गुरुवार, मई 24, 2007

हॉट स्पॉट यानि....

हमेशा हास्य व्यंग्य वगैरह लिखते लिखते ईमेज बड़ी खराब होती जा रही है. सब समझते हैं कि हमें सिवाय ठिठोली के और कुछ आता ही नहीं. जो मिलता है बस मजाक. हमारी अपनी सोच से की गई गंभीर बातें भी मजाक में उड़ा दी जाती हैं. हमसे आधी उमर के लोग चैट पर हमसे कहते है कि और मामू, अभी भी टुन्न हो कि होश में..क्या चल रहा है? लालू की सी स्थिती हो गई है. अब रेल्वे कितना ही बढ़िया काम करे या कोई बेहतरीन योजना घोषित करे, सब एक बार को तो हंस ही देते हैं. इसीलिये आज हमने सोचा है कि बीच बीच में गंभीर चिंतन भी किया करेंगे. इसी के मद्दे नजर आज हम आपको पूरी क्लास लगा कर पढ़ायेंगे:

फुरसतिया जी आये हैं , ले कर कलम दवात
अखबारों मे वह छापते इंकब्लॉगिंग की बात.
इंक ब्लॉगिंग की बात, हस्त लेखन से होती
अरमानी के सूट पर, बाँध ली उन्होंने धोती *
कहत समीर कि सीखो इसमें लिंक लगाना
समझ तुम्हें आ जाये, तब करके दिखलाना.
-समीर लाल ‘समीर’
* अब कम्प्यूटर सामने रखा हो और आप यूनिकोड में टंकण में भी माहिर हों, फिर भी हाथ से लिखकर उसे कम्प्यूटर पर चढ़ाने में तुले हों, इसे अरमानी सूट पर धोती पहनना नहीं कहेंगे तो और तो कोई उपमा मुझे नहीं सूझती!!







उपरोक्त तस्वीर में अगर आप फुरसतिया जी के नाम पर जाकर चटका लगायेंगे तो वह आपको उनके चिट्ठे पर ले जायेगा, जहाँ उन्होने ऐरिहासिक अखबार निकाला है और यदि इंक ब्लागिंग पर चटका लगायें तो वो देबाशीष के चिट्ठे पर, जहाँ उन्होंने इंक ब्लॉगिंग से हम सबका परिचय कराया था. जब सब के पास ले जा रहा है यह चटका, तो हम कौन पाप किये हैं? हमारे नाम पर भी लगा कर देख लो. यह सब संभव होता है, हाईपर लिंक की ही तरह हॉट-स्पाट लिंक देकर. जिस तरह से आप टेकस्ट में हाईपर लिंक देते हैं, वैसे ही चित्र में अमुक स्थान पर हॉट-स्पाट लिंक. और इसे लगाने के औजार के रुप में मैं माईक्रो सॉफ्ट के फ्रंट-पेज (Microsoft Front Page) का इस्तेमाल करता हूँ, जो कि माईक्रो सॉफ्ट ऑफिस के साथ आमूमन स्थाफित रहता है. अगर आपके पास फ्रंट पेज नहीं है, तो आपका सफर यहीं खत्म कर लें. आपने यहाँ तक पढ़ा, आपका बहुत आभार और साधुवाद. अन्य औजारों से भी इसे लगाया जा सकता है, मगर हम यहाँ सिर्फ फ्रंट पेज धारकों को समझा रहे हैं, माईक्रो सॉफ्ट की चमचागिरी में कि शायद उनकी नजर पड़ जाये तो लेपटाप वगैरह कुछ ईनाम में दे दें.

क्रमवार दिशा निर्देश:

१.एक हस्त-लेख (छोटा सा-मात्र सलाह है. बाकि आपकी इच्छा, चाहो तो उपन्यास लिख लो) (ध्यान रहे उसमें उड़न तश्तरी का नाम आये, उसी का लिंक लगाना सिखाऊंगा, इस आलेख में :)) तैयार कर लो.
२.फिर उसकी तस्वीर ले लो (स्कैनर से या कैमरा से, ये आपकी इच्छा पर)
३.फिर उसे किसी फोटो वाली साईट पर चढ़ा लो (जैसे कि फ्लिकर- फ्री है न भाई) .साथ ही सरलता के लिये अपने कम्प्यूटर भी एक कॉपी सेव किये रहो. आगे काम आयेगी.
४.वहाँ से उसका लिंक नोट कर लो (और अपने पास धरे रहो, वो भी अभी आगे काम आयेगा-उस समय मांगूगा तो हे हे मत करने लगना. सम्भाल कर रखो.)
५. अब फ्रंट पेज खोल लें.
६. फिर File> New> Blank Page खोल लें.
७.इस पन्ने के Design View में Insert>Picture>From File क्लिक करके कंडिका ३ में जो कॉपी आपने अपने कम्प्यूटर में सेव की है, उसे खोल लें.
८. अब वह फोटो फ्रंट पेज में खुल जायेगी. (यह अपने आप हुआ, आपकी मेहनत कंडिका ८ का परिणाम, इस कंडिका के लिये आपका योगदान भारत के विकास में नेताओं के योगदान के सम-तुल्य माना जायेगा.)
९.अब फ्रंट पेज में View>Toolbars>Pictures पर क्लिक कर दें.
१०.इस नीचे तस्वीर की तरह की टूल बार आपको दिखने लगेगी.




११. इसमें दायें से पांचवा जो आयताकार चित्र दिख रहा है, उसे क्लिक करें.
१२. फिर माऊस को चित्र पर ले जाकर समीर (आपने शायद उड़न तश्तरी लिखा है, चलेगा, उसी को कवर कर लो) का नाम को इस आयत से कवर कर लो. जैसे ही आप माऊस रिलिज करेंगे, अपने आप हाईपर लिंक का बक्सा खुल जायेगा, वहाँ http://udantashtari.blogspot.com/2007/05/blog-post_22.html का लिंक दे दें.



१३. अब फ्रंट पेज के कोड वाले पन्ने पर जाकर फोटो का लिंक C:\\ या जो भी आपके कम्प्यूटर वाला है, को बदल कर कंडिका ४ वाला लिंक, जो हम कहे थे धरे रहो, आगे काम आयेगा, वो लगा लें.
१४. अब यहाँ से '<'Body'>' के बाद से '<'/Body'>' के पहले तक का कोड कॉपी कर लें.
१५. अब इसे ब्लॉग के पोस्ट वाले पन्ने पर पेस्ट कर दें. बस!! हो गया.
१६. अब अपनी पोस्ट पर जाकर लिंक पर क्लिक करें.

वाह, पहुँच गये उड़न तश्तरी पर. अब वहाँ कमेंट कर दें और फिर जो मर्जी सो करो. हमें क्या!!

आशा है समझ आ गया होगा. अगर नहीं आया तो पूछने में शरमाना मत. सबका बुद्धि पर समान अधिकार थोड़े ही न होता है. कोई जल्दी समझ जाता है, कोई देर से और कोई नहीं भी समझ पाता. यही सब देखकर ईश्वर के कहीं न कहीं होने की भावना बलवती हो जाती है. :) अगर कमेंट नहीं करोगे तो हम समझेंगे कि आपको समझ नहीं आ पाया और ट्रेफिक काउन्टर से हमें मालूम तो चल ही जायेगा कि आप आये थे...हा हा!!!


नोट: वैसे अब तक की हिन्दी इंक ब्लॉगिंग की सबसे बड़ी पहली पोस्ट कनाडा अमेरिका न जाओ... का सेहरा हमारे फुरसतिया जी के सिर पर जाता है. एक न एक दिन उन्हें इसके लिये पुरुस्कार से नवाजा जायेगा. वो तैयारी रखें. आज से वो ईनामी कहलाये.

अब आज की क्लास खत्म. अब चलो, थोड़े जाम-शाम हो जायें. ऐसे मास्साब फिर नहीं मिलेंगे, जो क्लास के बाद कॉकटेल पिलवायें. :) Indli - Hindi News, Blogs, Links

34 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ला ने कहा…

बढ़िया है। हम समझ गये। अब इसे तकनीकी विद्वतजन पास करें तब बात है। पता नहीं कौन बात
पर कह दें कि ऐसे नहीं वैसे होगा। हस्तलेख तो आपका भी आपकी तरह ही मन भावन है।

धुरविरोधी ने कहा…

समीर भैय्या, हम तो ओपिन आफिस वापरते हैं, कुछ इसके लिये भी तो बताओ.

Laxmi N. Gupta ने कहा…

अति उत्तम। इतना तक्नीकी लेख लिखोगे तो हास्य लेखक वाली छवि बिगड़ जाएगी। मेरे तो कुछ खास पल्ले नहीं पड़ा लेकिन बहुत धयान से पढ़ा भी नहीं। अभी तो कापियाँ जाँचते भेजे का भुर्ता बना हुआ है। जब दिमाग कुछ काम कर रहा होगा तब फिर पढ़ूँगा।

Raviratlami ने कहा…

एक कहावत है कि कुकुर अऊ कउवा जब मुँह खोलेगा तो...

तो वैसे ही जब व्यंग्य लेखक मरसिया भी लिखेगा तो उसमें व्यंग्य तो घुस ही जाएगा.

तकनीकी लेखन की नई, मौलिक शैली मुबारक हो. ज्ञान ज्ञंगा ऐसी ही बहती रहे...

काकेश ने कहा…

ज्ञान तो अच्छा दिये हो मामू ...अभी भी टुन्न हो का ...

वैसे फ्रंट पेज ऑफिस के साथ नहीं आता आजकल कम से कम स्टेंडर्ड वर्जन के साथ ...

और तस्वीर में जहां हॉट स्पॉट लगाया है वहां पर किसी मार्कर से मार्क कर दें ताकि पता चले कि वहां पर लिंक है...

Raviratlami ने कहा…

और हाँ, जहाँ आपको लिंक लगाना है वहाँ आप पहले ही स्याही से रेखांकित कर दें और उन शब्दों को गहरा कर दें :)

mamta ने कहा…

पढ़ तो लिया पर इतनी लंबी क्लास ।

Sanjeet Tripathi ने कहा…

शुक्रिया गुरुवर!

Pankaj Bengani ने कहा…

ऐ ल्लो... अब आप मास्टरगिरी पर उतर आए.. अरे भाई कोई विधा किसी और के लिए भी तो छोडिए.. सब खुद ही कर लीजिएगा का?
:)


वैसे लेशन अच्छी तरह से रट लिया गया है, पर फ्रंटपेज तो हम युज करते ही नहीं हैं.. ही ही.. ये बात बिल्लु तक ना पँहुचे यह ध्यान रखिएगा.. उनकी सीडी वीडी में अपने को भी इंटरेस्ट है. :)


वैसे खान पान की बात झांसु लगी. तो दमदार मास्टरजी से निवेदन है की पाठशाला नियमित कर दे और क्लास के पहले खान और खतम होने पर पान जरूर करवा दे.. :)


=================


आये नए मास्टर, हाथ में लेके चॉक,

बोले सिखो ट्रीक पुरानी, डस्टर दिए ठोक,

डस्टर दिए ठोक, बॉर्ड पे पोती सफेदी,

क्या सिखें क्या समझें छोडो, जल्दी से पार्टी दे दी.

Gaurav Pratap ने कहा…

उडन तश्तरी जी.... आपने तो हास्य व्यंग से सीधे तक्नीक पे छलन्ग मार दी है. जानकारी के लिये शुक्रिया.

Gaurav Pratap ने कहा…

उडन तश्तरी जी.... आपने तो हास्य व्यंग से सीधे तक्नीक पे छलन्ग मार दी है. जानकारी के लिये शुक्रिया.

संजय बेंगाणी ने कहा…

यह मस्त जुगाड़ आया आपके दिमाग में. बहुत खुब. जो ज्ञान लिया उसकि टिप्पणी कर दक्षिणा दे दी है.
कोकटेक मस्त ही होगा, हमने नहीं पीया है.

आलोक पुराणिक ने कहा…

समीरजी आज का लेख आपने टेकनीक-लिटरेट लोगों के लिए लिखा है। हम जैसे तकनीक-निरक्षरों की समझ में कुछ नहीं आया। निरक्षरों पर भी कृपा करो जी। वैसे, अपना अगड़म-बगड़म चिंतन कहता है कि इमेज के मेकओवर में पुरानी इमेज की ऐसी-तैसी हो जायेगी, जरा सोचिये मल्लिका सहरावत अगर निरुपा राय बनने की सोचे, तो क्या वह बन पायेगी।
आलोक पुराणिक

notepad ने कहा…

बहुत बढिया !छवि तोडक !तकनीक जोडक !ज्ञान फोडक !
:)

Debashish ने कहा…

बढ़िया, आपके भीतर छिपा तकनीकी प्राणी अब जाकर बाहर आया है मैंने और रमण ने वैसे एक चिट्ठा http://kalamkaar.blogspot.com/ बना छोड़ा था जिसे हम पूर्णतः इंकब्लॉग बनाना चाहते हैं। आप, अनूप जो इस पर हाथ आजमा चुके हैं और जो आजमाना चाहते हैं उनको निमंत्रण है इससे आ कर जुड़ें।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

<>... हमेशा हास्य व्यंग्य वगैरह लिखते लिखते ईमेज बड़ी खराब होती जा रही है. सब समझते हैं कि हमें सिवाय ठिठोली के और कुछ आता ही नहीं....<>

कौन $%ं& समझता है? वैसे इसके आगे हमने आपका लेख नहीं पढ़ा है. टेक्नीकल लग रहा था. फुर्सत से पढ़ेगे. अगर हुई तो! :)

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी, लेख पढा है अब कोशिश करके दॆखेगें।आपने इस लेख में भी व्यंग्यातम्क शैली का हल्का-हल्का दर्शन तो हो ही रहा है।इस नय प्रयास के लिए भी आप को बधाई।

अतुल शर्मा ने कहा…

अब कक्षा में विनोद करेंगे तो आधी उमर के तो बोलेंगे ही, वो क्या कहते हैं मामू...
कंप्यूटर ही हमारा नहीं है और जो है उस पर भी फ़्रंट पेज तो है ही नहीं। फिर भी नहीं रुके (आपने यहीं खत्म करने का बोला था) पूरी पोस्ट पढ़ डाली। ये आपने बहुत ही अच्छी बात बताई है। प्रयोग तो भविष्य में कभी हो पाएगा।

rachana ने कहा…

वैसे तो आपके कहे अनुसार बिना पूरी पोस्ट पढे ही चले जाना चहिये था, लेकिन फ़िर् भी पूरी पढ डाली...पता नही कौन से दिन क्या पढा हुआ काम आ जाये.:)

’कंडिका’ माने क्या होता है?

Neelima ने कहा…

क्या कह रहे हैं समीर जी हास्य व्यंग्य लिख्गते लिखते आपकी इमेज खराब हो गई है ? यहां न जाने कितने अपनी इमेज खराब करने पे तुले हैं और दिन रात कामना करते हैं कि किसी भांति उनकी भी इमेज खराब हो जाए बस ...वैसे इमेज बदल्कना भी कोई आसान काम नहीं है :)

Shrish ने कहा…

लाला जी, आप तो हमारी दुकान बंद करवागे लगता है। अगर जनता को हास्य-व्यंग्य पूर्ण ऐसे तकनीकी लेख मिलने लगें तो अपनी दुकान पर कौन आएगा ? :)

बहुत ही शानदार लेख। यदि आप अनुमति दें तो क्या सर्वज्ञ के लिए इंक-ब्लॉगिंग पर लेख तैयार करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है ?

Udan Tashtari ने कहा…

श्रीश

काहे शर्मिंदा कर रहे हो मास्साब!! हम तो एक बात बस जानते थे तो वही ऊड़ेल डाले बकिया के लिये तो आप ही काम आओगे.

और यह अनुमति की बात?? आपको भी अब पूछना पड़ेगा क्या? अरे महाराज, जो भी लिखा जहाँ उपयोग हो जाये, वही मेरे लिये सम्मान का विषय होगा. :)

sunita (shanoo) ने कहा…

गुरूदेव पहले ये बताइये आपकी फ़ीस क्या होगी...अभी तो आप मुफ़्त में क्लास दे रहे है...फ़िर कहेन्गे ये तो ट्रेलर था...

