बुधवार, जून 30, 2010

सर, आपके घर चोर आये हैं!!!

एक बार कहीं का सुना किस्सा याद आ रहा है:

अमरीकी, जपानी और हिन्दुस्तानी पुलिस के मुखिया मिटिंग में थे. अमरीकी बोला कि हम तो चोरी के बीस मिनट के अन्दर चोर की पहचान कर लेते हैं. जपानी बोला कि हमारे यहाँ तो दस मिनट में पता कर लेते हैं कि किसने चोरी की. भारतीय पुलिस के मुखिया हँसने लगे. दोनों ने पूछा कि हँस क्यूँ रहे हैं. उसने कहा कि हमें तो चोरी के पहले से ही मालूम होता है कि कौन चोरी करेगा.

मगर उस पहले से मालूम वाले को पकड़वाने के लिए आपकी कितनी पहुँच होना चाहिये, ये सोचने का विषय है वरना भारत में कोई चोर भला बाद में कब पकड़ाया है सिवाय रसूकदारों के घर चोरी करने के इल्जाम में.

वैसे तो कनाडा में आम तौर पर घरों में चोरी के किस्से सुनाई नहीं देते. फिर किसी का घर में घुसना, तो दरवाजा ही पूरा काँच का है, जिसका जी चाहे, फोड़े और घूस आये. मगर ऐसा होता नहीं है. इसीलिए तो काँच का है. कितनी बार रात भर दरवाजा खुला रह जाता है, गैरेज खुला पड़ा रहता है, कभी कुछ मिसिंग तो दिखा नहीं मगर फिर भी, इन्तजामात करने में कोई चूक नहीं.

कुछ दिन पहले एक पोस्ट में फोटो छापी थी जिसमें एलार्म फोर्स का बोर्ड भी आ गया था. भारत से मित्र ने जिज्ञासा प्रकट की कि यह एलार्म फोर्स क्या है? सोचा कि इसी विषय पर लिख दूँ, उनकी जिज्ञासा भी दूर हो जाये और मित्रों को पता भी चल जाये.

एलार्म फोर्स हाऊस सिक्यूरीटी कम्पनी है जो हमारे घर की सिक्यूरिटी देखती हैं. उनके एलार्म हमारे दरवाजे और खिड़कियों पर लगे हैं. अगर एलार्म ऑन है और उसे बिना कोड डाले ऑफ किए बिना कोई खिड़की या दरवाजा खोलता है तो घर सिक्यूरिटी कम्पनी से कनेक्ट हो जाता है और एनाउन्समेन्ट होता है कि आप कौन हैं और सिक्यूरिटी कोड बताओ. अगर वो नहीं बता पाया तो सायरन बजने लगता है जिससे पड़ोसी सजग हो जाते हैं और पुलिस स्टेशन को सूचना हो जाती है.

तीन से चार मिनट में पुलिस आ जाती है. इस बीच एनाउन्समेन्ट होता रहता है घर भर में कि पुलिस चल चुकी है, आ रही है. यह सब फोन लाईन से जुड़ा है किन्तु यदि फोन लाईन कोई बाहर से काट दे तो भी वायरलेस से एनाउन्समेन्ट शुरु हो जाता है और पूरी प्रक्रिया की जाती है.

यह भी संभव नहीं कि कोई बंदूक की नोक पर हमसे कोड बुलवा दे और पुलिस न आये. अगर हमने गलत कोड बोल दिया तो फिर वो अनाउन्समेन्ट चुप हो जाता हैं मगर पुलिस आ जाती है. फिर आप लाख कहिये कि कुछ नहीं हुआ, वो आपके घर वालों को बाहर निकाल कर पूरा घर चैक करते हैं कि किसी को गन पाईन्ट पर रखकर तो ऐसा नहीं कहलवा रहे हैं.

अगर हम घर में हैं तो होम अलार्म लगाते हैं याने बिना एलार्म ऑफ किए कोई घर में नहीं घुस सकता या निकल सकता. अगर हम घर में नहीं हैं तो अवे का अलार्म लगाते हैं, तब न कोई घुस सकता है न घर में कोई चीज हिल सकती है याने मोशन डिटेक्टर भी लगा रहता है अर्थात अगर कोई पहले से घुस कर बैठा हो तो बाद में चोरी करके भागे, वो संभव नहीं. घर एयर पैक्ड रहते हैं अतः हवा से कुछ हिलने का सवाल नहीं.

अवे के अलार्म में हम जहाँ भी हों, अलार्म कम्पनी हमें मोबाईल पर घटना की सूचना भी तुरंत देती है एवं नामित पड़ोसी/ मित्र को फोन पर भी सूचना दी जाती है कि वो भी आ कर चैक कर लें पुलिस के साथ.

इसी के साथ एक पैनिक बटन भी या तो बाथरुम या बिस्तर के पास लगा देते हैं ताकि ऐसे किसी अंदेशे पर आप बाथरुम में छिप गये हो या बिस्तर पर हो तो उसे दबा दें, तब भी बिना एनाउन्समेन्ट के पुलिस भिजवा दी जाती है.

इस व्यवस्था के लिए महिना दर महिना एक निश्चित फीस ली जाती है एवं साल में दो बार बिना कोड डाले दरवाजा खोल देने की भूल को माफ करते हुए बाकी बार फाल्स एलार्म के लिए एक पेनाल्टी की रकम ली जाती है.

