मंगलवार, अप्रैल 28, 2009

बेचारा सुअर....

कल देर रात लंदन की यात्रा से लौटे. यहाँ से याने यॉर्क से लंदन की ३.३० घंटे की ड्राईव थी और लौटते वक्त नॉरिच शहर वाया केम्ब्रीज लौटे. नॉरिच में एक मित्र परिवार के साथ लंच था तो वापास आते पूरे ७ घंटे की ड्राईव हो गई.

यहाँ हालाँकि भारत की तरह ही लेफ्ट में गाड़ी चलाते हैं और हैं भी मेन्यूल गियर मगर फिर भी स्पीड कनाडा से ज्यादा थी. लगभग पूरा सफर १३० किमी की रफ्तार से गाड़ी चलाने में आनन्द आ गया. रास्ता भी बहुत हरियाली से भरा हुआ और मौसम भी उतना ही सुहाना. बीच बीच में वो सरसों के खेत भी मिले जिनमें कभी काजोल दौड़ी थी फिल्म ’दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ के लिए.

इस बीच मेनचेस्टर भी हो आये हैं. बहुत कुछ है बताने को इन शहरों के बारे में, इनकी तस्वीरें और यहाँ आने के लिए बेल्जियम से यहाँ तक यूरोस्टार रेल से यादगार यात्रा. लगता है ३ तारीख को कनाडा पहुँच कर ही तस्सली से लिखना होगा.

हाँ, कनाडा जाने के नाम पर एकाएक आज अरविन्द मिश्रा जी की पोस्ट पर नजर पड़ी. टीवी पर तो खैर देख ही रहे थे कि कनाडा-अमरीका में स्वाइन-फ्लू का प्रकोप हुआ है और इसके महामारी बन जाने का खतरा विश्व स्तर पर मंडरा रहा है.अखबार और टीवी देखता हूँ तो हर अमरीकी और कनैडियन परेशान और हैरान. साबुन से बीस बार हाथ धोये जा रहे हैं. हर बार डिसइन्फेक्टेन्ट लगा रहे हैं जैसे बर्ड फ्लू के समय एतिहात बरते जा रहे थे. लग रहा है मानो इससे बच गये तो अमर हो जायेंगे. फिर कभी नहीं मरेंगे.

एक पतले से धागे का फासला है जिन्दगी और मौत के बीच. धागा टूटा नहीं कि आप उस पार. फिर भी जीजीविषा की मोटी रस्सी आपको उस धागे से पार जाने से रोके रखने का अंतिम क्षणों तक प्रयास करती रहती है. न जाने क्यूँ?

खैर, मिश्र जी को पढ़ा, टीवी देखा, अखबार पढ़ा-जाना और समझा. जाना तो वहीं है. तसल्ली ये लग गई कि यह महामारी सूअर के माध्यम से फैल रही है. बहुत राहत लगी कि हम तो सूअर खाते नहीं. ये तो गोरे जाने, उनकी परेशानी है.

मन ही मन बड़े खुश और लगे सोफे पर लेटकर मूवी देखने ’रब ने बना दी जोड़ी’. प्रिन्ट शायद थो़ड़ा खराब था तो मन भटका. विचार फिर मन में कौंधे कि आखिर मैं कितना सेफ हूँ सिर्फ इसलिए कि सूअर नहीं खाता. अवलोकन करते ही चौंक पड़ा-अरे, काहे का सेफ!!! सूअर भी तो सूअर कहाँ खाते हैं? फिर भी मेन रोल में वो ही हीरो हैं इस एपिसोड के. फिर अपने काहे के सेफ?

बेचारा सूअर

चलो, देखी जायेगी. जाना तो है ही है. कनाडा भी और उपर भी. जब जो जो बदा होगा, तब वो वो झेलेंगे.

एक मजेदार बात तो भारत से निकलते वक्त ऐसी हुई कि क्या कहें.

