सोमवार, मार्च 01, 2010

गीला रंग मोहे लगाई दो!!

पिछले साल होली पर यह गीत लिखा था किन्तु इस साल अदा जी की आवाज और संतोष जी की म्यूजिक नें इस गीत में चार चाँद लगा दिये. बिना किसी की भूमिका के आप आनन्द उठायें.

 

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

रंग लगा दो,
गुलाल लगा दो,
गालों पे मेरे
लाल लगा दो..
भर भर पिचकारी से मार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

सासु लगावें
ससुर जी लगावें,
नन्दों के संग में
देवर जी लगावें..
साजन का करुँ इन्तजार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

गुझिया भी खाई
सलोनी भी खाई
चटनी लगा कर
पकोड़ी भी खाई..
भांग का छाया है खुमार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!


-समीर लाल ’समीर’

 

holimubaarak

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98 टिप्‍पणियां:

RaniVishal ने कहा…

behatreen prastuti......geetkar,sangeet kar aur gayayika teeno ke karyo ki sarahana ka karya lajawab hai!!
Aannd aagaya ji ....bahut bahut dhanywaad sabhi ko

Sanjay Kumar Chourasia ने कहा…

एक तो आपके सोने की कलम से लिखा गया खूबसूरत गीत.. उसपे अदा दी की मखमली आवाज़ और संतोष सर की अँगुलियों का जादू.. बस गीत रहा कहाँ अब ये?? सम्मोहन ही हो गया ये तो... बधाई..

ललित शर्मा ने कहा…

सासु लगावें
ससुर जी लगावें,
नन्दों के संग में
देवर जी लगावें..
साजन का करुँ इन्तजार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!


होली पे पुरा ही भंगिया गए हैं।
सास ससुर को भी बहु के साथ
होली खेलवा दिए-रंग लगवा दिए
अदा जी बहुत ही सुंदर गाया है।
सुनकर मजा आ गया और
चढ गया फ़ागुनी बुखार,

होली की हार्दि्क शुभकामनाएं

दीपक 'मशाल' ने कहा…

एक तो आपके सोने की कलम से लिखा गया खूबसूरत गीत.. उसपे अदा दी की मखमली आवाज़ और संतोष सर की अँगुलियों का जादू.. बस गीत रहा कहाँ अब ये?? सम्मोहन ही हो गया ये तो... बधाई..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अरे वाह.....!
यह तो बहुत सुन्दर होली लोक-गीत है!
अदा जी ने इसे बहुत मस्त होकर गाया है!
दोनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Vivek Rastogi ने कहा…

गीला रंग मोहे लगाई दो !!

मजा आ गया, गीत,संगीत और आवाज मस्त !!

बेचैन आत्मा ने कहा…

वाह! स्वर-संगीत का यही कमाल है.

पहले से बहुत अच्छी लगने लगी कविता.

योगेश स्वप्न ने कहा…

holi ke sare rang is geet men sanjo diye hain , behad sunder rachna, sununga shaam ko aakar office se.

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

सुबह सुबह सुना मजा आ गया , गीत
भी सुन्दर लिखा है और अदा जी की आवाज ने उसे
चार चाँद लगा दिया है ! आभार !

अमिताभ मीत ने कहा…

वाह समीर भाई .......... मज़ा आ गया ......... सुन्दर गीत.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सुबह सबेरे मन मोह लिय आपनें,वाह क्या कहनें.

M VERMA ने कहा…

लाजवाब गीत को जब लाजवाब स्वर मिले तो
अभिभूत कर दिया

वाणी गीत ने कहा…

गीत कुछ सुना- सुना सा लग रहा है ....:)
आपने लिखा बढ़िया और अदाजी की मधुर आवाज से तो चार चाँद लगने ही थे ....!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अदा जी ने तो कमाल ही कर दिया। इसे गाने में।
वे किसी भी मुश्किल गीत को गा सकती हैं।

अजित वडनेरकर ने कहा…

बहुत खूबसूरत गीत।
शब्द और आवाज़ दोनो बाकमाल।

ali ने कहा…

समीर भाई
माफ़ कीजियेगा...रंग पर्व के हिसाब से कम्पोजीशन काफी स्लो लगी...पता नहीं ऐसा क्यों लगता है कि इस दिन सारे सुर फास्ट ट्रेक / बीट पर ही होना चाहिये ? क्या ये मेरा वहम है ? पोस्टिंग भी मिसटाइम्ड लगी !



