वादे से कहानी तक
जो तुमने कहा था
जो तुमने किया था
वो भी उस वक्त एक वादा ही था
न तुमने उसे निभाया
न तुमने आवाज दी
और उसी खामोशी में डूबा मैं
अब तलक उसी कहानी को सुनता हूँ
और सोचता हूँ
आखिर उस कहानी का असल किरदार कौन था?
तुम थीं?
मैं था?
या कि वो हम थे
जिनका न मिल पाना ही
वादे से कहानी तक की
एक कहानी बन गया।
-समीर लाल ‘समीर’
https://youtube.com/shorts/h_Fme5pUVoE?feature=share









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