बुधवार, जून 24, 2026

वादे से कहानी तक


वादे से कहानी तक

जो तुमने कहा था

जो तुमने किया था

वो भी उस वक्त एक वादा ही था

न तुमने उसे निभाया

न तुमने आवाज दी

और उसी खामोशी में डूबा मैं

अब तलक उसी कहानी को सुनता हूँ

और सोचता हूँ

आखिर उस कहानी का असल किरदार कौन था?

तुम थीं?

मैं था?

या कि वो हम थे

जिनका न मिल पाना ही

वादे से कहानी तक की

एक कहानी बन गया।

-समीर लाल ‘समीर’

 

https://youtube.com/shorts/h_Fme5pUVoE?feature=share


2 टिप्‍पणियां:

  1. कहानी का किरदार कहानी में ही हो जरूरी तो नहीं

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत कम शब्दों में आपने अधूरे रिश्ते का दर्द गहराई से कह दिया। सबसे अच्छा लगा कि कविता किसी पर दोष नहीं डालती, बल्कि एक सच्चा सवाल छोड़ जाती है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं

आपकी टिप्पणी से हमें लिखने का हौसला मिलता है. बहुत आभार.