार होने में ..!!
कवि बोलिन: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!
आप विदेश में हैं और बहुत बड़े आदमी हैं- मैं एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ और कंप्यूटर भी मेरा अपना नहीं है लेकिन उपलब्ध है- आशा है आप अन्यथा न लेकर उचित निर्देश देंगे...
कि टिप्पणी कैसे की जाये, जो अन्य पाठकों को न रुलाये !
बट बाई द वे... इती सारी दुआयें ले चुके हो, अब बेचारे डाक्टर की दवाओं का क्या होगा ?

डा. अमर कुमार ने कहा…

;)

मीत ने कहा…

जीवन जीना एक कला है,
उससे यूँ घबराना कैसा.
धूप छांव के बीच रहा है,
रिश्ता अजब पुराना जैसा
वाह जी वाह क्या कह गए तुस्सी....
मीत

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

वैसे हमारे मित्र हैं, भारतीय हैं तो भरोसा है कुछ न कुछ नया सा ही होगा. कहो वो स्पेश्लिस्ट ही न निपट जाये....

aur...

मेहबूबा एसीडिटी तो निकल ही ली थी, वो तो पकड़ाई नहीं बल्कि टेस्ट वेस्ट के चक्कर में उसकी सहेली जो उसे लेकर आई थी, पथरी पकड़ गई, जिससे कुछ लेना देना न था. अरे, चार छः बीयर पीते, खुद ही बह निकलती मगर तब वो डॉक्टर अपनी लेज़र तलवार कहाँ चलाता. बोफोर्स तोप टाईप शो पीस तो है नहीं, काम करती है, यह उसने साबित कर दिया तब माना. दो दिन अस्पताल में भरती रहे थे....

behtarin upmaiyen aur behterin abhivyakti

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

वैसे हमारे मित्र हैं, भारतीय हैं तो भरोसा है कुछ न कुछ नया सा ही होगा. कहो वो स्पेश्लिस्ट ही न निपट जाये....

aur...

मेहबूबा एसीडिटी तो निकल ही ली थी, वो तो पकड़ाई नहीं बल्कि टेस्ट वेस्ट के चक्कर में उसकी सहेली जो उसे लेकर आई थी, पथरी पकड़ गई, जिससे कुछ लेना देना न था. अरे, चार छः बीयर पीते, खुद ही बह निकलती मगर तब वो डॉक्टर अपनी लेज़र तलवार कहाँ चलाता. बोफोर्स तोप टाईप शो पीस तो है नहीं, काम करती है, यह उसने साबित कर दिया तब माना. दो दिन अस्पताल में भरती रहे थे....

behtarin upmaiyen aur behterin abhivyakti

हेमन्त कुमार ने कहा…

वाकई बहुत मजेदार। आभार..।

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

Badhiya likha budhape ka dard...khag ki bhasha khag hi jane !!

नरेश सिह राठौङ ने कहा…

जब आपका शरीर बडा है तो रोग भी ज्यादा परेशान करेंगे ही | हलका फुलका शरीर होता तो बीमारियां भी हल्की ही रहती |

अर्शिया अली ने कहा…

Bahut sundar ghazal hai.
{ Treasurer-T & S }

नीरज जाट जी ने कहा…

aji jab aapko pata hai daktaron ke nakhre, to kyon jate ho?
kya hame sunane ke liye chatkhare lelekar?
chalo ji, aaj to ham bhi kahe dete hain-
jeete raho.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

sameer ji , aapki ye kavita man ko choo gayi ... is baras baarish ne gazab kar diya hai .. garmi se saare desh me haal kharab hai ....aur doctor ke saath ke anubhav ..waah kya kahne ..

aapki lekhni se seekh raha hoon ...

vijay

pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

Berojgar ने कहा…

सभी हिन्दी ब्लोगर भाइयों/बहनों से अनुरोध है की यहाँ मैं एक प्रस्ताव रख रहा हूँ कृपया इस पर अपनी सहमति देने की कृपा करें। ब्लोगर भाइयों के आपसी प्यार को देखते हुए मेरी हार्दिक इच्छा है की एक हिन्दी ब्लोगर संघ की स्थापना की जाए और (वैसे तो सभी इन्टरनेट पर मिलते ही हैं) साल में एक बार कहीं मीटिंग आयोजित की जाए. इंटरनेट पर ही अध्यक्ष, सचिव, इत्यादि के चुनाव हो जायें। मेरे इस सुझाव पर गौर करें। हिन्दी ब्लोगर संघको मजबूती प्रदान करें। भाई समीर जी से मेरी प्रार्थना है की इस कम में रूचि दिखाते हुए.सहयोग दें. ब्लोगर संघ के उद्देश्य, नियम, चुनाव प्रक्रिया के बारे में आगली पोस्ट में बताऊंगा.स्तरीय ब्लॉग लेखकों को सक्रियता के आधार पर चयनित किया जाये.

अतुल शर्मा ने कहा…

ओहो! बड़ा कठिन है डॉक्टरी इलाज वहाँ पर। वैसे तब के किस्से आप अब बयाँ कर दीजिए :-)

rewa ने कहा…

Sirji,

Sab umra ka taqaza hai:-) doctor ki to baat chodiye...pahle ye sochiye ki ye acidity ki bimari aati kyun hai....thoda oily food or chatpata kam khana shuru kar dijiye warna.....aage nahi bolungi. hehehe:-)



rgds.

yaksh ने कहा…

saw after a long time...c u soon.fir se likhna shuru karunga jaldi.