[ गीत की नायिका गीले रंग के लिये सार्वजनीन आमंत्रण देती है ! खाने , यहां तक कि भांग भी , के मामले में भी कोई कोताही नहीं करती तो ये कैसे मान लूं कि बुखार की वज़ह से सुर मद्धम पड़ गये हैं :) ]

खुशदीप सहगल ने कहा…

गीत सुनकर वैसा ही आनंद आया जैसा नौशाद के संगीत, कवि प्रदीप के गीत और लता मंगेशकर की आवाज से सृजित रचना को सुनकर आता...

आप तीनों को बहुत-बहुत बधाई...

जय हिंद...

महाशक्ति ने कहा…

बहुत ही अच्‍छा

Rambabu Singh ने कहा…

लाजबाब है आपका ये फाग गीत ,सुबह सुबह जैसे ही ब्लॉग को देखा मजा आ गया
इंतज़ार ही कर रहा था आपके पोस्ट का ,
त्यौहार के इस अवसर पर बहूत बढियां प्रसतुति है |
बहूत बहूत आभार और आपको सपरिवार होली की रंगारंग बधाई |

Dr Prabhat Tandon ने कहा…

वाह भाई वाह ..बहुत ही खूबसुरत गीत !! होली की बहुत-२ शुभकामनायें !!

निर्मला कपिला ने कहा…

गीत संगीत गायन बहुत खूब सूरत अदा जी की आवाज़ मे जादू है। धन्यवाद इसे सुनवाने के लिये। शुभकामनायें

indu puri ने कहा…

गीला रंग उतारे ना उतरे
रंग चमरिया चमड़ी से चिपके
कैसे उतारू तु ही बता दे
माथे अबीर की बिन्दी लगा दे
पानी क्यों बहाए बेकार
गुलाल बस मोहे लगा दे
गीला रंग है बेकार,मोहे ...
अबीर चल सबको लगा दे
काहे कहूँ गालो पे लगा दे
छूट जो दे दूँ सबको मैं इतनी
कहाँ कहाँ हाथ धर देंगे मुरदार
दूर से रंग लगाना
कहे देती हूँ सौ बार
सूखा रंग मोहे लगाना
पहले रंगे फिर रंग छुडावे
एक मुम्बई में ही इत्ता पानी गिरावे
साल भर खेती सींच जाये
तरसे ना मेरा राजस्थान
सूखा रंग मोहे लगा दे
सब मर्दों के तिलक लगा दे
चुटकी भर से चाहे मोहे सजा दे
तु सयाना ,तेरी बातें सयानी
बढ़ आगे नया चलन चला दे
गीला रंग बेकार,मोहे.....
तुम को ही कुछ ज्यादा ही चढ़ता
ए बबूआ , ये फागुनी बुखार .......

इंदु पुरी ने कहा…

गीला रंग उतारे ना उतरे
रंग चमरिया चमड़ी से चिपके
कैसे उतारू तु ही बता दे
माथे अबीर की बिन्दी लगा दे
पानी क्यों बहाए बेकार
गुलाल बस मोहे लगा दे
गीला रंग है बेकार,मोहे ...
अबीर चल सबको लगा दे
काहे कहूँ गालो पे लगा दे
छूट जो दे दूँ सबको मैं इतनी
कहाँ कहाँ हाथ धर देंगे मुरदार
दूर से रंग लगाना
कहे देती हूँ सौ बार
सूखा रंग मोहे लगाना
पहले रंगे फिर रंग छुडावे
एक मुम्बई में ही इत्ता पानी गिरावे
साल भर खेती सींच जाये
तरसे ना मेरा राजस्थान
सूखा रंग मोहे लगा दे
सब मर्दों के तिलक लगा दे
चुटकी भर से चाहे मोहे सजा दे
तु सयाना ,तेरी बातें सयानी
बढ़ आगे नया चलन चला दे
गीला रंग बेकार,मोहे.....
तुम को ही कुछ ज्यादा ही चढ़ता
ए बबूआ , ये फागुनी बुखार .......

