रविवार, अगस्त 22, 2010

एक सफ़हा

कुछ जरुरत से ज्यादा व्यस्तताओं ने घेर रखा है. बस, दो दिन और फिर सब पूर्ववत!!

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कुछ उधड़े कुछ जुड़े रिश्ते
चन्द पोशीदा से ज़ज्बात
धुँधली पड़ती कुछ यादें
दिल के फ्रेम में जड़ी
धूल खाई दो चार तस्वीरें
पुश्त पर लदी
मेरे अरमानों को थामे
पैबंद लगी एक गठरी..
आँगन वाले नीम के नीचे पड़ा
तेरी पायल से टूटा घुंघरु...
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!

-एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को.

-समीर लाल ’समीर’

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93 टिप्‍पणियां:

Deepak Shukla ने कहा…

Hi..

Ek safhe main kah daala hai,
jaise ho ek yug ki baat..
Jeevan ki khatti meethi..
Yaadon ko lekar ke saath..

Behtareen abhivayakti..

Deepak..

P.N. Subramanian ने कहा…

हमेशा की तरह अति सुन्दर रचना.

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ने कहा…

बात तो सही है समीर जी....सुंदर अभिव्यक्ति

anoop joshi ने कहा…

sir aapki tarif karna suraj ko diya dikhane ke saman hai.......par tarif na ki to aap ko mujh jainse chote aadmi ke barien me kainse pata chalega.......

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

hmmmm... kafi hai samajhane ko bhi....

संजय भास्कर ने कहा…

SAMEER JI
कैसे लिख जाते हो ऐसा सब..........
तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…

कम शब्दों में बहुत कुछ कह गए आप

आभार

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

इस पृष्ठ में तो पूरा जीवनदर्शन ही भरा पड़ा है!
--
बहुत-बहुत बधाई!

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

बहुत दिनों बाद एक लाजवाब कविता पढने को मिली.
कविता क्या ...बस दिल निचोड़ के रख दिया
अआह
गजब
बेहतरीन रचना
-
-
आभार
शुभ कामनाएं

रंजना ने कहा…

इतना है मेरा जहां....

वाह वाह वाह....क्या बात कही....लाजवाब !!!
मन मोह लिया...

ali ने कहा…

@ समीर लाल जी ,
व्यस्ततायें भी ज़रुरी हिस्सा हैं जिंदगी का :)

कविता अत्यंत अर्थपूर्ण बन पड़ी है ! सुन्दर !

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

सुन्दर स्वच्छ संक्षिप्त

न रह 'इधर उधर की' में लिप्त

कहते हैं अपनी बात

सिवा 'सुन्दर' कछु और नहीं

हमसे है लिखत न जात .....

बधाई व आभार....

Shekhar Suman ने कहा…

bAHUT khub likha hai sirji...
kya kahoon.. choota moonh badi baat hogi....

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

.....व्यस्तता के चलते बढ़िया रचना.... आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच ..एक ही सफहा काफी है अपने जीवन के प्राप्य और अप्राप्य को कहने के लिए ...बहुत सुन्दर

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

sameer bhaiya SAFHA ka matlab to bata do.......:)

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

waise shandaar rachna to kahna hi parega.........:)

राजेश उत्‍साही ने कहा…

हमने भी पढ़ ली आपकी कविता।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

"itna hai mera jahan"

arun c roy ने कहा…

"खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!"
इतना कहने के बाद कुछ बचता है क्या.. सुंदर रचना

फ्रेंकलिन निगम ने कहा…

खूबसूरत कविता है। बेहद अच्छी

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

पुश्त पर लदी
मेरे अरमानों को थामे
पैबंद लगी एक गठरी...
वाह...ये आपका ही अलग अंदाज़ है समीरलाल जी.

cmpershad ने कहा…

आपके लिए एक सफ़हा.... अमृता प्रीतम के लिए एक डाक टिकट !!!

मो सम कौन ? ने कहा…

वामन अवतार ने तीन डग में समस्त ब्रह्मांण्ड लपेट लिया था, आपने ’एक सफ़हा’ में। बस इतना सा है मेरा जहाँ, वैसे और बचा क्या सर जी?

