रविवार, दिसंबर 07, 2008

आओ तुम्हें सट्टा खिलवायें!!

भाई जी, आपका ठिया तो सबसे बड़े बाजार में है. पता चला है, होल सेल में डील करते हो. कुछ हमें भी बताओ भाई, सुना है दिवाली सेल लगी है आपके बाजार में.

हमने कहा कि दिवाली कहो या दिवाला. सेल तो लगी है ६०% से ७०% की भारी छूट चल रही है. एस एम एस से विज्ञापन भी किया जा रहा है. स्लोगन भेजा जा रहा है, आपको भी मिल गया लगता है..आपके जमाने में बाप के जमाने के भाव. और जाने क्या क्या विज्ञापन किये गये हैं.

मुझे सेठ दीनानाथ की आढत याद आ गई. दिन भर मंडी के बीचों बीच अपनी दुकान पर तख्त पर बिछे सफेद गद्दे पर आधे लेटे रहते थे. बंडा और प्रदर्शनकारी धोती पहने. भई, जब प्रदर्शनकारी नेता हो सकता है तो धोती क्यूँ नहीं. जो भी प्रदर्शन करे, वो प्रदर्शनकारी, ऐसी मेरी मान्यता है. मेरी नजर में तो मल्लिका शेहरावत और राखी सावंत के डिज़ानर परिधान को भी प्रदर्शनकारी श्रेणी में ही रखता हूँ. खैर, सेठ के मूँह में हर समय पान. सामने मुनीम अपने हिसाब किताब में व्यस्त. बस, होलसेल का व्यापार था उनका भी, इसीलिए याद हो आई.

उनके ठीक विपरीत हम. न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज, टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज, नेसडेक और शिकागो कमॉडेटी एक्सचेंज पर डील तो करते हैं मगर कुर्सी पर सीधे बैठे सामने कम्प्यूटर लगाये. न आसपास घूमते बजारिया सांड और न ही पास बैठा मुनीम. मुनीम, चपरासी से लेकर सब कुछ खुद. माल की खरीदी बिक्री सब कम्प्यूटर पर. अगर अपने आप को ट्रेडर न बतायें तो कोई कम्प्यूटर ऑपरेटर ही समझे.


Picture Stock Trader


मित्र कहने लगे कि हाँ, विज्ञापन तो मिला. इसीलिये फोन किये हैं. भाई, बहुत घाटा लग गया. आप तो वो माल बताओ जिसको १०० टका ऊपर ही जाना हो, बस, वो ही लेंगे और एक बार लॉस पूरे हुए तो जीवन में स्टॉक एक्सचेंज की दिशा में सर रख कर सोयेंगे तक नहीं. खेलने की तो छोड़ो.

हमने उनको पहले भी समझाया था और फिर समझाया कि भाई, हम तो बस आप जो बोलो, वो खरीद देंगे और जो बोलो, वो बेच देंगे. हमारे लिए तो हर माल बराबर, हमें तो दोनों हालात में कमीशन बस लेना है. चाहे बेचो तब और खरीदो तो. जिस दिन हमें या इन बाजार एनालिस्टों को ये मालूम चलने लग जाये कि ये वाला तो पक्का ऊपर ही जायेगा तो क्या पागल कुत्ता काटे है जो सुबह से शाम तक कम्प्यूटर लिये लोगों के लिए खरीदी बेची कर रहे हैं. घर द्वार बेच कर सब लगा दें और एक ही बार में वारा न्यारा करके हरिद्वार में आश्रम खोलकर साधु न बन जाये और जीवन भर एय्याशी करें. ये सब बाजार एनालिस्ट मूँह देखी बात करते हैं आज जो दिखा वो कह दिया, कल जो दिखा तो बदल गये.

हम में और नारियल बेचने वाले किराना व्यापारी में बस यही फरक है. दोनों को माल बेचने से मतलब है मगर हर आने वाले को वो नारियल देते वक्त एक को हिलाकर कान में न जाने क्या सुनता है. फिर उसे किनारे रख दूसरा उठाकर बजाता है और कहता है कि हाँ, ये ठीक है. इसे ले जाईये और आप टांगे चले आते हैं जबकि ऐसे ही हिला हिला कर शाम तक वो सारे नारियल बेच लेता है और आप भी खुश, वो भी खुश. हमारे यहाँ ऐसा हिलाने का सिस्टम नहीं हैं. निवेशक को बाजार खुद हिला लेता है इसलिये हमें हिलाने की जरुरत नहीं.