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

गजब का आनन्द आया।
अदाजी, सन्तोष जी और समीर जी आपको हार्दिक शुभकामनाएं और आभार...।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

गजब का आनन्द आया।
अदाजी, सन्तोष जी और समीर जी आपको हार्दिक शुभकामनाएं और आभार...।

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!


KISE SAMJHAWOGE SAMEER JEE , TASLEEMAA KE BURKE PAR LIKHE EK LEKH PAR TO KAL INHONE KARNATAKA ME KAI GAADIYAA PHOONK DAALEE !

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!


KISE SAMJHAWOGE SAMEER JEE , TASLEEMAA KE BURKE PAR LIKHE EK LEKH PAR TO KAL INHONE KARNATAKA ME KAI GAADIYAA PHOONK DAALEE !

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत बढ़िया !
सुन्दर गीत संगीत .
आभार.

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत बढ़िया !
सुन्दर गीत संगीत .
आभार.

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्‍तुति !!

Parul ने कहा…

sir holi ke bhang mein rang daal diye aapne..dhol ki thaap chahiye bas :)

संजय बेंगाणी ने कहा…

क्या बात!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

रंग चाहे सूखा हो

या हो गीला

पर कर दे मन रंगीला।

रंग सदा ऐसा पाना जी

हमें तो वही लगाना जी।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही सुन्दर, होली के उन्मुक्त भाव को सरलता से समाहित करता हुआ । मधुर गायन । आनन्द आ गया ।

अरूण साथी ने कहा…

सचमुच चढ़ गया, हिन्दू लगावे मुस्लमा लगावे। सचमुच आपके मुंह में धी-शक्कर

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

आपके गीत में सम्मोहन है, वहीं अदा जी की आवाज़ मे जादू है। मंत्र मुग्ध हो गया मैं ....और संगीत ऐसा की दीवाना बना दे ...ग़ज़ब क़ा संयोजन ...बधाइयाँ !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

awaaz ka jadu chadh gaya

Arvind Mishra ने कहा…

उत्कृष्ट रचना की उत्कृष्ट संगीतमय प्रस्तुति! बेहद दिलकश -पूरी टीम को बहुत बधाई !

shikha varshney ने कहा…

Cherry on the cake :)

Mansoor Ali ने कहा…

मस्त कविता व् गायकी...... लेकिन

गीलो रंग लायो ज़ुकाम,
मोहे विक्स लगाई दो.

G M Rajesh ने कहा…

ye to gaa kar bhi sunana padega

नीरज गोस्वामी ने कहा…

जितना सुन्दर गीत लिखा है उतना ही सुन्दर इसे गाया और संगीत से सजाया गया है...अप्रतिम रचना...आनंद ही आनंद आ गया...बहुत आभार हम सब को सुनवाने के लिए...
नीरज

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

गीला रंग मोहे लगाई दो!
रंग गीला हो या सूखा..क्या फर्क पडता है। वैसे भी अब काले रंग पे ओर कौन सा रंग चढने वाला है :-) हो...ली की बहुत बहुत मुबारकबाद!

गीत बहुत बढिया लगा...और अदा जी की मधुर आवाज नें तो सोने पे सुहागे का काम कर डाला ।

makrand ने कहा…

great work

Anil Pusadkar ने कहा…

वाह!

कमलेश वर्मा ने कहा…

sameer dadda ki kalam aur santosh ji ki jhnkar aur ada ji kook ...maja aa gaya ...manohari ,samayik uphar....aabhar

Manish ने कहा…

गाना तो बेहतरीन था, और गायि्का की आवाज भी अच्छी है… उनको भी कमेन्टिया आता हूँ :)

Amitraghat ने कहा…

"अच्छा लगा........"
amitraghat.blogspot.com

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

खूबसूरत गीत।
खूबसूरत आवाज़।

बहूत बहूत आभार

आपको सपरिवार होली की रंगारंग बधाई |

अनूप शुक्ल ने कहा…

सुन्दर है गीत,गायन और संगीत सब कुछ! अच्छा किये भूमिका नहीं लिखे। सब चौपट हो जाता।

Dr.Bhawna ने कहा…

Sameer ji bahut acha laga geet sabko badhai..

rashmi ravija ने कहा…

Geet,sangeet...aur sumadhur swar ka adbhut sangam...bahut bahut shukriya..

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

वाह जी आनंद आ गया गीत सुनकर। ऐसा लगा जैसे आज भी होली है।

'अदा' ने कहा…

@ अली जी से कहना चाहूंगी...होली के भी बहुत से गाने धीमी गति में है...जैसे
आई होली आई सब रंग लाई,
पिया संग खेलूं होली फागुन आयो रे
होली आई रे कन्हाई होली आई रे....
हमने इस गीत को मात्र ३ घंटे में तैयार किया है, अपने सीमित साधनों से...
जिसमें गीत को सुर में ढाल कर शब्दों में थोड़ी-बहुत फेर बदल करना और संगीत बनाना था और रिकॉर्ड करना ...इसलिए कमियाँ रह गई हैं....
आशा है आप उन कमियों को नज़रंदाज़ करेंगे..
एक बार फिर आप सभी का मैं हृदय से आभार मानती हूँ...अगली बार इससे बेहतर प्रस्तुति के साथ हम हाज़िर होंगे अगर समीर जी ने मौका दिया तो...
साधना जी का मैं दिल से शुक्रिया अदा करना चाहुगी चाहूँगी, उन्होंने न सिर्फ़ मेरा हौसला बढ़ाया अपितु मान भी बढ़ाया है...इस गीत को पसंद करके..
धन्यवाद...

शशांक शुक्ला ने कहा…

होली का एक बेहतरीन प्रस्तुति

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह जी वाह ।
मज़ा आ गया ।
समीर जी --गीतकार ,
संतोष जी -- संगीतकार
अदा जी --अदाकारा

सब मिलाकर निर्मल आनंद ।
होली की हार्दिक शुभकामनायें।

Maria Mcclain ने कहा…

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महेन्द्र मिश्र ने कहा…

जय हो आनंद आ गया .. रोचक प्रस्तुति ....आभार

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मेरा लिनक्स आज कुछ गड़बड़ है...बस पढ़ कर आनंद ले पा रहा हूँ

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर गीत और उतने ही सुंदर युग्म आवाजों ने इसमें चार चांद लगा दिये हैं.

होली की घणी रामराम.

JHAROKHA ने कहा…

Holee ke mauke par ek behatareen prastuti----apko bhee holee kee mangalkamnayen.
Poonam

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!!
समीर जी, बहुत खूबसूरत गीत---आपको एवम परिवार के समस्त सदस्यों होली की शुभकामनायें।। हेमन्त कुमार

राज भाटिय़ा ने कहा…

मिठ्ठी आवाज सुंदर कविता, होली का महोल गीत सुन कर हमे तो भांग का नशा हो गया.
बहुत सुंदर
ध्न्यवाद

Atul Sharma ने कहा…

सुंदर कविता की संगीतमय प्रस्तुति।
ओह! नेट से दूर रहने से कितना कुछ छूट जाता है।

शरद कोकास ने कहा…

मै इस गीत में रंग के साथ जुड़े विशेषण " गीला " के बारे में सोच रहा हूँ । कवि का यहाँ गीला लिखने का विशेष आशय है । यहाँ केवल रंग भी हो सकता था और होली की आधुनिक औपचारिकता के चलते सूखा रंग भी । लेकिन गीला आर्द्रता का प्रतीक है । यह वही आर्द्रता है जिसकी वज़ह से खेतों में बीज से अंकुर निकलते हैं , यह वही आर्द्रता है जिसकी वजह से दुख और भावनायें चरम पर पँहुचती है और आँसू निकल पड़ते हैं । यही आर्द्रता सृष्टि को जन्म देती है और इसकी वज़ह से ही संवेदना इस जग में स्थान पाती है । इसकी वज़ह से ही सम्बन्धों में नमी बनी रहती है और देह में जीवन शेष रहता है ।कल्पना करके देखिये यदि जीवन में तरलता न हो तो यह जीवन कितना शुष्क हो जाये और फिर यह संसार भी कहाँ जीवित रहेगा । आज इसी तरलता की खोज चान्द से लेकर अन्य ग्रहों पर की जा रही है .. क्योंकि इस गीलेपन के अभाव मे जीवन सम्भव ही नही है । बधाई समीर भाई ।

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

वाह.. एकदम होली के माफ़िक.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

समीर लाल जी, आदाब

आनन्द आ गया....होली की शुभकामनाएं

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" ने कहा…

kya baat hei.....ab to ada ji ki awaj mei 2 gane sunne ko mil gaye holi par......ek apka ek lalit ji ka.....kah kahe.....bas gila rang mohe lagai do.....

Ajay Tripathi ने कहा…

सासु लगावें
ससुर जी लगावें,
नन्दों के संग में
देवर जी लगावें..
साजन का करुँ इन्तजार,
गीला रंग मोहे लगाई holiyane maje ko jahir karta jabulpariya saskriti ka ghotak vah - vah ...........

Ajay Tripathi ने कहा…

सासु लगावें
ससुर जी लगावें,
नन्दों के संग में
देवर जी लगावें..
साजन का करुँ इन्तजार,
गीला रंग मोहे लगाई holiyane maje ko jahir karta jabulpariya saskriti ka ghotak vah - vah ...........

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आनंद आ गया .. क्या गीत है और संगीत भी लाजवाब है ... समीर भाई .. मज़ा आ गया .. झूम रहे हैं हम भी ...

anitakumar ने कहा…

अदा जी की आवाज और संतोष जी के फ़न ने आप के गीत में चार चांद लगा दिये हैं।

arvind ने कहा…

चढ़ गया रे फागुनी बुखार,
गीला रंग मोहे लगाई दो!! ....बधाई..

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

पिछले साल होली पर यह गीत लिखा था किन्तु इस साल व्यक्त हुआ...यही तो होली की फगुनाहट का कमाल है. होली की शुभकामनायें !!

सतीश सक्सेना ने कहा…

Comments reply at mere geet :
महाराज कभी नीचे भी आ जाओ , हम लोग जमीन के प्राणी हैं , गूढ़ वचन नहीं समझ पाते ...मदद करो
अन्यथा ...
;-)

संजय भास्कर ने कहा…

पहले से बहुत अच्छी लगने लगी कविता.

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

सुन्दर गीत
सुन्दर आवाज
एकदम से फाग में डूबे हुए हैं

दिलीप कवठेकर ने कहा…

आपका लिखा हुआ यह फ़ाग गीत वाकई गज़ब ढा गया. शरद कोकास जी कि टिप्पणी का मर्म अगर सही होतो बात बहुत ही गहरे पैठ जाती है.

रही बात गीत के संगीत और गायन पक्ष की..

अदाजी के स्वर अदायगी में जो शोखी, अल्हडता, और निश्छल सादगी है, वह इस फ़ाग गीत या लोकगीत के जोनर को सपोर्ट करती है, विश्वसनीयता प्रदान करती है.

बाकी संतोष जी का स्वर संयोजन भी अनूठा, और माधुर्य भरा है. साथ में बीच में जो उन्होने सिम्फनी का उपयोग किया है वह गीत को ऊपर के स्तर पर ले जाता है.

बस यह बात अली जी की कुछ हद तक सही प्रतीत होती है,कि जिस मूड का यह गीत लिख गया है, या गाया गया है, या तर्ज़ बनाई गयी है, उसके साथ लय अधिक होती तो और मस्ती बढ जाती , समा और रंगीनीयत बढ जाती .परकशन वाद्यों में धोलक, और अन्य भारतीय ताल वाद्यों की कमी अखरी ज़रूर.

