गुरुवार, नवंबर 25, 2010

दिल्ली में मिले दिल वालों से..१३ नवम्बर, २०१०

इतना सारा स्नेह, इतना सम्मान-ढेरों रिपोर्टिंग.

आनन्द आ गया दिल्ली मिलन समारोह में.

अक्षरम हिंदी संसार और प्रवासी टुडे से जुडे अनिल जोशी जी एवं अविनाश वाचस्पति जी जिस दिन मैं दिल्ली पहुँचा, उसके अगले दिन ही आकर मिले. बहुत देर चर्चा हुई, चाय के दौर चले और तय पाया कि सभी ब्लॉगर मित्र कनाट प्लेस में मुलाकात करेंगे. १३ तारीख को शाम ३ बजे मिलना तय पाया.

१३ तारीख को सतीश सक्सेना जी का फोन आया और उन्होंने मुझे अपने साथ चलने का ऑफर दिया. अंधा क्या चाहे, दो आँख. मैं तुरंत तैयार हो गया मगर जब बाद में पता चला कि वह मुझे लेने नोयडा से दिल्ली विश्व विद्यालय नार्थ कैम्पस तक आये हैं और उसकी दूरी और ट्रेफिक को जाना तो लगा कि काश!! मैं खुद से चला जाता तो उन्हें इतना परेशान न होना पड़ता.

कनाट प्लेस जैन मंदिर सभागर में बहुत बड़ी तादाद में ब्लॉगर मित्र पधारे थे, सभी के नाम आप विभिन्न रिपोर्टों में पढ़ ही चुके हैं उन सबके साथ साथ वहाँ प्रसिद्ध व्यंग्यकार मान. प्रेम जनमजेय जी को पाकर मन प्रफुल्लित हो उठा. फिर पाया कि वहाँ मीडिया रिसर्च स्कॉलर श्री सुधीर जी के साथ अनेक बच्चे मीडिया शिक्षार्थी ब्लॉगिंग के विषय में कुछ जानने समझने आए हैं. बहुत अद्भुत नजारा था सब का मिलना. इन्हीं शिक्षार्थियों में एक छात्रा रिया नागपाल जिसने हिंदी ब्लॉगिंग को ही शोध के विषय के रूप में चुना है, से मुलाकात हुई और उसने मुझे याद दिलाया कि एक बार वह मेरा इसी विषय पर कनाडा से साक्षात्कार ले चुकी है. बहुत अच्छा लगा सबसे मिलकर.

लगभग सभी ब्लॉगर मित्रों को मैं तुरंत पहचान गया. राजीव तनेजा (संजू तनेजा जी से फोन पर बात हुई थी पहले), मोहिन्दर जी और सुनिता शानु जी से तो पहले भी मिला था बस, रतन सिंह  जी बिना पगड़ी के पहचान नहीं आये और अजय कुमार झा को देख लगा जैसे कोई कालेज के फर्स्ट ईयर का छात्र है, जबरदस्त मेन्टेनेन्स के लिए वो बधाई के पात्र हैं. शहनवाज से भी एक दिन पूर्व फोन पर चर्चा हुई और वहाँ इस उर्जावान युवा मिलना  से बहुत अच्छा लगा.  श्री तारकेश्वर गिरि जी ,श्री नीरज जाट जी (पहले चैट पर आवाज तो सुन ही चुका था इनकी, बस दर्शन बाकी थे) , श्री अरुण सी रॉय जी, श्री एम वर्मा जी, श्री सुरेश यादव जी (आप विशेष तौर पर मिलने के लिए एक दिन रुके रहे दिल्ली में) , श्री निर्मल वैद्य जी , श्री अरविन्द चतुर्वेदी जी, एलोवेरा वाले राम बाबू सिंह  जी, डॉ वेद व्यथित जी, मयंक सक्सेना (बाद में मयंक ने टीवी के लिए इन्टरव्यू भी लिया), कनिष्क कश्यप (बहुत व्यस्तता के बीच पधारे), दीपक बाबा, भतीजे पद्म सिंह , श्री राजीव तनेजा जी ,श्री कौशल मिश्र , पुरबिया जी,  नवीन चंद्र जोशी जी, ,पंकज नारायण जी , सुश्री अपूर्वा बजाज सुश्री प्रतिभा कुशवाहा , आदि से मिलना अद्भुत रहा.