जिस दिन आप इस दिशा में सर रख कर सोना बंद कर दोगे, उस दिन से हम क्या घास छिलेंगे. ऐसा अशुभ न कहो एन धंधे के समय भाई.

अजी, आप तो अंतिम दमड़ी तक खेलो. जब पूरा बर्बाद हो जाओ, तब मजबूरी में बंद हो ही जायेगा, इसमें प्रण कैसा करना. हमें भी तब तक १० दूसरे मूर्ख मिल जायेंगे जो रातों रात लखपति बनना चाहते, हम उनसे अपना काम चला लेंगे. कसम खाते हैं आपको याद भी न करेंगे.

तो बोलो, क्या आर्डर लिखूँ...सब माल चोखे हैं.
ऐसा मौका कहाँ बार बार आता है जब ६०% से ७०% तक छूट चले और आपके जमाने में बाप के जमाने के भाव पर माल मिलें.

जल्दी..फटाफट आर्डर बोलो. टाईम न खोटी करो.

नोट: यूँ भी अगर हम तुम्हें अपना खास मान कर बाजार से दूर रहने की सलाह दें तो तुम मानोगे थोड़ी न बल्कि किसी और ट्रेडर के यहाँ जाकर खेलोगे. फिर हम ही अपनी कमाई क्यूँ छोड़ें. ये बाजार ही अजीब है कि जब तक खुद न हार लो सब जीते हुए ही नजर आते हैं. Indli - Hindi News, Blogs, Links

75 टिप्‍पणियां:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

ये बाजार ही अजीब है कि जब तक खुद न हार लो सब जीते हुए ही नजर आते हैं.
सौ फीसदी सही बात बताई है आपने |

अनूप शुक्ल ने कहा…

सांस्कृतिक राजधानी जबलपुर के बालकों को सट्टा सिखा रहे हैं। नारियल हिला-हिला के! कित्ती तो गलत बात है जी!

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

इस उतार चडाव के समय मुझे तो एक पैसे का भी घाटा नहीं हुआ क्यों ...... क्योंकि मैंने आजतक सट्टा नहीं खेला .

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

खानदान में एक महारथी थे जो सट्टा खेलते थे, वहीं एक नारी से मित्रता हुई तो अपनी पत्नी और लड़कियों को छोड़ कर ऐसे गायब हुए कि पत्नी सदासुहागन ही स्वर्ग सिधार गईं। तब से खानदान ने सट्टा, जुआ, लाटरी, शेयर बाजार सब से तौबा कर रखी है।

seema gupta ने कहा…

जल्दी..फटाफट आर्डर बोलो. टाईम न खोटी करो.
" सट्टे का धंधा मंदा नही है क्या....कुछ ऑर्डर मिले क्या "
Regards

mehek ने कहा…

baazaar bhi satta lagate hai? 60percentchut deker kya kamate honge?ya grahak jada aate hai,vaise jaha sale hohum na pahunche aisa hua nahi kabhi.

संजय बेंगाणी ने कहा…

नारियल वाला उदाहरण मजेदार लगा.


और अंतिम पंक्तियाँ तो सुभान अल्लाह, पंच थी.

yaksh ने कहा…

सट्टेबाजो से मोटी वसूली करती है,पुलिस। वरना,किसी की हिम्मत है,,,,,,यह सब तो पुलिस के स्व विवेक पर निर्भर करता है,जो स्व विवेक ५० रु. रोज पर उपलब्ध है।

ALOK PURANIK ने कहा…

क्या केने क्या केने

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत शानदार व्यंग है ! मजा आया , और सबसे हाईलाईट ये रहा :

"चाहे बेचो तब और खरीदो तो. जिस दिन हमें या इन बाजार एनालिस्टों को ये मालूम चलने लग जाये कि ये वाला तो पक्का ऊपर ही जायेगा तो क्या पागल कुत्ता काटे है जो सुबह से शाम तक कम्प्यूटर लिये लोगों के लिए खरीदी बेची कर रहे हैं. घर द्वार बेच कर सब लगा दें और एक ही बार में वारा न्यारा करके हरिद्वार में आश्रम खोलकर साधु न बन जाये और जीवन भर एय्याशी करें."

