बुधवार, मार्च 15, 2006

महाकवि Robert Frost भाग २: एक नज़रिया-अंधियारे उजियारे

फ़िर सुना और पढा, भईया की एक और कविता. वैसे तो ढेरों पढ चुका हूँ, मगर इसकी गहराई नापने मे पसीने छूट गये. जब जब पढा, एक नया अर्थ. फिर अपने अंदाज़ मे अर्थ लिखा और अब विडंबना यह कि अर्थ भी पदता हूँ तो हालाँकि खुद का लिखा है, फ़िर भी नया मतलब निकलता है. बहुत गज़ब बात है भईया की लेखनी मे, कोई तोड नही. कहाँ जंगल मे तफ़रीह ले रहे थे और कहाँ इतनी गहरी बात "Stopping by Woods on a Snowy Evening ".तो अब फ़िर सुनो, पहले फ़िर से अग्रज और तब मेरी समझ....अनुवाद नही, बस मेरा नज़रिया, भईया Robert की सोच पर....मैने नाम दिया "अंधियारे उजियारे"..कैसा लगा?...भईया भी शीर्षक देखें तो घबरा जायें...

तो पहले भईया:(श्रीमान Robert Frost जी):

Stopping by Woods on a Snowy Evening

Whose woods these are I think I know,
His house is in the village though.
He will not see me stopping here,
To watch his woods fill up with snow.

My little horse must think it queer,
To stop without a farmhouse near,
Between the woods and frozen lake,
The darkest evening of the year.

He gives his harness bells a shake,
To ask if there is some mistake.
The only other sound's the sweep,
Of easy wind and downy flake.

The woods are lovely, dark and deep,
But I have promises to keep,
And miles to go before I sleep,
And miles to go before I sleep.

-- Robert Frost

अब मुझे सुनिये...जब भईया को सुना, जो आपको समझ मे भी नही आई, तो मुझे क्यों नही.....

एक नज़रिया: अंधियारे उजियारे

भाग आया ज़िंदगी से
इस कदर परेशान था
हर तरफ़ घनघोर अंधेरा
जानकर हैरान था.

गमों के थे स्याह जंगल
आसूओं की झील थी
मै ही अपने साथ था
बस मौत ही तामील थी.

तब उठी झंकार मन से
आत्मा की आवाज है
क्या तू करता है रे पगले
ज़िदगी नायाब है.

पहचान तुझको खुद बनानी
होगी इस संसार मे
खुशीयाँ ही है हर तरफ़
बस देखने का अंदाज़ है.

ध्यान रख कि इस धरा को
तुझसे अनंत अरमान हैं
अंतिम पडाव के पहले
अभी बाकी बहुत मुकाम हैं
अंतिम पडाव के पहले
अभी बाकी बहुत मुकाम हैं.........

--हिन्दी मे एक नज़रिया: समीर लाल

यह मात्र मेरा नज़रिया है इस कविता को देखने का. आपका क्या नज़रिया है इसका इंतजार रहेगा. Indli - Hindi News, Blogs, Links

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…
इस टिप्पणी को ब्लॉग के किसी एडमिन ने हटा दिया है.
Udan Tashtari ने कहा…
इस टिप्पणी को ब्लॉग के किसी एडमिन ने हटा दिया है.
Pratyaksha ने कहा…

मैंने भी इस कविता को इस नज़रिये से नहीं पढा था, पर आपका रूपाँतरण बहुत अच्छा लगा और एक नये पहलू से, कविता के, आपने सामना कराया.
कविता की सार्थकता इसी में है कि पाठक अपने हिसाब से उसमें अर्थ खोजे, फिर संभावनायें कितनी बढ जाती हैं

Udan Tashtari ने कहा…

प्रत्यक्षा जी
आपको पसंद आया. बहुत धन्यवाद आपका.
समीर लाल

Udan Tashtari ने कहा…

--From Lavnya Shah,--
Sameerji,
Since I don't have my BLOG ....
My Comments will not be accepted ....
But I wrote this ....
आपके blog का नाम बहुत बढिया है !:)
" उडन तश्तरी " ...... और
आपकी यह कविता का विषय ही ऐसा है की मन के भीतर तक माँ से जुडी हर बात पहुँच जाती है!
--लावण्या
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
The name " UDAN TASHTAREE " means the " Flying Saucer " .. & Futuristic space travel Zooms one into the Magical world of those space craft cruising through different dimensions !
So Congrats & good wishes ..&..Happy Blogging ...
--Lavanya