डॉ दराल सा: अपने पिता जी की तबीयत बहुत खराब होने के बावजूद भी समय निकाल कर मिलने आये.

रचना जी ने अपनी माता जी की कविताओं की पुस्तक सस्नेह भेंट की और चूँकि अगले दिन मुझे जबलपुर के लिए रवाना होना था तो बड़ी बहन का फर्ज निभाते हुए रास्ते में खाने के लिए बिस्कुट का पैकेट भी दिया. वाकई, रास्ते में काम आया चाय के साथ खाने में.

मुझे इस बात की कतई उम्मीद न थी कि वहाँ पहुँच कर चर्चा के अलावा भाषण जैसा कुछ देकर अपने विचार रखने होंगे अतः सबसे मिलने के उत्साह में कुछ तैयारी तो की नहीं थी. मेरे पहले श्री प्रेम जनमजेय जी ने और फिर बालेन्दु दधीची जी ने अपने विचार रखे. बालेन्दु जी पूरी तैयारी में थे. पाईण्ट बना कर लाये थे और बहुत सार्थक आंकड़े प्रस्तुत किये. साथ ही ब्लॉगर्स पर आधारित एक बेहतरीन कविता भी सुनाई. उनकी तैयारी देख कर मैं घबराया कि अब मैं क्या बोलूँगा मगर जब नम्बर आया तो बस, बिना तैयारी शुरु हो गये जैसे जैसे विचार मन में आते गये, कहते चले गये. मित्रों नें अपनी जिज्ञासाएँ भी प्रकट की और मैने हर संभव प्रयत्न किया कि उसका निवारण हो सके. भाषण खतम होते ही सबने ताली बजाकर मामला ही ठप्प कर दिया कि बहुत देर हो रही है, अशोक चक्रधर जी के कार्यक्रम में जाना है तो मुझे कविता झिलाने का समय ही नहीं मिला, वरना सोचा था कि गाकर सुनाऊँगा. :) खैर, फिर कभी सही. वरना बालेन्दु जी कविता सुना जायें और हमारी सुने बिना निकल जायें, यह कैसे संभव है. बस, समय का खेल है. उनको तो पक्का दो तीन सुनानी है खूब लम्बी लम्बी.

मैं सभी मित्रों का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर मुझे समय प्रदान किया एवं श्री अविनाश वाचस्पति, श्री अनिल जोशी जी का इस विराट आयोजन के लिए विशेष आभार.

आयोजन की समाप्ति पर फिर वापस छोड़ने भी सतीश सक्सेना जी गये तो लगा कि कितना दुष्कर कार्य वह मित्रतावश मुस्कराते हुए कर गये. लौटते वक्त सतीश भाई ने डीनर का ऑफर भी दिया लेकिन तब तक भारत के हिसाब से पेट एडजस्ट नहीं हो पाया था तो जुबान की मांग के बावजूद भी मना करना पड़ा. अगली बार के लिए ड्यू है सतीश भाई. इस दौरान भाई विनोद पाण्डे भी साथ थे और मौके का फायदा उठाते हुए विनोद जी ने रास्ते में ही दो गज़लें भी सुना डाली. वैसे थी बहुत बेहतरीन. मैं जब तक माहौल बनाता कि बदला लिया जाये, तब तक शायद सतीश भाई भाँप गये और उन्होंने स्पीड बढ़ा कर यूनिवर्सिटी पहुँचा कर उतार दिया. ये नाईंसाफी है, एक न एक दिन घेर कर सुनाऊँगा जरुर.

आशा करता हूँ हम सभी मित्र समय समय पर ऐसे आयोजन कर हिन्दी ब्लॉगिंग को समृद्ध करते रहेंगे. अनेक शुभकामनाएँ.

नोट: फोटो सभी अजय झा के यहाँ से चुराई हुई हैं.

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92 टिप्‍पणियां:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Are Prabhu ji aap hain ya thande pradesh ko chale gaye.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इसी रिपोर्ट का तो इंतज़ार था !

Shekhar Kumawat ने कहा…

ji ha mujhe bhi padam ji ne bataya tha is mulakat ke bare me

or photos bhi dekhe the mene

खुशदीप सहगल ने कहा…

गुरुदेव,
मिलने के बड़े अरमान संजो रखे थे...लेकिन कहते हैं न कि खुद के चाहने से सब कुछ नहीं होता...जिस वक्त आप इस कार्यक्रम में थे, मैं हरिद्वार में पुत्रधर्म का पालन कर रहा था...आपसे मिलने की ख्वाहिश जल्दी ही पूरी होगी...

जय हिंद...

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

rohtak me bhi charcha thi ki aap aayenge...
khair...
fir sahi...

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

rohtak me bhi charcha thi ki aap aayenge...
khair...
fir sahi...

दीपक डुडेजा DEEPAK DUDEJA ने कहा…

वाह जी सबसे लेट...... बढिया ये अदा भी....

आपसे नज़रे मिली तो थी, पर का है क्या हमरा शर्मीला स्वाभाव यहाँ आड़े आ गया ... कुछ बतिया नहीं पाए.........

आभार - याद रखने के लिए.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपके मुख से सुन अब तृप्ति हो गयी।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी रिपोर्ट से यह तो पता चल गया की दिल्ली दिल वालों की है ....मुझे दिसंबर का इंतज़ार है :)

shikha varshney ने कहा…

सबकी सुन ली अपनी नहीं सुना पाए...ये तो वाकई न इंसाफी है :)

M VERMA ने कहा…

आपसे मिलना (इसको भी कोई मिलना कहते हैं) अच्छा लगा. आप तो हूबहू वैसे ही हैं जैसा सोचा था.
मैने तो आपकी आवाज भी चुरा ली थी पता चला क्या?
http://phool-kante.blogspot.com/2010/11/blog-post_4657.html
और
http://phool-kante.blogspot.com/2010/11/blog-post_5127.html
और
http://phool-kante.blogspot.com/2010/11/blog-post_13.html

नरेश सिह राठौड़ ने कहा…

बहुत अच्छी रिपोर्ट है | सभी लोगो को आपकी रिपोर्ट का इन्तजार था कि आप इस मिलन को किस नजरिये से देख रहे थे | रोहतक में आपकी काफी चर्चा रही थी | लेकिन आपकी कमी भी महशूस की गयी |

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

दिल्ली ब्लागर्स मिलन अवसर के बारे में बहुत ही उम्दा विस्तृत सारगर्वित रिपोर्ट है ... बहुत अच्छा लगा पढ़कर ...आभार

cmpershad ने कहा…

चलो! आप का भी संस्मरण संस्करण निकल ही गया:)

singhsdm ने कहा…

भारत भ्रमण का बेहतरीन संस्मरण.......!!!! आपसे काश हम भी मिल सकते.....

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

हमारे लिए भी ये मिलन बैठक यादगार रहेगी :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत अच्छा लगा... आप यूंही आते रहें और खुशियां बिखेरते रहें..

sangeeta ने कहा…

Great to know that there was a hindi bloggers meet ...you sure had a great time.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बालेन्दु जी कविता सुना जायें और हमारी सुने बिना निकल जायें, यह कैसे संभव है.

वाकई बहुत अफ़्सोसजनक बात हौई ये तो. आपसे पूरी हमदर्दी है, पर अगली बार सामने वाले की सुनना ही मत बस अपनी शुरू करके रुकियेगा नही.

चोरी का माल वाकई चुराने लायक है. झाजी की खींची हुई फ़ोटो बहुत सुंदर हैं. प्रणाम.

रामराम

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत अच्छी रिपोर्ट है |बहुत अच्छा लगा पढ़कर आभार...

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

कमबख़्त अपना दिल ही दगाबाज़ निकला... मिस जो कर गए!!

Poorviya ने कहा…

"दिल्ली में मिले दिल वालों से..१३ नवम्बर, २०१०"
sab log itna keh chuke hai ki ab kuch naya kahane ko hai hi nahi.
ab agle mulakat kab hogi.
uska intizaar hai----.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी इस पोस्ट का लिंक कल शुक्रवार को (२६--११-- २०१० ) चर्चा मंच पर भी है ...

http://charchamanch.blogspot.com/

--

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

आप से मुलाकात संक्षिप्त किन्तु अच्छी रही... आपका संक्षिप्त वार्ता ज्ञानवर्धक था...

नीरज जाट जी ने कहा…

आनन्द आ गया था आपसे मिलकर।

abhi ने कहा…

मस्त रिपोर्टिंग रही ये :)

राजीव तनेजा ने कहा…

सारगर्भित रिपोर्ट...
आपसे पुन: मिल कर अच्छा लगा...
फिर से मिलने की तमन्ना है ...

अजय कुमार ने कहा…

जाने कब मुंबई का नम्बर लगेगा ।

केवल राम ने कहा…

दिल्ली के कार्यक्रम में मिलने का पूरा प्रयास किया , पर किसी कारणवश मिल नहीं पाया ...खेर रोहतक में जाने का अवसर मिला ..वहां बहुत कुछ सीखने को मिला ...और सबका सहयोग भी ...आपके दर्शन की तमन्ना है ....आपकी रपट का मुझे इन्तजार था ....शुक्रिया

Rahul Singh ने कहा…

आपकी प्रतीक्षा थी, आप सबकी अलग-अलग नजरों से इसी वाकये को देखना, एक मजेदार अनुभव है यह.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

बहुत अच्छी रिपोर्ट पेश की है आपने, अपनी जानी पहचानी और विशिष्ट शैली में.

VICHAAR SHOONYA ने कहा…

ब्लोग्वासियों ने घर कि मुर्गी डाल बराबर वाली कहावत को सही सिद्ध कर दिया है. पहली बार आपकी पोस्ट पर इतनी कम टिप्पणिया देख रहा हूँ. भारत पहुंचकर आयी आपकी पहली पोस्ट पर ऐसा क्यों हुआ?

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post .

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

ज़ालिम कौन Father Manu या आज के So called intellectuals ?
एक अनुपम रचना जिसके सामने हरेक विरोधी पस्त है और सारे श्रद्धालु मस्त हैं ।
देखें हिंदी कलम का एक अद्भुत चमत्कार
ahsaskiparten.blogspot.com
पर आज ही , अभी ,तुरंत ।
महर्षि मनु की महानता और पवित्रता को सिद्ध करने वाला कोई तथ्य अगर आपके पास है तो कृप्या उसे कमेँट बॉक्स में add करना न भूलें ।
जगत के सभी सदाचारियों की जय !
धर्म की जय !!

Arvind Mishra ने कहा…

बस मानो इसी का था इन्तजार -अब आया दिल को करार !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

13 नवंबर की दोपहर से 14 नवंबर की सुबह तक मैं वर्धा से दिल्ली जाने वाली रेलगाड़ी में था। दिल्ली पहुँचकर इतनी बुरी तरह व्यस्त हुआ कि नेट पर भी कुछ नहीं देख पाया। दिल्ली सम्मेलन की कोई रिपोर्ट देखने का मौका नहीं मिला था। आपकी पोस्ट से कुछ कमी पूरी हो गयी।

मैं चाहूँगा कि दूसरी रिपोर्ट्स का लिंक भी कोई उपलब्ध करा दे तो इस महत्वपूर्ण जुटान का पूरा ब्यौरा जानने को मिले। मैं दिल्ली और रोहतक दोनो मिस कर गया। अफ़सोस हो रहा है।

उस्ताद जी (असली पटियाला वाले) ने कहा…

29/30

इस रोचक संस्मरण के लिये आभार। रिपोर्टिंग की भाषा और शैली जोरदार है। ऐसे आयोजनों में जरा उस्ताद जी (असली पटियाला वाले) को याद कर लिया किजिये।

नकली उस्ताद से बचकर रहें। आजकल कई ऐरे गैरे उस्ताद बने घूम रहे हैं।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

आपसे मुलाकात होना लिखा था , इसलिए संभव हो सका ।

बवाल ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
बवाल ने कहा…

बहुत उम्दा रिपोर्ट थी दिल्ली विज़िट की।
डा. दराल साहब के पिता जी की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना के साथ..... तमाम दिल्लीया ब्लॉगर्स के साथ आपको यथा योग्य।

anju ने कहा…

इस पोस्ट का कब से इंतज़ार था.पढ़ कर जिज्ञासा शांत हुई.अब आप से मुलाक़ात का इंतज़ार है :)

अभिषेक ओझा ने कहा…

बढ़िया, ट्रेन यात्रा कैसी रही?

मो सम कौन ? ने कहा…

दिल्ली के दिलवालों के द्वारा आपके साथ हुई नाईंसाफ़ी का हम विरोध करते हैं:)
अगली बार आप सावधान रहियेगा। पहले आप अपनी सुनाईयेगा, फ़िर औरों की सुनियेगा।

एस.एम.मासूम ने कहा…

समीर जी का अंदाज़ ए बयान और ही है. लुत्फ़ आता है पढने मैं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

उम्दा और विस्तृत रिपोर्ट ....

boletobindas ने कहा…

अपुन को तो पता ही नहीं चल पाया औऱ इसका नुकसान ये हुआ कि आप एक श्रोता से महरूम रह गए। हाहाहाहहाहाहा

वाणी गीत ने कहा…

कवि के लिए इससे बड़ा दुःख क्या हो सकता है कि उसे अपनी कविता सुनाने का मौका ही नहीं मिले ...
ब्लॉगर मीट पर एक अच्छी संस्मरणात्मक पोस्ट ...
रचना जी के व्यक्तित्व का एक सकारात्मक पहलू जानने को मिला ....
आभार..!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

बहुत उम्दा रिपोर्टिंग लगी ,वैसे तो रिपोर्टिंग की अलिफ़ बे भी नहीं जानती हूं लेकिन जिस रिपोर्ट को पढ़ कर ये लगे कि हम भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं मुझे अच्छी लगती है
बधाई

Shah Nawaz ने कहा…

क्या हसीं मिलन था,
प्रेम दो-गुना था
सद्भाव का वोह सपना
नुक्कड़ पे बुना था

बड़े हसीन पल थे
दिल खोल कर मिले थे
जिनको पढ़ते आएं थे
अब उनको सुना था

Shah Nawaz ने कहा…

समीर जी सम्मलेन से एक दिन पहले मैंने तुरत-फुरत में एक ग़ज़ल के रूप में ब्लॉग जगत को न्यौता दिया, आप शायद व्यस्त थे इसलिए पढ़ नहीं पाए:

ग़ज़ल / न्यौता: ब्लॉगर बिरादरी और उड़न तश्तरी

अजय कुमार झा ने कहा…

ये खूब रही उडन जी ,हम तो छात्र हैं ही , और शागिर्द भी हैं ही आपके । फ़ोटो अब आपकी ही हैं महाराज फ़िर चुराना कैसा ...........

अशोक बजाज ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति !

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

समीर जी,

यह सम्मेलन हम सब के लिए एक बहुत यादगार रहेगी मुझे उम्मीद से ज़्यादा मिला |सोचा था की बहुत लोग आएँगे और भीड़ में आपसे कुछ बात भी हो पाएगी या नही पर किस्मत देखिए शायद दिल्ली के सभी ब्लॉगर्स से ज़्यादा समय मुझे और सतीश जी को मिला आपके साथ रहने का..बहुत ही अच्छा लगा ...आपके बारे में और जानकार तो मैं आपका.. और ही बड़ा फ़ैन बन गया हूँ ...और हाँ रही कविता की बात तो सच पूछिए मैं आपसे भी कविता सुनना चाह रहा था पर रास्ता भटका नही और बात बदल गई..वैसे फिर जब भी मौका मिलेगा आपसे कविता ज़रूर सुनेंगे और अपनी भी कुछ बची-खुची रचनाएँ आपको सुनानी है...

एक यादगार सम्मेलन....अविनाश जी,अनिलजी,डॉ, दराल जी और भी सभी ब्लॉगर्स जो इस ब्लॉगर्स मीट में आएँ निसंदेह बधाई के पात्र है..

G Vishwanath ने कहा…

पढकर बहुत खुशी हुई।

आशा करता हूँ कि कभी हमें भी ऐसा अवसर मिलेगा।
ब्लॉग जगत में केवल दो मित्रों से साक्षात भेंट हुई है।
एक हैं प्रवीण पान्डेजी जो आजकल यहीं बेंगळूरु में रहते हैं।
पिछले साल, प्रशान्त (blogger PD) जो चेन्नई में रहते हैं, मुझ से मिलने आया था।
औरों से फ़ोन पर बात हुई है और एक बार आपसे भी बात हुई थी।
पर मिलने का आनन्द तो कुछ और ही है।

शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ

सतीश सक्सेना ने कहा…


समीर भाई !
जैसा आपके बारे में अंदाजा था उससे अधिक प्यारे लगे यार ! आत्मीयता इतनी कि जैसे एक घर में साथ साथ रहे हों ! प्यार का वह सन्देश, जिसे आप शुरू से ब्लाग जगत में फैलाते रहे हो हर किसी का सम्मान लेने में सक्षम है !

आपके स्नेही स्वभाव को भुलाना मुश्किल होगा ! हालांकि एक रंज रहेगा कि आपकी उड़नतश्तरी हाथ नहीं लगी !

मेरी कविता को चमका दे,मुझको भी होंडा दिलवा दे
बहुत दिनों से इच्छा मेरी,सारे जग में नाम करा दे
इतने दिन से करूँ साधना,मेरी इज्जत को चमका दे
मेरी कविता को भी भोले, बोलीवुड में नाम दिला दे
कबाड़खाना बंद करा दे, मोहल्ले में आग लगा दे
सारे पाठक मुझको ढूंढे ,ऐसी टी आर पी करवा दे
मेरे ऊपर धन बरसा दे,कुछ लोगों को सबक सिखादे
मेरा कोई ब्लाग न पढता,ब्लाग जगत में भोले शंकर
मेरे को ऊपर पहुंचा दे , मेरा भी झंडा फहरा दे !
मेरे आगे पीछे घूमे दुनिया,ऐसी जुगत करा दे !
एक आखिरी बिनती मेरी,इतनी मेरी बात मान ले
समीर लाल को धक्का देकर,उड़नतश्तरी मुझे दिला दे !

sada ने कहा…

बहुत ही अच्‍छा लिखा है ...सबके बारे में और अपने बारे में भी, सभी बहुत खुश हैं ....।

Udan Tashtari ने कहा…

@सतीश भाई

बिना धकियाये ही ले लो भाई उड़न तश्तरी...हमें तो कहीं जाना होगा तो सतीश भाई को फोनिया देंगे. :)

वन्दना ने कहा…

यही तो एक कवि की त्रासदी है जब तक खुद का नम्बर आता है सब रफ़ू चक्कर हो जाते हैं………हा हा हा।
बलोगर मिलन के बारे मे इतना जानकर काफ़ी अच्छा लगा।

निर्मला कपिला ने कहा…

मुझे अफसोस रहा कि समय पर उस सम्मेलन का पता नही चला। आपसे मिलने की तमन्ना अधूरी रह गयी। अगली बार देखते हैं। शुभकामनायें।

Kajal Kumar ने कहा…

ये होता है मेरे जैसे बीच-बीच में ब्लागिंग से फ़र्लो मारने वालों का. दिल्ली के इस आयोजन के दिनों मैं ब्लागिंग से लगभग एकदम ही कटा हुआ था...कुछ खबर ही नहीं हुई. पर कुछ दिन बाद रपटें पढ़ कर पता तो चला ही, अच्छा भी लगा कि लोग अब इस पर पीएचडी तक करने में जुटे हुए हैं...इसके भविष्य को लेकर उड़ने वाली अफ़वाहों में दम कैसे हो सकता है, यह भी सोचता हूं मैं कभी कभी :)

mridula pradhan ने कहा…

rochak varnan,bahot achchi lagi.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

bahut achchha sansmaran.kalamkar ikattha huye to maza to ayega hi!

रंजना ने कहा…

अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसा जबरदस्त रहा होगा आयोजन...

इतने गुनी लोग मिले, तो जो विचार मंथन हुआ उससे हिन्दी ब्लोगिंग का प्रगति और प्रसार होगा ही यह सुनिश्चित है..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सटीक ... गज़ब की रिपोर्ट पेश की है समीर भाई .... आपकी उड़न तश्तरी आये और लों मिलने को उतावले न हों ... ऐसा हो सकता है क्या ....
फोटो भी जोरदार हैं भाई ...

किलर झपाटा ने कहा…

आप बहुत खराब हैं और रिपोर्टिंग भी अच्छी नहीं की है जाइए। पूरे टाइम हा हा ठी ठी । वैरी बैड।
ही ही ही....

अनुपमा पाठक ने कहा…

रिपोर्ट पढ़ कर अच्छा लगा!

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι ने कहा…

एक अच्छी महफ़िल की तरतीब और तफ़सील से लिखी तहरीर पढ कर तबीयत हरी हो गई। समीर जी का आभार।

sanjay ने कहा…

AAPKI BAAT ..... HAI KUCH KHAS
PADH DALI HAME... APKI BAAT....

PRANAM.

sanjay ने कहा…

AAPKI BAAT ..... HAI KUCH KHAS
PADH DALI HAME... APKI BAAT....

PRANAM.

श्रद्धा जैन ने कहा…

oho aap phir bhaarat ghum aaye..
:-), bahut achcha laga aapki report padh kar ..

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बढ़िया चर्चा है ....!

anitakumar ने कहा…

अलग अलग शहरों में अलग अलग समय पर ब्लोगर मिलन होते हैं और हर बार रिपोर्ट पढ़ने वालों को लगता है कि काश हम भी वहां होते( अब देखिए अगर हम वहां होते तो आप की कविता जरूर सुनते…।:)) क्युं न कुछ ऐसा कार्यक्रम बने कि पूरे हिंदूस्तान के हिंदी ब्लोगर्स एक साथ मिलें और कम से कम दो दिन का प्रोग्राम बनें। ऐसा आयोजन करना है तो मुश्किल पर सपने देखना तो मुश्किल नहीं न।
आप की रिपोर्ट का ही इंतजार था, अच्छा भी लगा वहां का आखों देखा हाल आप की नजर से और अफ़सोस भी रहा कि हम ऐसे अनुभव से वंचित रह गये…:)

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

जो रह गए हैं मिलने से
वे हो जाएं सावधान
दिसम्‍बर में फिर
मिलने वाले हैं हम
और भी अनेक
जो हैं नेक
मत कहना कि
खबर न हुई
खबरदार
आओ अमेरिका चलें

कैनन का एस एक्‍स 210 : खरीद लूं क्‍या (अविनाश वाचस्‍पति गोवा में)

विश्‍व सिनेमा में स्त्रियों का नया अवतार : गोवा से अजित राय

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

satish sir ne badi pyari baat kahi..:)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

दिल्ली, दिलवालों की!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत सुन्दर जानकारी मिली ।SIR HAVE A NICE DAY

Manav Mehta ने कहा…

बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

http://saaransh-ek-ant.blogspot.com

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

अच्छी रही ये सम्मेलन रपट । आप हम से भी मिलने वाले थे क्या अभी जबलपूर हैं ? वापसी पर जरूर आइयेगा ।

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया और विस्तारित रूप से लिखा है आपने! ब्लोगर मिलन के बारे में जानकर अच्छा लगा!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप दिल्ली आयें और ब्लोग्गर्स के गढ़ से यूँ ही निकल जाएँ असंभव....ये तो होना ही था...

आपको जो अपनी कवितायेँ और ग़ज़लें न सुना पाने का मलाल है उसका एक उपाय है मेरे पास...
ऐसा करें अपनी कवितायें और ग़ज़लें एक सी.डी में रिकार्ड कर लें और जो मिलने आये उसे टिका दें...बस. आप भी खुश और लेने वाला भी खुश. आप इसलिए खुश के ये सुनेगा और दूसरा इसलिए खुश के सुनने से बच गए. :-)

नीरज

Prem Farrukhabadi ने कहा…

Bhai ji,
Laajawab post.Laajawab mulakaat.Laajawab jo thahre hain aap.Badhai!!

Satyendra Prasad Srivastava ने कहा…

इस बार मुलाकात नहीं हो पाई, अफसोस रहेगा।

Vijay Pratap Singh Rajput ने कहा…

नमस्कार जी !
बेहतरीन दिल्ली दिल वालों की है

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आपकी रिपोर्टिंग ने ब्लागर्स - मिलन का पूरा दृश्य दिखा दिया !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Arvind Mohan ने कहा…

nice blog...intelligent posts buddy
inviting you to have a view of my blog when free.. http://www.arvrocks.blogspot.com .. do leave me some comment / guide if can.. if interested can follow my blog...

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

सिर्फ दिल्ली ही क्यों कही? ये तो पूरी इंडिया ही दिल वालों की है. ये बात और है की आपको दिल्ली वाले ही मिले और उनके ही दिल दिखे . वैसे लखनऊ और कानपुर वाले भी बुरे नहीं है. आप मौका तो देकर देखिये सेवा का. बहुत अच्छा लगा आपके संस्मरण पढ़ कर.

कुमार राधारमण ने कहा…

ब्लॉग परिवार को आत्मीयता से बैठ बतियाते देखना एक सुखद अनुभव है। एक आशा बंधती है कि लगभग रोज़ाना की कटुता के बावजूद,चंद लोग हमेशा रहेंगे-सद्प्रयासों में तल्लीन,अपने लक्ष्यों की ओर आहिस्ता-आहिस्ता डग भरते। शुभकामनाएँ।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

वाकई इस तरह के ब्लोगर मिलन समारोह आनंददायी होते है!...बहुत कुछ नया जानने को मिलता है और सभी से प्रत्यक्ष मे मिलना भी अदभूत अनुभव होता है!...काश कि आप राज भाटिया की आयोजित तिलियार लेक के संमेलन में दर्शन देते!...वह संमेलन भी आनंददायक रहा!

....धन्यवाद एवं अनेको शुभकामनाएं!

Dr.Bhawna ने कहा…

Bahut acha laga padhkar...

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

रिपोर्ट, कहानी, आलेख आप का लिखा अंतस तक पहुँचता है.
सुन्दर रिपोर्ट.
- विजय तिवारी "किसलय"

Madhu chaurasia, journalist ने कहा…

वैसे सर आप अगली बार आएंगे तो शायद मैं भी आपसे दिल्ली में मिलूं..दरअसल मेरी शादी है 8 दिसंबर को...आपका मेल ID नहीं है इसलिए आमंत्रण ब्लॉग पर ही स्वीकार करें
Hi,SIR

With a cheerful heart and deep joy within, we along with our parents invite you and your family to be part of the most important day of our lives when we tie the knot on 8th of December.

We will be really glad if you could come and share our joy when we step into a new beginning of wedded life. Your blessings and good wishes will go a long way in making this special day a memorable one!

Please be there to celebrate this special day with us.

Programme:-


Wedding : 8th Dec, In the night
Pakhariya Peer, New Colony, Muzaffarpur, Bihar



Reception : 11th Dec, 7.00PM
GPC House, Chaurasia Nagar, Deo, Aurangabad, Bihar




Please find below our marriage website and bless us with your wishes:



http://www.wix.com/madhubraj/mymarriage

http://www.momentville.com/madhubraj

Hope to see you there!

Madhu

अशोक बजाज ने कहा…

सुन्दर और बेहतरीन प्रस्तुति ,बधाई !