रविवार, मई 05, 2013

हे नीलकंठ मेरे!!

neelkanth

एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों का

जलती हुई जिन्दगी की आग से,

हथेली में रख फोड़ा उसे

फिर बिखेर दिया जमीन पर...

अपनी ही राह में, जिस पर चलना था मुझे

टुकड़े टुकड़े दहकती साँसों के साथ और

जल उठी पूरी धरा इन पैरों के तले...

चलता रहा मैं जुनूनी आवाज़ लगाता

या हुसैन या अली की!!!

ज्यूँ कि उठाया हो ताजिया मर्यादाओं का

पीटता मैं अपनी छाती मगर

तलवे अहसासते उस जलन में गुदगुदी

तेरी नियामतों की,

आँख मुस्कराने के लिए बहा देती

दो बूँद आँसूं..

ले लो तुम उन्हें

चरणामृत समझ

अँजुरी में अपनी

और उतार लो कंठ से

कह उठूँ मैं तुम्हें

हे नीलकंठ मेरे!!

-सोच है इस बार

कि अब ये प्रीत अमर हो जाये मेरी!!

-समीर लाल ’समीर’

Indli - Hindi News, Blogs, Links

48 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

तथास्तु...

Vivek Rastogi ने कहा…

बिल्कुल अमर होगी.. प्रीत अजर अमर ही है ।

Majaal ने कहा…

जूनूनी चीज़ों से तो हमें परहेज़ है.
लिखते रहिये

Anupama Tripathi ने कहा…

अपने कर्म पर विश्वास ...अपनी लगन पर यकीन ...
बहुत सुन्दर रचना ...!!

Girish Billore ने कहा…

वाह क्या कहने
एक अनोखी बात
एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों का जलती हुई जिन्दगी की आग से,
वाह वाह क्या बात है

Kuldeep Thakur ने कहा…

मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
आप की ये रचना 10-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

Kuldeep Thakur ने कहा…

मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
आप की ये रचना 10-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

Archana ने कहा…

Preet agar man me hai to Amar hi hogi ....Neelkanth bhi muskura hi rahe honge ... do bund charanamrt dekar...

Amit mishra ने कहा…

बहुत बढ़ियाँ कविता ।वैसे तो अब नीलकण्ठ दिखाई नहीं पर आपकी कविता नै याद ताजा कर दिया ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों का

जलती हुई जिन्दगी की आग से,

हथेली में रख फोड़ा उसे

फिर बिखेर दिया जमीन पर...

हौंसला बना रहे.

रामराम

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

आपकी इस मनोकामना के साथ हम बस ''आमीन'' ही कहेंगे

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... प्रीत अमर हो जाए यही तो चाहत है जीवन की .. नम्जिल है जीवन की ...

PRAN SHARMA ने कहा…

BEHTREEN !

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति,आभार.

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार ७/५ १३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां स्वागत है ।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सुन्दर सोच।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

३ मई को कवि सम्मेलन में गए कि नहीं !

रचना दीक्षित ने कहा…

जलन की गुदगुदी, आसुओं का चरणामृत, वाह क्या बात है. ये प्रीत जरूर अमर होगी. बेहतरीन भावनाओं का संगम यह कविता.

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

उद्वेलित करती कविता!

Ramakant Singh ने कहा…

दो बूँद आँसूं..

ले लो तुम उन्हें

चरणामृत समझ

अँजुरी में अपनी

और उतार लो कंठ से

कह उठूँ मैं तुम्हें

हे नीलकंठ मेरे!!

-सोच है इस बार

कि अब ये प्रीत अमर हो जाये मेरी!!

ऐसा ही हो आपकी मन की मुराद पूरी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

काश, सबके लिये ऐसा हो जाये.

Ranjana Verma ने कहा…

तेरी नियामतों की आँख मुस्कराने के लिए बहा देती दो बूंद आसूं बहुत खूब सुंदर प्रस्तुति!!

Ranjana Verma ने कहा…

तेरी नियामतों की आँख मुस्कराने के लिएबहा देती दो बूंद आसूं बहुत खूब सुंदर प्रस्तुति!!

Ranjana Verma ने कहा…

तेरी नियामतों की आँख मुस्कराने के लिएबहा देती दो बूंद आसूं बहुत खूब सुंदर प्रस्तुति!!

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत खूब ,आशा से आकाश टिका है,टिका रहे

अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
latest post'वनफूल'

mridula pradhan ने कहा…

bahot achcha likhe hain......

P.N. Subramanian ने कहा…

------- मेरा गीत अमर कर दो --आमीन

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति

vandana gupta ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

मनोकामना जरूर पूर्ण होगी .

मन के - मनके ने कहा…


कौन,यहां शिव बन पाया है
और,कैसे बन पायेगा
इंसानी जर्जर कांधों पर
बे-डौल हुई,मर्यादाओं को
कैसे,कोई ढो पाएगा--
मन छूती हुई कृति

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर कृति ..

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर कृति ..

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना
बहुत सुंदर

Ashok Madhup ने कहा…

bahut sundar kavita

विष्णु बैरागी ने कहा…

दर्द के रिश्‍ते से अच्‍छा और मीठा रिश्‍ता शायद ही कोई और हो।

निहार रंजन ने कहा…

ज़रूर अमर होगी. बहुत सुन्दर.

Amrita Tanmay ने कहा…

अति सुन्दर ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अपने नियमों के ढाँचों में, हम रोज रोज सज जाते हैं..

स्वयं पर पहले प्रश्न उठाने वालों की पंक्ति में आगे।

Vaanbhatt ने कहा…

नीलकंठ ने गरल पी लिया था...दुनिया में जितना भी गरल है...कर्तव्यों का वहन करने वालों ने अपने सीने में जज्ब कर लिया है...वर्ना ये धरती शायद जीने लायज न बचती...

मन्टू कुमार ने कहा…

Bahut Khub...

Sadar.

रजनीश तिवारी ने कहा…

bahut sundar...

Anita (अनिता) ने कहा…

सच्चे दिल से किया गया हर कर्म... सच्चा और अच्छा फल पाता है...!
आपकी मेहनत कभी ज़ाया नहीं जाएगी!
~सादर!!!

Anita (अनिता) ने कहा…

सच्चे दिल से किया गया हर कर्म... सच्चा और अच्छा फल पाता है...!
आपकी मेहनत कभी ज़ाया नहीं जाएगी!
~सादर!!!

Parul kanani ने कहा…

hello sir...aap to rasta bhool gaye hai shayad:)...chaliye koi baat nahi...yahan aap se mulakaat ho jati hai...hamesha ki tarah ..kamaal likha hai:)

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

जय हो .... मंगलमय हो .... बेहतरीन

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
ब्लॉग बुलेटिन के इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं 2013 (17) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !