उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

रविवार, सितंबर 30, 2007

भूतपूर्व स्वर्गवासी श्री......

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जबलपुर में हमारे एक भूतपूर्व स्वर्गवासी मित्र श्री नारायण तिवारी जी रहते हैं. भूतपूर्व स्वर्गवासी सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है मगर वो उपर ह...
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गुरुवार, सितंबर 27, 2007

बड़ा अच्छा लगता है!!

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दफ्तर से घर लौट रहा हूँ. स्टेशन पर ट्रेन से उतरता हूँ. गाड़ी करीब ५ मिनट की पैदल दूरी पर खुले आसमान के नीचे पार्क की हुई है. थोड़ी दूर पार्क क...
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रविवार, सितंबर 23, 2007

आज तुमने फिर बहुत सुन्दर लिखा है!!

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समय भी अजब चीज बनी है इस दुनिया में. जब हम चाहते हैं कि जल्दी से कट जाये तो ऐसा रुकता है कि पूछो मत और जब चाहें कि थमा रहे, तो ऐसा भगता है क...
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गुरुवार, सितंबर 20, 2007

मुझे मुक्ति चाहिये!!!!

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याद है मुझे, तब सरकारी मकान में रहते थे. छत पर ईंट और मिट्टी से घेर कर पानी भर दिया जाता था और घर की सारी खिड़कियों के काँच पर गाढ़ा रंग. गर्...
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मंगलवार, सितंबर 18, 2007

हाय टिप्पणी!! काहे टिप्पणी!!

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अगर मैं कहूँ कि ९८ प्रतिशत भारत की आबादी को, जिसमें मैं भी शामिल हूँ, को न तो धन्यवाद देना आता है और न ही स्वीकारना आता है और न ही किसी का अ...
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रविवार, सितंबर 16, 2007

तस्वीर बनाता हूँ, तस्वीर नहीं बनती!!!

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गमगीन सा बोझिल माहौल. सभी के चहेरों पर गंभीरता. शांत वातावरण के बीच सुनाई पड़ती फुसफुसाहट. पूरे हॉल के भीतर दीवालों पर टंगी पेन्टिंग्स और उसक...
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शुक्रवार, सितंबर 14, 2007

तन्हा रात

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नोट: यह पोस्ट जनवरी, २००७ की पुरानी पोस्ट है जो कि गल्ती से सुधार कार्य के चक्कर में फिर से पोस्ट हो गई है और पुरानी दिनाँक में पोस्ट कर पान...
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बुधवार, सितंबर 12, 2007

हिन्दी हैं हम वतन है, हिन्दुस्तां हमारा...

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मौका है भारत से सात समंदर पार कनाडा में हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार के लिये आयोजित समारोह का. अब समारोह है तो मंच भी है. माईक भी लगा है.टीव...
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सोमवार, सितंबर 10, 2007

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन

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आज ऐसे ही ऑर्कुट पर टहल रहा था. एकाएक कुछ स्क्रेप्स पर नजर चली गई. कुछ कवितायें टंगी थीं. बचपन की याद दिला गई. बस सीडी में यह नज़्म लगाई और य...
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बुधवार, सितंबर 05, 2007

जाओ तो जरा स्टाईल से...

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जरा हट के का भाग-२ ही समझो इसे..... आज एक चिट्ठी आई. उसे देखकर बहुत पहले सुना चुटकुला याद आया. एक सेठ जी मर गये. उनके तीनों बेटे उनकी अन्ति...
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रविवार, सितंबर 02, 2007

तुझसे नाराज नहीं...जिन्दगी हैरान हूँ मैं

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सलाहकारों की भूमि-भारत भूमि. मैं गौरवान्वित महसूस करता हूँ कि मैने ऐसी भूमि पर जन्म लिया. यही पुण्य आदत मेरी भी है. आप मांगे न मांगे, मैं त...
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शुक्रवार, अगस्त 31, 2007

जरा हट के: भाग-१

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जरा हट के में सोचता हूँ ऐसी कुछ बातें लिखूँ जो हमारी स्थापित सोच, संस्कृति और समाज से जरा परे हटकर हों. आज देखिये न!! पड़ोस में दो घर छोड़ कर ...
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मंगलवार, अगस्त 28, 2007

और भईया जी नहीं रहे…

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जब हमारे व्यंग्यकार मित्र ने कुछ समय पूर्व अपने जीते जी अपनी मरणोपरांत खोले जाने वाली वसीयत सार्वजनिक कर दी , तो हम भी जरा संभल गये. उनका इस...
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गुरुवार, अगस्त 23, 2007

दिन का सूरज उगा

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तेरी सूरत दिखी आज फिर याद में, दिन का सूरज उगा यूँ लगा रात में. फल से लदने लगे पेड़ अंगनाई के तुम लिए ही रहे बीज बस हाथ में. उसकी आदत बुरी है...
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बुधवार, अगस्त 22, 2007

चूं चूं चीं चीं और हम लोग!!

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इस कविता के वास्ते मैने अपने पाठकों, जो कि अधिकतर चिट्ठाकार भी हैं, तीन वर्गों में बाँट दिया है. पहला वर्ग जो कि 'अ' कहलायेगा कि उ...
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रविवार, अगस्त 19, 2007

क्या आप मल्लन चाचा को जानते हैं??

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भटक गई है जो हवा, उनको दिखाने रास्ते जल रहा बनकर दिया मैं, रोशनी के वास्ते. एक बड़े शायर का शेर है. नाम है समीर लाल और तख़ल्लुस 'समीर...
31 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, अगस्त 16, 2007

हज़ारों ख्वाईशें ऐसी,कि हर ख्वाईश पे दम निकले

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आज तो कुछ लिखने का मन ही नहीं है. रात हो गई है.अँधेरा घिर आया है. मैं घर के पिछवाड़े में निकल कर लॉन में बैठ जाता हूँ. शीतल मनोहारी हवा मद्ध...
35 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अगस्त 13, 2007

गाँव पुकारता है...

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ऐसा नहीं है कि सिर्फ गाँव में रहने वालों को शहर अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. मुझे लगता है कि शहर में रहने वालों को गाँव पुकाराता है. थोड़ा अज...
31 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, अगस्त 10, 2007

ये देश है वीर जवानों का...

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स्वतंत्रता संग्राम की १५० वीं और स्वतंत्रता प्राप्ति की ६० वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में हर तरह उत्सव भरा माहौल है. सरकारी विभागों में भी खु...
32 टिप्‍पणियां:
बुधवार, अगस्त 08, 2007

और फिर रात गुजर गई

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'जागे हो अभी तक, संजू के बाबू' लेटे लेटे कांति पूछ रही है. 'हूँ, नींद नहीं आ रही. तुम भी तो जागी हो?' अंधेरे में ही बिस्तर ...
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