अक्सर ही कनाडा आते समय जबलपुर से दिल्ली फ्लाईट के दो दिन पूर्व आ जाता हूँ ताकि मन भी शांत हो ले और इत्मिनान से निकलें. पीछे छूटे परिवार के सदस्य और साथी भी इस सेटलमेंट टाइम में सेटल हो जाते हैं कि अभी तो भारत में ही है. सब सोच का खेल है. हर बार ग्रेटर नोएडा में चाचा के घर ही रुकना होता है. इस बार चलते वक्त बेटे का फोन आ गया कि हयात होटल के पाइंट पड़े हैं, आप इस्तेमाल कर लिजिये. हमने भी सोचा, चलो हयात में रुक लेते हैं और भीका जी कामा प्लेस वाले हयात में कमरा बुक करा लिया.

बार बार रुकते रुकते बेटा उनके डायमंड कल्ब का मेम्बर हो लिया है तो होटल वाले जरा एकस्ट्रा सजग थे और हमसे पूछा कि सर, आप और मैडम आ रहे हैं तो रुम अपग्रेड कर दें. हमें भी क्या, हमने कह दिया-कर दो.

होटल पहुँचे तो बेहतरीन रुम इन्तजार कर रहा था. पहुँचते ही नहाने चले गये और जब निकल कर आये तो पत्नी हा हा करके हँसते मिली. माजरा कुछ समझ नहीं आया. जब उसकी हँसी रुकी तो जो उसने बताया कि हम तो मानो इस उम्र में आकर शर्म से लाल टाईप हो गये.

दरअसल, अपग्रेड में हयात नें हमें हनीमून वाला कमरा दे दिया जिसके बाथरुम की दीवाल पूरे काँच की थी. कमरे में चूँकि रोशनी एकदम मद्धम थी तो हमें तो बाथरुम से कमरा ज्यादा नहीं दिखा और न ही उस ओर ध्यान गया किन्तु कमरे से पूर्ण रोशन बाथरुम का एक एक नल नजर आ रहा था. बताईये, यह भी कोई बात हुई. भले ही कोई हनीमून पर भी आया हो, नहाते हुए क्या देखना भाई!! हमारी तो खैर समझ के बाहर है.

यूँ तो पारदर्शिता बहुत अच्छी बात है किन्तु हर जगह नहीं. सारी भैंसे एक ही लाठी से नहीं हाँकी जाती.

शाम को कुछ गेस्ट भी आमंत्रित थे कमरे में. हम सोचने लगे कि अगर उन्हें बाथरुम जाना हुआ तो? और वैसे भी पता लगने के बाद तो हम खुद ही न इस्तेमाल कर पाते. तुरंत फ़्रंट डेस्क को फोन किये. अपना कमरा दूसरा करवाये..नार्मल बाथरुम वाला, तब जा कर चैन में चैन आया.

वो पीछे: बाथरुम की काँच की दीवाल

हाँ, अगली रात एक मित्र परिवार के साथ जामा मस्ज़िद के पास वाले करीम पर जाकर खाना खाया-जबदस्त और अद्भुत अनुभव. बहुत पुरानी तमन्ना थी वहाँ जाकर खाना खाने की, सो चलते चलते पूरी हुई. जितनी ख्वाईशें ऐसे ही पूरी होती चलें, बस काफी है वरना तो:

हजारों ख्वाईशें ऐसी की हर ख्वाइश पर दम निकले

हयात:जरा बार का रुख करें


अब यूँ ही एक विडियो जो यू ट्युब पर मिला:

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68 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ल ने कहा…

ये वाला फ़्लू तो आदमी से भी फ़ैल रहा है जी। मुंह बांध के रखने का।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

कोई बात नहीं ,एहतियात बरतिए बस.यात्रा संस्मरण ,चित्र के साथ पढने की इच्छा बलवती हो उठी है जल्द पोस्ट करें .

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

अरे समीर भाई , क्या छाँट के वीडीयो लाये हैँ आप भी ..हँसते हँसते बुरा हाल हो गया मेरा! और होटल " हयात " मेँ खूब मजे कीये आपने क्यूँ ? ;-)) सौ. साधना भाभी जी की और आपकी तस्वीरेँ माशाअल्लाह बढिया आयीँ हैँ - बहुत स्नेह के साथ, - लावण्या

श्यामल सुमन ने कहा…

ढ़ंग बहुत रोचक लगा देखा सब वृतांत।
पढ़ता हूँ जब आपको हो जाता मन शांत।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Arvind Mishra ने कहा…

लिल्लाह दिखाते तो हैं ट्रेन के सफ़र का वीडियो और जाते हैं प्लेन से ! मूलतः आप मनोविनोदी स्वभाव के हैं -हर घाव घड़ी में हास्य ढूंढ ही लेते हैं !
हाँ हाथ धोते रहना मत भूलियेगा ! सूअर न खाएं मगर सूअरों ( के खाने वालों की ) की सोहबत तो

Bhuwan ने कहा…

मजेदार पोस्ट... आपकी यात्रा संस्मरण का इंतज़ार रहेगा.. वैसे अभी अभी पीटीआई ने जानकारी दी है की स्वाइन-फ्लू पोर्क खाने से नहीं होता. लेकिन इस बीमारी की वजह से कई मुल्कों में पोर्क का आयात बंद करा दिया गया है.. इससे हो रहे नुक्सान से निपटने के लिए लोग इसका नाम बदल कर मेक्सिकन फ्लू करने की सोच रहे है.

भुवन वेणु
- लूज़ शंटिंग

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत कुछ है बताने को इन शहरों के बारे में, इनकी तस्वीरें और यहाँ आने के लिए बेल्जियम से यहाँ तक यूरोस्टार रेल से यादगार यात्रा. लगता है ३ तारीख को कनाडा पहुँच कर ही तस्सली से लिखना होगा.
इंतजार रहेगा आपकी पोस्‍टों का ..

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

अपग्रेड सोच समझ कर करने की चीज है आपके अनुभव से ज्ञात हुआ .

Anil Pusadkar ने कहा…

सहमत हूं आपसे। हर जगह पारदर्शिता अच्छी नही। ये नया अनुभव है पारदर्शिता का।

Anil ने कहा…

"सुअरी जुकाम" अब आदमी को भी होने लगा है - इससे सिर्फ यही पता चलता है कि आदमी और सुअर में अब कितनी समानतायें हो गयी है।

करीम की याद दिलाकर आपने बड़ी बेदर्दी दिखायी। १३,००० किलोमीटर दूर से तो खुशबू भी नहीं ले सकता। वैसे भी वहाँ १-२ ही शाकाहारी भोजन बनते हैं ("अंगूर खट्टे हैं")।

आपका पारदर्शी बाथरूम तो फिर भी अच्छा था, जरा इसे देखिये!

Prem Farrukhabadi ने कहा…

समीर भाई,
आपकी यह पोस्ट पढ़ते पढ़ते जैसे ही मज़ा आने पता लगा आपकी पोस्ट समाप्त हो गयी .पोस्ट पढ़ते समय ऐसा लग रहा था जैसे मैं आपके साथ साथ चल रहा हूँ और इंजॉय कर रहा.इस पोस्ट की जितनी तारीफ की जाय कम है.शायद मुझे रोमांटिक बातें अच्छी लगती हैं. पोस्ट के रूप में आपने यात्रा ही करा दी .धन्यबाद .

Prem Farrukhabadi ने कहा…

समीर भाई,
आपकी यह पोस्ट पढ़ते पढ़ते जैसे ही मज़ा आने लगा,पता लगा आपकी पोस्ट समाप्त हो गयी.पोस्ट पढ़ते समय ऐसा लग रहा था जैसे मैं आपके साथ साथ चल रहा हूँ और इंजॉय कर रहा इस पोस्ट की जितनी तारीफ की जाय कम है.शायद मुझे रोमांटिक बातें अच्छी लगती हैं.पोस्ट के रूप में आपने यात्रा ही करा दी.धन्यबाद.

"अर्श" ने कहा…

BADE BHAAEE SAHIB KO NAMASKAR,
WAAHI JI WAAH BAHOT HI BADHIYA SASMARAN LIKHAA HAI AAPNE , UPAR SE WO BATHROOM WAALI BAAT TO BAHOT JAMI ,HA HA HA ... SACH KAHUN RO KAREEM ME KHAANE KA EK APNAA HI ANUBHAV HAI.. LAZIZ AUR LAAZAWAAB....
DHERO BADHAAYEE AUR AABHAAR AAPKA

HAAZAARO KHWAHISHEN AISI KE HAR KHAAHISH PE DAM NIKALE..
BADE BE-AABARU HOKAR TERE KUCHE SE HAM NIKALE..

SAHI KAHAA AAPNE...


ARSH

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

जाना तो है ही है. कनाडा भी और उपर भी. जब जो जो बदा होगा, तब वो वो झेलेंगे.


वाह जी सूअर चिंतन को आपने भारतिय दार्शनिकता से लिया. बडा अच्छा लगा. पर इन सूअरों ने कल के शेयर बाजार लुढका िये.:)

कमरे वाली बात पर बहुत आनन्द आया. क्या आनन्द आया होगा?
वैसे रामप्यारी बोल रही थी कि उसने आपका इंटर्व्यु हयात रिजेंसी मे लिया और उसको आपने हयात के आंगन रेस्टोरेंट मे ही लंच कराया.

हमने सोचा कि हमको जलाने के लिये कह रही है. पर अब लगता है रामप्यारी भी कभी कभी सच बोल ही देती है.

वैसे रामप्यारी ने ये बाथरूम वाली बात हमे बता दी थी जिस पर अब यकीन आया है.:)

रामराम.

लवली कुमारी / Lovely kumari ने कहा…

हा हा हा ..सही कहा पारदर्शिता जरुरी है पर हर जगह नही...एतिहातन डाक्टरों के द्वारा दिए गए बचाव के सभी नियमो का पालन करें.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

हम्म....
विडियो का उपदेश :- कराची से ईद मनाने अंदरूनी मुल्कों में जाते लोगों को कवर नहीं करना चाहिए.

Shama ने कहा…

Sameerji...aapke lekhanke baareme maine kya kehna hai...itnee qabiliyathee nahee...balki bade dinose aapka koyi maargdarshan mujhe mila nahee...narazeekee wajeh jaan saktee hun?
Filhaal," aajtak yahantak" is blogpe kuchh sansmaran likh rahee hun...dua karen ki, "duvidhawalee" durgatee na ho....!

अन्तर सोहिल ने कहा…

एक पतले से धागे का फासला है जिन्दगी और मौत के बीच. धागा टूटा नहीं कि आप उस पार. फिर भी जीजीविषा की मोटी रस्सी आपको उस धागे से पार जाने से रोके रखने का अंतिम क्षणों तक प्रयास करती रहती है. न जाने क्यूँ?
इसी दर्शन के लिये तो आपके पास आता हूं।
वीडियो देखकर तो मजा आ गया। मुझे लगा भाटिया जी भी आ गये हैं।
नमस्कार स्वीकार करें

संजय बेंगाणी ने कहा…

हनीमून मुबारक :)

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

:) हयात एपिसोड बेस्ट लगा :) और जीने की जिजीविषा ..एक सच बात कहती है .....

अभिषेक ओझा ने कहा…

हा हा ! हनीमून मुबारक :-)
और सूअर भी तो सूअर नहीं खाते. बात में दम है .

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी,आप का यह संस्मरण पढ़ कर ज्ञानवधर्न हुआ। ;))
वैसे ऐसी पारदर्शिता अब अपने देश मे भी बढ़ती जा रही है।

मीत ने कहा…

मजेदार लेख बहुत मजा आया...
वीडियो भी अच्छा है...
हा हा हा...
मीत

गौतम राजरिशी ने कहा…

किसी भके मानुष ने कहा है कि its never late for another honeymoon...
रोचक दास्तान
मधु-यामिनी की मुबारक बाद

SHUAIB ने कहा…

आपका लेख पढा मज़ा आगया फिर आखिर मे वीडियो देखा तो मज़ा दोबाला होगया :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आपको ऐसा कमरा देने के पीछे किसी की साजिश लगती है. वैसे तो ............... ठीक ही था.रही बात खतरे की तो ऐसा तो नहीं कि पहले खतरे पैदा किये जाते हों फिर वैक्सीन बनाई जाती हो.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

ज़िन्दगी जिंदादिली का नाम है....ये आपको पढ़ कर ही मालूम होता है...रोचक किस्से सुनाये आपने....वैसे ऐसे किस्से हमारे पास भी हैं लेकिन कभी मिले तो सुनायेंगे...यूँ सार्वजनिक करने योग्य नहीं हैं....कनाडा पहुँचिये फिर मिलने आते हैं आपसे....अगले माह शायद नियाग्रा जाने का कार्यक्रम बने....
नीरज

डॉ .अनुराग ने कहा…

हयात में सूअर चिंतन....का बोध ......जीवन कैसा दार्शनिक हो चला है.....उसके बाद पारदर्शी बाथरूम में इन्सान.....जीवन कितना पारदर्शी है.....सोचिये गर कोई मेहमान अचानक आ जाता.......वैसे बैगानी जी की बात मै भी दोहराता हूँ....हनीमून मुबारक हो

विनीता यशस्वी ने कहा…

majedaar post...agli post ka intzaar hai...

विनीता यशस्वी ने कहा…

majedaar post...agli post ka intzaar hai...

SWAPN ने कहा…

rochak sansmaran, dilkhush.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

kal hi log aapki pukar kar rahe the aur AAJ HI AAP HAAZIR.

Harkirat Haqeer ने कहा…

जब निकल कर आये तो पत्नी हा हा करके हँसते मिली. माजरा कुछ समझ नहीं आया. जब उसकी हँसी रुकी तो जो उसने बताया कि हम तो मानो इस उम्र में आकर शर्म से लाल टाईप हो गये.

दरअसल, अपग्रेड में हयात नें हमें हनीमून वाला कमरा दे दिया जिसके बाथरुम की दीवाल पूरे काँच की थी......

हा...हा....हा..........!!!!!!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

पहले तो आप की पोस्ट पढकर ही चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई, ऊपर से वीडियो देख क‌र तो हंसी रूकने का नाम ही नहीं ले रही.....

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

सूअर से जितने मरेंगे, उससे ज्यादा तनाव या अवसाद से मरते हैं। पर उनके लिये इतना पेनिक नहीं है।
यह सनसनी कुछ फर्मों और लोगों को मालामाल बना देगी और कुछ लोगों को शेयर बाजार पटकने का मौका देगी।
बाकी उसके बाद सूअर भी रहेंगे और फ्लू भी और आदमी भी!

Science Bloggers Association ने कहा…

संभल कर रहिएगा, वर्ना परेशानी भी हो सकती है।
----------
सम्मोहन के यंत्र
5000 सालों में दुनिया का अंत

अनिल कान्त : ने कहा…

ha ha ha ha
maza aa gaya

Mahesh Sinha ने कहा…

आजकल तो लोग घर में भी कांच के बाथरूम लगवाने लगे . भला हो किसी जासूस पत्रकार की नजर नहीं पड़ी :)

PD ने कहा…

बेचारे समीर अंकल.. :)

राजेश स्वार्थी ने कहा…

सारी दुनिया के लफड़े क्या आपकी किस्मत में ही लिखे हैं? जब देखो तब आपके साथ कुछ करिश्मा हो जाता है. :)

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

समीर जी,
जैसे हर बार हम भगवान का शुक्र अदा करते रहते हैं कि चलो ऐसा ना हुआ वैसा ना हुआ तो आप भी कर ही लें। खुदा ना खास्ता नहाते-नहाते ही मेहमान आ जाते तो..... (-:

Shefali Pande ने कहा…

मज़ा आ गया पड़कर .....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

प्रियवर समीर लाल जी!
आपकी पूरी यात्रा बड़े मनोयोग से पढ़ी। सूअर के सुन्दर चित्र भी देखे। बाथरूम का काँच भी देखा। बाथरूम के सामने एक सुन्दर छवि के भी दर्शन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। शायद वो अपकी जीवन-संगिनी होंगी।
उनको मेरा अभिवादन पहुँचाने की कृपा करें।
आपका यात्रा वृत्तान्त बड़ा अच्छा लगा।
आगे इसी शैली में कुछ और भी लिखें।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

प्रियवर समीर लाल जी!
आपकी पूरी यात्रा बड़े मनोयोग से पढ़ी। सूअर के सुन्दर चित्र भी देखे। बाथरूम का काँच भी देखा। बाथरूम के सामने एक सुन्दर छवि के भी दर्शन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। शायद वो अपकी जीवन-संगिनी होंगी। उनको मेरा अभिवादन पहुँचाने की कृपा करें।
आपका यात्रा वृत्तान्त बड़ा अच्छा लगा। आगे इसी शैली में कुछ और भी लिखें।

दिलीप कवठेकर ने कहा…

आपके युरोस्टार के चित्रों को देखने की ख्वाईश है.जरूर पोस्ट करें.

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

वाह स‌ूअर की फोटी भी क्या लगाई है आपने। और वीडियो तो कहने ही क्या हंसते हंसते लोटपोट हो गए इस‌े देखकर...

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

nice post

http://www.ashokvichar.blogspot.com

AlbelaKhatri.com ने कहा…

SAMEERJI, sujhav k liye dhanyavvd..
aapke aadeshanusar word vrfcn hata diya hai..wish you all the best
-albela khatri
www.albelakhatri.com

नरेश सिह राठौङ ने कहा…

धयान दे अब यह रोग टिपणियो से भी फैलने वाला है |

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया सचित्र यात्रा संस्मरण और सुअरों से फ़ैल रही बीमारी के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा. आभार

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

सूअर तो सदा ही रहेगा बेचारा

नहीं खाता है कभी भी वो चारा

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

Wah gurudev chhaa gaye

amit ने कहा…

वाह-२, कमरा तो बढ़िया चकाचक मिला था आपको, खामखा बदलवा लिए!! ;)

और दिल्ली आए लेकिन हमसे न मिले, यह अच्छी बात नहीं है समीर जी। कौनो नाराज़गी है का? :(

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह...समीर भाई...........दिल्ली की बात भी याद गार बन गयी...............पहले तो शुक्रिया भाभी की फोटो लगाने का...........दूसरा आपकी सुन्दर पोस्ट के लिए.............आपका यात्रा वृत्तान्त, लन्दन का स्टे, गाडी की तेज़ रफ़्तार .........वैसे तो आपका पूरा अंदाज ही लाजवाब है..

Manish Kumar ने कहा…

बड़ी मज़ेदार आपबीती रही ये भी।

sureeli sharma ने कहा…

समीर जी ,
आपका जबाव नहीं प्यार को कितने प्यार से लिखते हैं.दूसरों का दिल जीतना आपको आता है.
जीवन आपका प्यारमय हो. बधाई.

विनय ने कहा…

बढ़िया है वह तस्वीरें ज़रूर दिखाइए।

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तख़लीक़-ए-नज़रचाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलेंतकनीक दृष्टा

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

आपका यात्रा वृत्तान्त बड़ा अच्छा लगा।
लेकिन डरने की कोई बात नहीं है बस एहतियात बरतिये बाकी रब भली करे सबकी

साधवी ने कहा…

majedaar raha padhna.

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

हा हा हा हा. यह भी खूब गुजरी आप पर.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

फ्लू से बचिएगा, कैसा भी हो।

neera ने कहा…

अरे! आप हमारी गली से गुजरे और एक दस्तक भी न दी?
हयात के सुख हमारी झोपडी में कहाँ :-)

निवेदिता ने कहा…

mama ji ise par kar to mai has has k pagal ho jaugi
hayat wali bat par kar
waise mami bahut pyari lag rahi hai

निवेदिता ने कहा…

mai to haste haste pagal ho jaugi mama ji aapki hayat wali bat par kar.
waise mami bahut pyari lag rahi hai

Ashish Shrivastava ने कहा…

जानी जिनके बाथरूम शीशे के होते है , वो लाईट बंद करा के नहाते है !

निवेदिता ने कहा…

ha ha ha

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

video bahut pasand aaya. H1N1 behataqr nam haiswine flu se so usaka dar to yanha bhee hai. par aise to kaee kaee dar hum pacha ke baithe hain.

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

अजी मजा आ गया आपकी इस पोस्ट को पढकर। सुबह से अब जाकर हँसी आई है। शुक्रिया जी हँसाने के लिए।