वैसे तो यहाँ चोरी होती नहीं (इंसान तो हैं ही, कम या न के बराबर होती है) मगर इस एलार्म से बहुत सुकून रहता है. खास कर जब हम ६-६ महिने भारत में पड़े रहते हैं. उसी के साथ स्मोक अलार्म भी है. घर के भीतर धुँआ या आग से फायर ब्रिगेड आ जाती है. अब हम ठहरे हिन्दुस्तानी, कभी अगरबत्ती जलाने या हवन करने लग जायें, तो उस समय का जुगाड़ बना लिया है और स्मोक सेन्सर पर टावेल लगा देते हैं ताकि एलार्म न बजे.

मित्र को यह बात जब ईमेल से बताई और आशा व्यक्त की कि ऐसा भारत में भी होने लग जाए तो कितना बढ़िया. उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई और भारत के परिपेक्ष में इतने प्रश्न सामने आये कि क्या कहना:

  • जब चोर घूसे और बिजली गुल हुई हो तो क्या? एलार्म कैसे बजेगा और कम्पनी को कैसे पता लगेगा?
  • फोन लाईन अगर खराब चल रही हो कई दिन से, तब?
  • खिड़की तो खुली ही रहती है, हवा को कैसे रोकेंगे किसी वस्तु को हिलाने से?
  • स्मोक सेन्सर पर धूल जमने के बाद भी काम करेगा क्या?
  • क्या मोशन डिटेक्टर ऐसा नहीं बन सकता जो सिर्फ इन्सानों के मोशन पहचाने बाकि को जाने दे?
  • अगर एक ही लाईन में चार पांच घरों के एलार्म एक साथ बज उठे, तो पड़ोसी को किसके घर पहले जाना चाहिये?
  • अगर घर मालिक बाहर गया है तो क्या एलार्म कम्पनी मिस्ड काल दे सकती है? (सस्ता पड़ेगा)
  • पुलिस स्टेशन से आपके घर की दूरी साईकिल से तय करने में हवलदार को कितना समय लगेगा?
  • अगर छुट्टी के दिन चोर घुसा, तब?
  • अगर भारत बंद के दौरान चोर चला आये, जब?
  • अगर चोर की सेटिंग हो थाने में, और पुलिस आये ही न?
  • जब अलार्म बजे और सिक्यूरिटी कम्पनी वाला चाय पीने या पान खाने गया हुआ हो तो?
  • अगर फोन का बिल या बिजली का बिल भुगतान न होने के कारण लाईन काटी जाये, तब?

यक्ष प्रश्न:

  • क्या हिन्दी ब्लॉग में रचनाओं की चोरी रोकने के लिए इन कम्पनियों के पास कोई एलार्म सिस्टम है?

अगर...अगर..अगर...और जाने कितने प्रश्न...मगर इन्हें सुन कर मैने अपना स्टेटमेन्ट वापस ले लिया कि ऐसा भारत में भी होने लगए तो कितना बढ़िया.

लेकिन जैसे हम देशी वैसा ही हमारा मित्र भी, ठेठ भारत से भारत में रहने वाला. आखिर बात ऐसे ही खतम कैसे हो जाने दे.

अब आखिरी प्रश्न एक आँख दबा कर उछाला कि गुरु, इतनी सिक्यूरीटी लगाये हो मतलब मोटी रकम धरे होगे घर में. अब उनको क्या बतलायें कि भई, जब हमारे देश में जिनकी जान की कीमत कौड़ी की नहीं है, वो जेड सिक्यूरीटी लिए घूम रहे हैं तब हमारे पास मेहनत का कमाया गुजारे लायक तो है ही, फिर क्यूँ न लगायें सिक्यूरीटी.

लगता तो है कि शायद मेरे जबाब से आशवस्त हो गये होंगे क्यूँकि उनकी एक दबी आँख खुली दिखी बाद में.

बस, अब एक ही बात कहता हूँ कि मेरा भारत जैसा भी है, वैसा ही बढ़िया. कौन जरुरत है इन सब नौटंकियों की. सायरन तो कोई सड़क पर से निकलता हुआ ट्र्क भी बजा देगा मगर पड़ोसी, वो अब कहाँ निकलते हैं सायरन सुन कर. बल्कि वो तो यह सुनिश्चित करने में जुट जायेंगे कि उनका घर ठीक से बंद है कि नहीं...बाकी खिड़की से झांक कर मजा तो पूरा ले लेंगे आपको लुटता देखने का.

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106 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा ने कहा…

भारत में सारे सिस्टम फ़ैल हैं।
आप कुछ भी लगा लीजिए सबका तोड़ है।
वो अलार्मफ़ोर्स कम्पनी वाले ही बता जाएगें चोरों को।
कि इतने बजे बंद रहेगा अलार्म,काम कर लेना।

हमारे यहां के सट्टेबाज इतने प्रभावशाली हैं कि जिस नम्बर का पैसा खाते हैं अगर वो निकल आए तो कम से कम 5घंटे तो टेलीफ़ोन एक्सचेंज बंद करवा देते थे, जिससे पैसे लगाने वाले को अपना नम्बर खु्लने जी जानकारी न मिले। सुबह फ़िर जोड़ तोड़ हो जाती थी।

ये मेरा इंडिया है, लोग ऐसे ही भारत को महान नहीं कहते।

मेरा भारत महान

आचार्य जी ने कहा…

सुन्दर लेखन।

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत काम की जानकारी दी आपने ! शुक्रिया भाई जी !.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