वैसे क्लास अच्छी रही..थोडी़ लम्बी अवश्य थी...:)
सुनीता(शानू)

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

सोलह हैं निर्देश मगर हम बढ़े न पहले से ही आगे
कहाँ दूसरे तक सीढ़ी है, रस्ता भी हम भूल गये हैं
हमें बताओ सीधा साधा लिखने का कुछ और तरीका
तकनीकी के अध्यायों के हम हरपल प्रतिकूल गये हैं :-)

Raviratlami ने कहा…

जिन बंधुओं के पास फ्रंट पेज नहीं है, वे ओपन ऑफ़िस (यह मुफ़्त उपलब्ध ऑफ़िस सूट है और बढ़िया काम करता है) के जरिए बताए अनुसार कर सकते हैं. इमेज को डाक्यूमेंट में प्रविषट करें, फिर उस पर दायाँ क्लिक कर इमेजमैप चुनें. बस फिर इस लेख में बताए अनुसार (थोड़ा सा भिन्न है, परंतु आसान है) चित्र में यूआरएल लगाएँ.

Dr.Bhawna ने कहा…

कुछ अलग पढ़ने को मिला आपके ब्लॉग पर, किन्तु अच्छा लगा कभी-कभी कुछ हटकर लिखना,पढ़ना भी अच्छा लगता है। आपको बहुत-बहुत बधाई। बहुत मेहनत की है आपने।

Divine India ने कहा…

आपने ज्ञान बांचा उसे लेकर तो जा रहे हैं आपने कहा है तो ठीक ही होगा…देखे हम इसे कैसे आजमाएं!!

RC Mishra ने कहा…

अरे समीर जी हम तो पीछे रह गये फ़िर भी, बहुत शुक्रिया इस जुगाड़ को बताने के लिये।
Frontpage Office 2000 के साथ मुफ़्त आता है, आफ़िस २००३ के लिये अलग से।

अरुण ने कहा…

काहे समीर भाई, दुसरो की रोजी पर काहे ट्रायल मार रहे हो,तुम्हारे पास है ना इक अपनी पर्सनल रोजी उसी से काम चलाओ ना,ये मास्साब वाला काम उन्ही के लिये रहने दो ना

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey ने कहा…

आज हमने आपका लिखा समझने की सेकेण्ड असफल ट्राई करी. आप कह सकते हैं कि हम सफल होना ही नहीं चाहते.

Vijendra S. Vij ने कहा…

बडी उपयोगी जानकारी मिली समीर जी आपके आलेख के मध्यम से..इक ब्लागिग के बारे मे भी जाना..लिक दर लिक खुलते चले गये जिससे हम अंजान थे..आपकी उडनतस्तरी को टैग कर दिया है हमने अपनी जुगलबन्दी के साथ.वह भी बिना चटका लगाये...
अपने उम्दा हास्य को तकनीकि के साथ जोड एक नया प्रयोग है..आपकी आने वाली किताब को सजाने सवारने का जिम्मा हमे जरूर दीजियेगा.
धन्यवाद.

गायत्री ने कहा…

ग्यान वर्धन के लिये शुक्रिया समीर जी,इन्क ब्लोग्गि टाइपिन्ग का समय बचाएगी

Abhishek ने कहा…

मान गये भई आपकी उड़न तश्‍तरी की उड़ान को!

महावीर ने कहा…

एक बार पढ़ने में ही बुद्धि धसक गई।
२ -४ बार पढ़ेंगे तो शायद हमारे जैसे कंप्यूटरी में अंगूठा टेक नौसिखिए के भेजे में कुछ न कुछ आ ही जाएगा। करें क्या? सारी जिंदगी मास्टरी में टर टर करते रहे,अब विद्यार्थी बनने में कठिनाई आ रही है।
इतना तो समझ में आ गया है कि
यह तकनीकी लेख है।
समीर भाई, काम का लेख है, अभी तो हम blogroll से ही काम चला लेते हैं।