रविवार, अप्रैल 20, 2014

कतरा कतरा

khand_har

 

कभी जिन यादो से दिन,

खिल कर संवर जाता था..

आज सोचता हूँ

वही बचपन,

वही स्पर्श,

वही नाते,

उतारता हूँ जब

दिल के कागज पर वो यादें

और उनकी जिन्दा गवाह वो मकां..

कि कतरा कतरा हुआ

कागज भी बिखर जाता है..

एक लम्हा गुजरता है

और

कितना कुछ बदल जाता है..

-समीर लाल ’समीर’

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41 टिप्‍पणियां:

राकेश खंडेलवाल ने कहा…

भाईजी,

यह सतरें अपने आप में तो पूर्ण है परन्तु आपके लेखन कौशल के समीप नहीं. मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिर्फ़ लिखने के लिये आपने इन्हें लिखा है. आपसे और बेहतर कविता की प्रतीक्षा है.

Udan Tashtari ने कहा…

राकेश भाई, यह कविता नहीं...वेदना की अभिव्यक्ति है मात्र...

Devi Nangrani ने कहा…

Bahut hi karmic abhivyakti hai.....

गिरीश बिल्लोरे मुकुल ने कहा…

बेशक समीर जी
इसे हम जी रहे हैं

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

"Our sweetest songs are those that tell of saddest thought." - P.B.Shelley.

PRAN SHARMA ने कहा…

बहुत खूब समीर जी ! आपकी लेखनी का मैं मुरीद हूँ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह बहुत ख़ूब

संजय भास्‍कर ने कहा…

समीर जी आपके अहसासो ने कमाल कर दिया आज फिर एक कविता को जन्म दे दिया………हार्दिक आभार्।

Unknown ने कहा…

यथार्थ का बयान करती कविता। बधाई समीर भाई।
राजेंद्र त्‍यागी

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन 'ह्यूमन कंप्यूटर' और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-04-2014) को ""वायदों की गंध तो फैली हुई है दूर तक" (चर्चा मंच-1590) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

mridula pradhan ने कहा…

wah......

Prakash Jain ने कहा…

Ek lamha gujarata hai, aur kitna kuch badal jaata hai....


Very touchy...

Vaanbhatt ने कहा…

यही यादें उम्र होने पर जीने का सबब बन जातीं हैं... मेरा मतलब ये नहीं है कि हमारी उम्र हो गयी है...पर उम्र के साथ जज़्बात पुरानी यादों से जुड़ते जाते हैं...

दिगंबर नासवा ने कहा…

आ जाने के बाद ... वो लम्हा क्या सच में गुजर जाता है ... कई बार तो वो नासूर बन के चिपक जाता है ... भाव पूर्ण ...

शारदा अरोरा ने कहा…

तस्वीर देख कर न जाने मन कैसा कैसा हो आया ....कविता और तस्वीर दोनों यह कह रही हैं ...कि ये इमारत भी कभी बुलन्द थी ...
कृपया मेरे द्वारा पोस्ट की गईं पिछली दोनों टिप्पणियाँ हटा दीजिये ...कुछ बेतरतीब सी लग रही हैं ...कल उन्हें पोस्ट करते वक्त ही कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कर्सर काबू में नहीं हो जैसे ...इसीलिए आज मैंने सोचा कि देखूं टिप्पणी ठीक पोस्ट हुई या नहीं ....

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

कितना सब कुछ बदल जाता है, फिर भी ......

बहुत सुंदर !!

Abhishek Shukla ने कहा…

रोचक

abhi ने कहा…

बिलकुल सही !!!

Kavita Rawat ने कहा…

सच कितना कुछ बदल जाता है अपने देखते-देखते। .
बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

हर गुजरे लम्हे के साथ कितना कुछ बदल जाट अहि, सुन्दर प्रस्तुति.

Basant Khileri ने कहा…

आपकि बहुत अच्छी सोच है, और बहुत हि अच्छी जानकारी।
जरुर पधारे HCT- Hindi Computer Tips

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कुछ मैं बिखरता हूँ
कुछ लम्हा
समेटने में सारा वक़्त गुजर जाता है

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी ने कहा…

उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@मतदान कीजिए

Satish Saxena ने कहा…

यही जीवन है , मंगलकामनाएं आपको !

Kavita Rawat ने कहा…

एक लम्हा गुजरता है
और
कितना कुछ बदल जाता है..
.. सच पता ही नहीं चलता . समय के साथ ही कितना कुछ घट जाता है ... बदल जाता है

Shilpakar Nandeshwar ने कहा…

Ek lamha hi to hai jo aadmi ko jina bhi sikha deta hai aur aapke is blog se muze aise lamhe dhundhne me madat milti hai.................very nice every alpha's

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Unknown ने कहा…

ये लम्ह और ये कतरे मिल कर बनाते हैं जिंदगी।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



कितना कुछ बदल जाता है..
सच !
वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल तो जाता है...

भीतर कुछ उदास-सा अनुभव हो रहा है...
लेकिन रचना की तह तक नहीं पहुंच पा रहा हूं आदरणीय समीर जी !
ईश्वर से प्रार्थना है- सब कुशल-मंगल हो...

मंगलकामनाओं सहित...


Arun sathi ने कहा…

गजब... साधू साधू

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी ने कहा…

बहुत दिनों से आप अपने ब्लॉग पर आये नहीं...क्या बात है?
नयी पोस्ट@आप की जब थी जरुरत आपने धोखा दिया (नई ऑडियो रिकार्डिंग)

Unknown ने कहा…

सच एक लम्हें में कितना कुछ बदल जाता हैय़

abhi ने कहा…

कितना कुछ बदल जाता है..

सच में !

vijay kumar sappatti ने कहा…

inhi sab ko samet kar unkee yaado ke saath ji rahe hai sameer ji .
bahut vedna ke saath likha hai . man ko choo gaya
aapka
vijay

आकर्षण गिरि ने कहा…

एक लमहा गुजरता है
और
कितना कुछ बदल जाता है...

चंद लमहे ही सबकुछ दे देते हैं... और चंद लमहे ही सबकुछ छीन लेते हैं....

Unknown ने कहा…

आप जैसे बड़े लेखक की कुछ सीखना चाहती हूँ

कृपया मार्गदर्शन दे। धन्यवाद!!

http://swayheart.blogspot.in/

Unknown ने कहा…

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dr.rajkumar patil ने कहा…

वाह..सुन्दर रचना

Unknown ने कहा…

दिन की तरह ज़िन्दग़ी का पूरा पेच पलट जाता हैं
http://savanxxx.blogspot.in

Zindagi Ek Safar Hai Suhaana... ने कहा…

bahut hi sundar abhivyakti!

Zindagi Ek Safar Hai Suhaana... ने कहा…

bahut sundar abhivyakti!