बुधवार, नवंबर 09, 2016

नंगा क्या नहाये और क्या निचोड़े?



सर, आप तो सी ए हैं. कभी सोचा भी न था कि आपके दर्शन प्राप्त करने आपके दर आऊँगा.... अब इसे अच्छे दिन न कहूँ तो और क्या कहूँ कि आज यह मौका भी आ ही गया?
सर, नित सब्जी मंडी के सामने (भीख) मांग कर इतना जुटा ले रहा था कि उस दिन का खाना खा सकूँ... इससे ज्यादा न कभी (भीख) मांगने में मिला, न ही कभी ऐसा सोचने का मौका आया..
अब नंगा क्या नहाये और क्या निचोड़े? आप से तो खैर क्या छिपा है? आपका तो काम ही रिवर्स गियर में है..नहाये और निचोड़े हुए को नंगा सर्टीफाई करके प्रस्तुत करना...सर, आज आपकी जरुरत आन पड़ी है. कृप्या सलाह दें.
सर, ८ नवम्बर, २०१६ की रात ९ बजे अपने (भीख) मांगने का कटोरा समेट कर घर की तरफ चला ही था कि पीछे से एक आवाज आई..बाबा, भूखे हो न? यह बोरा लेते जाओ..बस, मेरे लिए दुआ मांग लेना..कि मुझ तक लक्ष्मी आने का सिलसिला कभी न रुके...कोई बात नहीं कि १००० और ५०० बंद हो रहे हैं..मगर नये २००० और ५०० आ भी तो रहे हैं. न तो मेरी कुर्सी कहीं जा रही है, न लक्ष्मी का आगमन...बस!! अभी तक का न खर्च किया हुआ और सोने और जमीन में न बदला हुआ कागज दगा दे गया..ईश्वर का सेवक हूँ.. उ पर पूर्ण आस्था है ...उसी ने दिया था....वही फिर देगा..अभी फिलहाल तो आप इस बोरे को लेते जाओ.
मुझे लगा कि कपड़ा लत्ता बांट रहा होगा गरीबों को बोरे में बंद करके यह धन्ना सेठ कहीं से धोखा खा कर...कौन जानता था कि उसी का अपना चुना हुआ नेता उसे दगा दे गया... घर आकर बोरा खोला तो मानो आँखों को यकीन ही न हुआ...१००० १००० के नोट से भरा हुआ बोरा ५० करोड़ का निकला..
अब बताईये सर, हमारे धंधे का तो नेचर ही नगद है. न तो कोई रसीद, न कोई पैन कार्ड का प्रवधान है कि ५०००० रुपये से उपर (भीख) मांगने पर दोगे तो या तो चैक से दो या अपना पैन और आधार कार्ड दो....कई बार तो लगता है जैसे कि हमारी पोजीशन भगवान के समान है..सोना दे दो तो, चैक दे दो तो और गुप्त दान दे जाओ तो ..कुछ नहीं पूछेंगे.. 
अब सर, आप बतायें...मेरी यह इन्कम उस समय की है जब १००० के नोट लीगल टेंडर थे...८ नवम्बर २०१६ के रात १२ बजे के पहले की... इन्कम भी करेंट इयर की है अतः रिटर्न अप्रेल में ही फाईल होगी...साथ ही बैंक में जन धन खाते के वक्त का शुन्य बैलेन्स वाला, माननीय के १५ लाख वाले वादे के पूरा होने के इन्तजार में खुला हुआ खाता भी है..
माना, अगर कल जमा करते वक्त, यह ढाई लाख से ज्यादा का जमा आयकर वालों को बताया जायेगा...किन्तु मुझ जैसे की वर्तमान आय का पहले से कोई रिटर्न फाईल कैसे हो सकता था ..फिर इन्कम के किस पैटर्न से मिलान कर कोई पैनाल्टी लगा सकता है..बताये कि...क्या मुझे भी टैक्स के अलावा २०० प्रतिशत पेनाल्टी लग सकती है?
आप सी ए हैं, कृप्या सुझायें और जैसा कि मैं समझ पा रहा हूँ अगर वो सही है तो कृप्या मेरा पैन कार्ड बनवा कर इस रकम को मेरे खाते में जमा करवाने के उपरान्त, इसका एडवान्स टैक्स भर कर इसे सफेदी की चादर से अनुग्रहित करें...
हाँ, जैसा माननीय ने कहा कि ऐसे मौके पर अगर कुछ तकलीफ भी उठानी पड़ी तो इतिहास गवाह रहा है कि हर भारतीय इसे उठाने को तैयार है...
जी, मैं भी..कोई बात नहीं..नित दो हजार ही निकालने देना...किसी तरह काम चला ही लूंगा...
हो सकता है कि भीख एक अपराध हो..इसीलिए ब्रेकेट में लिखा है...किन्तु किसी से मदद मांगना कब से अपराध हो गया है..फिर तो सोसाईटी चल चुकी,,आपसी मदद तो सभी को चाहिये होती है...माननीय भी आपसी मदद से ही माननीय हुए हैं..है न!!
यही (भीख) मांगना कहीं पार्टी फंड में चंदा भी कहलाती है, यह नहीं भूला जाना चाहिये.
बताना जरुर.. में फ्री की सलाह नहीं मांग रहा हूँ..फीस दूँगा न!!
वैसे सच कहूँ तो फीस मुझे लेना चाहिये...ऐसा सटीक रास्ता आपको सुझाने के लिए..

-समीर लाल ’समीर’
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10 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

भिखमंगे करोड़पति और और करोड़पति जमीन पर .....रोचक प्रस्तुति ... सब असंभव कुछ भी नहीं ...

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 11 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Ravishankar Shrivastava ने कहा…

आप सीए हैं, आपको जवाब (सलाह) जरूर देना चाहिए. आपने तो जवाब देने के बजाए मामला टरका दिया है. ऐसे नहीं चलेगा.

शानदार व्यंग्य.
आज ही अखबार में दक्षिण के किसी शहर की खबर चित्रमय छपी है जिसमें नेता लोग आम जनता को 3 - 3 लाख बांट रहे हैं!

विकास नैनवाल ने कहा…

अभी तो यही जोड़ तोड़ काम आने वाले हैं। निचोड़ निचोड़ के मारा है।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अरे ग़ज़ब पोस्ट!!! इस बारे में तो सोचा ही नहीं था कि यदि कोई भिखारी को अपनी काली कमाई टिपा दे, तो भिखारी का क्या होगा? रकम का क्या होगा??

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "'बंगाल के निर्माता' - सुरेन्द्रनाथ बनर्जी - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

राकेश कुमार श्रीवास्तव राही ने कहा…

सुन्दर रोचक प्रस्तुति।

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

बढ़िया पोस्ट

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वैसे तो नंंगे ही खाये जा रहें हैं सबको निचोड़ कर :)

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

वाह,एकदम लाजवाब !