गुरुवार, अप्रैल 27, 2006

प्रभु से बडा प्रभु का नाम: चुनाव संग्राम

प्रभु से बडा प्रभु का नाम: चुनाव संग्राम- दोहे-कुण्डलियों के साथ

"प्रभु से बडा प्रभु का नाम
जपते रहो परिवार का नाम
कृपा अगर तुम पर हो जाये
पाओगे एक टिकट ईनाम."


//१// रायबरेली चुनाव

भईया खडे चुनाव मे, कौनो मुद्दा ना मिल पाय
विदेशी बहू के राग मे, पहिले भी मुँह की खाय.
पहिले भी मुँह की खाय कि कैसे अब जीत सकेंगे
मंदिर वहीं बनाने का क्या फ़िर फ़िर मंत्र जपेंगे
कह 'समीर' कि रथ का भी अब चले है उल्टा पहिया
जमानत बस बच जाये तो समझो जीते रे भईया.


//२// उत्तर प्रदेश चुनाव

अब यूपी के चुनाव की बिटवा सम्हालेंगे कमान
बाकी सब बस बैठ कर, उन पर धर रहे ध्यान.
उन पर धर रहे ध्यान कि नाव अब पार कराओ
बाकी सब तो थक गये तुमहि कुछ उद्धार कराओ
कह 'समीर' कि विपक्ष की हालत हो रही है अजब
कहते जे नादान लईका है का हमे हरायेगा अब.

//३// अब एक कबीर दास जी के दोहे के साथ

बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड खजूर
पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर
फल लागे अति दूर कि हमरे छुटके भईया
यूपी की क्या बात देश की खे दो नईया
नेता लोगन सब दर पे तेरे पंजा लिये खडा
टिकट बस दिलवा दे रे बिटवा लायक हूँ बडा.


//४// बस चलते चलते एक क्रिकेट के नाम

धोनी ने है धुन दिया,चऊआ छक्का मार
सबके दिल मे बस गया, क्या मारत है यार.
क्या मारत है यार कि जरा संभल कर मारो
जे हि उतारेंगे भद्द, अगर तुम कहीं पे हारो
कहे 'समीर' कविराय कि करो आहिस्ता बोहनी
लम्बी दौड लगईओ जरा थम थम के धोनी.

--समीर लाल 'समीर' Indli - Hindi News, Blogs, Links

12 टिप्‍पणियां:

Laxmi N. Gupta ने कहा…

वाह भाई समीर जी! बढ़िया कुन्डलियाँ लिखी हैं।

Udan Tashtari ने कहा…

धन्यवाद, लक्ष्मी जी.

अनूप शुक्ला ने कहा…

बढ़िया हाथ साफ हो रहा है।अब तो कुंडलिया विशेषज्ञ से हो गये हैं!

Udan Tashtari ने कहा…

बस अनूप भाई
कृपा बनाये रहें और हौसला बढाते रहें.
बहुत धन्यवाद.
समीर लाल

रजनीश मंगला ने कहा…

समीर जी, बहुत बढ़िया

Udan Tashtari ने कहा…

धन्यवाद, रजनीश भाई.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 10 -05-2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में ....इस नगर में और कोई परेशान नहीं है .

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut sundar saamyik kundliyaan kahi hain aapne badhaai

मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

बहुत सुन्दर समसामयिक कुण्डलियाँ लिखी है , समीर जी ! हार्दिक आभार

dheerendra ने कहा…

समीर जी,...लिखने के लिए उम्र का कोई बंधन नही होता,जिस विषय पर दिल आये लिख डाले,...आपने हट कर लिखा,मुझे अच्छा लगा,अगली बार कुछ फिर नया.......हो जाए ......

my recent post....काव्यान्जलि ...: कभी कभी.....

Suman ने कहा…

बहुत सुंदर .....

Reena Maurya ने कहा…

बहुत सुन्दर.....