मारो मारो.....
पहचान का है...मारो मारो..बम मारो...
वो पचास की भीड़ मिल गई..एक ही पहचान का है..कोई बात नहीं..सबको मारो..धम...धम!!!
वो सवा सौ लोग..किसी को नहीं जानते..अरे, लेकिन उसमें से एक ने बम फेंका है...तुम भी सबको मारो..मारो मारो..धम धम....धमा धम...
यहाँ से मारो...वहाँ से मारो...
ये हालात हैं दिवाली पर...
लेख से मारो, टिप्पणी से मारो..ईमेल से मारो, ट्विटर पर मारो..आर्कुट पर मारो..फेस बुक पर मारो...एस एम एस से मारो.....
शुभकामना, बधाई..मंगलकामना....
लेख वाला बम मारो, कविता वाला, व्यंग्य वाला..मगर मारो..बम..धम धम!!
हम भी जुटे रहे जमाने का चलन देख...धांय धांय...फेशनेबल तो हैं ही..इसलिए फैशन के मुताबिक चले...
कवि हैं और इस बात का गुमान भी है तो चार ठो पंक्तियाँ भी सजा लिए:
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-समीर लाल 'समीर'
भेजना शुरु..याने बम मारना शुरु...दो चार घंटे बमबारी की होगी उपर की तर्ज पर कि एकाएक सामने से किसी ने बम फेंका...
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
-फलाना फलाना.....
लो अब हम क्या जबाब दें इन फलाना फलाना को...हम तो खुद ही यही बम फेंक रहे थे..???
लिखे, कि भईया यही चार ठो पंक्तियाँ हैं हमारे पास...तो वही वापस भेज रहे हैं बतौर शुभकामना. धर लो...धम धम...बम बम!!
फिर चार छः एस एम एस आ लिए भारत से...यही वाले..वो भी उनसे, जिन्हें हमने भेजा भी नहीं...देखते देखते कम से ४० मैसेज..इसी रचना के साथ...सबके प्रेषक वो..जिन्हें कम से कम हमने तो यह नहीं भेजा..
और सबसे मजेदार तो जब यह कार्ड पर चिपक कर आया (प्रेषक का नाम नामी होने के कारण पोंछ दिया है) तो हम तो झुक गये....हाय, काश हम ही कार्ड पर रच देते...इस कालजयी शुभकामनाओं को:
अरे भाई, कोई तो क्रेडिट देता..तो चरण में गिर पड़ते....धन्य हुए यह चार पंक्तियाँ रच कर. अगली बार किसी को किसी त्यौहार पर लिखवाना हो तो सस्ते में लिख दूँगा. आप तो अपने ही हो. फिर आप भी बमबारी करना. :) हम भी कुछ कमा लेंगे..नाम की कमाई की उम्मीद तो अब जाती रही.
इस पोस्ट को अर्थ देती राजेश स्वार्थी जी की यह पोस्ट भी पढ़ें:
मारो..मारो...समीर जी, क्या मतलब है इसका?






























72 टिप्पणियाँ:
अगली बार किसी को किसी त्यौहार पर लिखवाना हो तो सस्ते में लिख दूँगा.
छठ के लिए एक शुभकामना संदेश लिखवाना है .. कितने में लिखेंगे ?
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
लो मै आप पर ही मार दिया गुरु :)
दीपावली की शुभकामनाओं के सब रेडीमेड बम फोड़ने में रहते है | इंतजार करते है कोई बढ़िया सा शुभकामना एस ऍम एस मिले तो अपना नाम चिपकाकर आगे फॉरवर्ड करदे | यही बात आपके शुभकामना सन्देश रूपी बम के साथ हुई |अब इतना बढ़िया शुभकामना बम आपने फ्री में उपलब्ध उपलब्ध करा दिया तो लोग ठेलने में पीछे क्यों रहे आखिर भारत में तो ये इम्पोर्टेड बम जो था |
दीपावली के बाद की भी शुभकामनाएँ |
बमबारी मे किसका बम है यह कब किसने देखा. जिसका बम उसी को मारो तो बमबारी मे और मज़ा आता है.
