सोमवार, अप्रैल 03, 2006

पश्चिम मे देशी: विडंबना के दो चित्र

पश्चिम मे पढाई कुछ इस कदर मंहगी है और साथ ही पढाई के लिये लोन मिलने का सिलसिला इतना सरल, कि अधिकतर बच्चे लोन लेकर ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.वैसे ये एक फ़ैशन भी है...ऎसे मे बिटिया की शादी मे नये आयाम इस लोन को लेकर जुड जाते है, क्योंकि हम कितना भी पश्चिम मे रहें, हैं तो देशी ही, दो चित्रों के माध्यम से अपनी दो विरोधाभाषी बात पेश कर रहा हूँ, आशा है, सब कवर हो जायेंगे.

//चित्र १//

लडके के पिता ने
लडकी के पिता से कहा
लडकी तो आपकी नायाब है
नौकरी मे भी कामयाब है
पसंद वो एकदम हमारी है
इस घर मे उसी की इंतजारी है.
मगर हमे सिर्फ़ नौकरी पेशा
लडकी ही चाहिये...
उसकी पढाई का लोन
आप ही चुकाईये...
जब चुक जाये तब आइयेगा,
फ़िर आगे बात चलाइयेगा.



//चित्र २//

लडके के पिता ने
लडकी के पिता से कहा
लोन की आप चिंता ना करें
बिटिया ने पढा है,
वही तो चुकायेगी,
नौकरी करती है अपनी
जिम्मेदारी उठायेगी.
लडकी के पिता को
बात कुछ जम गई...
और सोच यहाँ थम गई..
चलो अपना लोन भी
बिटिया के नाम कराते हैं..
ऎसॆ रिश्ते बार बार
कहाँ मिल पाते हैं.

--समीर लाल 'समीर'

आपके पास कोई नया नज़रिया हो तो बतायें. Indli - Hindi News, Blogs, Links

13 टिप्‍पणियां:

पंकज बेंगाणी ने कहा…

बहुत सही लिखा

Udan Tashtari ने कहा…

शुक्रिया, पंकज भाई.
समीर लाल

संजय बेंगाणी ने कहा…

बहुत खुब, मजा आया.
आपका युं व्यंग्यकाएं करना
हमको भाया(पसन्द आया).
न हो प्रतिभा आपकी जाया
इस लिए, लिखते रहीयो भाया(भैया).

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा लगा, संजय भाई, रचना आपको पसंद आई.आपके प्रोत्साहन से जरुर लिखता रहूँगा.
समीर लाल

Tarun ने कहा…

बहुत सही व्‍यंग्‍य किया है।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत धन्यवाद, तरुण भाई.
समीर लाल

Unknown ने कहा…

वाह
बहुत खूब
लगे रहो।

Udan Tashtari ने कहा…

शुक्रिया, युगल भाई.लगा हूँ.
समीर लाल

rajneesh ने कहा…

बहुत घैंट है। समीर साहब का इश्टाईल युनीक है।

Udan Tashtari ने कहा…

स्टाईल पसंद आया, बहुत धन्यवाद रजनीश भाई.
वैसे बुरा ना माने तो जानना चाहूँगा अपने शब्दकोष के विकास के लिये, ये "घैट" शब्द का अर्थ क्या होता है?(वैसे लगता है शायद अर्थ गहन होगा, जब आपने लिखा है. :))

पुनः धन्यवाद..
समीर लाल

Dawn ने कहा…

वाह! बहुत सही व्‍यंग कसा है आपने...वही पुराने चोचले, लेकिन कुछ बदलते रंगों के साथ।
हमारी जानिब से ढेरों दाद कबूल करें
और अब आज्ञा दें...
फि़जा़

Manish Kumar ने कहा…

बहुत खूब!

Udan Tashtari ने कहा…

फ़िजा जी
और
मनीष जी

बहुत शुक्रिया.
समीर लाल