शनिवार, सितंबर 23, 2017

सब्र का बांध अभी टूटा नहीं है...


पिछले साल जब बिहार में शराब बंदी लागू की गई थी तब खबर आई थी कि जब्त की गई ९ लाख लीटर शराब जो पुलिस के माल खाने में रखी गई थी उसके निरक्षण हेतु जब बड़े अधिकारी निकले तो सारी बोतलें खाली मिली.
अव्वल तो थानों में जब्ति का सामान रखने की जगह का नाम ही ऐसा रखा गया है कि माल खाना नाम पढ़कर ही भूख लग आये. अच्छा भला आदमी तक न रोक पाये खुद को तब तो यह पुलिस वाले हैं जिनका खाना तो जग जाहिर है. जिस तरह से सच बोलने वाले नेता को नेता कौम अपने बीच से निकाल फेंकती है वैसे ही अखाऊ पुलिस वाले को लाईन अटैच कर दिया जाता है. कहावत है कि अच्छा खाने वाला खाकर डकारता नहीं है, सारा पचा जाता है. इसलिए अक्सर छोटी मोटी रिश्वत लेने वाला पटवारी १०० रुपये की रिश्वत लेता रंगे हाथ पकड़ा जाता है और नौकरी से हाथ धो बैठता है और मोटी रकम दबाने वाला बंदा ऐश काट रहा होता है.
दरअसल मोटी रकम खाने वाले को एक सुविधा यह भी रहती है कि अगर पकड़े गये तो खिला पिला कर मामला रफा दफा करने के लिए रकम हाथ में रहती है. अतः कारण बता दिया गया कि माल खाने से गायब शराब चूहे पी गये. जांच अधिकारी भी मान गये कि चूहे पी गये होंगे पक्का. एक अधिकारी ने नाम न बताये जाने की शर्त पर बताया कि यह चूहों की वही बाहुबली गैंग है जिसने एक बार फूड कार्पोरेशन का पूरा अनाज खा लिया था और एक बार कागज के वोटों के जमाने में विपक्षी नेता को पड़े वोट को चुन चुन कर कुतर डाला था और सरकार बनवाने में मदद की थी. इतनी पहुँच वाले चूहों पर भला कौन हाथ डाल सकता है अतः एक दलित चूहों के गुट के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें तड़ीपार जिलाबदर की सजा सुनाई गई.
फिर करोड़ों का चूहा मार पाऊडर नियमितमाल खानेके चारों तरफ छिड़का जाना तय पाया गया ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो. छिड़काव जारी रहा नियमित और हवा का चलना भी, जो उसे नियमित अपने साथ उड़ा कर ले जाती है. ’माल खाना’ इस मामले में भी अपने नाम की लाज रखे हुए है.
एकाएक खबर आई कि बिहार में ३८९ करोड़ का बांध उदघाटन तक भी बंधा न रह पाया और उसके पहले ही बह निकला. मुख्यमंत्री अभी उदघाटन हेतु नहा धो कर निकलने को ही थे कि बांध को गंगा जी बहा निकली और न जाने कितनों को नहला गईं.
मामला गंभीर था. अतः जबाबदेही तय करना भी जरुरी था. कोई बोरवेल तो है नहीं कि बता दिया -अरे यहीं तो खोदी थी..अब दिख नहीं रही..शायद शरारती बच्चों ने खेलते हुए वापस पूर दी होगी और न ही राजीव गाँधी वाटर शेड़िंग मिशन है कि पानी पहाड़ से आया था..संग्रहित हुआ था..जमीन में चला गया था..सूरज निकला था..पानी आदतानुसार वाष्प बन कर उड़ गया था. करोंड़ो स्वाहा हो गये थे.
अतः जबाबदेही तय की गई. पुनः नाम न बताने के शर्त पर मिली जानकारी में वही बाहुबली चूहा गैंग जिम्मेदार पाई गई मगर समरथ को नहीं दोष गुसांई..अतः फंसा फिर वही दलित चूहों का गुट जिन्हें तड़ी पार कर दिया गया था.
रिपोर्ट में बताया गया कि जब इस चूहा गुट ने शराब पी थी तो नीट पी गये थे. पानी की व्यवस्था तो थाने पर थी नहीं और उस पर से दलित..फिर बिहार का गांव.. जलाशय पर लतिया दिये जाते अतः नीट पीने के बाद जब सजायाफ्ता जिलाबदर दलित चूहों का गुट गंगा जी किनारे जाकर बस गया तब लोगों ने समझा कि प्रयाश्चित के तौर पर शायद जीवन का बाकी समय गंगा के पवित्र सानिध्य में आकर गुजार देने हेतु बस गये हैं मगर दरअसल गंगा किनारे बसने का हेतु यह था कि अब पी गई शराब को पानी पी कर बैलेंस किया जाये. बहुतेरे साधु ऐसे ही दुश्कर्मों को बैलेंस करने गंगा के किनारे धूनी रमाये हैं.
ये चूहे जब गंगा किनारे बसे हैं तो रहवास की व्यवस्था भी करनी ही है. एकाएक गंगा जी पर बांध बँधने लगा..सीमेंट के खंभे और दीवारें खड़ी होने लगे और चूहे उन्हें खोद खोद कर बिल बना बना कर अपनी रहवास योजना को अंजाम देने लगे. मजबूत को पोला बनाना चूहों का स्वभाव है. चूहे और नेताओं का यह स्वभाव ही उन्हें एक दूसरे के इतना करीब लाता है. करीबी का अंजाम देखें कि नेताओं के जाने कितने इल्जाम चूहे अपने सिर पर उठाये बदनाम हुए हैं.  मजबूत बांध की नींव को बनते बनते ही यह चूहे पोला करते चले गये और बांध उदघाटन के पहले ही धाराशाही हो गया..
रिपोर्ट जारी हो गई है. दलित चूहों के गुट को आईएसआईएस का प्रशिक्षित आतंकवादी गुट घोषित कर देश से बाहर निकालने के आदेश जारी हो रहे हैं..वे पड़ोसी देश में भेज दिये जायेंगे..
तेरा तुझको अर्पण की तर्ज पर...
आम जनता सारा खेल समझ रही है मगर उसका सब्र का बांध अभी टूटा नहीं है...

-समीर लाल समीर

भोपाल से प्रकाशित सुबह सवेरे के रविवार २४ सितम्बर, २०१७ में: 
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7 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (25-09-2017) को
"माता के नवरात्र" (चर्चा अंक 2738)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

मजबूत को पोला बनाना चूहों का स्वभाव है ...... इस पंक्ति पर तो नतमस्तक हो गए ..... सादर !

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आपको सपरिवार शुभ पर्व की मंगलकामनाएं

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

आपको सपरिवार शुभ पर्व की मंगलकामनाएं

vivek singh ने कहा…

Bahot pyaari bhasha me likha gaya hai..Hindi ko aage badhaane me aapka sahyog..behtareen hai Samir Lal Ji.

Pushpendra Dwivedi ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया बेहतरीन लेख

Pushpendra Dwivedi ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया बेहतरीन लेख