चलो इस बहाने हमें भी पता तो चला दुनियां के सिक्युरिटी सिस्टम का |
यहाँ तो पुलिस के सामने लूटपाट हो जाती है |

अजय कुमार ने कहा…

आभार जानकारी देने के लिये ।
ब्लाग धन का संचय ,चोरी से बचा रहे इसका जुगाड़ नहीं हो पा रहा है ।

रंजन ने कहा…

मस्त सिस्टम है.. भारत में कहाँ कहाँ क्या क्या सिस्टम लगाओगे.. लोग घर के बाहर रखे पुराने चप्पल भी नहीं छोडते....

ali ने कहा…

सम्पदा बौद्धिक हो या भौतिक , प्रोटेक्शन के बेहतर विकल्प होना ही चाहिये !
रही ब्लॉग जगत की बात तो अचानक खाद बनानें वाली कंपनियां याद आ गईं...तो समीर भाई कचरे को भी व्यर्थ क्यों मानना :)

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

आपकी कलम से कोई मुद्दा बच नहीं सकता सरल शब्दों में पूरा चित्र उकेर देते है आप. मेरी हौसला अफजाई के लिए हार्दिक शुक्रिया

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

आपकी कलम से कोई मुद्दा बच नहीं सकता सरल शब्दों में पूरा चित्र उकेर देते है आप. मेरी हौसला अफजाई के लिए हार्दिक शुक्रिया

P.N. Subramanian ने कहा…

काफी ज्ञान वर्धन हुआ. ह्रदय से आभार

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

वाह, अच्छा सिस्टम है.. काफ़ी दिमाग लगाया है लोगो ने..

sandhyagupta ने कहा…

जब हमारे देश में जिनकी जान की कीमत कौड़ी की नहीं है, वो जेड सिक्यूरीटी लिए घूम रहे हैं तब हमारे पास मेहनत का कमाया गुजारे लायक तो है ही, फिर क्यूँ न लगायें सिक्यूरीटी.

Baat to pate ki hai.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हमारे यहाँ सिस्टम इन्ट्यूशन पर चलते हैं आपके यहाँ हर गतिविधि का सिस्टम है ।
हम अंग्रेजों के जमाने के घर हैं । यहाँ तो परिन्दा भी
पर नहीं मार सकता ।

सतीश पंचम ने कहा…

सुरक्षा के नाम पर इतने सारे तामझाम...इतना सारा बनरबझौआ देख कर मुझे तो लगता है कि भारत का विकसित न होना एक तरह से भारत के चैन से सोने की गारंटी है :)

बहुत उम्दा पोस्ट और हल्के फुल्के अंदाज में यक्ष प्रश्नावली....मजा आ गया।

Shah Nawaz ने कहा…

बेहतरीन जानकारी. वैसे हमारे देश में इतने सिस्टेमेटिक उपकरण लगा भी दिए जाएं तो चोर भाइयों के लिए परेशानी की कोई बात नहीं है.

हम भारतवासी हैं, और हमारे पास हर चीज़ का जुगाड़ होता है. :-)

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत ही ज्ञानवर्धक साथ ही मनोरंजक पोस्ट ! ना जाने कितने 'अगर-मगर' मन में दबाये हम भी हर बार यहाँ से रुखसत हो लेते हैं और भारत जाकर जब ढाक के वही तीन पात दिखाई देते हैं जिनमें बदलाव लाने की कोई जुगत समझ में नहीं आती तो बड़ी कोफ़्त होती है ! बहुत शानदार और यथार्थवादी पोस्ट ! आभार !

अमित शर्मा ने कहा…

@ "जब हमारे देश में जिनकी जान की कीमत कौड़ी की नहीं है, वो जेड सिक्यूरीटी लिए घूम रहे हैं"
क्या कोई हल है इसका.................. शायद है तो सही ..................... ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी................

हाँ आशीर्वाद दीजिये की "हमारे पास मेहनत का कमाया गुजारे लायक" हमेशा बना रहे

aradhana ने कहा…

हम्म ! एक फिल्म है जूडी फ़ॉस्टर की... पैनिक बटन... उसमें ये सारे इंतजाम देखे थे... आज आपने विस्तार से बताकर हमारा ज्ञानवर्धन किया ...धन्यवाद :-)
सही कहा है आपने हमारा भारत जैसा भी है, अच्छा है... आखिर कैनेडा या यूएस की तारीफ़ करके हम वहाँ के बाशिंदे तो हो नहीं जायेंगे इसलिए "मेरा भारत महान" :-)
आपकी आख़िरी वाली लाइनें बड़ा करारा व्यंग्य हैं देश की व्यवस्था पर... ऐसे ही चल रहा है ये ... सिस्टमैटिकली हैंडीकैप्ड ... फिर भी है तो अपना ही..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मगर पड़ोसी, वो अब कहाँ निकलते हैं सायरन सुन कर. बल्कि वो तो यह सुनिश्चित करने में जुट जायेंगे कि उनका घर ठीक से बंद है कि नहीं...बाकी खिड़की से झांक कर मजा तो पूरा ले लेंगे आपको लुटता देखने का.

