गुरुवार, दिसंबर 29, 2016

मित्र को पत्र



प्रिय मित्र बराक
कैसे हो? बहुत दिन हुए तुमसे गप्प सटाका नहीं कर पाया फोन पर. अब तो २०१६ खत्म होने में २ दिन का समय बचा है और उसके २० दिन बाद तुम्हारा कार्यकाल भी समाप्त हो जायेगा. जानता हूँ तुम चलते चलते समेटने में लगे होगे. मिशेल भौजी भी घर भांड़े का सामान नये घर में शिफ्ट कराने के लिए पैकिंग में जुटी होंगी. नमो नमो बोल देना उनसे. सुना है जो नया घर अलॉट हुआ है वो भी काफी बड़ा और खुला खुला सा है. मगर जो भी हो व्हाईट हाऊस तो नहीं ही हो सकता है. अगली दफा जब अमरीका आऊँगा तो कोशिश करुँगा तुम्हारे नये घर पर आने की.
मैं जानता हूँ कि अब २० जनवरी के बाद तुम्हारे पास काफी खाली समय रहेगा और तुम किताबें लिखोगे. तुम्हारे यहाँ तो सभी राष्ट्र्पति सेवानिवृति के बाद लेखन को पेशा बनाते हैं सो तुम भी बनाओगे ही. पैसा भी तो बहुत बरसता है इन पुस्तकों से. अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति होने पर इतनी तो बनती है. हमारे यहाँ यह हथकंडा नेता जेल जाने पर अपनाते हैं. वहाँ भी खाली समय काफी रहता है. कभी किताब लिखते हुए मन उचाट हो जाये तो खबर करना. यहाँ भारत में किसी चैरीटी कार्यक्रम का बुलावा भिजवा दूँगा. यहाँ कुछ समय के लिए हमारे मेहमान बन कर घूम जाना. कुछ आदिवासी नृत्य आदि का प्रबंध करा दूँगा...किताब के लिए नया मटेरियल भी मिल जायेगा...तुम तो जानते ही हो मैं यारों का यार हूँ.
याद है जब तुम पिछली बार आये थे और कह रहे थे कि मेरा नाम उच्चारित करना थोड़ा मुश्किल है ..कहीं प्रेस के सामने भूल न जाऊँ तो मैने अपने पूरे सूट पर अपना नाम गुदवा मारा था ताकि तुम वहाँ से पढ़कर मेरा सही नाम बोलो और कोई जान भी न पाये. मन तो था कि माथे पर अपने नाम का गुदना गुदवा लूँ तुम्हारे लिए मगर फिर ख्याल आया जो युवा प्रेमी प्रेमिका जवानी के आवेश में आकर एक दूसरे का नाम हाथ पर गुदवा लेते हैं, उनका बुढ़ापा फुल स्लीव की कमीज पहने ही गुजरता है. फिर अगर मैं माथे पर गुदवा लेता तो टोपी पहने गुजरता और तुम तो जानते ही हो कि मैं टोपी पहनाता हूँ, पहनता नहीं.
तुमने मुझसे एक बार गपाष्टक के दौरान पूछा था कि मेरी हॉबीज़ क्या क्या है और मैने तुमसे बताया था कि एक तो यारी निभाना और दूसरा, पतंग उड़ाना. हर गुजराती को पतंग उड़ाना बहुत पसंद होता है.
तो हाल में दो तीन बड़ी यारियाँ निभाते हुए मैने ८ नवम्बर को ऐसी पतंग की पैंग भरी कि पूरा देश देखता रह गया और तब से रोज, कभी ढील छोड़, कभी टाईट कर, कभी दायें, कभी बायें, कभी ऊपर, कभी नीचे, ऐसी ऐसी कुलाचें लगा रहा हूँ कि पूरा देश हलाकान है और मैं अपनी कार गुजारियों पर ताली बजा बजा कर नाच रहा हूँ. पप्पू आज कह रहे थे कि १२५ से ज्यादा कुलाचियाँ भरी हैं मैने इस बीच.
बहुत मजा आ रहा है. आसमान में तूफान है, देश हलाकान है और मेरी पतंगबाजी की पारंगतता से मेरी पतंग आसमान में तनी है. मेरे साथी बता रहे हैं कि देश लहालोट हो रहा है मेरी इस कलात्मक्ता पर. यारों के यार, अपने इस यार को काँधे पर उठाये हैं. नमो नमो के नारे ऐसे गुँजायेमान हैं कि देश में आये तूफान की गर्जन दब गई है.
एक बात बताऊं? ८ नवम्बर के बाद शुरु में जनता कहती थी कि ये कैसी पतंग उड़ा दी आपने?
तुम तो जानते ही हो मेरी मौके पर भावुक हो जाने की आदत...फेसबुक के दफ्तर के विडियो में भी तुमने देखा होगा मेरा आँसूं बहाना...मैंने आँख में आँसू भर के अवरुद्ध कंठ से ५० दिन की पतंग बाजी का समय मांगा था. अब वो भी अगले १ दिन में खात्मे पर ही हैं मगर मुझे कोई चिन्ता नहीं है. मैंने कैशलैश इकनॉमी वाली एक नई पतंग भी उड़ा छोड़ी हैं. नोटबंदी वाली पतंग कट कर गिरे, उसके पहले कैशलैस वाली पतंग की ऐसी करामात दिखाने लगूँगा कि लोग पचास दिन भूल कर नई पतंग के साथ साथ ठुमके लगायेंगे..ये इधर..ये उधर...और मैं ताली बजा कर नाचूँगा..
१४ जनवरी को संक्रांत है. उस दिन गुजरात में खूब पतंग उड़ाई जाती है और तिल के लड्डु बांटते हैं मित्रों में.
मैं लगा हुआ हूँ विचार में कि उस दिन एक नई पतंग तानूँ...डिजिटल कंदील लटका कर..कि सब देखने वालों की आँख जगमग हो जाये..एकदम से आँख चौंधिया कर रह जाये...शिकायत दर्ज करेंगे तो उनको मोतिया बिन्द के इलाज शिविर में भिजवा दूँगा..उन शिवरों के लिए एक बाबा से बात चल रही है, योगा से मोतिया बिन्द का इलाज..मात्र ६ माह में.. तब तक यूपी, पंजाब और गोवा के चुनाव भी निपट ही जायेंगे...
वैसे जिस तरह लोग तुम्हें ओबामा केयर के लिए हमेशा याद करेंगे, उसी तर्ज पर लोग मुझे मेरे नमो फेयर (जो डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, मेक इन इण्डिया, सफाई और कैश लेश मेला मैने सजाया है) के लिए याद करेंगे, ऐसा मेरा अटूट विश्वास है.
संक्रांत पर तिल के लड्डु भिजवाऊँगा..भौजी को भी खिलाना...कब्ज में फायदा करते हैं.
फ्री होकर बात करते हैं किसी दिन...और हाँ, डोनाल्ड से दोस्ती जमाने के लिए कोई टिप है क्या?
चालो...नमो नमो!!

तुम्हारा..मोटा भाई 
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3 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (31-12-2016) को "शीतलता ने डाला डेरा" (चर्चा अंक-2573) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

PRAN SHARMA ने कहा…

Nice . bhasha aur bhaav donon kaa jawaab nahin .
Mubaaraq .

Digamber Naswa ने कहा…

मस्त समीर भाई ... रंग में आ रहे हो आजकल ...
नव वर्ष मंगलमय हो ....