नामी का नाम तो पोछ दिया पर नामी तो और नामी हो गया होगा.
ग़म गलत करने से तो अच्छा है
ग़म को ही गलत कर् दिया जाये
छ्ठ तो छः सौ (भारतीय रुपया) मे हो जायेगा संगीता जी...चलेगा क्या?? :)
गुरुदेव,
ये क्लोनिंग और पाइरेसी का ज़माना है...आपको नहीं पता कि आपकी हा,हा,हा,हा,हा,हा,हा (मेरी तो इतने मे ही बस हो गई)भी
कितनी हिट रही थी...कम से कम 10 जगह तो मैंने वही हा,हा,हा...देखी थी...
जय हिंद...
दीवाली तो त्यौहार ही बम पटाखों का है. आपकी कम्पनी के बम बहुत अच्छे हैं, इस दीवाली पर खूब धांय धांय चले:)
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
क्या वाकया है, दीवाली में हो गया, परुआ..., वैसे ६०० में एक सन्देश...समीर जी को अंदाजा है मार्केटिंग का...वाह, अभी संगीता जी का जवाब आएगा तब पता चलेगा की समीरलाल जी को काम मिला या नहीं...:)
"बुरा ना मानो दीवाली है....."
मुश्किल ही लगता है श्रीष...आजकल बाय वन गेट वन फ्री का जमाना है..छठ के साथ न्यू ईयर फ्री मांगेंगी अभी संगीता जी...... :)
prabhu ab tak kitne?
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
अजी अब कर देते है तारीफ़....
सच मै आप ने इन चार लाईनो मे बहुत पटक पटक के मारी हम सब को शुभकामानये, ओर इतनी पटक के मारी की मेरा लेपटाप की सक्रीन भी खराब हो गई, चलिये इस सप्ताह नया लेपटाप खरीद लूं, फ़िर उस का बिल आप को भेज दुंगा, बिना भरे.... अगले साल देखा जायेगा
धन्यवाद.
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
बहुत ही सुन्दर दिल को छूते शब्द, आभार सहित शुभकामनायें ।
लेख से मारो, टिप्पणी से मारो..ईमेल से मारो, ट्विटर पर मारो..आर्कुट पर मारो..फेस बुक पर मारो...एस एम एस से मारो..... शुभकामना, बधाई..मंगलकामना....
महाताऊजी! अच्छा लगा आपके मजेदार पर लच्छेदार बातो को पढ।
समीर जी,
वो क्या कहते हैं "बाँटनवारे को लगे ज्यों मेहंदी के रंग" ! तो वही हाल है. आपकी कमाई भी मेहंदी को लगाने वाले की तरह ही है. चाहे न चाहे तो भी खुद ब खुद लगता रहता है और दिखता रहता है. और, बम-वम तो ऐसे ही है पर झेलने वाला कोई आपके जैसा मजबूत होना चाहिए.
चोरी और सीनाजोरी इसे ही कहते हैं
हा हा ! क्या पलट के मारा है जी :)
वैसे हमें भी २-४ ठो लिखवाना है, थोक के भाव में ६०० से कुछ कम पे होगा क्या. चलिए न हमारा ना आपका २०० में फाइनल करते हैं :)
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
apki is pankti ke dwara jo aashirwaad aapne diya....... uska apka aabhaari hoon.....
चलिए छठ के शुभकामना सन्देश हेतु छ सौ के भाव पर हमारा एक आर्डर नोट कर लीजिए....
डिलीवरी थोडा जल्दी चाहिए.......ओर हाँ छ: सौ रूपये की पेमेन्ट आप मनीआर्डर वगैरह से करेंगें कि अपना बैंक एकाऊंट नम्बर भेजें :)
chaliye kuch naye varsh ke liye abhi se hi........bahut sahi rahega
दीवाली की आपको हार्दिक शुभकामनायें ,आपके जीवन में दीपो का प्रकाश भर जाए ,यह हमारी मंगल कामनाएं हैं .आपकी मंगल कामनायों का बम धमधमा था .बधाई ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा!
