उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

सोमवार, जनवरी 05, 2015

सुनहरी चाबुक

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अगर आपके पास घोड़ा है तो जाहिर सी बात है चाबुक तो होगी ही. अब वो चाबुक हैसियत के मुताबिक बाजार से खरीदी गई हो या पतली सी लकड़ी के सामने सूत की...
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रविवार, सितंबर 21, 2014

तितली

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  तितली उस रोज ऊगी थी बगीचे मे मेरे गुलाब को चूमते.. आ बैठती थी काँधे पर मेरे अपनापन पहचान बगीचे की खुशबू से.. अब बड़ी हुई ...
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सोमवार, सितंबर 01, 2014

डॉ कुमार विश्वास: हिन्दी कविता के मंच का कोहिनूर

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पिछले महिने जुलाई २०१४ में जिस दिन डॉ कुमार विश्वास अमेरीका पहुँचे, उसी सुबह उनसे फोन पर बात हुई. पता चला कि अमेरीका और कनाडा के १४ अलग अलग ...
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बुधवार, जुलाई 30, 2014

दूर बहुत दूर…

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  दूर बहुत दूर मगर मेरे दिल के आस पास कई दरियाओं के पार मेरी यादों में बसा वो शहर रहता है.. जहाँ गुजरा था मेरा बचपन जिसकी सड़...
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रविवार, अप्रैल 20, 2014

कतरा कतरा

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  कभी जिन यादो से दिन, खिल कर संवर जाता था.. आज सोचता हूँ वही बचपन, वही स्पर्श, वही नाते, उतारता हूँ जब दिल के कागज पर वो ...
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रविवार, मार्च 09, 2014

आज क्या हुआ होगा...मेरे देश में

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आज सुबह रोज की तरह ही ६ बजे से कुछ सैकेंड पहले ही नींद खुली. हमेशा सुबह ६ बजे का अलार्म लगा होता है मगर एक आदत ऐसी बन गई है कि मैं उसके चन...
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रविवार, जनवरी 05, 2014

आँटी पुलिस बुला लेगी- गंदी बात गंदी बात!!

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कनाडा की शाम को आजतक पर “दिल्ली की आप सरकार की सबसे कम उम्र की महिला व बाल विकास मंत्री राखी बिड़ला” (बाकी मंत्रियों के लिए मात्र विभाग के सा...
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रविवार, नवंबर 17, 2013

नारे और भाषण लिखवा लो- नारे और भाषण की दुकान

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हमारी एक नई घोषणा!! आईए और जानिए हमारा एक नया व्यापार.....चुनाव के मौसम में एकदम ताजा. हमारे यहाँ चुनाव के लिए नारे और भाषण लिखे जाते है...
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बुधवार, अक्टूबर 02, 2013

कुछ वाँ की.. तो कुछ याँ की...

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एक नये तरह का प्रयोग किया है...देखें जरा...कैसी गज़ल निकली है: कब परिंदो को पता था, आंगनों में भेद का एक दाना वाँ चुगा था, एक दाना याँ ...
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रविवार, सितंबर 08, 2013

फासला - कोई एक हाथ भर का!!

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जब रात आसमान उतरा था झील के उस पार अपनी थाली में सजाये अनगिनित तारे तब ये ख्वाहिश लिए कि कुछ झिलमिल तारों को ला टांक दूँ उन्हे...
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रविवार, अगस्त 18, 2013

पूर्ण विराम: एक कहानी

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सुनिये मेरी कहानी- मेरी आवाज़!! मेरी कहानी: मेरी आवाज़!! मुझे नहीं, वो मेरी लेखनी पसंद करती है. मुझसे तो वो कभी मिली भी नहीं और न ही कोई...
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सोमवार, अगस्त 05, 2013

तुमको सलाम लिखता हूँ.....

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याद करो वो रात.. वो आखिरी मुलाकात.. जब थामते हुए मेरा हाथ हाथों में अपने कहा था तुमने... लिख देती हूँ मैं अपना नाम हथेली पर तु...
40 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जुलाई 29, 2013

जन्मदिन पर गुरुदेव का आशीष!!

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उफ़ क्यों याद दिलाता कोई उम्र ढल रही धीरे धीरे गाकर गीत जनम दिन वाले और बजा कर ढोल मजीरे लेकिन जग की रीत यही है औपचारिकी होना ही ...
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सोमवार, जुलाई 01, 2013

पहाड़ के उस पार….इस बार मेरी आवाज़ में

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सुनिये: समीर लाल ’समीर’ की आवाज में उनकी एक कविता   मेरे कमरे की खिड़की से दिखता वो ऊँचा पहाड़ बचपन गुजरा सोचते कि पहाड़ के उस ...
29 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, जून 18, 2013

हरे सपने...एक कहानी..मेरी आवाज़ में..

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उसे भी सपने आते थे. वो भी देखती थी सपने जबकि उसे मनाही थी सपने देखने की. माँ के पेट के भीतर ही थी तब वो खूब लात चलाती, यह सोचकर कि माँ को ...
35 टिप्‍पणियां:
रविवार, जून 02, 2013

देखता हूँ मुड़ कर

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इसे पढ़िये और एक नया प्रयोग किया है तो सुनिये यू ट्यूब पर…. देखता हूँ मुड़ कर और सोचता हूं उम्र की इस दहलीज़ तक पहुँचने के लिए सीढ़ी...
47 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, मई 17, 2013

मैच फिक्सिंग: सरकार इस्तिफा दे!

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इतना बड़ा खुलासा. लाखों करोड़ों रुपयों का लेन देन और साथ में सेक्स स्कैंडल. श्री शांत के साथ साथ दो और खिलाड़ी. खिलाड़ियों समेत कई अन्यों पर...
52 टिप्‍पणियां:
रविवार, मई 05, 2013

हे नीलकंठ मेरे!!

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एक अंगारा उठाया था कर्तव्यों का जलती हुई जिन्दगी की आग से, हथेली में रख फोड़ा उसे फिर बिखेर दिया जमीन पर... अपनी ही राह में, जिस पर...
52 टिप्‍पणियां:
रविवार, अप्रैल 28, 2013

मेरी कविता- नई इबारत!!!

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मेरी कविता बदल दी है मैने उन सब बातों के लिए जो तुमको मान्य न थी... मेरी कविता बदल दी है मैने उन सब बातों के लिए जो सबको मान...
45 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, अप्रैल 23, 2013

मैं वही अँधेरों का आदमी…

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  तुमने छुड़ा कर हाथ मेरा जो पीछे छोड़ दिये थे अँधेरे उनसे अभ्यस्त होती मेरी ये आँखे आज जरा सी टिमटिमटाहट से उस दीपक की, जो बुझने ...
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समीर लाल की उड़न तश्तरी... जबलपुर से कनाडा तक...सरर्रर्रर्र...
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