रविवार, अक्तूबर 08, 2017

टीआरपी (TRP) के बदले आरआईपी (RIP)

अगर कोई सुन्दर बाला आपसे कहे कि वो २०-२० के क्रिकेट मैच में हिस्सा लेकर लौट रही है, तो सीधा दिमाग में कौंधता है कि चीयर बाला होगी. किसी के दिमाग में यह नहीं आता कि हो सकता है वो महिला लीग का २०-२० खेल कर लौट रही हो. वही हाल हमारा होता है जब शाम को हमारे घर लौटते हुए रास्ते में कोई मिल जाये और उसे हम बतायें कि जिम से लौट रहे हैं. सब समझते हैं कि जिम का ऑडिट करके आ रहे होंगे या जिम में एकाऊन्टेन्ट होंगे. सी ए होने के यह लोचे तो हैं ही. कोई यह सोच ही नहीं पाता कि बंदा कसरत करके लौट रहा है. कई मारवाड़ी मित्र सोचते हैं कि बोलने में मात्रा गलत लगा दी होगी तो पूछते हैं कि कहाँ से जीम के लौट रहे हो? उनको लगता है कि किसी दावत से जीम (खा) कर लौट रहे हैं.
अतः हमने भी अब यह सोच कर बताना ही बंद कर दिया है कि बाद में तब बतायेंगे जब करनी और कथनी एक सी दिखने लगेगी. वरना हमारी हालत भी सरकार वाली हो जायेगी कि जो कुछ भी करेगी, यही कहेगी कि भ्रष्टाचार मिटा रहे हैं और मिटता विटता कुछ नहींहालांकि हम वजन के जिस मुकाम से लौट कर आज जिस मुकाम पर खड़े हैं, इस मुकाम तक आने के भी पहले ही जो बंदे लौट लिए वो देश भर में फिटनेस गुरु से बने फिटनेस के मंत्र बांटते नहीं थक रहे. ऐसा मानो कि कोई एवरेस्ट के बेस कैम्प नेपाल तक जाकर लौट आया हो दिल्ली वापस और देश भर को पर्वतारोहण के तरीके और गुर सिखा रहा हो और मीडिया उसके इर्द गिर्द लट्टू सी नाच रही हो. एक हम हैं कि एवरेस्ट पर झंडा गाड़ कर अभी वापस उतर ही रहे हैं और किसी को दिल्ली में कानों कान खबर तक नहीं है.
मीडिया भी एवरेस्ट पर चढ़कर कवरेज लेने से तो रही और सनसनीखेज की तलाश भी अनवरत बनी हुई है तो ऐसे ही लोग बच रहते हैं जो बेस कैम्प से लौट कर पर्वतारोहण के नुस्खे बांट रहे हों और पत्रकार उनसे पूछ रहे हों कि आप युवाओं को पर्वतारोहण के लिए क्या टिप देना चाहेंगे? और टिप के नाम पर बंदे गुरु मंत्रों का उच्चारण शुरु कर देते हैं.
वक्त वक्त की बात है. एक दिन हम भी एवरेस्ट से उतर कर जब दिल्ली पहुँचेंगे तो तहलका मचायेंगे, ऐसा विचार है मगर तब तक मीडिया ऐसे छद्म पर्वतारोहियों से इन्टरव्यू ले लेकर पर्वतारोहण का ही क्रेज  खत्म कर डालेगी तो हमारी सुनेगा कौन?
ये वैसे ही है जैसे कि बच्चे आज भी बोरवेल में गिरते हैं मगर कोई खबर नहीं लेता. सब मीडिया की अति का कमाल है. एक दिन ऐसा भी आयेगा कि जब मर्डर, रेप, रेल दुर्घटानायें, भ्रष्टाचार, बाबों का सियासत के मिल कर रचा जा रहा सामराज्य एवं तांडव, सिस्टम की कार गुजारियाँ आदि सब बच्चे के बोरवेल में गिरने जैसा ही बिना कान पाया हादसा बन कर रह जायेगा.
सजग होना होगा मीडिया को कि दिल्ली की गोदी से उतर कर हिमालय की वादी तक पहुँचे पर्वतारोहण की खबर जुटाने के लिए. खबर की तह तक जाये. खबर सुनाने पर ध्यान लगाये बजाय खबर बनाने के..उसे फरक करना होगा खबर और सनसनीखेज चमकदार वारदात के बीच...वरना शायद एक रोज टीआरपी (TRP) देने वाले ही न मूँह मोड़ कर आरआईपी (RIP) देने लग जायें....तब हाथ मलने के सिवाय कुछ न बच रहेगा..
याद रहे सोशल मीडिया नित जिम जा जा कर मजबूत हुआ जा रहा है.
-समीर लाल समीर
भोपाल के सुबह सवेरे में आज सोमवार अक्टूबर ९, २०१७ प्रकाशित:

http://epaper.subahsavere.news/c/22756350

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9 टिप्‍पणियां:

SANDEEP PANWAR ने कहा…

अति हर चीज की बुरी है।
मीडिया आजकल इसी रीत पर चल रही है। किसी ने अपराध किया नहीं कि जज, वकील, जासूस गवाह आदि सब कुछ मीडिया बनकर फैसला कर लेता है।

बवाल ने कहा…

बहुत गंदा बच्चा बन गया है मीडिया।

कमाल है जी जिम के बाँटों से मीडिया को तौल दिया। तोल मोल के बोल मीडिया तोल मोल के बोल।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

सार्थक पोस्ट

विकास नैनवाल ने कहा…

सही कहा। जितना ज्यादा चीजें दिखेंगी उतना आदमी उसके प्रति संवेदनहीन होता चला जायेगा। इस अति के कारण तो अब समाचार देखने तक बंद कर दिए हैं। बढ़िया लेख।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (10-10-2017) को
"थूकना अच्छा नहीं" चर्चामंच 2753
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (10-10-2017) को
"थूकना अच्छा नहीं" चर्चामंच 2753
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व डाक दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Kavita Rawat ने कहा…

मीडिया कब किसे कैसे उठा ले, गिरा ले कोई नहीं जानता
बहुत खूब!

Shashi Mohan Kumar Sah ने कहा…

बहुत अच्छा और बड़ा सच्चा लिखें हैं सर.