हम भी सबसे यही कहते हैं ! बस साधू बनने वाली और ऐयाशी वाली बात छोड़ कर ! :)

वैसे एक बात कहू की ये सट्टा बाजार सबसे पुरातन बाजार है ! शायद कोई बाजार जो सबसे पहले शुरू हुआ होगा वो सट्टा बाजार ही था ! सबसे ज्यादा बरबाद भी इसी में लोग हुए हैं ! पर ये जितना जवान शुरुआत में था उतना ही जवान आज भी है ! इसको शायद अखंड जवानी का वरदान मिला हुआ है ! कभी बुड्ढा ही नही होता !:)
और अब तो पक्का यकीन हो गया है की ये कभी भी बुड्ढा नही होगा ! बस इसके किरदार बदल जाते हैं !

राम राम !

मीत ने कहा…

दोनों को माल बेचने से मतलब है मगर हर आने वाले को वो नारियल देते वक्त एक को हिलाकर कान में न जाने क्या सुनता है. फिर उसे किनारे रख दूसरा उठाकर बजाता है और कहता है कि हाँ, ये ठीक है. इसे ले जाईये और आप टांगे चले आते हैं जबकि ऐसे ही हिला हिला कर शाम तक वो सारे नारियल बेच लेता है और आप भी खुश, वो भी खुश.
यह बहुत गहरी बात कह दी आपने...
लेकिन शायद ही कोई ऐसा हो जो यह सट्टा ना खेलता हो...
---मीत

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

छा गए गुरू
भा गए गुरु
मिल न सके हम
जबलपुर आ गए गुरु

P.N. Subramanian ने कहा…

आपके लेपरॉस्कोपिक नज़रों के हम कायल हैं. चाहे वो धोती सेठ की हो या शेयर की. आभार.

amit ने कहा…

बाज़ार की ओर सिर रखकर सोना तो दूर, अपन तो इस बात का ही भान नहीं रखते कि बाज़ार किधर किस दिशा में है! बस इसी कारण अभी तक बचे हुए हैं नहीं तो लोगों ने ललचाने का तो बहुतेरा प्रयास किया!! ;) :D

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

त्वाड्डा धन्धा जिन्दाबाद! बोले तो अजर अमर।
हर फूल के पीछे एक ग्रेटर फूल खड़ा है! :)

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

..बढ़िया है व्यंग...सट्टा विश्लेषण :)

रंजना ने कहा…

सटीक व्यंग्य है.बहुत बढ़िया.

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

समीर जी
व्‍यंग्‍य बहुत ही अच्‍छा है बधाई स्‍वीकारें

विनय ने कहा…

सट्टा, अरे यह क्या सिखला रहे हैं। अरे बुरा न माने, बहुत अच्छी बात साझा करी है!

neeraj tripathi ने कहा…

चलिए आज आपकी भारत यात्रा का उद्देश्य भी पता चल गया
नारियल की बात तो मस्त लगी , बढ़िया है

बवाल ने कहा…

वाह वाह महाराज जी,
गज़ब का सट्टा न्यूयार्की है भैया. मज़ा आ गया हा हा. सब घबरा गए के ये क्या सिखा रहे पिरभू. ज़ोरदार व्यंग है जी, हरिओम.

डॉ .अनुराग ने कहा…

अब समझ में आया ये सूट टाई वाले फोटो का राज...बड़े खिलाडी है आप...सारे खेल कोम्पुटर ओर कुर्सी पर बैठकर खेलते है......आपकी चिर परिचित शैली में बात कहने का ये अंदाज आपके व्यक्तित्व का काफ़ी कुछ आभास देता है....

विवेक सिंह ने कहा…

हमें तो डर लग रहा है :)

ई-गुरु राजीव ने कहा…

आतमकथा है क्या प्रभु !!
आतमा को परमातमा मिल जैहै अगर सट्टा खेलिबे.
कौन बनेगा मुख्यमंत्री !!
अश्होक चह्वाण या राणे ? लगा सट्टा. सटासट.
कौन बनेगा मुख्यमंत्री !!
शीला दीक्षित या ....
वसुन्ध.... या .........
रमन सि.. या .....
शिवर.. या ....
फ़िर लगाना सट्टा
कौन बनेगा प.म. !!
लगा सट्टा सटासट......

प्रकाश बादल ने कहा…

वाह समीर भाई वाह! क्या व्यंग्य करते हैं आप। मैं नि:शब्द हूं। कमाल की लेखनी है आपकी।

Vidhu ने कहा…

बाजार ही अजीब है कि जब तक खुद न हार लो सब जीते हुए ही नजर आते हैं. hameshaa ki tarah..jaandaar aapki baat,aapki najar se,sabke liye,shukriyaa.

प्रहार - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

वाह भाई सब कुछ तो ठीक लिखा है थोड़ा बम्बई वाले रतन खत्री का भी थोड़ा ख्याल कर लेते उनको भी जगह दे देते तो थोड़ा सट्टे चालीसा में चार चाँद लग जाते. हा हा

Manish Kumar ने कहा…

अपन तो इन चक्करों में पड़ते ही नहीं, अगल बगल लोगों को खुश और फिर ज्यादातर मायूस होते ही देखा है स्टॉक के चक्करों में।

Manish Kumar ने कहा…

अपन तो इन चक्करों में पड़ते ही नहीं, अगल बगल लोगों को खुश और फिर ज्यादातर मायूस होते ही देखा है स्टॉक के चक्करों में।

डा. अमर कुमार ने कहा…


आप तो शरीफ़ मानुष में शुमार होते हैं, भाई जी ?
फिर, यह धोती में ताकाझाँकी ?
नारियल हिलाने की उपमा आगामी कई वर्षों तक याद रहेगी !

"अर्श" ने कहा…

बहोत ही बढ़िया ब्यंग कसा आपने बहोत खूब... बधाई स्वीकारें ........

गौतम राजरिशी ने कहा…

गर सब माल चोखे हैं
तो खाये क्यों ये धोखे हैं...

pintu ने कहा…

bahut sundar dhnyvad,

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

समीर भाई,
बात बात मेँ
सावधान भी करवा गये आप -
आप असली हितैषी हैँ ,बाकि
लोगन वही करते हैँ
जो दिल चाहे
स स्नेह,
- लावण्या

राज भाटिय़ा ने कहा…

समीर जी , राम राम भारत जाते ही सट्टा.... ओर अब तो कमीशन पर..... चलिये नारियल किसी काम तो आया.
धन्यवाद

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

बाजार की निराली माया। आपने अच्छा समझाया॥
नारियल में पानी। हिलाकर है बतानी॥
सट्टा कम लगाइए। बस इतना ही टिपिआइए॥:)

अभिषेक ओझा ने कहा…

अब तो बाजार ऐसे दिन दिखा रहा है की मत पूछिए... हम भी यही सोच के नौकरी करने आए थे. अब सड़क पर न आ जाएँ ! नौकरी तो कभी भी जा सकती है बस जोइनिंग बोनस न वापस देना पड़ जाए :-)

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

शानदार व्यंग है !बहुत बढ़िया

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप के पास शब्दों का वो ज्वाला मुखी है जो कभी नहीं बुझता...कैसे कैसे ख्याल और शब्द उछल उछल हर आते हैं की अचरज होता है...इतनी व्यस्तता के बावजूद भी आप क्या धाराप्रवाह लिखते हैं...वाह...जय हो प्रभु..आप की सदा ही जय हो.
नीरज

HEY PRABHU YEH TERA PATH ने कहा…

Udan Tashtari
आजके आर्थिक मन्दी के माहोल मे आपका यह विचार बहुत ही अच्छा लगा। लोगो कि दुखती नश पर हाथ रखने कि कोशिश उत्तम लगी। ताऊ कि बात से भी मै सहमत हु कि भारत मे सट्टा बाजार सबसे पुरातन बाजार है । राजस्थान के कई गावो मे सट्टा सदियो से चलता है। शेयर बजार कि उत्पति हॉल ही के वर्षो मे हुई है। मेरे नाना चॉन्दी का चट्टा खिलते थे। राजस्थान के एक गॉव फलोदी मे तो बादलो पर चट्टा लगा देते है। वहॉ का बच्चा बच्चा इस धन्धे का खिलाडी है।

शेयर बजार णो कोई भरोसो नथी,
आजे अप, काले डाऊन, परसो अन्डर ग्राउण्ड॥॥

vijay gaur/विजय गौड़ ने कहा…

कुछ ढंग का काम करने की सलाह दी होती तो मान लेते। नारियल पानी पीने को कहा होता तो खुद भी कान में बजाकर देखता कि कोई आवाज आ भी रही है या नहीं। नारियल वाला कोई दलाल थोडे है जो आवाज सुनने के भी पैसे मांगता।

नितिन व्यास ने कहा…

ये वो खेल है जो खेले तो पछताय ना खेले तो पछताय, इसलिये ना खेल के पछताना अच्छा!

Dr. Amar Jyoti ने कहा…

हल्के-फुल्के अंदाज़ में गंभीर विवेचन करना कोई आपसे सीखे। बधाई।

Neeraj Rohilla ने कहा…

दुखती राग पे हाथ रख दिया आपने, गरीब विद्यार्थी अपना ४६% गंवा के बैठा है | कोई पूछता है तो कहते हैं इस ऊपर नीचे से हमें फर्क नहीं पड़ता हम तो बुल हैं लांग टर्म की सोचते हैं | असल में सोचा तो था की कोई पाँच सौ/हजार डालर बन जाते तो किसी सुन्दरी को अच्छे से होटल में खाना खिला लाते | अपने लिए तो कभी न सोचा है न सोचेंगे बस बेचारी कन्या का नुक्सान हो गया | अब बताओ मेक्सिकन बुफे भी जगह है खाना खाने की लेकिन किस्मत जो न कराये :-) वैसे कन्या समझदार निकली बोली अगली बार किसी म्यूजियम चलते हैं, विद्यार्थियों को मुफ्त होता है न :-)

हमारे हाईस्कूल के लैब असिस्टेंट की याद आ गयी | प्रेक्टिकल एक्जाम में दस रुपये के बदले साल्ट को सूंघकर रेडिकल बता देता था, सोडियम, सल्फेट, अमोनियम, क्लोराइड | एक बार एक बंद दोबारा पूछने गया कन्फर्म करने तो बोला आयरन, नाइट्रेट, लेड, कार्बोनेट | उस दिन एक जाट के लंबा दौडाया उस लैब असिस्टेंट, बस याद आ गयी कहानी तो कह डाली :-)

रश्मि प्रभा ने कहा…

ye to ek nashaa hai,aur kabhi-kabhi galat kadam lene ka dil kar jata hai......hahaha

नरेश सिह राठौङ ने कहा…

बहुत अच्छा व्यंग है । आपकी भाषा शैली का मै कायल हूं ।

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

"घर द्वार बेच कर सब लगा दें और एक ही बार में वारा न्यारा करके हरिद्वार में आश्रम खोलकर साधु न बन जाये और जीवन भर एय्याशी करें."

शानदार! ऐसी-ऐसी पंक्तियाँ हैं कि क्या कहूं? प्रदर्शनकारी धोती के तो क्या कहने.

क्षितीश ने कहा…

हाय रे ये पूंजीवादी समाज... ये बाज़ार और ये रातों-रात लखपति बनने का ख़्वाब...!!! अपनी मेहनत से कमाने का फलसफा तो कहीं गुम हो गया है साब जी...!!! टकटकी लगा कर देखते रहो बाज़ार की तरफ, कि कहीं किसी को माल मिले और हम भी मुनाफे की एक खेप अपने अकाउंट में ले आयें...!!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सही लिखा समीर भाई

सट्टे मैं जो मज़ा है, जो नशा है, किसी और मैं कहाँ
पूरा लुटने के बाद ही होश आता है, किसी के समझाने से भी कोई असर नही होता

face the truth ने कहा…

aap to blog mathadhish hain aur chapluson se ghire hain. anaap-sanaap bhi likhte hain to comments ki badh aa jati hai. likhne ke pehle thoda manthan kijiye to behtar hai.Vyangya likhna aasan nahin hota,kabhi-kabhi vyangya ki bajay vyangyakar par hansi aa jati hai. meri baaton ko anyatha nahin lenge. jo sach jaan pada likha.saarvjanik karen na karen aapki marji.

face the truth ने कहा…

aap to blog mathadhish hain aur chapluson se ghire hain. anaap-sanaap bhi likhte hain to comments ki badh aa jati hai. likhne ke pehle thoda manthan kijiye to behtar hai.Vyangya likhna aasan nahin hota,kabhi-kabhi vyangya ki bajay vyangyakar par hansi aa jati hai. meri baaton ko anyatha nahin lenge. jo sach jaan pada likha.saarvjanik karen na karen aapki marji.

bhoothnath ने कहा…

50 vee tippini...ha-ha-ha-ha-ha-ha !!
समीर भाई....हिला दिया ना...आपने बिना खिलाये ही...हा-हा-हा-हा-हा-हा-.....!!हमारी आदत ही ऐसी है...कि हम ख़ुद ही कहीं ठगाने जाते हैं...और जब ठगा जाते हैं...तो कलपने लगते हैं....हाय ये क्या हो गया...हाय ये क्या हो गया....!!...हम गधे के गधे हैं...ये भी नहीं सोचते कि सामने वाला भला हमें खिलाने को क्यूँ व्याकुल है.....!!

singhsdm ने कहा…

समीर जी
सटीक व्यंग्य है.बहुत बढ़िया.

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

अनूप जी
जे इतई से सीख के गए हथे . का सिखाहैन
जबलईपुर वालन कौं .
काय बड़े सच्ची है कै नईं
समीर भैया आज शाइत हम ओरें मिल जाएँ
आज कोऊ काम न भाओ तो आपसे मिलबे को काम
बन जै है

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सच्ची बात कही है आपने. मगर जिनके हाथ जले हैं वे बेचारे क्या करें?

अखिलेश सिंह ने कहा…

waah waah jabardast , dhamal hansi hansi mein hila diya,.....

G M Rajesh ने कहा…

chunavon bhi bahut lagaa

kai ke vaare nyaare ho gaye

kai pit gaye

lagaane wale sbhi haare

lagwane wale jeete

पुरुषोत्तम कुमार ने कहा…

वाह, बहुत अच्छे। नारियल वाला उदाहरण तो अनुपम है। वाकई एेसा ही होता है।

परमजीत बाली ने कहा…

समीर जी, बहुत बढिया सट्टा खेला है आपने....मेरा मतलब जानकारी दी है।

बहुत मजेदार पोस्ट लगी।बधाई।

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" ने कहा…

बहुत ही धारदार व्यंग्य.वैसे नारियल वाला उदाहरण बहुत जोरदार रहा.

सैन्सेक्स 10 हज़ारी से नीचे तो आ गया है.ओर 2 हज़ारी तक लुढ़कने का विश्‍वास मजबूत होता नज़र आ रहा है। न जाने यह दिन क्‍यों दिखलाया जा रहा है। अब तो शेयर बाज़ारों के ट्रेडिंग का टाइम भी रात का ही कर देना चाहिए। जो जागेगा वही खोएगा। जो मुँह ढक के सोएगा उसे किसी बात का डर नहीं।

कविता वाचक्नवी ने कहा…

यह मामला अपनी तो समझ से ऊपर की चीज है.

