सोमवार, अगस्त 05, 2013

तुमको सलाम लिखता हूँ.....

याद करो वो रात..

वो आखिरी मुलाकात..

जब थामते हुए मेरा हाथ

हाथों में अपने

कहा था तुमने...

लिख देती हूँ

मैं अपना नाम

हथेली पर तुम्हारी

सांसों से अपनी ...

फिर ...

कर दी थी तुमने..

अपनी हथेली सामने मेरे ..

कि लिख दूँ मैं भी

अपना नाम उस पर

सांसों से अपनी.....

कहा था तुमने...

सांसों से लिखी इबारत..

कभी मिटती नहीं..

कभी धुलती नहीं..

चाहें आसूँओं का सैलाब भी

उतर आये उन पर..

वो दर्ज रहती हैं

खुशबू बनी हरदम.. हर लम्हा...

साथ में हमारे.....

आज बरसों बाद जब...

बांचने को कल अपना...

खोल दी है मैने.... मुट्ठी अपनी.....

तब...हथेली से उठी...

उसी खुशबू के आगोश में...

ए जिन्दगी!!..

एक बार फिर .....अपने बहुत करीब....

अहसासा है तुम्हें!!....

“मैं ज़िन्दगी की किताब में, यूँ अपना पसंदीदा कलाम लिखता हूँ..

लिख देता हूँ तुम्हारा नाम, और फिर तुमको सलाम लिखता हूँ......”

-समीर लाल ’समीर’

 

सुनें इसे मेरी आवाज़ में:

 

तुमको सलाम लिखता हूँ……
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42 टिप्‍पणियां:

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब ...

arvind mishra ने कहा…

ह्रदयस्पर्शी!

yashoda agrawal ने कहा…

आपने लिखा....
हमने पढ़ा....और लोग भी पढ़ें;
इसलिए बुधवार 07/08/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!

नुक्‍कड़ ने कहा…

जरूर लिखो सलाम
कलाम पर पहले खिलाओ
फीके वाले मीठे आम।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

आहा, क्या खूबसूरत सलाम करते हैं आप।
कौन न लट्टू हो जाए।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

एक सुहानी सुबह का आनन्दमयी उपहार आपकी यह कविता।

अनुपमा पाठक ने कहा…

वाह!

P.N. Subramanian ने कहा…

हृदयभेदी

Khushdeep Sehgal ने कहा…

लिख कर तेरा नाम ज़मीं पर,
उसको सजदे करता है,
लैला-लैला करता है...

जय हिंद...

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

अपने क़लाम में सलाम लिक्खा-
अच्छा किया उसी के नाम लिक्खा!

expression ने कहा…

अहा.............
बहुत सुन्दर!!!


सादर
अनु

Dr.Bhawna ने कहा…

bahut touching hai aapki ye rachna bahut 2 badhai..

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी यह रचना कल बुधवार (07
-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 78 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब समीर भई ... ये खुशबू यूं ही बसी रहे ...आमीन ...

kshama ने कहा…

Wah! Hameshaki tarah beinteha khoobsoorat rachana!

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

bahut sundar , padha aur suna donon .
dhanya hue ham.

Kailash Sharma ने कहा…

लाज़वाब अहसास....

HARSHVARDHAN TRIPATHI ने कहा…

'सलाम' अब कहां है सर

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत खूबसूरत अहसास।

Archana ने कहा…

बेहतरीन प्रयोग .... अच्छा लगा सुनना ..

Mahesh Barmate ने कहा…

bahut sundar sir ji... :)

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

वाह वाह, लाजवाब.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

काव्य पाठ भी बहुत सुंदर, शुभकामनाएं.

रामराम.

वाणी गीत ने कहा…

खूब भालो !

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

लिख देती हूँ
मैं अपना नाम
हथेली पर तुम्हारी
सांसों से अपनी ...


हे भगवान, आप कवि‍ लोग इतना महीन कैसे सोच लेते हो , मुझे तो ईष्‍या होने लगती है

Anupama Tripathi ने कहा…

हृदयस्पर्शी कविता और भावप्रबल कविता पाठ ...!!

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - एकला चलो पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

Ramakant Singh ने कहा…

ए जिन्दगी!!..

एक बार फिर .....अपने बहुत करीब....

अहसासा है तुम्हें!!....

“मैं ज़िन्दगी की किताब में, यूँ अपना पसंदीदा कलाम लिखता हूँ..

लिख देता हूँ तुम्हारा नाम, और फिर तुमको सलाम लिखता हूँ.....

अभिभूत हूँ आपके प्रेम से अद्भुत

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत बढ़िया बात कही !
latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!
latest post,नेताजी कहीन है।

Suman ने कहा…

बहुत सुन्दर भावभरी रचना है !
आपकी आवाज में पहली बार सुन रही हूँ
बहुत अच्छी लगी … आभार !

Maheshwari kaneri ने कहा…

वाह बहुत खुबसूरत अहसास..मेरे बलांग पर आकर हौसला बढ़ाने के लिए आप का बहुत बहुत आभार समीर जी..

rohitash kumar ने कहा…

अपना हाथ किसी ने थामा नहीं..कहा नहीं लिख दो अपना नाम...पर अहसास रहा है आखिर तक रहेगा..कि काश तुम ...काश...
बेहतरीन अहसास ..सलाम आपको

रचना दीक्षित ने कहा…

“मैं ज़िन्दगी की किताब में, यूँ अपना पसंदीदा कलाम लिखता हूँ..

लिख देता हूँ तुम्हारा नाम, और फिर तुमको सलाम लिखता हूँ......”

बहुत खूब अहसास.

आशा जोगळेकर ने कहा…

तब...हथेली से उठी... उसी खुशबू के आगोश में... ए जिन्दगी!!.. एक बार फिर .....अपने बहुत करीब.... अहसासा है तुम्हें!

आशा जोगळेकर ने कहा…

तब...हथेली से उठी... उसी खुशबू के आगोश में... ए जिन्दगी!!.. एक बार फिर .....अपने बहुत करीब.... अहसासा है तुम्हें!

Bahut sunder.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

dil ko chhuti hui, pyari si rachna..:)
वन्दे मातरम् !!

lori Ali ने कहा…

khoobsurat!
khyaal ki tazagi, aur ehsaasson ki taraawat ke saath, shabdon me anokha pryog bhi hai yah nazm. Lafz 'ehsaasaa' kafi khubsoorat ban pada hai.....
apki awaz 'Masha'Allah"
bahtu hi pyaraa
-Lori

vijay kumar sappatti ने कहा…

अब कुछ कहने के लिए शब्द ही नहीं है जी ...


दो बार तो पढ़ ही लिया है ..

दिल से बधाई स्वीकार करे.

विजय कुमार
मेरे कहानी का ब्लॉग है : storiesbyvijay.blogspot.com

मेरी कविताओ का ब्लॉग है : poemsofvijay.blogspot.com

ब्लॉग - चिठ्ठा ने कहा…

आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ ( 6 अगस्त से 10 अगस्त, 2013 तक) में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

रश्मि शर्मा ने कहा…

मीठे अहसास से भरी कवि‍ता

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

आपकी ये बेहतरीन कविता "संकलन" में साभार !

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत खुबसूरत अहसास..मेरे बलांग पर आकर हौसला बढ़ाने के लिए आप का बहुत बहुत आभार समीर जी..