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
फटके न अंधेरा कभी आपके आस पास
खुशी आपके द्वार पर आकर खुशियाँ मनाएँ..
दीपावली पर्व पर आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
"लो अब हम क्या जबाब दें इन फलाना फलाना को...हम तो खुद ही यही बम फेंक रहे थे..??"
जब आप ही इतने अच्छे बम बनाओगे और फ़ेंकोगे तो भला दूसरा चुराने से काहे कतराए। लो...अब झेलो अपने ही बनाए हुए बम:)
नक्कलों से सावधान,हमारी और कोई ब्रांच नही है।लगता है समीर जी आपने इन सब मंत्रों पर ध्यान नही दिया था।यंहा रायपुर मे इंजीनियरिंग कालेज मे प्र्वेश मे लिये हुई काऊंस्लिंग मे दो कालेज वाले आपस मे भीड गये थे और एक ने तो बाकायदा बैनर-पोस्टर लगवा दिये हमारी और कोई ब्रांच नही है।
गलत बात है समीर जी,
हम तो पश्चिमी देशो से आउट्सोर्सिंग भारत लाने की जी तोड़ कोशिश कर रहे है ताकि यहाँ के गरीबो का भी कुछ भला हो, और आप है की उल्टे कनाडा ले जाने की फिराक में है ! खैर भैया दूज की आपको बधाई !
-agli baar se apna naam bhi kahin panktiyon mein likha kareeye...
khud ki taslalee ke liye..:D
--aap ki wakayee diwali ho gayee...kitna saraaha gayaa aap ki in chaar panktiyon ko..
yah aspect bhi dekheeye!
-[haan....'credit' nahin milne se dukh to bahut hota hai ]
-ab ye chaar panktiyan agle saal bhi [har saal]..dikhen to atishyokti na hogi!
लो अब हम क्या जबाब दें इन फलाना फलाना को...हम तो खुद ही यही बम फेंक रहे थे..???
लिखे, कि भईया यही चार ठो पंक्तियाँ हैं हमारे पास...तो वही वापस भेज रहे हैं बतौर शुभकामना. धर लो...धम धम...बम बम
हा हा हा पूरा पटक बम भरा लेख है . इस बार शुभकामनाओ की बमबार्डिंग खासी रही ... एक दूसरे पर दे दनादन फेंकी जा रही थी .हमने भी खूब... हा हा अ ... शुभकामनाओ के साथ..
मारो मारो’ शीर्षक पढकर भागते हुए आ रहे हैं ।
सोचा आपने किसी को मारने के लिये पकडा हुआ है ।
बम को तो फ़ूटने से मतलब होता है , उसे पता थोडी होता है कि किसने बनाया है ।
इसी तरह कविता और फ़ूल भी है । जहां भी पडेंगे वहीं खुशबू बिखेरेंगे ।
नाम हो या न हो ।
साहित्यकार तो लिखता ही इसलिए है कि वह दूसरों के काम आ सके। न जाने कितनी पंक्तियां कौन लोग काम ले रहे होंगे। ये तो पटाखे समान है, बनाता कोई है, छोडता कोई है। दीवाली और भैया दूज की बधाई।
हा हा हा!
मैं तो आपकी मुख-मुद्रा की कल्पना किए मौज़ ले रहा हूँ। :-)
बुरा ना मानो दीवाली है!!
बी एस पाबला
आपके कुंडली के खानों में जरूर कोई ग्रह है जो इस तरह आपको नामी-बेनामी बनता रहता है...नामी तो अच्छा है पर इस बेनामी के लिए कुछ करिए...
बेचारी भेड़ों की चाल नाहक बदनाम.
हमारा बम!!
बम पे बम = दमादम
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दीपावली पर्व पर आपको मेरी मंगलकामनाएं!!!
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स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
हर अंधेरी रात में,
जब अकेले ही चलोगे
तुम्हारी राह का तम
दूर मैं करता रहूँगा|
स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
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"प्राइमरी का मास्टर" की ओर से आपको दीपावली की हार्दिक मंगल कामनाएं !!
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दीपावली पर्व पर आपको मेरी मंगलकामनाएं!!!