सटीक व्यंग.....और हाँ जानकारी बहुत अच्छी है...लेकिन भारत में हर चीज़ का तोड़ है..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

सौ बात की एक बात-"भारत में इसीलिए अलार्म लगाए/लगवाए ही नहीं जाते" (बतर्ज़ फ़िल्म 'स्पर्श' के...लंबे नाम वाले को कुएं के पास नहीं जाना चाहिये)

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया जानकारी दी है ... यहाँ तो जेड सुरक्षा वाले खुद सुरक्षित नहीं रह गए है .... यहाँ तो काम डल जाने के बाद सुरक्षा विभाग का अमला सक्रिय होता है . हालत तो यहाँ तक हो चुके हैं की आपको अपनी सुरक्षा की व्यवस्था खुद करनी पड़ेगी..छतीसगढ़ का उदहारण लें नक्सलवादी धडाधड हत्याए कर रहे हैं . और सिम्बल साहब नक्सलवाद का मुकाबला पढ़ाई से करने का इरादा जता रहे हैं . .... आभार

sajid ने कहा…

समीर लाल जी इतनी अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद !
वैसे शायद लोगो को पता नहीं है हमारे देश मैं भी बहुत अच्छे सिक्यूरिटी सिस्टम्स
आ गए है जैसे... ANALOG CAMERA, CS MOUNT LENSES, WIRELESS CAMERAS RECEIVERS, TELEMETRY SYSTEMS MATRIX, SCANNERS, SMOKE SENSOR CAMERA, MULTI APARTMENT ADP SYSTEMS, VILLA TYPE VDP,
DOORVELL CAMERA, BEAM SENSOR, MULTI DOOR CONTROLLERS,
आदि !

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

भारतीय पुलिस के मुखिया ने ठीक ही कहा कि उन्हे पहले ही से पता होता है कि चोरी कौन करेगा!... हा, हा, हा!... ऐसी पुलिस की फसल हर देश में होनी चाहिए, तभी तो खुशहाली के परचम लहराएंगे!

माधव ने कहा…

the post is alarming for the thieves. But "where there is a will there is a way", the thieves will find the way out to beat this security solutions. moreover, No machines is intelligent than Human( thieves).

राजेश उत्‍साही ने कहा…

समीर भाई, जानकारी पढ़कर आनंद आया। बात सही है अगर भारत में यह सिस्‍टम लग जाए तो फिर चोरी से अपना पेट भरने वालों का क्‍या होगा। वे और भी बेरोजगार हो जांएंगे। आखिर वे चोर भी तो बेरोजगारी के कारण ही बने हैं न। अच्‍छा हुआ जो आपने भारत के संदर्भ में किन्‍तु परन्‍तु जोड़ दिए।

संगीता पुरी ने कहा…

जिस देश में जान की कीमत ही न हो .. उस देश में एलार्म फोर्स हाऊस सिक्यूरीटी कम्पनी की क्‍या आवश्‍यकता ??

radhikahari ने कहा…

BAKWAS! MUJHE samajh nahin aata 8-10 saal videsh main rahne ke baad log apne desh ki burai karke wahwahi kyun loot te hain.
poore post main ek hi baat sahi hai"jinki jaan..............security"

अन्तर सोहिल ने कहा…

सबसे पहले तो इस अलार्म सिस्टम की ही चोरी हो जानी है जी
आप सटीक व्यंग्य द्वारा गुदगुदी करके
बहुत सारे सवाल छोड जाते हैं जी

प्रणाम स्वीकार करें

shikha varshney ने कहा…

बहुत काम की बातें बताईं ...बढ़िया लेखन है .

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही बढ़िया और विस्तृत जानकारी...पर जब इन सब बातों से अनजान, एक भारतीय बेटे के पास गयी माँ,अपने बेटे को उसकी पसंद के पकौड़े बना कर खिलाने की सोचती है...,फिर तो क्या क्या होता है..बेटे को किसे किसे जबाब देने पड़ते हैं....आप समझ सकते हैं..मेरी चाची जी ये कारनामा कर चुकी हैं :)

abhinav pandey ने कहा…

मेरे द्वारा एक नया लेख लिखा गया है .... मैं यहाँ नया हूँ ... चिटठा जगत में.... तो एक और बार मेरी कृति को पढ़ाने के लिए दुसरो के ब्लॉग का सहारा ले रहा हूँ ...हो सके तो माफ़ कीजियेगा .... एवं आपकी आलोचनात्मक टिप्पणियों से मेरे लेखन में सुधार अवश्य आयेगा इस आशा से ....
सुनहरी यादें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

badhiyaa

Parul ने कहा…

sir is pol ke bol anmol hai :)

कुन्नू सिंह ने कहा…

लेख पढ कर मजा आ गया, भारत मे लगवाने पर जितने का सामान होगा उसका दोगुना तिगूना सिक्योरीटी सिसटम आ जाएगा।

अगर अलार्म गलती से भी बज गया तो पुलिस पक्का आएगी, और बोलेगी की "हमारा हिस्सा तो दे दो, गलती तो तुमहारी है... पैसा...पैसा... दे दो...दे दो..:)"

वैसे ईस लेख से एक प्रेरणा मीली की सिक्योरीटी सिस्टम नही खरीदें लेकीन खुद से ही घर की सिक्योरीटी तो बढा सकते हैं, भले ही कोई नही आए, लाईट गुल हो जाए लेकीन Inverter का प्रयोग कर सकते हैं और छोटी मोटी घटनाओं से बच सकते हैं।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत बढिया।
पोस्ट अलार्म भी हो तो बताइएगा। हम भी मंगवा लेंगे।
---------
किसने कहा पढ़े-लिखे ज़्यादा समझदार होते हैं?

