उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

रविवार, फ़रवरी 25, 2007

एक, दो, तीन........

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एक, दो, तीन........चार, पाँच, छः...यह सब हम पर की गई प्रश्नों की बौछारे थीं, रचना और जीतू की. एक, दो, तीन........चार, पाँच, छः... सुन हम भी...
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गुरुवार, फ़रवरी 22, 2007

इंडिकब्लागिज अवार्ड, २००६: बहुत आभार और धन्यवाद

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अभी अभी इंडिकब्लागिज इंडियन वेबलॉग अवार्ड, २००६ के परिणाम देखे. आप सबका स्नेह, मात्र एक वर्ष से भी कम समय के साथ में, देख कर मन भावविभोर हो...
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बुधवार, फ़रवरी 21, 2007

कवि-क्यूँ, कैसे और आप: प्रवचन माला २-३

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एक ही प्रवचन माला में भाग २ और ३ एक ही साथ - ताकि लेख की लम्बाई सिद्ध कहलाये: भाग-२ कवि कई प्रकार के होते हैं. इस लेख में मैं अपनी पहुँच को...
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मंगलवार, फ़रवरी 20, 2007

वाह रे, यह चैनल

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आज सबेरे जब कम्प्यूटर खोला तो देखा हमारे न्यूज चैनेल वाले भाई साहब के गुगल चैट पर नोटिस बोर्ड टंगा है, फ्लैशिंग न्यूज टाइप: ब्लागर्स में मा...
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वो सुनाते रहे हैं दास्तां

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कल पिछली पोस्ट पर लोगों के विचार सुनें, जबकि हम कह चुके थे कि पुनी पुनी बोले ( शायद ऐसे लिखते तो ठीक रहता-बार बार बोले ) मगर फिर भी हमने अप...
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शुक्रवार, फ़रवरी 16, 2007

पुनि पुनि बोले संत समीरा- प्रवचन माला भाग १

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५ मई सन २००६ तदानुसार विक्रम संवत २०६२ ...आगे लिखना सीख रहा हूँ शुक्ल पक्ष ८..या जो भी... शैलेष भारतवासी भाई , जरा बताना!! आभारी रहूँगा. यह ...
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मंगलवार, फ़रवरी 13, 2007

दाता से सुम भला...

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परसों सुबह जल्दी नींद खुल गई. इंडीब्लागिज पर नामांकित चिट्ठों की घोषणा होनी थी. समय रहते हो गई. ७ दिग्गजों के साथ ८ वां नाम उड़न तश्तरी, ८वे...
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रविवार, फ़रवरी 04, 2007

बाल महिमा

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एक बार बाल झड़ जाने के बाद उनके वापस आने का इंतजार ठीक वैसा ही है जैसे भारतीय नौकरशाही में संपूर्ण इमानदारी की बहाली का इंतजार करना. चार-छः ...
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बुधवार, जनवरी 31, 2007

भागो भागो, डाकू आये

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सुबह से बाजार में हल्ला मचने लगा था, 'भागो भागो, डाकू आये". और जीतु भाई , ई-पंडित , संजय बैंगाणी जी सब ने अपनी कलमी तलवार उठा ली...
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सोमवार, जनवरी 29, 2007

हरि से बड़ा हरि का नाम

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हमारे मित्र अब विधायक हो गये थे. हमेशा पूछते-' कोई काम हो तो बताना ' . हम शरीफ आदमी ठहरे. कुछ ऐसा काम ही नहीं सोच पाये, जो कि उनसे क...
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गुरुवार, जनवरी 25, 2007

कृष्णा विरेन्द्र ट्रस्ट और जयप्रकाश जी : आभार

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तरकश द्वारा आयोजित सम्मान 'सर्वश्रेष्ट उदीयमान चिट्ठाकार, २००६' में स्वर्ण कलम से सम्मानित होने पर कृष्णा विरेन्द्र ट्रस्ट के द...
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बुधवार, जनवरी 24, 2007

अतुल्य भारत या भारत उदय

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अभी दो दिन पहले ही फुरसतिया जी के प्रश्न पर अपनी एक जबाबी पोस्ट लिखी थी, खुलासा-ए-मुहब्बत: आग का दरिया . यह पोस्ट जैसे ही नारद पर आई वैसे ...
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रविवार, जनवरी 21, 2007

खुलासा-ए-मुहब्बत: आग का दरिया

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उस दिन जब फुरसतिया जी ने अपने चिर परिचित अंदाज में अपना लेख “आग का दरिया, बसंती की अम्मा और कुछ हाईकु “ पेश किया और हमसे हमारी इश्क मुहब्...
11 टिप्‍पणियां:
रविवार, जनवरी 14, 2007

अह्हा, आन्नदम, आन्नदम!!

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चलो, नया साल शुरू हो गया, बड़ी अच्छी बात है. मगर मन का क्या करें? हर समय ही विचलित सा रहता है. आंतरिक शांति तो हमारे लिये मानो अमरीकन सपना हो...
23 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, जनवरी 09, 2007

शतकीय एहसाह

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अभी तक कभी क्रिकेट मन लगा कर खेला नहीं और न ही स्वयं शतकीय आन्नद कभी उठाया. सबका कुतूहल देखकर लगता तो था कि जो शतक मारता होगा, उसको जरुर कोई...
30 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जनवरी 08, 2007

वो इक पागल सी..

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इधर वर्षांत में दफ्तर का काम भी कुछ बढ़ गया था और फिर चिट्ठाजगत की हलचल और नव वर्ष के स्वागत में आयोजित पार्टियां. इन सब व्यस्तताओं के बीच भी...
16 टिप्‍पणियां:
शनिवार, जनवरी 06, 2007

किस विधी कहूँ आभार तुम्हारा...

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आप सबने, अपने स्नेह और आशिष से मुझे तरकश स्वर्ण कलम से सम्मानित किया है. मैं आप सबका बहुत आभारी हूँ. हालांकि मुझे लगता है कि अभी ही तो मैन...
37 टिप्‍पणियां:
बुधवार, जनवरी 03, 2007

संगत कीजे साधु की...

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स्थान: तरकश चुनाव मैदान शहर: अहमदाबाद मौका: तीन सर्वश्रेष्ट उदयीमान चिट्ठाकारों का चुनाव २००६ प्रवचनकर्ता: स्वामी समीरानन्द उर्फ़ उडन तश...
19 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जनवरी 01, 2007

जब भी लिखो

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अब जबकि नया वर्ष आ चुका है. कितने संकल्पों की बात की गई. क्या पता कौन से संकल्प पूरे होते हैं और कितने अगले साल को हासिल जाते हैं. अच्छा है,...
11 टिप्‍पणियां:
शनिवार, दिसंबर 30, 2006

आपके लिये..

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नूतन वर्षाभिनन्दन : दो मुक्तक -१- रोशन राहें दूर तलक हैं, मंजिल तक अब जाना है नये साल में आशाओं का, फिर से खुला खजाना है अब तक जो भी सीखा तु...
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