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स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
हर अंधेरी रात में,
जब अकेले ही चलोगे
तुम्हारी राह का तम
दूर मैं करता रहूँगा|
स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
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"प्राइमरी का मास्टर" की ओर से आपको दीपावली की हार्दिक मंगल कामनाएं !!
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दीपावली पर्व पर आपको मेरी मंगलकामनाएं!!!
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स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
हर अंधेरी रात में,
जब अकेले ही चलोगे
तुम्हारी राह का तम
दूर मैं करता रहूँगा|
स्नेह अपना दो ना दो,
दीप बन जलता रहूँगा|
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"प्राइमरी का मास्टर" की ओर से आपको दीपावली की हार्दिक मंगल कामनाएं !!
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"समीर" जी।
हमतो डर ही गये थे "मारो...मारो!!!!" सुन कर।
मगर ये मार तो बड़ी मुश्किल से मिलती है।
"मारो...मारो!!!!" भई खूब मारो।
हर दिन मारो!
पल क्षिण मारो!!
भइया-दूज की शुभकामनाएँ!
समीर जी , नमस्कार, आपके लेखन का तो ज़वाब ही नहीं है, इसी तरह बम के धमाके करते रहे और हम इन धमाकों में हमेशा झुलसते रहें , दीपावली की हार्दिक शुभकामना!
मारो..मारो!!! कविता लिखने के बाद हिंसा फ़ैला रहे हो!
हा हा...ये तो दिलचस्प रहा।
प्रिय श्री समीर जी,
आपको रचना पसन्द आयी इस हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।
मैरी और से भी आपको दिपावली की हार्दिक शुभकामनाऎ।
प्रिय श्री समीर जी,
आपको रचना पसन्द आयी इस हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।
मैरी और से भी आपको दिपावली की हार्दिक शुभकामनाऎ।
शुक्रिया अंकल...
ये तो जोरदार रहा, चारो तरफ़ मारो मारो मची हुई है, नाहक ही डर गये थे. मामला समझ आने पर शांति मिली.:)
रामराम.
आदरणीय लाल साहब,
सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
--- आपका बवाल
हा हा हा
(बुरा न मानो दीवाली है)
समीर भाई सब ही बम्ब मार रहे हैं ......... खा भी रहे हैं ............ दिवाली में तो सब मिठाई के साथ साथ सब कुछ खाते हैं ....... आपकी पोस्ट मजेदार है ...........
समीर भाई सब ही बम्ब मार रहे हैं ......... खा भी रहे हैं ............ दिवाली में तो सब मिठाई के साथ साथ सब कुछ खाते हैं ....... आपकी पोस्ट मजेदार है ...........
भावनाओं का भी कहीं कापी राईट हुआ है समीर जी !
धमाके के साथ मारा...वाह! खूब मारा!
ha ha ha bahut khoob , yahi diwali par gift ya mithai ke saath bhi hota ek gift kisi ko diya usne aage....aage.....aage.... ghoom phir kar phir hamare pas.
मारो मारो
पढ़कर पोस्ट पढे ही नहीं अब टिप्पणियों से पता चला कि मामला शुभकामनाएँ मारने का है!!!
शुभकामनाएँ!
बहुत बम मारे समीर भाइ आपने
मारो-मारो रात भर गुन्जता रहा
वो बमा-बम सारे आपके ही थे
जिनका धमाका रात भर सुनता रहा
सुबह फ़िर वही धमा-धम
बहुत एनर्जी है। बधाई हो
मारॊ मारो! समीर जी पहले तो पढ़ कर घबराहट हो गई थी कि यह कैसा आवाहन कर रहे हैं आप.....लेकिन आलेख पढ़ कर मन शांत हुआ:))
चलिए, मेरे बहाने आपको कई आर्डर मिल गए .. पर अनूप शुक्ला जी चिट्ठा चर्चा में आपकी शुभकामनाओं की कमियां निकालकर आपके बिजनेस को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं !!
मारो-मारो से लगा कि मियां की जूती मियां के सर.
चलो गनीमत हैं कि यहाँ रचनाकार के पास ही उसी कि रचना के सन्देश धड़ाधड़ पहुँच रहे हैं.........
