मंगलवार, दिसंबर 18, 2012

खुशियाँ मनाइये कि मेरा रेप नहीं हुआ!!!

rape

 

पापा,

आप खुशियाँ मनाइये

एक उत्सव सा माहौल सजा

कि आपने मुझे खत्म करवा दिया था

भ्रूण मे ही

मेरी माँ के

वरना शायद आज मैं भी

जूझ रही होती....

जीवन मृत्यु के संधर्ष में...

अपनी अस्मत लुटा

उन घिनौने पिशाचों के

पंजों की चपेट में आ..

रिस रिस बूँद बूँद

रुकती सांस को गिनती

ढूँढती... इक जबाब

जिसे यह देश खोजता है आज

असहाय सा!!!

कितना अज़ब सा प्रश्न चिन्ह है यह!!

कोई जबाब होगा क्या कभी!!

कि निरिह मैं..

छोड़ दूँगी अंतिम सांस अपनी

एक जबाब के तलाश में!!!

और तुम कहते

बेटी तेरा देश पराया

बाबुल को न करियो याद!!

 

-समीर लाल ’समीर’

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63 टिप्‍पणियां:

poonam ने कहा…

कितना कटु सत्य है

poonam ने कहा…

दुखद , शर्मसार हूँ मे भी इसी समाज का हिस्सा हूँ ।

smile klub ने कहा…

Sahi hai asmat luta k ghut kar jine se pahle ma k kokh me hi marna par kiya unko koi haq nai hai is duniya me aane ki

kiya ye duniya shirf mardo k liye hai

agar isi tarah betion ko marte rahenge to is shristi ka kiya hoga kabhi chintan kiya humne.

girlsguidetosurvival ने कहा…

बालिका भ्रूण हत्या का ठीकरा रह रह के दहेज के नाम फूटता है आपने सही कहा दहेज तक पहुँचने के लिए गलियों कूचों से हो कर गुज़रना होगा और हर पल भय में जीना होगा कि कौन घड़ी किसी दरिंदे के हत्थे चढ़ जाओ. बहुत सामयिक रचना.
साधुवाद.

Peace,
Desi Girl

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

...ओह !

Darshan kaur dhanoe ने कहा…

आज की ज्वलंत समस्या तो यही कहती है की सब लड़कियां भ्रूण में ही मार दी जाये ? फिर कोई कैसे किसी का बलात्कार करेगा ---नारी जाति की एक और आम समस्या .....

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

आज की ज्वलंत समस्या तो यही कहती है की सब लड़कियां भ्रूण में ही मार दी जाये ? फिर कोई कैसे किसी का बलात्कार करेगा ---
नारी जाति की एक और आम समस्या ..... "औरत को जनम दिया मर्दों ने .....

अरूण साथी ने कहा…

DARD HE.....AADMI KE HAIBAN HONE KA

Rashmi Swaroop ने कहा…

:'(

Rashmi Swaroop ने कहा…

:'(

Rashmi Swaroop ने कहा…

:'(

Rashmi Swaroop ने कहा…

:'(

गिरीश बिल्लोरे ने कहा…

बास करना है अब तो
http://www.nukkadh.com/2012/12/blog-post_19.html

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पूरा वातावरण बोझिल कर दिया है।

Amrita Tanmay ने कहा…

अनुत्तरित प्रश्न का बोलता उत्तर..

ranjana bhatia ने कहा…

एक कड़वा सच ......बहुत दर्दनाक है

अन्तर सोहिल ने कहा…

पैदा होने से पहले अपने मार देते हैं और बडी होने पर समाज
बेटियों की यही कहानी

mukti ने कहा…

:(

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

एक कड़वा सच...जो हिला जाता है भीतर तक..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ऐसा लिखने की मजबूरी ओर पढ़ने की मजबूरी से शर्मशार हैं सब ...
आक्रोश उठता है मन में पर बेबस हो जाते हैं...

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

इन हालात में तो लगता है बेटियाँ यही कहेंगी ... उनकी पीड़ा को सशक्त शब्द दिए आपने .....

Kailash Sharma ने कहा…

उफ्फ..एक कटु सत्य...

बेनामी ने कहा…

alas! very sad

Maheshwari kaneri ने कहा…

एक दर्द है पर कटु सत्य भी है,,,

varsha ने कहा…

छोड़ दूँगी अंतिम सांस अपनी

एक जबाब के तलाश में!!!

Rajeev Panchhi ने कहा…

Samir ji,

Namaskar!

Your poem is really very touching. Actually this is a harsh reality.


By the way your blog is really wonderful. Congrats.

sushma 'आहुति' ने कहा…

EK KADWA SACH.....