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

एक बार मुझे भी पूरी रात अरबी पुलिस के साथ गुज़ारनी पड़ी थी इसी सिस्टम के कारण. कम्बख़्त एक सजावटी काग़ज़ी फ़ानूश मेरे ऑफिस की छत से फर्श पर गिर पड़ा था और मोशन सेंसर ने अपना काम कर दिखाया. बाकी काम अरबी पुलिस ने किया मेरा अरबी फ्राय बनाकर.

vicharmanch ने कहा…

बहुत सुन्दर रचनाएं , प्रभावशाली और सलीके से सजाये गए शब्द. बहुत -बहुत शुभकामनाएं ....
और हाँ, प्रतिक्रया के लिए शुक्रिया .



-मुकेश मासूम

राजकुमार सोनी ने कहा…

आपने काफी मजेदार जानकारी दी है लेकिन ललित जी ने भी ठीक लिखा है कि भारत में चोरों के पास सबका तोड़ है।
यहां तो पुलिस को भी पता होता है कि कौन सा चोर कहां चोरी करेगा।

शिक्षामित्र ने कहा…

जितना शहरीपन,उतना अकेलापन। जितना अकेलापन,उतनी सतर्कता।

कुमार राधारमण ने कहा…

संसार की सर्वोत्तम तकनीकी प्रतिभाएं दिल्ली के गफ्फार मार्केट और नेहरू प्लेस में हैं। उनसे कहिए तो अलार्म सिक्यूरिटी कंपनी में ही चोरी करवा दें।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी, लेकिन अभी हमारे यहां इतनी खराब स्थिति नही आई, कि आलार्म की जरुरत पडे,

महफूज़ अली ने कहा…

आदरणीय समीरजी... आजकल व्यस्तता बहुत है इसलिए ब्लॉग पर आना पौसिबल नहीं हो पा रहा है... आपकी यह पोस्ट बहुत ज्ञानवर्धक और शानदार लगी.... यक्ष प्रश्न बहुत अच्छा लगा.... काश! ऐसा कोई अलार्म सिस्टम निकल आता...

Arvind Mishra ने कहा…

एक ठूसेट वा लेते आयिहो -देखते हैं चला कर -
बिना देखे नहीं मानते जा ....

Etips-Blog Team ने कहा…

कमाल की तकनिकी है । लिखते रहिऐँ

सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ब्लागर गिरीश पंकज जी का इंटरव्यू पढने के लिऐ यहाँ क्लिक करेँ >>। एक बार जरुर पढेँ

जी.के. अवधिया ने कहा…

एलार्म फोर्स के विषय में यह जानकारी हमारे लिये बिल्कुल नई है!

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

इत्ती मजबूत सुरक्षा के चलते बेचारे चोरों का तो वहाँ कोई भविष्य ही नहीं रहा...
चोर भी जरूर ऊपर वाले से प्रार्थना करते होंगें कि मरने के बाद गर पुनर्जन्म हो तो सिर्फ और सिर्फ भारत में ही हो :)

डॉ टी एस दराल ने कहा…

इसमें एक और जोड़ लीजिये --जहाँ २५ गज के प्लाट में ६ परिवार रहते हों , वहां भी क्या अलार्म लगाया जा सकता है ? वैसे यहाँ लग गया तो सारे दिन बजता ही रहेगा ।
ज़ेड सुरक्षा वाली बात सही कही।

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

अच्छी जानकारी दी आपने.
आभार

आपकी चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली गयी है.

आभार.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

पहली बात तो जितनी बात आपने कनाडा में सेक्यूरिटी के बारे में बताई सचमुच में बहुत बढ़िया लगा अपने भारत में ऐसा होने में अभी बहुत ज़्यादा दिन लग जाएँगे और उससे पहले ही इस स्थितियों से निपटने के जुगाड़ भी बना लिए जाएँगे..और दूसरी बात जैसा भारतीय लोगों से उम्मीद है वैसा ही प्रश्न है...थोड़ा बढ़िया ही सोचते है और अलग भी अगर इनके सुझाव पर अमल किया जाय तो निश्चित रूप से कनाडा की सेक्यूरिटी और ही मजबूत हो जाएगी...

बढ़िया विवरण..

निर्मला कपिला ने कहा…

यहाँ तो खुद ही सिक्योरटी वाले चोर हैं अगर गलती से अलार्म बज भी गया तो वो खुद सारा कुछ समेट ले जायेंगे और आप देखते रह जायेंगे। तौबा ,इस से अच्छा है न लगवायें -- कम से कम इन चोरों से तो बचे रहें\ धन्यवाद

Darshan Lal Baweja ने कहा…

घर की रखवाली के लिए एक कुत्ता पाला
पांच दिन बाद ....
पड़ोसी की कुतिया और कल्लन की मुर्गी और वो कुत्ता नहीं मिल रहे थे

मो सम कौन ? ने कहा…

मान गये सर, आपको भी, कि पक्के हिन्दुस्तानी हैं आप। कर ही लिया न जुगाड़ स्मोक अलार्म का?
हमें तो सिर्फ़ ये बता दो कि खाली बोर्ड लगाने का कितना चार्ज करेगी कंपनी, बाकी तो हम देख लेंगे।

आभार, इतनी अहम जानकारी देने के लिये।

Darshan Lal Baweja ने कहा…

एक सच्ची घटना
यू पी मे एक बस लूटी गई
थोड़ी देर मे लुटेरों ने सब का माल वापिस कर दिया किसी ने हिम्मत कर के पूछ लिया
क्यों भाई माल वापिस कर दिया
लुटेरा : कलेक्शन कम हुई इस से ज्यादा तो पुलिस को देनी तय कर रखी है

रौशन जसवाल विक्षिप्त ने कहा…

नमस्‍कार। आपकी रचनायें पढ् कर हमेशा लाभान्वित हुआ हूं लेख सामाजिक सोच का परिचायक है

ajit gupta ने कहा…

अच्‍छी जानकारी। घर के फायर अलार्म तो फुलके के धुएं से भी बज जाते हैं। असल में यहाँ का सिस्‍टम ही ऐसा है कि कोई चुरायागा भी तो क्‍या? कबाडी नहीं होता ना। हमारे यहाँ तो नाली का ढक्‍कन भी चोरी हो जाता है क्‍योंकि कबाडी है खरीदने को। केश पैसा होता नहीं, बस कार्ड है। तो यहाँ तो सिस्‍टम के कारण ही आप सुरक्षित हैं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

भारतीयों के अनुसार
नियमों को तो तोड़ने में ही मजा आता है!

Sumit Khanna ने कहा…

Kamaal ki jaankari hai sir. hamare yahan kab aisa hoga?

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

भारतीय पुलिस जिन्दाबाद...

डा० अमर कुमार ने कहा…


महामहिम समीर गुरु को यथोचित अभिवादन पश्चात मालूम हो कि मेरी एक जिज्ञासा को आप सफाई से गोल कर गये ।
मैं पूर्णतया निट्ठल्ले मूड में सार्वज़निक रूप से इसकी भर्त्सना करता हूँ ।
मेरा एक प्रश्न यह भी है कि, सत्ता की कुर्सियों पर काबिज लोगों की चोरी पर अँकुश लगाने वाला ऍलार्म जनता अपने दिलो-दिमाग में कब लगायेगी ?

मुझमें थोड़ा आत्मभिमानी दोष है, मॉडरेशन को खटखटाने में लाज़ आती है, अपने ई-मेल बकसिया में चुप्पै पोस्ट पढ़ लेने में भी भला कोई मज़ा है ?

अजय कुमार झा ने कहा…

जाईये जाईये झूठे हैं आप एकदम , ये नहीं बताया कि ये सुरक्षा सबको नहीं सिर्फ़ एलियन्स को ही मुहैय्या कराई जाती है ..आम लोगों के लिए दिल्ली पुलिस है न ....सदैव आपके लिए आपके साथ
..........मगर यही बात वो चोरों को भी कहती है ...सदैव आपके लिए आपके साथ .। हा हा हा

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

यहाँ तो आजकल पुलिस भी डरती है चोर को पकड़ने में
थाने जाने पर जो रिपोर्ट नहीं लिखते अलार्म सुनके आयंगे !!

मनोज कुमार ने कहा…

मेरा भारत जैसा भी है, वैसा ही बढ़िया. कौन जरुरत है इन सब नौटंकियों की.
आपसे सहमत!
सबसे पहले हमारे पास जो है, उसके लिए संतोष का भाव होना चाहिए, और जो नहीं उसके लिए कोशिश होनी चाहिए । सिर्फ असंतुष्‍ट रहने का कोई मतलब नहीं है।

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…

जानकारी के साथ ही व्यंग्य का अलार्म भी बजा दिया है..... बहुत खूब!

शुभकामनाएं...

lokendra singh rajput ने कहा…

भारत के चोर बहुत प्रतिभवान है सर जी आप कुछ भी लगा लीजिये.....

Stuti Pandey ने कहा…

हमारे यहाँ चोर भगाने का सिस्टम -
१. छेदवाली पर काँटा वाला पेड़ लगाना
२. आवारा कुत्ता को दुआरी पर रखवाली के लिए रखना
३. गहना जेवर को आंटा चावल के डब्बा में रखना
४. बाउंड्री वाल पर छर्री लगवाना
इत्यादी इत्यादी. बहुत कारगर है ये सिस्टम.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बहुत खूब, सर जी !

दीपक 'मशाल' ने कहा…

ये है वो शैली जिसपे सब मरते हैं... :)

मृत्‍युन्‍जय कुमार त्रिपाठी ने कहा…

लाजवाब सर।

सादर,
मृत्‍युंजय

नीरज जाट जी ने कहा…

हम सब भारतीय हैं। हैं। हैं।

मृत्‍युन्‍जय कुमार त्रिपाठी ने कहा…

आपकी बहुमूल्‍य टिप्‍पणी के लिए आपको धन्‍यवाद

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

jankari bhi ..manoranjan bhi ...hehe..total infotainment

वन्दना ने कहा…

समीर जी
बहुत बढिया जानकारी दी……………भारत मे ये सब कहाँ हो सकता है मगर फिर भी जैसा है ठीक है हर जगह की अपनि अपनी अच्छाई और बुराई होती है……………हाँ जानकारी बहुत ही उम्दा दी है……………अगर भारत भी उतना ही समृद्ध बन जाये और बेरोजगारी खत्म हो जाये तो फिर यहाँ भी किसी ऐसे सिस्ट्म की जरूरत न पडे………………॥शुक्रिया।

sanu shukla ने कहा…

बहुत सुंदर लेख है भाई साहब...

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

यां नयी जानकारी मिली आपकी इस पोस्ट के माध्यम से ....यहाँ तो सही कहा पहले वह अलार्म ही चोरी होगा ...

Apanatva ने कहा…

jaankaree ke liye bahut bahut dhanyvad .

chaliye khush hoo ye soch ki kismat se padousee bahut acche mile hai...........
hamare ghar kee chabee ek to hamesha unke paas hee rahtee hai.......

hem pandey ने कहा…

एक नयी जानकारी मिली. धन्यवाद. भारत के सन्दर्भ में अभी कई अन्य मुद्दे प्राथमिकता में हैं.कुछ अन्य प्रकार के सिक्युरिटी सिस्टम यहाँ भी लोग प्रयोग में लाते हैं.

शोभना चौरे ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी |कितु इतने अगर मगर है भारत में |हर चीज की तुलना तो भारत से नहीं की जा सकती |

Anurag Dhanda ने कहा…

अंत में जो आज के भारत की तस्वीर पेश की न आपने.....चलिए छोड़िये अब क्या कहें...सच ही तो है। वैसे लिखा बहुत अच्छा है आपने। बात सीधे समझ आयी....मेरा मतलब लेख में भारतीयता वाला सिस्टम नहीं है घुमाने फिराने वाला :)

आशीष/ ASHISH ने कहा…

बाऊ जी,
नमस्ते!
जब पुलीस को पहले ही चोर के बारे में ज्ञात है, तो अलार्म सिस्टम की क्या ज़रुरत?!?!
हा हा हा.....
और अंत में जो यक्ष प्रश्न पूछा........ब्लॉग शिरोमणि, आपको तो उसका उत्तर देना चाहिए!!!!

Priyank ने कहा…

बहुत अच्छा -

अलार्म को कौन बचायेगा- प्रश्न इस बात का है

Reetika ने कहा…

shukriya share karne ke liye!

Deshi Vicharak ने कहा…

hindostan jaisa bhi hai apna hai, yahan gharon men tale nahi lagte the, aayiye milkar fir se desh ko waisa hi banayen.

anitakumar ने कहा…

badhiya jaankaari

ab inconvinienti ने कहा…

मैं भी एक ही बात कहता हूँ कि मेरा भारत जैसा भी है, वैसा ही बढ़िया. कौन जरुरत है इन सब नौटंकियों की. सा

नीलम शर्मा 'अशु' ने कहा…

आलेख के साथ-साथ(भारत से संबंधित प्रश्नों के संदर्भ में) कुछ रोचक टिप्पणियों ने भी दिल में गुदगुदी का अलार्म बजाया। धन्यवाद सभी को।

makrand ने कहा…

bahut badhiya jankari mili Canada mei home suraksha ke bare me

दीपक "तिवारी साहब" ने कहा…

हमारा भारत बहुत ही महान है. चोरों को भी खाने कमाने का पूरा हक दिया जाता है.:)

ढपो्रशंख ने कहा…

अति उत्तम पोस्ट. काफ़ ज्ञानवर्धन हुआ, धन्यवाद.

Gaurav Sharma ने कहा…

Hahahaha...bahut khoob janaab. Bhaarat ka sahi chitr ukera hai aapne. apne blog ke zariye bhaarat ke security system ke loop holes saamne laayein hain aap. Yahaan abhi tak social security number par behas chaalu hai...jaane kitne din aur lagenge..par aapke blog ki yah chatpati post ne khoob manoranjan kiya..shaayad yahaan ke zimmedaar log bhi dekh kar kuch seekh lein.

--Gaurav

साधवी ने कहा…

आलेख अच्छा लगा.

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

आपने गजब दिखाया भारत को. एकदम सच सच. फिर भी कह्ते हैं कि जैसा है अच्छा है.

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्या समीर जी ...ऊपर इतनी अच्छी जानकारी देकर नीचे जो हास्य पुट लिया आपको तो नमन करने को दिल करता है .....

हर किसी के बस में कहाँ ऐसी चुटीली बातें लिखने का दम .....एक खुशदीप जी और एक आप ......कमाल करते हैं बस ......!!

झंडागाडू ने कहा…

इस्लाम हर इन्सान की जरूरत है, किसी आदमी को इस्लाम दुश्मनी में सख्त देखकर यह न सोचना चाहिये कि उसके muslim होने की उम्मीद नहीं।-पूर्व बजरंग दल कार्यकर्त्ता अशोक कुमार

anilpandey ने कहा…

kitna achchha kaha aapne

बेचैन आत्मा ने कहा…

umda aur naii jankariyon se bhara behtariin post. likhne kii shaili rochak aur baat sankatmochak hai. prashn sahii hain ..bharat men bhale lag jay apne poorvii uttarpradesh men to jiivan men lagne kii sambhavana nahi hai.
..yahan jyada skop hai.sistam ka ? ajii nahin ..chori ka.

Dr.Ajeet ने कहा…

समीर जी,आपकी बहुमूल्य टिप्पणियाँ मिलती रहती है इसके लिए तहे-दिल से शुक्रिया। आपका प्यार यूं ही बना रहेगा और आप शेष फिर और खानाबदोश पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहेंगे ऐसी आशा है।
ब्लागिंग के टिप्पणी आदान-प्रदान के शिष्टाचार के मामले मे मै थोडा जाहिल किस्म का इंसान हूं लेकिन आपमे तो बडप्पन है ना...!

