उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

रविवार, जनवरी 05, 2014

आँटी पुलिस बुला लेगी- गंदी बात गंदी बात!!

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कनाडा की शाम को आजतक पर “दिल्ली की आप सरकार की सबसे कम उम्र की महिला व बाल विकास मंत्री राखी बिड़ला” (बाकी मंत्रियों के लिए मात्र विभाग के सा...
55 टिप्‍पणियां:
रविवार, नवंबर 17, 2013

नारे और भाषण लिखवा लो- नारे और भाषण की दुकान

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हमारी एक नई घोषणा!! आईए और जानिए हमारा एक नया व्यापार.....चुनाव के मौसम में एकदम ताजा. हमारे यहाँ चुनाव के लिए नारे और भाषण लिखे जाते है...
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बुधवार, अक्टूबर 02, 2013

कुछ वाँ की.. तो कुछ याँ की...

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एक नये तरह का प्रयोग किया है...देखें जरा...कैसी गज़ल निकली है: कब परिंदो को पता था, आंगनों में भेद का एक दाना वाँ चुगा था, एक दाना याँ ...
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रविवार, सितंबर 08, 2013

फासला - कोई एक हाथ भर का!!

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जब रात आसमान उतरा था झील के उस पार अपनी थाली में सजाये अनगिनित तारे तब ये ख्वाहिश लिए कि कुछ झिलमिल तारों को ला टांक दूँ उन्हे...
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रविवार, अगस्त 18, 2013

पूर्ण विराम: एक कहानी

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सुनिये मेरी कहानी- मेरी आवाज़!! मेरी कहानी: मेरी आवाज़!! मुझे नहीं, वो मेरी लेखनी पसंद करती है. मुझसे तो वो कभी मिली भी नहीं और न ही कोई...
36 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अगस्त 05, 2013

तुमको सलाम लिखता हूँ.....

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याद करो वो रात.. वो आखिरी मुलाकात.. जब थामते हुए मेरा हाथ हाथों में अपने कहा था तुमने... लिख देती हूँ मैं अपना नाम हथेली पर तु...
40 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जुलाई 29, 2013

जन्मदिन पर गुरुदेव का आशीष!!

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उफ़ क्यों याद दिलाता कोई उम्र ढल रही धीरे धीरे गाकर गीत जनम दिन वाले और बजा कर ढोल मजीरे लेकिन जग की रीत यही है औपचारिकी होना ही ...
28 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जुलाई 01, 2013

पहाड़ के उस पार….इस बार मेरी आवाज़ में

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सुनिये: समीर लाल ’समीर’ की आवाज में उनकी एक कविता   मेरे कमरे की खिड़की से दिखता वो ऊँचा पहाड़ बचपन गुजरा सोचते कि पहाड़ के उस ...
29 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, जून 18, 2013

हरे सपने...एक कहानी..मेरी आवाज़ में..

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उसे भी सपने आते थे. वो भी देखती थी सपने जबकि उसे मनाही थी सपने देखने की. माँ के पेट के भीतर ही थी तब वो खूब लात चलाती, यह सोचकर कि माँ को ...
35 टिप्‍पणियां:
रविवार, जून 02, 2013

देखता हूँ मुड़ कर

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इसे पढ़िये और एक नया प्रयोग किया है तो सुनिये यू ट्यूब पर…. देखता हूँ मुड़ कर और सोचता हूं उम्र की इस दहलीज़ तक पहुँचने के लिए सीढ़ी...
47 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, मई 17, 2013

मैच फिक्सिंग: सरकार इस्तिफा दे!

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इतना बड़ा खुलासा. लाखों करोड़ों रुपयों का लेन देन और साथ में सेक्स स्कैंडल. श्री शांत के साथ साथ दो और खिलाड़ी. खिलाड़ियों समेत कई अन्यों पर...
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रविवार, मई 05, 2013

हे नीलकंठ मेरे!!

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एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों का जलती हुई जिन्दगी की आग से, हथेली में रख फोड़ा उसे फिर बिखेर दिया जमीन पर... अपनी ही राह में, जिस पर...
52 टिप्‍पणियां:
रविवार, अप्रैल 28, 2013

मेरी कविता- नई इबारत!!!

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मेरी कविता बदल दी है मैने उन सब बातों के लिए जो तुमको मान्य न थी... मेरी कविता बदल दी है मैने उन सब बातों के लिए जो सबको मान...
45 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, अप्रैल 23, 2013

मैं वही अँधेरों का आदमी…

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  तुमने छुड़ा कर हाथ मेरा जो पीछे छोड़ दिये थे अँधेरे उनसे अभ्यस्त होती मेरी ये आँखे आज जरा सी टिमटिमटाहट से उस दीपक की, जो बुझने ...
45 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, मार्च 05, 2013

चचा का यूँ गुजर जाना....हाय!!

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चचा मेरे - नाम मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खान और लोग उन्हें प्यार से गालिब कहते थे- वो १८६९ में क्या निकले कि तड़प कर रह गये उनके चाहने वाले अच्छा...
55 टिप्‍पणियां:
बुधवार, फ़रवरी 27, 2013

जीत: अब लौट भी तुम आओ

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एक लघु कथा - जीत: वह सफेद कार में था... उसने रफ्तार बढ़ा दी...नीली कार पीछे छूटी..फिर पीली वाली... एक धुन सी सवार हुई कि सबसे जीत जाना है...
53 टिप्‍पणियां:
बुधवार, फ़रवरी 20, 2013

मतवाली बेखौफ़ गज़ल

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बस कोशिश थी कि कुछ कहें मगर जब बात बिगड़नी होती है तो यूँ बिगड़ती है कि साधे नहीं सधती....काफिया उखड़ा बार बार...कोई बात नही....माईने ही उखड़ गय...
85 टिप्‍पणियां:
रविवार, जनवरी 20, 2013

आहिस्ता आहिस्ता!!

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सफ़हा दर सफ़हा लम्हा दर लम्हा बरस दर बरस दर्ज होता रहा किताब में मेरे दिल की तुम्हारे मेरे साथ की यादों का सफर और मैं अपने द...
51 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, दिसंबर 18, 2012

खुशियाँ मनाइये कि मेरा रेप नहीं हुआ!!!

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  पापा, आप खुशियाँ मनाइये एक उत्सव सा माहौल सजा कि आपने मुझे खत्म करवा दिया था भ्रूण मे ही मेरी माँ के वरना शायद आज मैं भी ...
60 टिप्‍पणियां:
सोमवार, नवंबर 19, 2012

अधूरे सपने- अधूरी चाहतें!!

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मेरे कमरे की खिड़की से दिखता वो ऊँचा पहाड़ बचपन गुजरा सोचते कि पहाड़ के उस पार होगा कैसा एक नया संसार... होंगे जाने कैसे लोग... क...
51 टिप्‍पणियां:
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समीर लाल की उड़न तश्तरी... जबलपुर से कनाडा तक...सरर्रर्रर्र...
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