उड़न तश्तरी ....

--ख्यालों की बेलगाम उड़ान...कभी लेख, कभी विचार, कभी वार्तालाप और कभी कविता के माध्यम से......

हाथ में लेकर कलम मैं हालेदिल कहता गया
काव्य का निर्झर उमड़ता आप ही बहता गया.

गुरुवार, मई 31, 2007

"हास्य-दर्शन"- कवि अभिनव का जयकारा

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"हास्य-दर्शन" - कवि अभिनव की प्रभावशाली प्रस्तुति - एक समीक्षा भाई अभिनव शुक्ल का नाम यूँ तो किसी परिचय का मोहताज नहीं है. आप निय...
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रविवार, मई 27, 2007

तुम....सिर्फ तुम

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चलो, यह "तुम" शब्द बहुत व्यापक है, फिर आत्मिय भी. और सच में तुम तो तुम हो और तुम्हारे लिये यह गीत: तुम.... आज फिर जब दो घड़ी को, सा...
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गुरुवार, मई 24, 2007

हॉट स्पॉट यानि....

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हमेशा हास्य व्यंग्य वगैरह लिखते लिखते ईमेज बड़ी खराब होती जा रही है. सब समझते हैं कि हमें सिवाय ठिठोली के और कुछ आता ही नहीं. जो मिलता है बस...
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सोमवार, मई 21, 2007

अश्वम जेलम गच्छन्ति

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हफ्ते भर पहले समाचार सुनता था: छ्त्तीसगढ़ के किसी शहर में एक न्यायाधिश महोदय को टहलते वक्त किसी आवारा घोड़े ने काट लिया. इससे नाराज माननीय न्य...
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शुक्रवार, मई 18, 2007

चिट्ठाकार मिलन: रमन कौल जी पधारे द्वार हमारे

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रविवार को दिन में रमन भाई का फोन आया कि सोमवार शाम को टोरंटो आ रहे हैं. हमें बड़ी प्रसन्नता हुई और हमने आग्रह किया कि भाई, हमारे ही घर रुकें...
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गीत सम्राट राकेश खंडेलवाल: तुम जियो हजारों साल

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आज गीत सम्राट राकेश खंडेलवाल जी का जन्म दिवस है. हमारी ओर से अनेकों बधाई और शुभकामनायें. इस अवसर पर मेरी पसंद का राकेश जी द्वारा रचित एक पु...
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बुधवार, मई 16, 2007

का करें इन अनर्गल प्रलापियों का......

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घाव लगता है कोई, गहरा लगा है आपकी दहलीज पर, पहरा लगा है दो पलों को सो गये जो रात में आपको मालिक मकां, बहरा लगा है. उपरोक्त पंक्तियाँ चिट्ठा...
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रविवार, मई 13, 2007

आप गदहा लेखक हैं……..

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आज एक प्रशंसक की अपने लेख पर टिप्पणी मिली. हिन्दी टंकण औजार की अनुपलब्धता की वजह से उन्होंने रोमन में टिप्पणी कर दी. ऐसे होते हैं प्रशंसक क...
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बुधवार, मई 09, 2007

सरररर......सबसे तेज!!!

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ट्रिन..ट्रिन... 'हेलो, सबसे तेज चैनल "बात-कर"? मैं दस्युराज मरखाम बोल रहा हूँ.' 'अरे दस्युराज, बहुत दिन बाद फोन किया? ...
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सोमवार, मई 07, 2007

अरे ओ दकियानुसी!!!

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समय बदलता जाता है. मान्यतायें बदलती जाती हैं. हम बदलते जाते हैं. जब भारत में रहते थे तब कोई भी मित्र सर मुंडाये मिल तो भर जाये. हम झट से अपन...
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गुरुवार, मई 03, 2007

धार्मिक सहनशीलता और पौराणिक तटस्थता

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समस्त युग पुरुष, जैसे कि फुरसतिया जी तटस्थता पर लिख चुके और नितिन बागला जी पूछ चुके. अरुण(पंगेबाज ) दिनकर जी की इन पंक्तियों में नहा कर डू...
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सोमवार, अप्रैल 30, 2007

टेमा बोले टैं....

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आजकल ये टेली मार्केटिंग वाले भी न!! गजब होशियार हो गये हैं यहाँ पर. सब कंपनियों ने भारत और पाकिस्तान के बंदे रख लिये हैं और यहाँ रह रहे देसि...
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शनिवार, अप्रैल 28, 2007

दो दिन की छूट....

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अभी अभी शादी से लौटे, तब ख्याल आया कि कल तो हमें कुछ लिखना नहीं है. कल हम ३० अप्रेल को सारे ब्लॉगर द्वारा वर्जनिया टेक की घटना के विरोध में ...
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गुरुवार, अप्रैल 26, 2007

ये तो छूट चिटिंग है!!!

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आज मन खिन्न है, इसलिये नहीं कि हम बेवकूफ हैं. बल्कि इसलिये कि हमें बेवकूफ बनाया गया है. अरे, यह भी कोई बात हुई, सब मिल कर गुट बनायें है और ह...
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सोमवार, अप्रैल 23, 2007

मूषक पीर सही न जाये!!

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मैने देखा है जो चुप रहता है और सीधा होता है, उसका फायदा सब लोग उठाते हैं. अब जरा सी आत्मा, बेचारा चूहा, क्या हालत कर डाली है सबने उसकी. कहाँ...
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बुधवार, अप्रैल 18, 2007

बुढापा देख कर रोया...

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पिछली पोस्ट की भूमिका देखकर एक मित्र ने विनोदवश प्रश्न उठाया कि क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ है कि किसी कविता की सिर्फ भूमिका ही पढ़ी गई और लोग...
22 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अप्रैल 16, 2007

गगन चढहिं रज पवन प्रसंगा

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स्वामी समीरानन्द की प्रवचनमाला: ई X Factor क्या है. भाई!! अभी कुछ दिन पहले पंकज ने मेक्सिम पत्रिका से मन्दिरा बेदी की तस्वीरें अपने ब्लाग ...
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गुरुवार, अप्रैल 12, 2007

मोटापा बदनाम हो गया!!

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अजीब दो गले लोग हैं. एक तरफ तो कहते हैं, प्रगति होना चाहिये- चहुंमुखी प्रगति एवं सर्वांगीण विकास. इंडिया उदय और न जाने क्या क्या नारे. अब जब...
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मंगलवार, अप्रैल 10, 2007

बिजली के खम्भे, गालियाँ और कुत्ते!!

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बिजली विभाग और उसकी रहवासी कॉलिनियों से मेरा बड़ा करीब का साबका रहा है. पिता जी बिजली विभाग में थे और हम बचपन से ही उन्हीं कॉलिनियों में रहते...
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गुरुवार, अप्रैल 05, 2007

मान गये भाई कवि!!

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मान गये भाई कवि जी आपको. बड़े अजू्बे जीव हो. रात को जब सारा जग सो जाता है, घोर अंधेरा छा जाता है तब जागते हो. जब सारा घर दिन भर कामकाज करके,...
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समीर लाल की उड़न तश्तरी... जबलपुर से कनाडा तक...सरर्रर्रर्र...
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