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता ने कहा…

:(
:(
:(
:(

प्रतीक माहेश्वरी ने कहा…

सोच को अपने परिवार और आस पास के लोगों से ही बदलना होगा.. यह हर एक इंसान की जिम्मेवारी है.. दुःख तो बहुत है पर दुःख के समय हम सब को एकजुट हो कर आगे बढते रहना होगा..

Ramakant Singh ने कहा…

कितना अज़ब सा प्रश्न चिन्ह है यह!!

कोई जबाब होगा क्या कभी!!

कि निरिह मैं..

छोड़ दूँगी अंतिम सांस अपनी

एक जबाब के तलाश में!!!

और तुम कहते

बेटी तेरा देश पराया

बाबुल को न करियो याद!!

एक शर्मनाक सच

विष्णु बैरागी ने कहा…

मर्मान्‍तक पीडादायक है सब कुछ।

वाणी गीत ने कहा…

:(

kshama ने कहा…

Aah...

Suman ने कहा…

कटु सत्य....

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

बुधवार, दिसम्बर 19, 2012

खुशियाँ मनाइये कि मेरा रेप नहीं हुआ!!!





पापा,

आप खुशियाँ मनाइये

एक उत्सव सा माहौल सजा

कि आपने मुझे खत्म करवा दिया था

भ्रूण मे ही

मेरी माँ के

वरना शायद आज मैं भी

जूझ रही होती....

जीवन मृत्यु के संधर्ष में...

अपनी अस्मत लुटा

उन घिनौने पिशाचों के

पंजों की चपेट में आ..

रिस रिस बूँद बूँद

रुकती सांस को गिनती

ढूँढती... इक जबाब

जिसे यह देश खोजता है आज

असहाय सा!!!

कितना अज़ब सा प्रश्न चिन्ह है यह!!

कोई जबाब होगा क्या कभी!!

कि निरिह मैं..

छोड़ दूँगी अंतिम सांस अपनी

एक जबाब के तलाश में!!!

और तुम कहते

बेटी तेरा देश पराया

बाबुल को न करियो याद!!



-समीर लाल ’समीर’



एक ही दंश है आज भारत देश का उसी को मुखातिब है आज चर्चा मंच .बेहतरीन रचना ,हालाकि हम इस बात से सहमत नहीं है ,आपकी प्रस्तावना ,गर्भपात करवाओ गर्भस्थ कन्या का वरना बड़े होने पर बलात्कृत हो सकती है .क्यों सोच सके आप ऐसा .तीस साल पहले एक डॉ .ने कुछ ऐसे ही उदगार प्रकट किये थे आज आप समीर लाल ....

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

ram ram bhai
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बृहस्पतिवार, 20 दिसम्बर 2012
Rapist not mentally ill ,feel they can get away'
'Rapist not mentally ill ,feel they can get away'

माहिरों के अनुसार बलात्कारी शातिर बदमॉस होतें हैं जो सोचते हैं उनका कोई क्या बिगाड़ सकता है वह साफ़

बच

निकलेंगें .इस नपुंसक व्यवस्था के हाथ उस तक नहीं पहुँच सकते .

तस्दीक की जानी चाहिए यह बात कि बलात्कार एक इरादतन अदबदाकर किया गया हिंसात्मक व्यवहार है

http://veerubhai1947.blogspot.in/

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

कन्या भ्रूण हत्या तो उचित नहीं है पर यह बात भी सही है कि हमारे देश में महिला को सम्मान से जीने भी नहीं दिया जाता है। वे हमेशा प्रताड़ित तो होती ही है फिर बलात्कार जैसी घटनाओं का शिकार भी होती है।

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

कन्या भ्रूण हत्या तो उचित नहीं है पर यह बात भी सही है कि हमारे देश में महिला को सम्मान से जीने भी नहीं दिया जाता है। वे हमेशा प्रताड़ित तो होती ही है फिर बलात्कार जैसी घटनाओं का शिकार भी होती है।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

इस एक मोर्चे पर बेटियां हार जाती हैं...विडम्बना है ये.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

निशब्द हूँ. आपकी पंक्तियों ने बहुत कुछ कह दिया है .और तुम कहते बेटी तेरा देश पराया बाबुल को न करियो याद!!.....इन्हें पढ़कर गला रुंध गया और आंसू तैर गए है .. अब कुछ न कहा जा सकेंगा .

lalitya lalit ने कहा…

katu satya,jis ko kabhi badlanahi ja sakta.jab tak hay samaj tab tak rona hi hay bhai........

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

मैं आप की इस सोच से सहमत नहीं हूँ ....अगर हम माँ बाप ही कुछ संभाल कर चले तो ऐसी बहुत सी घटनायों को होने से रोक सकते है ....एक और हम भूर्ण हत्या को रोकने की मुहीम छेड़ रहें है ...वही आपकी ये कविता उसे ठीक ठहरा रही है ये सोच गलत है ...

shobhana ने कहा…

हम सबको गुस्सा आता है किन्तु कई बार प्रश्न उठता है इतने लेख ,इतनी मार्मिक कविताये ,इतने कानून इतने विचार विमर्श ,इतनी सामाजिक संस्थाए इतने नेता ,इतने अभिनेताओं की पहल के बावजूद भी कोई समाधान
नजर नहीं आता जैसा दहेज प्रथा विरोधी कानून बनने के बाद दहेज ज्यादा लिया दिया जाना लगा है ।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

रचना तो बेहद सुंदर बन पडी है. पर आज के युग को भ्रूण हत्याओं, ब्लातकारों का युग कहें या कि, क्या हम वापस पाषाण युग में जा रहे हैं?

रामराम.

Ankur Jain ने कहा…

शब्द-शब्द में दर्द से भरी हुई प्रस्तुति।।। साथ ही एक गहरा कटाक्ष।।।

G M Rajesh ने कहा…

drad bhara hai.
panktiyo me..
aur mai ab aahat hu
kyonki
jod diya gaya hu
abhiyaan se k beti bachao

roz kar raha hu swagat un maao ka jo janti hai betiyan

khush hota hu ke aaj fir beti ne janam liya kisi maa ki god me

rakhta hun khwaahish taki aabaad rahe ye jahaan

magar pishaachon ki is duniya me khamoshi se karte kaam mahsoos raha hun dard

raj ji apne hila dala mujhe

naya saal fir ummeedo ke saath age badhega ashaanvit hu.......


सुशील कुमार ने कहा…

सामाजिक सोच से उद्भूत एक अच्छी कविता |

रचना दीक्षित ने कहा…

लड़कियों पर ऐसे अत्याचार आखिर कब तक. सब्र की भी सीमा होती है.

sushila ने कहा…

बहुत ही मार्मिक रचना ! शर्म आती है कि हमने व्यवस्था को इतना चरमराने दिया।

साथ ही युवा शक्‍ति को नमन !

Madan Mohan Saxena ने कहा…

कटु सत्य .सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

ashok andrey ने कहा…

aapne apni is kavita men ek satya ko badi saphalta se udhghatit kiya hai jo kabile tareeph hai.bahut sundar,badhai.

रचना ने कहा…

excellent post sameer ji

http://indianwomanhasarrived.blogspot.in/2012/12/blog-post_26.html

वीना ने कहा…

एक कटु सत्य...मार्मिक रचना...

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

प्रभावी लेखन,
जारी रहें,
बधाई !!

Vinay Prajapati ने कहा…

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ... आशा है नया वर्ष न्याय वर्ष नव युग के रूप में जाना जायेगा।

ब्लॉग: गुलाबी कोंपलें - जाते रहना...

आशा जोगळेकर ने कहा…

सब के दिल का दर्द कहती है यह कविता ।

दर्शन कौर धनोय ने कहा…

मैं शर्मिदा हूँ क्योकि मेरी ही कोख से पुरुष ने जनम लिया ..और पुरुष भी शर्मिंदा है की हमारी जात में कोई नामर्द पैदा हुआ ..

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

यह तो ऐसा तमाचा है जिसकी गूँज सभी को सुनाई दे रही होगी।

Asha Saxena ने कहा…

मन को व्यथित करती समसामयिक रचना |
आशा

आशीष ढ़पोरशंख/ ਆਸ਼ੀਸ਼ ਢ਼ਪੋਰਸ਼ੰਖ ने कहा…

अशेम्ड!

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थर्टीन रेज़ोल्युशंस

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



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♥सादर वंदे मातरम् !♥
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पापा, आप ख़ुशियां मनाइए...
सच तो यह है कि शोक का विषय है ...
अत्यंत मर्मांतक और पीड़ादायक स्थिति है !

आदरणीय समीर जी
गर्भ में ही भ्रूण-हत्या का शिकार हो चुकी बेटी के मुंह से वर्तमान परिप्रेक्ष में बेटी की असुरक्षित स्थिति का चित्रण अन्य किसी की कविता में पढ़ने को नहीं मिला ...
विषय ऐसा है कि मन उदास हो रहा है ...
लेकिन आपकी प्रभावशाली लेखनी की प्रशंसा में कुछ न कहूं तो मन और भी बेचैनी महसूस करेगा ...
सार्थक सृजन के लिए साधुवाद !


हार्दिक मंगलकामनाएं …
लोहड़ी एवं मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर !

राजेन्द्र स्वर्णकार
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mridula pradhan ने कहा…

peedadayak......

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

स्त्रियों की पीड़ा की करुण अभिव्यक्ति...