गुरुवार, मार्च 09, 2017

टुकड़े टुकड़े में बंटी जिन्दगी...


हम देश से इतनी दूर बैठे देश को सोचते हैं जहाँ हाल में चुनाव हुए हैं.
पता ही न चला कि देश के चुनाव हैं, कि प्रदेश के या फिर शहर विशेष के...
अब चुनाव हो चुके हैं..निर्णय पेटियों में बंद हैं..
ये सारे सर्वे वाले इस बात को जानते हैं कि हम क्या सोचते हैं.
आकाशवाणी सुनने की क्षमता अब भी बरकार है इतने सालों बाद भी जबकि इस देश में ऐसी वाणी मौन है.
सर्वे वाले आकाशवाणी कर रहे हैं...हम सुन रहे हैं..हमारे संस्कार बाकी हैं अभी चुपचाप सुनने के...
इनकी बकर अच्छी लगती है जबकि मालूम है यह हकीकत नहीं..
बचपन से हर तिलस्मी बातें अच्छी लगने के संस्कार लेकर बड़े हुए हैं...
यही सीखा है जिन्दगी से...खुश रहने का भी यही एक मात्र तरीका है..
चंदा मामा आयेंगे...दूध मलाई लायेंगे..
अब चंदा मामा ग्यारह तारीख को आयेंगे तब देखेंगे कौन सी दूध मलाई आई है.
आयेगी तो दूध मलाई ही...मगर किसके लिए...वही तो सर्वे उछाल रहे हैं?
पेट का सवाल तो उनके सामने भी है...क्या करें वो भला...अतः उत्पात आवश्यक है उनके भी..
मगर यह तय है कि किसी न किसी राजनीतिक दल के लिए तो दूध मलाई आयेगी..हंडिया में..
बच रही आम जनता तो वो फिर ठगी सी रह जायेगी..
ग्यारह तारीख तक जो भी सपने देखने हो देख लो आम जनों..
फिर हकीकत का हाथ थामे..अपनी पुरानी जिन्दगी में लौट जाना
अगले पांच साल के लिए अपने सपने कैद में डाल देना...
फिर उन्हें जब पाँच साल बाद खोलना तो इसलिए
कि अगर घुन लग गया हो..तो धूप दिखा दी जाये...
वरना फिर बंद हो जाना तो नियति है ही..अगले पाँच साल के लिए..
मानो सर्दी सर्दी नेप्थानाल की गोली के साथ स्वेटर बंद कर रहे हो पेटी में..
और तुम इस बात से भली भाँति परिचित हो...हर बार तो दोहराते हो..
पाँच पाँच साल में बंटी
हकीकत और सपनों की दुनिया..
-समीर लाल ’समीर’


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3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

अद्भुद आज भी ब्लाग लेखन चल रहा है …
एक हम है जो सोचते है कि जमाना बदल रहा है …

PRAN SHARMA ने कहा…

Bahut khoob

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (12-03-2017) को
"आओजम कर खेलें होली" (चर्चा अंक-2604)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक