रविवार, जुलाई 12, 2026

तुम आदत में शुमार हो मेरी

 


प्याली से उठती भाप

जाने कहाँ खो गई

चाय की उस आखिरी

चुस्की के साथ

मगर चाय का स्वाद

घुल रहा है अब भी

जुबान पर मेरी

और नथुनों में बस रही है

अदरक की खुशबू

जो आ बसी है उस

भाप के साथ –

यही सिलसिला है हर शाम का 

यूं मुझे चाय पसंद नहीं

मगर इसी प्याली मे समाई

तुम्हारी याद ही तुम हो

और इन्हीं लम्हों से

हर लम्हा गुजरना 

आदत में शुमार है मेरी

-समीर लाल ‘समीर’

youtube पर देखें: 

https://youtu.be/9sKLddww6PE?si=TIWa0kPCScuBTj1y


1 टिप्पणी:

  1. "यूं मुझे चाय पसंद नहीं"
    अच्छा लगा नापसंद का आदत में शुमार हो जाना

    जवाब देंहटाएं

आपकी टिप्पणी से हमें लिखने का हौसला मिलता है. बहुत आभार.