कापीराइट नहीं करवाई थी न, तो कुछ कर भी तो नहीं सकते...............
फिर भी रचनाकार को तो खुश ही होना चाहिए कि उसका रचित बधाई सन्देश इत्ता पापुलर हो गया............
हार्दिक बधाई स्वीकार करें जी..........
अब तो दीपावली बीत गई, वर्ना हम भी वही ठोक दिए होते.........
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com
ये भी खूब रही... :-)
आपका बम तो एटम बम है गुरु!!
इन चार लाइनों को चालीस बार तो मैं भी पढ़ चुका हूँ।
कोई अफ़सोस मत करिए। आपकी भावनाओं का जबरदस्त प्रचार-प्रसार हो चुका है। अब इसे ही अपनी उपलब्धि मानिए। धन्यवाद।
छठ का सन्देश बन गया हो तो हमें भी भेज दीजियेगा ...मुफ्त में ...कुछ बम हम भी फोड़ लेंगे ..!!
मारो-मारो पढ के पहले तो हम घबराये,
लेकिन फिर खूब-खूब मुस्कुराये.
अब समझ में आया कि तुलसीदास सदा हरि चेरा और मीरा के प्रभु गिरधर नागर क्यों लिखा गया। लोग भजन तो याद रख लेते हैं लेकिन लिखने वाले को दरकिनार कर देते हैं। इस बार आप भी कुछ ऐसा ही आजमाना जैसे
समीर कहे खेलो होली जमके.... जैसा कुछ।
हा हा हा हा हा हा
काश एक बम मेरे ब्लॉग पर बी फेंक देते....!बहुत इच्छा है की आप आयें...दीपावली की शुभकामनाएँ |
मारो...मारो अपना नहीं तो समीरजी का ही चुरा कर मारो
इतना खतरनाक बम्बार्टमेंट चल रहा है यहाँ ...और
हम इतनी देर से पहुंचे ...
Janam din kee badhayee ke liye tahe dilse shikriya!
http://shamasansmaran.blogspot.com
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htpp://baagwaanee-thelightbyalonelypath.blogspot.com
आपने सही नबज पकड़ी है। मैंने भी ऐसे ही शुभकामनाएं भेजी थी, मारी नहीं।
आपसे सहमत है ।
ab agle saal ke liye likh dijyga, abhi se buking samjhiye......shubh dipawali.
ना ना ना ना समीर भाई ना .. ये छठ-वठ वालों के बहकावे में बिलकुल नहीं आना वरना आपके पास मुंडन और नामकरण संस्कार वालों के भी ऑर्डर आने लगेंगे । इतनी सस्ती कलम थोड़े ही है आपकी । बाकि आपकी यह बम बम वाली अदा अच्छी लगी । ऐसे ही बम दीवाली में फूटें तो जनता प्रसन्न हो जाये और प्रदूषण भी न हो .. ।
Aap khoob likhte hain,vishay koee
bhee ho.ye lekh bhee kam nahin.
Badhaee.
हमें भी मिला था आपका ये वाला बम.
दो चार कम ज्यादा की बात नहीं पर करीब करीब सबने ये गोली बारी झेली है.. संवेदना हीन भावना रहित संदेशों की बौछार
अरे समीरजी आपको तो खुश होना चाहिये कि इतनी सारी दिवाली शुभ कामनाओं में से चोरी आपकी कविता की हुई । कविता कितनी चौर्य है ! जैसे माइक्रोसॉफ्ट के विन्डोज सॉफ्टवेयर की जब धडल्ले से नकली कॉपियां बिक रहीं थीं तो बिल गेटस् ने कहा था पाइरेशन बुरा है पर अगर हो ही रहा है तो हमारे सॉफ्ट वेयर का ही हो ।
दिवाली शुभ ही रही होगी .........
अपनी तो तोप रूपी इन्टरनेट दिवाली की छुट्टी पर थी इसलिए मारा मारी नहीं कर पाए .
shubh diwali aapko aur is dhamekedaar rachna ke liye badhai .bahut hi shaandar likha hai
बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.
SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
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