मनोज कुमार ने कहा…

इस कविता में कई रंग, गंध और स्वाद हैं, जो जिजीविषा और प्रगति की चिरंतन मानवीय सच्चाई को प्रभावशाली ढंग से पेश करती है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बस इतना ही नही है समीर भाई ... ये पूरी कहानी है अपने आप में ...
बहुत खूब ...

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

पर कभी-कभी सागर रौशनाई बन जाए और धरा कागज फिर भी कम पड़ जाती है जगह इस अफसाने के लिए।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

-एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को.


बहुत सही कहा आपने, शुभकामनाएं.

रामराम

अजय कुमार ने कहा…

दार्शनिक अंदाज में ढ़ला हुआ है ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़े ही गहरे उपमानों में आपने अपनी जीवनी की कथा कह डाली। बहुत ही सुन्दर।

Manoj K ने कहा…

आपका ब्लॉग फोलो करना के बाद यह पहली पोस्ट है. आपकी सक्रियता देखकर मैं भी दांग हूँ. आपसे कुछ टिप्स चाहूँगा, लेकिन फिर कभी.

फिलहाल आपकी कविता.
प्रभु बहुत कम वाक्यों में बहुत ही उम्दा सम्प्रेषण. आप एक मंझे हुए लेखक हैं और आपके लिए यह काम शायद मुश्किल नहीं होगा, पर मुझ जैसे नए पाठक के लिए ऐसी रचनाएं ज़रूर पथ प्रदर्शक होती हैं.

आभार
मनोज खत्री

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

समीर बाबू!
ई जो आप कहानी लिखे हैं..माने कबिता..ऊ कबिता कम पेंटिंग जादा लगता है..एकदम आँख के सामने फोटो खींच गया. लेकिन जेतना सादगी से आप कहानी बयान किए हैं उसके लिए एक सफहा तो बहुत जादा है..अमृता प्रीतम के हिसाब से देखें त इसके वास्ते चाहिए बस एक रसीदी टिकट... जल्दी फ्री हो जाइए (फ्री माने मुफ्त नहीं मुक्त) ताकि आपको अपना पहिले वाला रंग में देख सकें!!

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

...यादों की दुनिया दिल को कितना सुकून देती है!...सुंदर रचना!

Rajendra Swarnkar ने कहा…

'समीर जी '
कमाल करते हैं व्यस्तताओं में भी आप !
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस!
इतना है मेरा
पूरा जहान!!


वाह …
जब आवै संतोष धन जैसा फ़लसफ़ा …

साधु … … …



- राजेन्द्र स्वर्णकार

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति !

शहरोज़ ने कहा…

क्या अंदाज़ है समीर साहब!! खूब !! निसंदेह कविता लहजे और कंटेंट में बेमिसाल है!

रक्षाबंधन की ह्र्दयंगत शुभ कामनाएं !

समय हो तो अवश्य पढ़ें :
यानी जब तक जिएंगे यहीं रहेंगे !http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_23.html

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

-एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को
वाह! बहुत सुन्दर. शुभकामनाएं.

Hari Shanker Rarhi ने कहा…

Very touching!

राज भाटिय़ा ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति। आभार

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

ये कहानी नहीं अंतस में छिपी कोई तदबीर है.
अच्छा हुआ जो हाले दिल खोल दिया.

mai... ratnakar ने कहा…

zabardast... na jane mera kya durbhagya raha ki kaee baar koshish ke bawzood aapka blog nahee khol paya tha. aaj kismat ne saath diya, behatareen se bhee behatar likha hai aapne
aabhar

महफूज़ अली ने कहा…

मेरे साथ भी व्यस्तता कुछ ज्यादा ही है..... सुबह आधा घंटा और रात ११ बजे के बाद ही कमेन्ट कर पाता हूँ.... बहुत दिन हो गए मुझे भी पोस्ट लिखे हुए.... आपकी रचना बहुत अच्छी लगी.....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

हमरा टिपाणी कहाँ गायब हो गया...हम त भोरे भोरे लिखे थे..समीर भाई ई बहुत गलत बात है!! खोजिए!!

boletobindas ने कहा…

आज जीवन का पूरा फलसफा ही कह डाल दिया।
कितनी सही बाते। हर खिड़की पर जब बैठता हूं तो भूरा आसमान ही दिखता है। पीठ पर अरमानों की पोटली..पैबंद लगी..ठंडी सांस ही ले सका मैं....

