उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

बुधवार, फ़रवरी 27, 2008

अफसोस कि दिल्ली नहीं गये

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अफसोस कि दिल्ली नहीं गये. दिल्ली जाने के बाद भी दिल्ली नहीं गये. बस, फरीदाबाद गये. खुशी इस बात की कि पंगेबाज भाई अरुण अरोरा मिल गये. खाना उ...
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शनिवार, फ़रवरी 23, 2008

सावधान!! मेरी ब्लॉग आई डी चोरी...

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मित्रों, आज कम से कम ७ मित्रों का फोन या ई मेल आया कि मैने उनके ब्लॉग पर कुछ असंयत भाषा का प्रयोग करते हुए टिप्पणियाँ की हैं और बाद में मिटा...
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गुरुवार, फ़रवरी 21, 2008

द चोकिंग गेम-चिट्ठाजगत में...

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कभी घुटन सी महसूस होने लगती है. सोचने को मजबूर होना पड़ता है कि ये कहाँ आ गये हम. क्या हासिल है? महज एक घुटन का अहसास. एक अंधेरापन. एक दूसरे...
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रविवार, फ़रवरी 17, 2008

आओ कि खुशी मनायें

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यह मेरी २०० वीं पोस्ट है और मैं आप सबका बहुत आभारी हूँ जो आप सबने मेरा इतना उत्साह लगातार बढ़ाया. आगे भी इसी तरह के उत्साहवर्धन का आकांक्षी ...
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गुरुवार, फ़रवरी 14, 2008

बीबी तो इन्तजार करेगी ही..

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चा र दिन बाद गोरखपुर, उत्तर प्रदेश से लौटा. बचपन में भी हर साल ही गोरखपुर जाना होता था. ननिहाल और ददिहाल दोनों ही वहाँ हैं. तब तीन दिन की रे...
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रविवार, फ़रवरी 03, 2008

लोटा गायब

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लगभग ३ माह गुजर गये चिट्ठाकारी किये और पता ही नहीं चला. शायद वजह अपनों का सानिध्य और लगातार चिट्ठाकारों से संपर्क एवं मिलन रही हो. इस बीच भा...
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बुधवार, नवंबर 07, 2007

कुंठा से ग्रन्थी तक...

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आज किसी से बात चल रही थी और वो अपने बचपन कोई किस्सा बता रहा था. मुझे बचपन की बात से एक किस्सा याद आया. एक दिन दफ्तर से लौटते वक्त स्टेशन से ...
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सोमवार, नवंबर 05, 2007

झूठे सिद्धांत-एक दोस्त को याद करते हुए

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सुबह सुबह संदीप का फोन आया. कल रात उसके पिता जी को दिल का दौरा पड़ा है. अभी हालात नियंत्रण में है और दोपहर १२.३० बजे उन्हें बम्बई ले जा रहे ह...
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गुरुवार, नवंबर 01, 2007

आखिर बेटा हूँ तेरा

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सरौता बाई नाम था उसका. सुबह सुबह ६ बजे आकर कुंडी खटखटाती थी. तब से उसका जो दिन शुरु होता कि ६ घर निपटाते शाम के ६ बजते. कपड़ा, भाडू, पौंछा, ...
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सोमवार, अक्टूबर 29, 2007

१.३० घंटे मे ५० चिट्ठे मय टिप्पणी निपटायें

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बचपन में परीक्षा की तैयारी करते थे. मास्साब सफलता का पाठ पढ़ाते थे ट्यूशन में. गुर दिया गया कि जैसे ही परचा हाथ में आये, सबसे पहले एक नजर पूर...
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रविवार, अक्टूबर 28, 2007

राम की चिट्ठी सीता जी के नाम

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अभी २ दिन बाद वाशिंग्टन कवि सम्मेलन से लौटा १५ मिनट पहले. चिट्ठों में तो दमादम मची है. चलो, अच्छा है अच्छी परंपरा है सब खुल कर बात करते हैं....
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बुधवार, अक्टूबर 24, 2007

हद करती हैं ये लड़कियाँ भी...

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(यह संस्मरणात्मक आलेख मेरे पिछले आलेख ’दो जूतों की सुरक्षित दूरी’ वाले आलेख पर आये कई जिज्ञासु पाठकों की उस जिज्ञासा निवारण के लिये लिखा ज...
59 टिप्‍पणियां:
रविवार, अक्टूबर 21, 2007

कृप्या दो जूते की सुरक्षित दूरी बनाये रखें...

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बुजुर्ग कहते हैं जीवन एक पाठशाला है जहाँ व्यक्ति रोज कुछ नया सीखता है. सच कहते हैं. बुजुर्ग वैसे भी जो कुछ कह गये वो सच ही कह गये हैं. उनको ...
44 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, अक्टूबर 18, 2007

मीर की गज़ल सा.......

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आज कुछ ऐसे ही लिख देने का मन हुआ. देखिये, आपको कैसा लगा!!! मीर की गज़ल सा....... गांव की गली के उस नुक्कड पर बरगद की छांव तले माई बेरी की ढ़ेर...
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मंगलवार, अक्टूबर 16, 2007

हे कुत्ता जी महाराज, विधायक को आ जाने दो!!!

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हे कुता जी महाराज, आज न काटना. विधायक जी शहर के बाहर हैं. यह आम पुकार आपको शीघ्र गली मुहल्ले नुक्कड़ पर जल्द ही सुनाई देने लगेगी. सुना था कुत...
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रविवार, अक्टूबर 14, 2007

वो जो लिखता है न!! वो मैं नहीं हूँ.

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वो जो है न!! वो ख्वाबों की रहस्यमयी दुनिया में भटकने वाला, यथार्थ से दूर चाँद तारों में अपनी माशूका को तलाशता, हवाओं मे संगीत लहरी खोजता. उ...
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मंगलवार, अक्टूबर 09, 2007

ताज्जुब न करो!!

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गाँधी जयन्ती पर पढ़ता था गाँधी जी का खत , जो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के अपने अभिन्न मित्र कालेनबाख को लिखा. उस खत में उन्होंने हवा में आ रही ...
40 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अक्टूबर 08, 2007

पुनः वापसी : एक विचार

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५ तारीख की शाम एक कवि सम्मेलन में शिरकत करने मांट्रियल जाना पड़ा. उम्मीद थी कि ६ को लौट आयेंगे. मगर वाह रे मित्र!! ऐसे कैसे लौट आते जबकि सो...
26 टिप्‍पणियां:
बुधवार, अक्टूबर 03, 2007

अपराध बोध से मुक्ति

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घर के सामने ही एक छोटा सा किन्तु लम्बाई के हिसाब से अपेक्षाकृत घना पेड़ है. सुबह शाम को जब चाय पीने बरामदे में बैठो तो उसे निहारना बड़ा अच्छा ...
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रविवार, सितंबर 30, 2007

भूतपूर्व स्वर्गवासी श्री......

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जबलपुर में हमारे एक भूतपूर्व स्वर्गवासी मित्र श्री नारायण तिवारी जी रहते हैं. भूतपूर्व स्वर्गवासी सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है मगर वो उपर ह...
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