मगर शायद समय की कमी और सीमित संसाधनों के होते हुए जिस प्रकार का भी सृजन हुआ है उसे यही कहा जा सकेगा कि-

HATS OFF TO ALL!!!

अर्कजेश ने कहा…

बहुत बढिया लगा यह होली गीत सहज सरल लेकिन रंगों से सराबोर ।

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

देर से ही सही पर गीला रंग मोहे लगाई दो .

ओम आर्य ने कहा…

अदा जी की आवाज ने aapke geet ko एक lambi umra de di hai

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

अरे वाह! किसी ने लगाया भी या नहीं?

Priya ने कहा…

sir geet bahaut sunder likha hai.....abhi suna nahi

नवीन जोशी ने कहा…

Behtareen, bahut khoob. Kanada main bhee aapne jabalpur aur Bharat ko India nahin banane diya hai! Badhayee!!

Babli ने कहा…

गुझिया भी खाई
सलोनी भी खाई
चटनी लगा कर
पकोड़ी भी खाई..
बहुत सुन्दर लगी ये पंक्तियाँ और मुँह में पानी आ गया! बेहद पसंद आया आपका ये पोस्ट!

Kumar Koutuhal ने कहा…

समीर जी जबलपुर संस्कारधानी है बुंदेलखंडी मध्यप्रदेश की... उहां का रंग तनक छल्काय देते तो मज्जा दुगुना न भय जाता... काय ?

vikas ने कहा…

गुझिया भी खाई
सलोनी भी खाई
चटनी लगा कर
पकोड़ी भी खाई..
भांग का छाया है खुमार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!

ati sundar rachna,bahut pasand aaya.

VIKAS PANDEY

http://vicharokadarpan.blogspot.com/

गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर'' ने कहा…

और वो नहीं जिसका फोटो छापे थे एक बार नहीं लिए
होली मुबारक

Ashish (Ashu) ने कहा…

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
आप ने कहा तो बहुत ही अच्छा हे पर आप ही बतायिये इस होली मे कहा दगे नही हुये..काश आपके लेख को शरारती तत्व भी पढ लिये होते तो शायद मॆ भी कहता हेपी होली

Dinbandhu Vats ने कहा…

sir ek bar mere blog ko dekhane ki kripa kare.mera pryas bilkul naya -naya hai.

ज्योति सिंह ने कहा…

हिन्दु लगावें
मुस्लमां लगावें,
मजहब सभी
इक रंग लगावें..
मुझको है इंसां से प्यार..
गीला रंग मोहे लगाई दो!!
is adbhut rang par bahut bahut badhai

कृष्ण मुरारी प्रसाद ने कहा…

सरल शब्दों में असरदार रचना...

पंकज ने कहा…

सब कुछ रंगीन, गीत, स्वर और संगीत.

Kulwant Happy ने कहा…

हिन्दी गीत संगीत जगत को नई लता और समीर मिल गए। ऐसा नहीं कि जो बॉलीवुड से संगीत रिलीज हो वो ही हिन्दी गीत संगीत जगत का है, अब जो ब्लॉगवुड से भी जारी होगा, वो भी गीत संगीत जगत का हिस्सा है। अदा की आवाज, समीर के बोल। बेहद प्यारे लगे, संतोष जी का संगीत भी गजब का है।

JHAROKHA ने कहा…

Puri ki puri kavita ka ek hi bhav parilachhit hota hai,hua sabhi rangon ki tarah milkar ek ho jayen.

poonam

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

rangbhari + rasbhari = udantashtari....


JAI HO>>>>>>>>>>>>>

हिमान्शु मोहन ने कहा…

बड़े महीन गीतकार निकले आप तो !
देर कर दी हमने इसे सुनने में।
बधाई। इस साल जो लिखा वो कहाँ है?
आपकी इस 'अदा' से हमें 'संतोष' नहीं हुआ। और, और, और …

संतोष जी को और अदा जी को बहुत-बहुत धन्यवाद, इस गीत को सुर और स्वर देने के लिए। आपको बधाई और ऐसी एक गुझिया और…और…और…

Neeraj Bhushan ने कहा…

Oh... I liked it. Thanks for the efforts of all.