आशीष कुमार 'अंशु' ने कहा…

मजेदार पोस्ट

face the truth ने कहा…

Samir bhai,

Mere comment se aapko taklif hui iske liye kshama prarthi hoon. Taklif kitni jyada hui iska andaja is baat se lagaya ja sakta hai ki aap mere lalan-palan tak pahunch gaye. Khair aapse koi shikwa nahin kyoonki sach ka samna karna aasan nahin hota. Vastvikta yah hai ki jhuti taariphon ke jaal me aap itna ulajh chuke hain ki kuch viprit sunna hi nahin chahte.
Par aap akale nahin. Hindi blog-jagat yatharth se bilkul kat chuka jaan padta hai. Sach kahne aur sunne ki kshamta hindi blogkar ko chuke hain. Jyadatar doyam darje ki rachnayen hain aur sara system “tum mujhe Shakespeare kaho aur main tumhe Wordsworth kahunga” ki tarj par chal raha hai. Post ko bina gehrai se padhe ya bina padhe chand shabdon me dusron ko ‘achche post’ ki badhai dene me to aap khud bhi maahir hain.
Jahan tak mere post par aapke vyangya baanon ka sawal hai ,to shayad aap yah samajh hi nahin paye ki uski saarthakta keval itni hai ki yeh aap logon se mera sidha sanvaad sthapith karne ka jariya matr hai.Bina iske aapka comment mujh tak pahunch nahin pata.
Anth me main phir se kehta hoon ki meri baat ko vyaktigat roop me na len.Main to aap logon ke bich sirph isliye upastith hua hoon ki hindi blog jagat me ek sarthak,bebak,spast aur nirbhik vaicharik adan-pradan ki nayi pahal ho sake ...

Aapka………..

"SHUBHDA" ने कहा…

satta seekhne jitani samta nahi, lekin "ro lete hai"" samajh me aai aur aakhen nam kar gayi.
shesh shubh.

विष्णु बैरागी ने कहा…

अपने व्‍यवसाय को लेकर इतना सुन्‍दर और प्रभावी व्‍यंग्‍य बरसों बाद पढने को मिला । आपकी कलम को सलाम और आपकी साफगोई पर कुर्बान ।
अपना निवेदन दुहरा/तिहरा/चोहरा रहा हूं - आपका ब्‍लाग मुझे मेरे ई-मेल पर नहीं मिलता । मैं कोशिश कर-कर अब थकने की दशा में आता जा रहा हूं । कुछ कीजिए ।

विष्णु बैरागी ने कहा…

हां, एक निवेदन और । आपकी 'टिप्‍पणी खिडकी' पर लिखी इबारत 'आपकी टिपपणी से हमें लिखने का हौसला मिलता है.' हटा कर लिखिए - 'यहां टिप्‍पणी कर अपना हौसला बढाइए.'

सतीश सक्सेना ने कहा…

मज़ा आगया ! बहुत बढ़िया ! काफी दिन बाद आपको पढ़ पाया हूँ :-(

Yusuf Kirmani ने कहा…

समीर जी, मजा आ गया। भई कमाल का लिखते हैं आप। मुझे भी तो राज बताइए कि इतनी व्यस्तता में आप कैसे लिख लेते हैं?

rajeev chaturvedi ने कहा…

baat baat men bahut badi baat kah jaane ki aapki shaili nirali hai. ishwar aapki banduk kayam rakhe. bahut se nishane abhi sadhne baaki hain.
-rajeev chaturvedi,jabalpur.

Rajeev chaturvedi ने कहा…

baat baat men bahut badi baat kah jaane ki aapki shaili nirali hai. bhagwan aapki banduk(lekhni) ko salamat rakhe.bahut se nishane abhi sadhne baaki hain.

rajeev chaturvedi ने कहा…

baat baat men bahut badi baat kah jaane ki aapki shaili nirali hai. bhagwan aapki banduk(lekhni) ko salamat rakhe. abhi bahut se nishane sadhne baki hain.

Rajeev chaturvedi ने कहा…

baat baat men bahut badi baat kah jaane ki aapki shaili nirali hai. bhagwan aapki banduk(lekhni) ko kayam rakhe. bahut se nishane abhi sadhne baaki hain.

Rajeev chaturvedi ने कहा…

baat baat men bahut badi baat kah jaane ki aapki shaili nirali hai. bhagwan aapki banduk(lekhni)ko salamat rakhe. abhi bahut se nishane sadhne baaki hain.

प्रकाश बादल ने कहा…

kahaah hai sameer bhaai bade dinon se aapkaa koi pata nahin?

omsingh shekhawat ने कहा…

ye share market kya bala hai kabhi chad raha hai kabhi gir raha hai dhan rakho kahi niche na dab jaye iske ...