डाकिया बाबू ने कहा…

Ha..ha.ha..filhal main to abhi swasth aur mast hoon...so say bye-bye to Doctors !!...aur bimar hua bhi to Doctor ki bajay apke blog par a jaunga..ha..ha..ha...!!

lajwab Post ke liye badhai.Kabhi Dakiya babu ke yahan bhi tashrif laiye na !!

Harkirat Haqeer ने कहा…

कई बार झूट मूट मूँह लटका कर नर्स से कहा कि छाती में बाईं तरफ दर्द उठ रहा है जिससे वो उसे हार्ट की समस्या समझ डॉक्टर को बता दे और वो तुरंत अटैंड कर ले. मगर आप एक शातिर तो वो दो. सब समझते हैं और हम टंगे रहे वेटिंग में.

कहीं वो महिला डाक्टर तो नहीं थी .......???

ये सहेली बड़ी बत्तमीज़ निकली ....इन सहेलियों के चक्कर से आप जरा दूर ही रहा करो इनका कोई भरोसा नहीं ....खैर ....आपने इनसे पीछा तो छुडा ही लिया ....!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भावी खुशियों के खातिर ही,
पीड़ा है पड़ जाती सहनी.
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी.

SHASHVAT BAAT KAHI HAI NAVGEET MEIN....LAJAWAAB POST HAI AAPKI.....RAKTCHAAP KAA PAARA PAKAD KAR RAKHO BHAI.......

हितेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा…

Bahut barhia

http://hellomithilaa.blogspot.com

'अदा' ने कहा…

समीर जी,
इ का सुन रहे हैं, आप और बीमार ?
इ नहीं हो सकता है, हां अगर नर्स-उर्स से मिलने के लिए इ सब चक्कर चलायें है तो हम समझ सकते हैं....इ उम्र में इ सब हो जाता है.... और हमहूँ नहीं मानते हैं कि उ हाथ आपका हैं हमरा शिकायित भी दाखिल किया जावे...
बस अब जल्दी से ठीक हो कर चाहुपिये..सब आँख बिछाए इन्तेजार कर रहे हैं...

बेरोजगार ने कहा…

धन्यवाद आप लोगों का की मेरे विचार आप को पसंद आये. आपका आभारी रहूँगा मैं की आप ने टिप्पणी से नवाजा मुझे.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

यहां अच्छा है..न डाक्टर को फुर्सत है न मरीज को..खुद ही देसी नुस्खा आजमाआे आैर स्वस्थ होने का भ्रम पाले रहो...

दिलीप कवठेकर ने कहा…

शीशा ए दिल इतना ना उछालो...

डॉ .अनुराग ने कहा…

दोबारा टेस्ट करवाइए .....इन मुए डॉ का भरोसा न करिए ....यकीनन दिल के किसी वाल्व में कुछ न कुछ अटका मिलेगा...कोई कविता ...

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

हल्की-फुल्की बातचीत की शैली में कई बार, कई गंभीर इशारे कर जाते हैं आप...

इशारे चुपचाप यूं ही कब चेतना का हिस्सा बन जाते होंगे, आपके पाठकों को पता भी नहीं चलता होगा..

अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा रहा हूं...
टिप्पणी की तो जगह ही नहीं मिलती यहां...बस ऐसे ही गुजरते रहते हैं...

Murari Pareek ने कहा…

बहुत सुन्दर मिशाल दी महबूबा और पत्नी की | चलिए आपकी acidity महबूबा बनके निकल ली बीबी बनती तो लफडा था! रही बात डॉक्टर की तो भैया चाहे कुछ भी न हो उनके गुस्से का भाजन तो बनाना ही पडेगा | कुछ दवाइयाँ कुछ टेस तो करने ही होंगे | क्यूंकि डॉक्टर साहब को गुस्सा इस बात की आप आये क्यूँ??

yuva ने कहा…

चलिए डॉ के नाम पर ही सही पत्नी के साथ-साथ गर्लफ्रेंड को भी याद करने का क्या मौका निकाला है! इसे कहते हैं 'हर्रे लगे न फिटकरी और रंग चोखा'. वैसे मुझे लगता है कि इसी याद की वजह से आप की बीमारी भाग गयी और आप फिर से च्यवन ऋषि की तरह जवान हो गए है!!! :)

Pakhi ने कहा…

Uncle! hansate aur hasate rao, sare rog bhag jayenge.

"लोकेन्द्र" ने कहा…

अरे वाह बीमारी की भनक और पैगाम मिला वो भी मस्ती के साथ जिसमे इक सुन्दर सी कविता भी मिल गई... अब आप ही बताइए कविता की बधाई दूँ या फिर स्वस्थ रहने की दुआ करूँ..... जो भी हो बस हंसते रहिये और दुनिया को हँसाते रहिये.........

नन्हीँ लेखिका ने कहा…

get well soon, uncle !
:)

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut hi sundar rachana aur saath shaandar kavita .

शरद कोकास ने कहा…

आजकल हमारे यहाँ एक नई बधाई चलन मे आ गई है.."बधाई हो आपको सुगर नही निकली "

Babli ने कहा…

आपने तो कमाल कर दिया! बीमारी पर इतना सुंदर रूप से विस्तार किया है और साथ में ख़ूबसूरत रचना! तस्वीर भी बहुत सुंदर है! मैं तो निशब्द हो गयी! ये कहूँगी की आपकी लेखनी को सलाम!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत लाजवाब शैली है. इस शैली बाबा समीरानंद शैली के नाम से जाना जायेगा

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत लाजवाब शैली है. इस शैली बाबा समीरानंद शैली के नाम से जाना जायेगा