Ashok Pandey ने कहा…

आँगन वाले नीम के नीचे पड़ा
तेरी पायल से टूटा घुंघरु...
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!

सुंदर अभिव्‍यक्ति। आभार।

Anand Rathore ने कहा…

bahut khoob...

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

लाजवाब कविता .........
एक ही सफहा काफी .........
बहुत ही सुन्दर!!!

ललित शर्मा-للت شرما ने कहा…

श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाईलांस नायक वेदराम!---(कहानी)

राजभाषा हिंदी ने कहा…

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.
हिन्दी ही ऐसी भाषा है जिसमें हमारे देश की सभी भाषाओं का समन्वय है।

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

राम त्यागी ने कहा…

रचना बहुत सुन्दर है - मैं भी जबसे ट्रेवल कर रहा हूँ तब से बहुत व्यस्त हूँ - रक्षा बंधन की बहुत बहुत शुभकामनायें !!

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं...

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति........ रक्षाबंधन पर पर हार्दिक शुभकामनाये और बधाई....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

भाई-बहिन के पावन पर्व रक्षा बन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/08/255.html

अमिताभ मीत ने कहा…

आहा !! क्या बात है भाई ..... कमाल है !!

एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को.

छा गए !!

जी.के. अवधिया ने कहा…

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Babli ने कहा…

रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
बहुत खूब लिखा है आपने! सुन्दर रचना !

Atul ने कहा…

Pardesh gaye aur jode naye rishte,
Rahe hardam sampark main na badai duriyan,

Armaan aapne bhi kiye poore,
Na rahe bacchon ke sapne adhure,

Aangan mai goonjiti pote-potiyonn ki kilkari
Aur shaam ke dhundhalke mai sangani ke saath chai ki ek payali,
Jeevan ke is padav per yahi baat sabse nayari,

Sabr kar ae SAMEER -
Na khayanegi dhool koi bhi yanden,
Na dhundhli padengi koi tasveeren,
Jab tak hai yeh Udan Tastari, aapki kalam or shabdon ki yeh kasidekari.

Many happy returns of the day (in advance....)

वन्दना ने कहा…

्ज़िन्दगी 2 लफ़्ज़ों की ही तो कहानी है उसके लिये तो एक सफ़हा ही काफ़ी है……………बेहद खूबसूरत भाव्।
रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

KK Yadava ने कहा…

एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!...दार्शनिक लहजे में सुन्दर अभिव्यक्ति...बधाई.

Surbhi ने कहा…

खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!

मनमोहक अभिव्यक्ति, आभार !

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

रक्षाबंधन की ढेरों शुभकामनाए !!

PKSingh ने कहा…

hamesha ki tarah...aaj ki post bhi behtarin

चैन सिंह शेखावत ने कहा…

आँगन वाले नीम के नीचे पड़ा
तेरी पायल से टूटा घुंघरु...
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान


bahut sunder shabd aur bhaav..wakai..

ajay saxena ने कहा…

-एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को.
.....अति सुन्दर रचना.

Coral ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुती

अभिषेक ओझा ने कहा…

"पैबंद लगी एक गठरी.. " बहुत खूब !

शिक्षामित्र ने कहा…

काफी देर से आया ब्लॉग पर। टिप्पणीकारों ने इतना कुछ कह दिया है कि मेरे कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं।

कुमार राधारमण ने कहा…

व्यस्तताओं में ही सब कह दिया। फ्री होने पर क्या करेंगे?

shikha varshney ने कहा…

हमेशा की तरह अति सुन्दर रचना.

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

hamesa kee tarah man ko chhoo jane wali rachana...

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

रक्षाबंधन पर हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

Akshita (Pakhi) ने कहा…

आपने तो बहुत अच्छी नव-कविता लिखी अंकल जी ....बधाई.

______________________
"पाखी की दुनिया' में 'मैंने भी नारियल का फल पेड़ से तोडा ...'

निर्झर'नीर ने कहा…

बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!


bahut badaa jahan hai aapka ...anant aakash or sari zamii .

aabhar

Divya ने कहा…

You made me nostalgic !

शोभना चौरे ने कहा…

sach hi to hai ?

Rajendra Swarnkar ने कहा…

आदरणीय समीर जी भाई साहब और ममतामयी भाभीजी
शादी की साल गिरह मुबारक हो !
हार्दिक शुभकामनाएं !
मंगलकामनाएं !!


