उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

सोमवार, जून 30, 2008

टालम टूली में कुछ बात

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पिछले दो दिन से तबीयत खराब है. आँख में किसी की नज़र लग गई है, दोनों आँख सूजी है और लाल हैं. ऑफिस भी नहीं जा पा रहा हूँ सो मन मसोसे सोता रहता ...
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रविवार, जून 22, 2008

तुमको मैं अपनी जान कहूँ

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घर से दफ्तर, दफ्तर से घर की रेल यात्राओं के दौरान, स्टेशन पर, स्टेशन की सीढ़ी पर चढ़ते-उतरते, ट्रेफिक में फंसे, गमझे में मूँह लपेटे इतनी महिला...
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बुधवार, जून 18, 2008

रोज बदलती दुनिया कैसी...

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अभी बहुत पुरानी बात नहीं हुई है जब पूरे मोहल्ले में एकाध किसी के घर फोन होता था और सब उसका ही नम्बर देते थे. वो बेचारे कभी इसे बुला, कभी उसे...
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रविवार, जून 15, 2008

किस नजर से देखूँ दुनिया तुझे...

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पिछले सात दिन से न कोई नई पोस्ट और पिछले दो दिनों से न तो कोई टिप्पणी. यह भी नहीं पता कि कब से सिलसिला फिर शुरु होगा. शायद कल से ही या कुछ ...
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रविवार, जून 08, 2008

असहज विचारों की सहज बानगी..

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अकसर दफ्तर आते जाते ट्रेन में बैठे फ्री बंटे उस अखबार के इश्तहारों से पटे पन्नों पर कोई खाली कोना तलाश अपने असहज भावों को सहजता से उतार देता...
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बुधवार, जून 04, 2008

हिन्दी चिट्ठाकारी स्पेशल

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आज की यह पोस्ट हिन्दी चिट्ठाकारी स्पेशल है यानि स्पेशली फार हिन्दी ब्लॉगर्स. (अंग्रेजी मे बॉलीवुड चलन के अनुरुप लिखना पड़ा) आज हम नहीं, बस ये...
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रविवार, जून 01, 2008

कड़वी निंबोली

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माँ की धुँधली सी तस्वीर उसके मानस पटल पर अंकित है. साफ साफ तो नहीं याद, जब माँ गुजरी तब वो बहुत छोटा था. रात माँ के बाजू में ही दुबक के सोय...
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गुरुवार, मई 29, 2008

आँधी तो आँधी होती है

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बस कुछ यूँ ही उमड़ते घुमड़ते ख्याल: चाहे नाम धरम का रख लो या कि दिल में नफरत भर लो देखो, इक दिन पछताओगे अभी स्वयं को वश में कर लो. आँधी तेज हव...
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मंगलवार, मई 27, 2008

सही तस्वीर मानो कि आईना!

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कुछ लोगों को चुपचाप खड़े लोगों से ही परेशानी रहती है. कैसे विघ्नसंतोषी हैं यह? बस, कोशिश करो कि उनकी हरकतों से विचलित न हो. याद रखो, तुम्हार...
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सोमवार, मई 26, 2008

किस की नजर लगी तुझे मेरे ब्लॉगजगत!

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ब्लॉगजगत में जो चल रहा है, जो वातावरण बना है, सभी एक घुटन का अहसास कर रहे हैं. बस, चन्द मुट्ठी भर लोग, सारा माहौल खराब कर हैं. उनका होना या...
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रविवार, मई 25, 2008

इक तेरी नजर का

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कब से उधार बाकी है, इक तेरी नजर का अब तक खुमार बाकी है, इक तेरी नजर का. जिंदा हूँ अब तलक मेरी सांसे भी चल रहीं, उन्हें इन्तजार बाकी है, इक त...
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बुधवार, मई 21, 2008

पुलिसिया हेलीकाप्टर

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कल दफ्तर से घर की तरफ चला तो हाईवे पर एकाएक मेरी कार के उपर उपर हेलीकाप्टर उड़ता नजर आने लगा. पुलिस वालों का था. आकस्मिक सहायता एवं कानून व्य...
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सोमवार, मई 19, 2008

पी गये उधार में...

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जिस किसी ने भी जीवन में कभी इश्क में चोट खाई हो या किसी को खाते हुए देखा,पढ़ा या सुना हो, उन सभी को आमंत्रण है. आईये, आईये-महफिल सजी है. गज़ल ...
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शनिवार, मई 17, 2008

गीत सम्राट श्री राकेश खंडेलवाल जी को बधाई

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आज मई १८, २००८ चिट्ठाजगत के प्रिय गीत सम्राट श्री राकेश खंडेलवाल जी का जन्म दिन है. इस शुभ अवसर पर हमारी तरफ से अनेकों बधाई और शुभकामनाऐं ...
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गुरुवार, मई 15, 2008

अब भी संभलो

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चीन में आये भूकंप के बाद मन में उठते कुछ भाव. आशा है आप सहमत होंगे: अब भी संभलो यह धरती है जिसे रौंदती दुनिया बन के भीड़. सब सहती है चुप रहती...
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मंगलवार, मई 13, 2008

सहायता चाहिये पर सहायताओं से गुरेज

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सहायता (ऐड) चाहिये पर सहायताओं (ऐड्स) से गुरेज, हद है! बचपन में घर पर एक कहावत सुना करते थे- इतना ज्यादा मिठाई भी मत खा लो कि मीठा कड़वा लगने...
30 टिप्‍पणियां:
रविवार, मई 11, 2008

टेन्ट हाऊस वाले को नमन

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आज तक आपने मंचों से कवियों को आयोजकों, श्रोताओं, विज्ञापनदाताओं यदि कोई मैग्जीन भी छपी हो तो और मंचासीन साथी कवियों का आभार करते ही सुना होग...
50 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, मई 08, 2008

मेरी कामना!!

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मेरा घर उस बड़े से पाईप के अंदर जो सामने ओवर ब्रिज के नीचे लगना था आज उजड़ गया.... ब्रिज बन कर तैयार हो गया शहर के विकास का जीता जागता प्रमाण ...
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मंगलवार, मई 06, 2008

गमछे की लपेट में

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जिस दिन से कनाडा वापस आया हूँ, न जाने आँखे हर तरफ बस एक ही चीज खोज रही हैं-गमछा. बड़ा मिस कर रहा हूँ गमछे को. गमछा मिस कर रहा हूँ इसलिये नही...
45 टिप्‍पणियां:
रविवार, मई 04, 2008

कैसे कैसे पूर्वाग्रह!!

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जनवरी माह की ठंड की रात के ११ तो बज ही गये होंगे. सड़क बिल्कुल सुनसान. एक पार्टी से लौटते हुए घर के अंधेरे मोड़ पर गाड़ी मोड़ी तो देखा एक आदमी स...
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