डा.अजीत
www.monkvibes.blogspot.com
www.shesh-fir.blogspot.com

sahitya ने कहा…

भारत में सारे सिस्टम फ़ैल हैं।
आप कुछ भी लगा लीजिए सबका तोड़ है।
हमारा भारत बहुत महान है भैया
लेकिन आपने जानकारी बहुत सुन्दर दी है
हमें पसंद आई

Priya ने कहा…

Badi informative hai aapki post aur mazedaar bhi....Thoda waqt lagega aur hamein technically sound hone mein....lekin ummeed jaari hai

खुशदीप सहगल ने कहा…

गुरुदेव,
खामख्वाह अलार्म फोर्स पर इतना खर्चा कर रहे हैं...

आप तो विल्स के शौकीन रहे हैं...(साभार विल्स कार्ड)...

और सुना है सिगरेट पीने वालों के घर कभी चोरी नहीं होती...

जब सिगरेट पीने वाला रात भर जागकर खांसता रहता है तो चोर की हिम्मत ही कहां होगी घर में घुसने की...

जय हिंद...

शरद कोकास ने कहा…

भारत मे घरों की तो छोड़िये बैंकों में भी इतनी सिक्यूरिटी होती है क्या ?
और चोर यहाँ दरवाजे से आते ही नहीं ।
बाकी पुलिस का क्या कहें परसाई जी का व्यंग्य इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर पढ़ लें .. काफी है ।
लेकिन यह जानकारी अच्छी लगी

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मेरा भारत महान ...
दिल के करीब, मेरी जान ...
एलार्म का वहाँ क्या काम ...

ग़ज़ब लिखा है समीर भाई ...

Manish ने कहा…

इ सब टीमटाम तो हमको भी अच्छे लगते हैं :) लेकिन सेक्योरिटी किस चीज के लिए लगायें? एक गाय है, जो अपनी सेक्योरिटी खुद कर लेती है… घर है नहीं, पेड़ पौधों के बीच गुजारा हो जाता है… बारिश का मौसम है… खुले में इ सब टीमटाम फुक जायेगा… झोपड़ी में लगा नही सकते… मकड़ी के जाले दिन भर सरल आवर्त गति करते हुए झूमते हैं…बैंक अकाउंट में 17 रूपये पड़े हैं। :) वैसे आप भी सही हैं यहाँ पर हम जैसे भि्खमंगों की बात तो चल नही रही… देखा देखी हम क्यों पगलायें… जैसे आजकल गाँव वाले पगलाये हैं, खाने को अटता नही कैमरे वाला फोन चाहिये होता है… :) वैसे एक बात बोलूँ
आँख दबा के!! :)
गुरु, इतनी सिक्यूरीटी लगाये हो मतलब मोटी रकम धरे होगे घर में.

कैसे मेहनत की कमाई कमाते हैं, कभी आकर भरतवंशियों को भी सिखा दीजिये न!!

बहुत मस्त लगा, हमारे जैसे उड़नशील बच्चे को…

पिछला स्कोर तो गायब हो गया… फिर से शुरु करते हैं
0 आपका 1 मेरा :) (बराबरी का समझ रहे हैं)

Manish ने कहा…

इ सब टीमटाम तो हमको भी अच्छे लगते हैं :) लेकिन सेक्योरिटी किस चीज के लिए लगायें? एक गाय है, जो अपनी सेक्योरिटी खुद कर लेती है… घर है नहीं, पेड़ पौधों के बीच गुजारा हो जाता है… बारिश का मौसम है… खुले में इ सब टीमटाम फुक जायेगा… झोपड़ी में लगा नही सकते… मकड़ी के जाले दिन भर सरल आवर्त गति करते हुए झूमते हैं…बैंक अकाउंट में 17 रूपये पड़े हैं। :) वैसे आप भी सही हैं यहाँ पर हम जैसे भि्खमंगों की बात तो चल नही रही… देखा देखी हम क्यों पगलायें… जैसे आजकल गाँव वाले पगलाये हैं, खाने को अटता नही कैमरे वाला फोन चाहिये होता है… :) वैसे एक बात बोलूँ
आँख दबा के!! :)
गुरु, इतनी सिक्यूरीटी लगाये हो मतलब मोटी रकम धरे होगे घर में.

कैसे मेहनत की कमाई कमाते हैं, कभी आकर भरतवंशियों को भी सिखा दीजिये न!!

बहुत मस्त लगा, हमारे जैसे उड़नशील बच्चे को…

पिछला स्कोर तो गायब हो गया… फिर से शुरु करते हैं
0 आपका 1 मेरा :) (बराबरी का समझ रहे हैं)

DR. SHIV SHANKAR MISHRA ने कहा…

aadaraneeya,
aapki tippni ne mere blog kaa gaurav badhaayaa. Takaneekee kaaranon se mujhe tukadon me cheejen prkaashit karani padati hain. Kripayaa blog par aate rahen.DHANYVAAD.

vibha rani Shrivastava ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 28 जनवरी 2017 को लिंक की जाएगी ....
http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

savan kumar ने कहा…

कभी - कभी तो अपना पड़ोसी ही चोर निकलता हैं। जब तो हम यह कह कर ही चुप हो जोते हैं पड़ोसी - पड़ोसी के काम नही आएगाँ तो कोन आएगाँ।
अच्छी जानकारी से भरा लेख