- राजेन्द्र स्वर्णकार

ज्योति सिंह ने कहा…

कुछ उधड़े कुछ जुड़े रिश्ते
चन्द पोशीदा से ज़ज्बात
धुँधली पड़ती कुछ यादें
दिल के फ्रेम में जड़ी
धूल खाई दो चार तस्वीरें
पुश्त पर लदी
मेरे अरमानों को थामे
पैबंद लगी एक गठरी..
आँगन वाले नीम के नीचे पड़ा
तेरी पायल से टूटा घुंघरु...
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!

-एक सफ़हा काफी है
मेरी कहानी कहने को. man ko chhoo gayi rachna aapki ,behad sundar aur gahri baate hai .

डॉ टी एस दराल ने कहा…

समीर जी और साधना जी , शादी की सालगिरह मुबारक हो ।
आप दोनों को एक लम्बे स्वस्थ जीवन की ढेरों शुभकामनायें ।

Sadhana Vaid ने कहा…

इस एक सफहे में तो आपने सारे जहाँ को समेत लिया ! बहुत ही भावपूर्ण रचनी और बेमिसाल प्रस्तुति !
दिल के फ्रेम में जड़ी
धूल खाई दो चार तस्वीरें
पुश्त पर लदी
मेरे अरमानों को थामे
पैबंद लगी एक गठरी..
बहुत खूबसूरत अल्फाज़ और बहुत ही नाज़ुक ख्यालात ! बधाई समीर जी !

ओशो रजनीश ने कहा…

आप दोनो को वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएँ

http://www.baddimag.blogspot.com ने कहा…

kya likh diya sameer
lagata nahin ki itanr vyast hain aap.... wah...

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

ताऊ जी ब्लॉग पे पार्टी शार्टी चल रही है तो मैंने सोचा इधर भी कुछ इंतजाम होगा .....
पर इधर तो अरमानों को थामे पैबंद लगी एक गठरी..के सिवा कुछ न दिखा ....

तेरी पायल से टूटा घुंघरु...
खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
पूरा जहान!!

ओये होए .....!!

आज तो बस गज़ब ही है ....
चलिए इस पुरे जहां की बहुत सी बधाई आपको ....
ये जहां यूँ ही तरो ताजा रहे ......!!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

JUT SPEACHLESS... AUR KUCH KAHNE KO MERE PAAS SHABD NAHI HAI .. GALA RUNDH SA GAYA HAI AUR AANK ME PAANI HAI .. PHIR AATA HOON, AAPKO PRANAAM

VIJAY

विजय प्रकाश सिंह ने कहा…

वैवाहिक वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएँ |

anjana ने कहा…

सुन्दर रचना |

सुखी दांपत्य जीवन की ढेर सारी बधाइयां। शादी की सालगिरह मुबारक हो |

mehek ने कहा…

sach,sahi,ek chota safah kafi hai jeevan ki kahani pirone ke liye,sunder rachana.

venus***** ने कहा…

कुछ उधड़े कुछ जुड़े रिश्ते
चन्द पोशीदा से ज़ज्बात
धुँधली पड़ती कुछ यादें
दिल के फ्रेम में जड़ी
धूल खाई दो चार तस्वीरें

खिड़की से दिखता
एक मुट्ठी भूरा आसमान
बस! इतना है मेरा
hmmmm.............
prte prte..kho jaate hain....

Behtareen abhivayakti..
tahn xx for sharing such jem wid us
take care

Madhu chaurasia, journalist ने कहा…

शब्दों का सटीक चयन..
और कविता बेजोड़ है सर

http://www.baddimag.blogspot.com ने कहा…

badhiya gazal abhar

mridula pradhan ने कहा…

very good.

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

यहां तक आने में मैंने देर कर दी ,
बहुत पहले से शुरू कर देना चाहिये था !

roop ने कहा…

भई वाह!,बड़ा शानदार लिखते हैं आप .और हाँ , मेरी कविताएँ पढने के लिए आपका आभार और धन्यवाद,

यूँ ही होती रहीं गर, हौसला -अफजाई मेरी!

परिंदों से परवाज़ लगा पहुंचेंगे शिखर तक! (कुछ ज्यादा तो नहीं कह दिया).